मिथिमीडिया

मैथिली अकादमी : बिहार सरकार केर उदासीनता सँ निष्क्रिय भेल संस्था, हस्तक्षेपक मांग


मिथिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आ बौद्धिक दृष्टि सँ सदैव बिहार राज्यक गौरव रहल अछि। संपूर्ण मिथिला क्षेत्र आ देश-विदेश मे निवास करैत मिथिलावासी सदा सँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन आ राज्य नेतृत्व प्रति अपन समर्थन प्रकट करैत आएल छथि। विगत विधानसभा चुनाव मे मिथिला क्षेत्र सँ गठबंधन कें मिलल व्यापक जनादेश एहि विश्वासक स्पष्ट प्रमाण मानल जा रहल अछि।

मुदा एतेक व्यापक जनसमर्थनक बावजूद राजधानी पटना मे अवस्थित मैथिली अकादमीक वर्तमान स्थिति अत्यंत दुःखद आ चिंताजनक बनि गेल अछि। अकादमी लगभग पूर्णतः निष्क्रिय अवस्था मे पहुँचि गेल अछि, जाहि सँ मैथिली भाषा मे अध्ययन आ शोध करैत विद्यार्थी, शोधार्थी आ साहित्य प्रेमी सभ गंभीर समस्या सँ जूझि रहल छथि।

जानकार लोकनिक अनुसार मैथिली अकादमी सँ मानक पाठ्य-सामग्री, शोध-पत्रिका आ संदर्भ ग्रंथ आब उपलब्ध नहि अछि। साहित्यिक संगोष्ठी, पुस्तक प्रकाशन, लेखक सम्मेलन आ सांस्कृतिक गतिविधि सभ पूर्ण रूपें ठप भ’ गेल अछि, जाहि सँ भाषा-साहित्यक सतत विकास बाधित भ’ रहल अछि।

सब सँ गंभीर विषय ई अछि जे मैथिली अकादमी द्वारा विगत कएक दशक मे प्रकाशित ऐतिहासिक आ दुर्लभ साहित्यिक धरोहर उचित देख-रेख आ संरक्षणक अभाव मे नष्ट होएबाक कगार पर अछि। विद्वान लोक मानैत छथि जे यदि शीघ्र ठोस कदम नहि उठाओल गेल त ई केवल मिथिला नहि, बल्कि संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक विरासत लेल अपूरणीय क्षति साबित भ’ सकैत अछि।

एहि स्थिति कें देखैत मैथिली भाषा-प्रेमी समाज, शिक्षाविद आ साहित्यकार सभ सरकार सँ मांग क’ रहल छथि जे मैथिली अकादमी मे पूर्णकालिक निदेशक सहित आवश्यक पदाधिकारी आ कर्मचारीक शीघ्र नियुक्ति कएल जाए। संगहि अकादमी लेल पर्याप्त बजट आवंटन, स्पष्ट कार्ययोजना आ नियमित प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित क’ एकरा पुनः पूर्णतः क्रियाशील बनाओल जाए।

मिथिला समाजक मानब अछि जे यदि सरकार एहि विषय पर संवेदनशीलता आ दूरदर्शिता सँ निर्णय लेत, त संपूर्ण मिथिला क्षेत्र, देश-विदेश मे बसल मिथिलावासी आ मैथिली भाषा-प्रेमी समाज मे सकारात्मक संदेश जाएत आ मैथिली भाषा-साहित्य आ संस्कृति केर संरक्षण आ संवर्धनक उद्देश्य पुनः सशक्त रूपें पूरा भ’ सकत।

जानकारी अनुसार, मैथिली अकादमी लगभग पाँच महीना सं बंद‌ पड़ल अछि। अकादमीक पुस्तक विक्रय केन्द्र पर कोनो स्टाफ नहि भेटैत अछि, जाहि सँ विद्यार्थीक पुस्तक खरीद मे गंभीर कठिनाइ अछि। अकादमी द्वारा पिछला करीब 49 वर्ष मे 213 पुस्तक प्रकाशित कएल गेल अछि, जाहि मे कतेको साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता किताब सेहो शामिल अछि। मुदा 2017 केर बाद वेबसाइट बंद भेल, आ 2021 केर बाद कोनो नव किताब नहि प्रकाशित भऽ सकल अछि। एहि तरहें अकादमीक मूल लक्ष्य पूरा नहि भऽ रहल अछि। 

शिक्षा विभागक एक सूत्र सँ भेटल जनतब अनुसार, भाषा अकादमी सबकें एकीकृत रूप सँ संचालनक योजना बनाओल जा रहल अछि — जाहि मे एक निदेशक आ किछु उप-निदेशक केर नियुक्ति होएत। मुदा कतिपय विद्वान एहि योजना पर आपत्ति करैत छथि हुनक कहब छनि जे भाषा-विशेषज्ञ कें जओ नेतृत्व नहि देल जाएत त अफसर लोकनि उचित ध्यान नै देताह आ संस्थान नीक सँ संचालित नै भऽ सकत। मैथिली अकादमी कें पहिने जकां स्वतंत्र आ स्वायत्त रूप मे संचालित करब उचित होएत

वर्तमान मे मैथिली अकादमीक स्थिति चुनौतीपूर्ण आ चिन्ताजनक अछि — जखनकि एहि संस्थाक स्थापना मूल रूप सँ मैथिली भाषा आ संस्कृति केर संवर्धन, प्रकाशन आ संरक्षण लेल भेल छल। विद्यार्थी, लेखक, शोधकर्ता आ आम पाठक सभक बीच ई बहुत आवश्यक संस्थान छल, मुदा वर्तमान मे बंद पड़लाक कारण ओ अपन उद्देश्य सँ दूर भऽ रहल अछि।

मैथिली भाषाक भविष्यक मजबूती लेल इतिहास-साहित्य मे अग्रणी एहि अकादमीक पुनः सुचारु रूप द’ देबाक लेल सरकार एवं स्थानीय समाजक सक्रिय पहलक आवश्यकता अछि — नहि तऽ एक प्रगतिशील भाषा संस्थानक खालीपन मैथिली भाषा-संस्कृति पर सरकारी उदासीनता आ आघात रूप मे देखल जा रहल अछि।
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