विजय इस्सर लिखित कथा 'चिता पर मोबाइल' - मिथिमीडिया
विजय इस्सर लिखित कथा 'चिता पर मोबाइल'

विजय इस्सर लिखित कथा 'चिता पर मोबाइल'

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- बबलू माय! बबलू कतय गेल? आइ-काल्हि कतय रहैत अछि, कतय जाइत-अबैत अछि, कहियो आठ बजे, नौ बजे राति सं पहिने ओकर दर्शन नहि होइत अछि.

चिंतित रूपें रमेश अपन गृहणी राधा सं पुछलनि.

- हम की कही, दिन-राति कान मे इयरफोन खोंसने नै जानि ककरा सभ सं फुसफुसाइत रहैत अछि! हमर कोनो मोजर करय तहन ने? घर मे रहितो ओ जेना कोनो दोसरे दुनिया मे रहैत अछि. ई मोबाइल जानक जंजाल बनि गेलै आ उपर सं एकटा मोटरसाइकिल कीनिए देलियैए...जखन मोन भेलै हुर्र सं विदा भ' जाएत, जखन मोन करतै आबि जाएत.

- आब अहां त' हमरे दोष देब! अरे, हम देखलियै कॉलेज दूर छै, बस सं आबाजाही कठिन हेतै, समय से बेसी लगतै. अप्पन सबारी रहने समयो बचतै आ आरामो हेतै.

- हम अहां कें की दोष देब! समैये किदन भ' गेलै. आजुक बच्चा सभक र'हनि विचित्र भ' गेलै. ने पढ़ाइ ने लिखाइ. पढ़ए कहियौ त' कहत मोबाइल पर पढ़ै छी, लीखए कहियौ त' मोबाइल पर अंगुरी दौड़ाबए लागत. ने कॉपी ने किताप.

अरे ई फेसबुक, व्हाट्सएप आ ट्विटर न्यू जेनरेशन कें चौपट क' देलकै. नेट एतेक सस्ता आ सुलभ भेल जा रहलैए, पता ने की सब देखैत-पढैत रहैत छै. बच्चा सब कें नीक बेजाए केर ज्ञाने कतेक! आब त' लोक मुंह सं कोनो बात नै बाजैछ, झट सं मोबाइल पर पोस्ट क' देत. नओत-हकार सब मोबाइल सं. सूप्रभात, शुभरात्रि आ शुभकामना केर बरखा, व्हाट्सएप पर अपन-अपन ज्ञानक बघार आ नीक-नीक उपदेश. हम सब जीवन भरि मे पांचो-दसटा मित्र नै बना सकलहुं आ आजुक नवतुरिया सब कें फेसबुक पर पांच हजार फ्रेंड्स...गजब छै!

- अहूं  त' बड़की मोबाइल किनबे केलहुं अछि आ किदन-किदन सब देखिते रहैत छी!

- हं! तैं ने हम कहै छी जे अहूं आब ई छोटकी मोबाइल छोड़ू, एकटा नीक मोबाइल कीनि दै छी. व्हाट्सएप आ फेसबुक पर एकांउट बना दै छी. कने चेष्टा करबै त' चलाएब सीखि लेब. हम आफिस मे जखन खाली रहब त' दूनू गोटे चैट करब!

- दुर जाउ! हमरा नै अछि सिखबाक! हमरा लेल एतबे ठीक, फोन आएल त' उठा क' गप केलहुं आ ककरो सं मोन भेल त' बतिया लेलहुं. अच्छे हे, नओ बाजि गेलै कने फोन करियौ ने, देखियौ ने बबलू कतय अछि!

- हं, हं, देखै छियै.

रमेश अपन मोबाइल सं फोन करबाक बारंबार चेष्टा करैत बाजि उठलाह - "ओकर मोबाइल स्वीच ऑफ किएक बता रहल अछि. हे भगवान, सब ठीक रखबै."

किछु क्षणक उपरांत हुनक मोबाइलक घंटी बाजए लगलनि. रमेश हड़बड़ाइत मोबाइल उठओलनि. कोनो अनचिन्हार नंबर सं फोन छलनि.

- हेलो…हैलो…

- हैलो… आप रमेश झा बोल रहे हैं क्या?

- हां...हां! आप कौन?

- मैं शिवाजी नगर थाना से बोल रहा हूं. बृजमोहन (बबलू) के मोबाइल से आपका नंबर मिला.

- हां...हां… बबलू मेरा बेटा है...क्या हुआ उसको?

रमेशक चेहराक रंग उड़ि गेल. ओ आओर बेचैन भ' गेला. जवाब आएल -

- उसका एक्सीडेंट हो गया है. आप जल्दी से सदर अस्पताल पहुंचें.

रमेश सोफा पर धराम सं खसि पड़लाह, हाथ सं मोबाइल सेहो नीचां खसि पड़ल. राधा कनैत-कनैत घरक देवी-देवता कें गोहराबए लगलीह.

- की भेलै बबलू पप्पा...बबलू ठीक अछि ने?

- बबलू...बबलू के एक्सीडेंट….ओ होस्पीटल मे...

रमेशक स्वर घबरहटि मे ठीक सं नै निकलि रहल छलनि. ओ पानि दिस इशारा केलनि. राधा दौड़ि क' पानिक गिलास अनलनि. घरक कन्नारोहटि सुनि किछु लोक सभ जुटि गेल. सब कें ई खबरि लागि गेलै जे बबलू कें एक्सीडेंट भेलैए आ ओ अस्पताल मे सीरियस अवस्था मे अछि.

