बांग्ला फिल्म ‘कादम्बरी’ मे विद्यापति गीत
नीक विषय-वस्तु जतेक बेर अहांक समक्ष अबैत अछि, ततेक बेर तृप्त करैत अछि. सुमन घोष निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘कादम्बरी’ साहित्य, सृजन…
नीक विषय-वस्तु जतेक बेर अहांक समक्ष अबैत अछि, ततेक बेर तृप्त करैत अछि. सुमन घोष निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘कादम्बरी’ साहित्य, सृजन…
(1) लिलसा हमरा नहि अछि लिलसा मुखाग्निक आ ने कोनो मतलब स्वर्गक भ्रमजाल सं हमरा लोभ नहि श्राद्ध आ तर्पणक हम जी…
अहां जओ अपन 'स्पेस'क खोज मे ध्वस्त करैत छी ककरो जिनगीक 'पेस' आ 'पीस' सहजें प्रमाणित होइत छी सा…
ठकि लेलक त' ठकि लेलक हम ठका-ठका कें थाकल जन छी भैया हमसभ जन-गण-मन छी! केओ धर्म केओ जाति ध' लूटल केओ भाषा के…
हमरा सबेर मे प्राय: देर सं उठबाक अभ्यास अछि. सबेर कें 7 बाजि चुकल छलैक तखने हमर पड़ोसी जे मारवाड़ी समाजक छथि, कनि यां पर…
कलकत्ता मैथिलक काबा-काशी अछि आ से एकर अपन अवदान रहलैक अछि. आरंभहि सं कलकत्ता प्रवासी भाषा-संस्कृति कें संपोषित केलनि अछि. ए…
- बबलू माय! बबलू कतय गेल? आइ-काल्हि कतय रहैत अछि, कतय जाइत-अबैत अछि, कहियो आठ बजे, नौ बजे राति सं पहिने ओकर दर्शन नहि होइत …
कलकत्ता उपनगर क्षेत्र रिषड़ा मे बीतल 36 साल सं लगातार मैथिली नाट्य मंचन होइत आबि रहल अछि. विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक अंत…
अंगरेजी साल 2012 मे पनरह अगस्त कें एक अभियान जकां शुरू भेल छल मिथिमीडिया. ई बेस संतोषप्रद अछि जे हमरा लोकनि एहि माध्यम कें…
जन्मभूमि जननी ! पृथ्वी शिर मौर मुकुट चन्दन संतरिणी जन्मभूमि जननी। वन-वन मे मृगशावक नभ मे रवि-शशि दीपक हिमगिरि सं सा…
ओहि मेडिकल कॉलेज आ अस्पतालक बगलक दबाइ दोकानमे बेस भीड़ भऽ गेल रहै. अस्पतालमे भर्ती रोगीक गारजियन सभक अपन बीमार परिजनसँ भेँट …
खेला रहल छी जीवनक प्रांगण मे सुख आ दुखक अन्हरिया-इजोरिया मुदा सुख क्षणिक थीक जखन कि दुख थीक संगी लंगोटिया सोचै…
मिथिलाक इतिहास याद क' हम मैथिल कें महान बनेने छी पूर्वजक ज्ञान-विज्ञान सं हम चान पर निवासक बात केने छी गायत्री मं…
प्रसिद्ध मैथिली कवि दिलीप कुमार झा अपन तेसर पोथी ल' क' आबि रहल छथि. पाठक लोकनि हिनक उपन्यास 'दू धाप आगां' क…
किछु दिन पूर्व मिथिमीडिया फाउंडर रूपेश त्योंथ मैथिली साहित्य मे युवा रचनाकार लोकनिक कवितेटा दिस झुकाओ कें अकानैत टिप्पणी केन…
बड रे जतन सँ हम पोसली पुता केँ, भूखे सुतली अपने मर ओकरा सुतौली खुआ केँ। अपने हम मूरुख मुदा बौआ केँ पढौली, काटि कष्ट पोथी …
के' अछि ओ? किए ओ अबैत अछि हमर एतेक निकट जखन हमर आंखि रहैत अछि निपट. किछु दिन सँ ने जानि किए अनेरो फिरेसान रहैत…