साहित्य

रूपेश त्योंथ लिखित होरी विशेष कविता 'नेहक रंग'

नवल किरण थिक नेहक रंग चहुँदिक पसरल विपुल उमंग बाधबोन धरि पीत बसंती प्रेम पाबि मन बड़ श्रीमंत  होरी पाबनि मचल धुरखेल द्वेष मेटा स…

चन्द्र मोहन कर्ण लिखित मैथिली कविता 'गामक आमगाछी'

बीतल बसन्त ग्रीष्मक पदार्पण गाछी गमकैत आम  मजर बनल जे टिकुला लुधकल  सेहो पैघ भेल आम  चलू गाम जओ आम खाएक अछि गाछी बनल मचान  डारि …

घसल अठन्नी : कालजयी रचनाकार 'मधुप' केर श्रेष्ठ कविता

जेठक दुपहरि बारहो कला सँ उगिलि उगिलि भीषण ज्वाला आकाश चढ़ल दिनकर त्रिभुवन डाहथि जरि जरि पछबा प्रचण्ड बिरड़ो उदण्ड सन सन सन सन छन…

रामलोचन ठाकुर केर कविता 'गामक खोज'

हमरो एकटा गाम छल देशक बहुतो गाम सन एकटा शिव मन्दिर एकटा डीहबारक थान एकटा सलहेलक गहबर  एकटा मसजिद... कतेको टोल कतेको जाति-धर्मक स…

रूपेश त्योंथ केर होली विशेष कविता 'प्रेम रंग मे रंगि जो बौआ'

मधुमिश्रित बसात बहैए बनि मयूर मन नाचि उठैए  पशु-पंछी सब सेहो कहैए  घुसल किए छें खोली मे प्रेम रंग मे रंगि जो बौआ एहि बेरक तों हो…

रूपेश त्योंथ केर लघुकथा 'परदेसी'

परदेसी - माए गे! बरद मोटेलौ कि ओहने हउ? - ओ नै मोटाएबला हउ. - आ गहूम जोरगर हउ ने? - पानि पर कने जोर पकड़ने हइ....कहिया एबहक? - अ…

मैथिली कविता: तीन रंग केर झंडा नेने

तीन रंग केर झंडा नेने नेना इसकूल जाइए हिन्द देश केर जयकारा सं धरती-मेघ जुड़ाइए चल भजार तों हमरा संगे माहटर झंडा फहरेतै देतै फेरो …

विद्यापति गीत: के' पतिआ लए जाएत रे

के' पतिआ लए जाएत रे मोरा पिअतम पास हिय नहि सहए असह दुख रे  भेल साओन मास एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहल न जाए सखि अनकर दुख दा…

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