'भाषा-साहित्य कें बचेबा लेल गद्य लेखन जरूरी'

किछु दिन पूर्व मिथिमीडिया फाउंडर रूपेश त्योंथ मैथिली साहित्य मे युवा रचनाकार लोकनिक कवितेटा दिस झुकाओ कें अकानैत टिप्पणी केने छलाह. सोशल मीडिया पर प्रसारित ई टिप्पणी बेस वायरल भेल. हुनक चिंता पर बहुत रास कमेंट सब आएल अछि. 

रूपेश त्योंथ केर टिप्पणी एतय देखि सकैत छी-



उल्लेखनीय अछि जे साहित्य अकादेमी द्वारा लगातार सातम खेप युवा पुरस्कार कविता पोथी पर देल गेल अछि. ध्यान देबएबला ई बात छै जे रूपेश त्योंथ केर कमेंट एहि बेरक पुरस्कार घोषणा सं पहिने आबि गेल छल. ई विकट संयोग रहल जे एहू बेर साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार कविते लेल देबाक घोषणा भेल अछि.   

चिंता महज पुरस्कार कें ल' नै छै बल्कि ई बात पर धियान देबाक छै जे युवा कलमकार लोकनि प्रोत्साहनक दशा-दिशा अनुरूप बेसी भाग कविते लिखैत छथि. जओं सही समय पर चेतल नै गेल त' मैथिली मे गद्य लेखन दुर्गति कें प्राप्त क' सकैत अछि. युवा मे एखन आंगुर पर गिनबा जोग रचनाकार छथि जे गद्य लेखन करैत छथि.

एहि पर जे वरिष्ठ लोकनिक मंतव्य अछि से एना अछि -  

आनंद कुमार झा कहैत छथि,

'साहित्यक कोनो बिधा आसान नहि अछि. ओ कविते किएक नहि हो, मुदा आइ-काल्हि जेहन कविता लिखैक परम्परा प्रारम्भ भेल अछि ओ थोड़े लिखबा मे सुभीतगर अवश्य भेलै अछि. कविता लिखैक बेसी परिपाटी अहियो दुआरे सुतरल अछि, कविताक समीक्षकक अएल दिन मे घोर अभाव खटकि रहल अछि. मैथिली मे आन विधाक लेखक कम अवश्य छथि मुदा जतबहि पोथी अबैत अछि संतोषजनक कहल जा सकैत अछि. हम कहब जे जोगार विधि सं जे साहित्य मे आइ प्रबुद्ध बनबाक नाटक चलि रहल अछि से बेसी दिन नहि चलत. जहिया साहित्यिक मठ सभ ढनमनाएत त' इहो सभ नष्ट भए जएत.'

तारानंद वियोगी दू आखर मे बात रखैत छथि,

'ई बात जोर-जोर सं आ बेर-बेर कहबाक जरूरति छै.'

मलय नाथ मिश्र अपन बात रखैत छथि,

'सब समय संगे रंग-रूप बदलै छै. आबि गेल छै समय जे गद्य कें ताकि रहल छै. पद्यक भीड़ मे हेराएल गद्यक खोज शुरू भ' गेल अछि.'

सुरेश पासवान (मैथिली अध्यापक) केर कहब छनि, 

'जावत धरि मैथिली मे मुंह देखव्वलि आ खेमाबाजी नहि बन्द हेतै, एहिना होइत रहत. मिथिला मे जाति, धर्म आ स्वार्थ सिद्धि सं ककरो फुरसति कहां छै जे एहि सब बिंदु लेल सोचत.'

एहने बहुत रास बात कमेंट रूप मे आएल अछि जे महत्वपूर्ण अछि, मुदा सब एतय शामिल करब संभव नै. #टिप्पणी सं ताकि सकैत छी, देखि-पढि सकैत छी.