रूपेश त्योंथ लिखित होरी विशेष कविता 'नेहक रंग'


नवल किरण थिक नेहक रंग
चहुँदिक पसरल विपुल उमंग
बाधबोन धरि पीत बसंती
प्रेम पाबि मन बड़ श्रीमंत 

होरी पाबनि मचल धुरखेल
द्वेष मेटा सब कएने मेल
फाग गबै छथि मूषक नंदी 
शिवगण सराबोर छथि भेल

आमक मज्जर गमक पसारए
फूलल सरिसो नयन जुराबए 
बोरिआ बिस्तर बन्हने ठंढी 
बाल-बिरिध सब संगहि नाचए 

पुआ-पूड़ी, खीर-पकवान 
घोरल सरबत, पान-मखान 
लाल, पीअर, हरियर, नारंगी
सिनेहक सागर उबडुब चान 

प्रेम-प्रीति केर अनुपम धार
सुख-दुःख भेलै एकाकार
होरी खेलू सब साथी-संगी
वसुधा बनल एक परिवार

— रूपेश त्योंथ

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कविताक भावार्थ ः प्रस्तुत कविता होरी त्योहार कें मात्र रंगक खेल नहि, अपितु आपसी प्रेम आ सद्भावक प्रतीक मानैत अछि। कवि कहैत छथि जे फागुनक मस्ती आ आनंदक बीच प्रकृति आ मनुष्य दुनू खुशी सँ सराबोर छथि। एतय ‘धुरखेल’ (धूर-माटिक होली) संग-संग मनक मइल मेटा कें एक-दोसरा कें गला लगएबाक संदेश देल गेल अछि।

कविताक सुन्दरता तखन आओर बढ़ि जाइत अछि, जखन एहि मे शिवजीक गण आ नंदी-मूषक कें सेहो फाग गबैत आ होली खेलैत देखाओल गेल अछि, जे एहि पर्वक सर्वव्यापकता कें दर्शओबैत अछि। मैथिली संस्कृतिक पहिचान पूआ-पुड़ी, पान आ मखान केर उल्लेख उत्सवक स्वाद कें जीवंत बना देइत अछि। अंत मे कवि गहन संदेश देइत छथि जे जखन प्रेमक मधुर धार बहैत अछि, तखन पूरा पृथ्वी एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) बनि जाइत अछि।

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रूपेश त्योंथ (Rupesh Teoth) सुपरिचित कवि, स्तम्भकार ओ सम्पादक छथि। सम्प्रति कलकत्ता मे रहैत आइटी प्रोफेशनल रूप मे कार्यरत छथि आ स्वतंत्र लेखन क्षेत्र मे सेहो लगातार सक्रिय छथि। मैथिलीक प्रतिष्ठित ऑनलाइन पत्रिका मिथिमीडिया केर सम्पादन व संचालन करैत छथि। रूपेश मैथिली भाषा मे नवकृष्ण ऐहिक नाम सँ व्यंग्य सेहो लिखैत आबि रहल छथि। हिनका साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार सहित कतेको सम्मान प्राप्त छनि। रूपेश कतिपय राष्ट्रीय ओ अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन सब मे मैथिलीक प्रतिनिधित्व क' चुकल छथि।
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