रमेश आ राधा कनैत-पीटैत हॉस्पिटल जेबाक लेल घर सं बाहर भेलाह ताधरि एकटा पड़ोसी अपन कार सटार्ट केलक आ दूनू गोटे कें बैसा क' विदा भेल.

हॉस्पिटलक सामने पुलिस सभ कें जमा देखि गाड़ी एक साइड मे लगा देल गेलै. रमेश आ राधा मेन गेट दिस बदहबास भेल दौड़लनि. पाछू सं किछु पड़ोसी सभ सेहो पहुंचि गेलनि.

- हां...हां सर! हम रमेश झा. कहां है मेरा बबलू ?

पुलिसक हेड हिनका पकड़ि क' सांत्वना देइत अस्पतालक भीतर ल' गेल. पुलिस आ अस्पताल कर्मचारी सभ बीच सुगबुगाहटि होमय लागल. उपस्थित लोक सब कें ई बुझबा मे कोनो दिक्कत नै रहलै जे बबलू खतम भ' गेल अछि. पुलिस बाहर आबि हिनक पड़ोसी लोकनि मे सं दू गोटे कें भीतर बजओलक आ रमेश-राधा कें सम्हारबाक इशारा केलक. पुलिस इंस्पेक्टरक कहला  पर स्टेचर पर उज्जर चद्दरि सं झांपल एकटा लहास आनल गेल. जखने लहासक मुंह उघारल गेल कि रमेश-राधा बबलूक नाम ल' चिकरब-कानब शुरू क' देलनि. ई हृदय विदारक दृश्य देखि सब नोरे-झोरे भ' गेल. एहना मे की-कोना कएल जाए, ककरो किछु फुरा ने रहल छलै. रातिक बारह बाजि गेलै, पुलिस सब अस्पताल कैंपस सं विदा होइत गेल.

प्रात भेलै त' लोक सब लहास निकलबेबाक प्रक्रिया मे लगलाह. रमेश आ राधा कनैत-कनैत बदहबास भेल पड़ल छलथि. किछु गोटे हुनका दुनू कें भरोस देबाक उपक्रम मे लागल छलाह. ताधरि पुलिसक गाड़ी आएल आ रमेश कें थाना नेने गेल. थाना प्रभारी बबलूक समान सभ जेना हाथक घड़ी, मोबाइल, इयरफोन, पर्स, औंठी, गराक चेन आ किछु टका रमेश बाबू कें देलनि. रमेश बाबू कें प्रभारी बतओलनि जे सीसीटीवी फुटेज सं स्पष्ट अछि जे बबलू मोबाइल मे बतियाइत ड्राइव क' रहल छल. प्रभारी जनओलनि जे मोटर साइकिल क्षतिग्रस्त अवस्था मे अछि आ कानूनी प्रक्रियाक बाद हैंडओवर कएल जेतनि. रमेश बाबू सं किछु ठाम सही कराओल गेलनि आ फेर पुलिस वाहन सं हुनका अस्पताल पहुंचा देल गेलनि.

दिनक दस बाजि गेल छल. पड़ोसी सब मिलि दाह संस्कारक सब व्यवस्था क' लेने छलथि. रमेश बाबूक किछु संबंधी सब सेहो ताधरि जुटि गेल छलाह. लहास कें अस्पताल सं घर आ फेर घर सं श्मशानघाट ल' जाओल गेल. माए-बापक अवस्था बड्ड खराप छलनि. श्मशानघाट पर चिता सजाओल गेल. रमेशबाबूक अवस्था कें देखि आगि देबए लेल कहबाक साहस ककरो नै भ' रहल छलै तथापि एक गोटे हुनका पकड़ि क' हुनक हाथ सं मुखाग्निक बिधि संपादित करौलनि. चिता मे आगि पकड़ा देल गेल आ रमेश बाबू कें एक दिस बैसा देल गेल. रमेश बाबू जरैत चिता देखि कोढ़ फाटि क' कानए लगलाह. आ कि एकाएक किछु काल मे जेना ओ सचेत होइत किछु ताकए लगलाह. बगल मे हुनक कोनो संबंधी लग रमेशक उतारल कपड़ा आ सामान सभ छलै. ओ हुनका लग जा क' अपन छोड़ल कुरताक जेबी सं थाना प्रभारी द्वारा देल बबलूक मोबाइल निकाललनि. चिता हू-हू जरि रहल छल, रमेश चिता दिस बढ़लाह. सभ लोक अकचका गेल छल. 

रमेश जोर सं कनैत हाथक मोबाइल कें देखबैत बजला ई मोबाइल नै राक्षस अछि...इएह हमर बबलू कें खेलक. हम एकरा एही चिता मे सुड्डाह क' देबै. ई कहैत संग ओ मोबाइल कें चिता पर फेंक देलनि. कने कालक बाद एकटा जोरगर अबाज भेलै. आगिक किछु चिनगी चारू दिस उड़िया गेलै. लोक सब अचंभित भ' गेलथि. संभवतः मोबाइलक बैट्री फाटल छलै. 

लहासक संगे मोबाइलो चिता पर हू-हू क' जरए लागल.

 विजय इस्सर 'वत्स'

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