होली कें ल' रूपेश त्योंथ केर किछु 'चरिपतिया'

(1)
आम गाछ पर कोइली कुहुकै
पवन कहै संदेश 
फागुन मे संग होरी खेलए
पाहुन अओताह देश

(2)
होरी मे सभ रंग-बिरंगे
छेदीक धोती लाल 
भांग पीबि भकुएलै छौड़ा
ललिया फेकै जाल

(3)
आगि लेसै छौ मुसकी तोहर
अन्हर अनौ आंखि
मनमा बुलए संगे तोहर
लगा नेह केर पांखि

(4)
माए जसोदा उठबै कान्हा
क' बहुविध तंग 
निश्चिंती छै घोड़ा बेचि
सुतल अछि चितंग

(5)
करिया भागल जमुना दिस क'
क' रधिया कें संग 
होरी एलै, होरी एलै 
मचा रहल हुडदंग

(6)
नाचै मनमा बिहुंसै ठोर 
पाबनि दिन छै आइ
गाछ बैसि क' कोइली गाबै
अओतै मोर कस्साइ

(7)
मोन पड़ै छी अहीं सजनी 
नै भ' रहलए नीन
प्रेमक बदला प्रेम सधबियौ 
नेने छलियै रीन

(8)
मोनहि पर अंकित अनमन
जेहन तोहर रूप
तोरा सं क' भेंट बिजुरिया
हीय भेल हम्मर सूप

(9)
टाट टुटतै, फट्टक टुटतै
संग भौजी घीचा-तीर 
रंग रभस हुड़दंग चहुंदिस
चकमक रंग-अबीर

(10)
नेह भरल पिचकारी नेने 
सभतरि हुलकल जाइ छै 
देह भिजओलक हमर सरधुआ 
कनियो ने लजाइ छै

(11)
बिनु अपराधे पढ़ने जाइए 
बिक्खिन बिक्खिन गाइर 
की करियौ किछु कहलो जाए ने
सुन्नरि भैयाक साइर

#हैप्पीहोरी 

>> रूपेश त्योंथ केर एक व्यंग्य कविता:
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Rupesh Teoth is an award-winning author, language activist, poet, columnist & an internet entrepreneur. He holds years of expertise in Digital Media and Product Development. He has the same proficiency in information technology, language, literature, and journalism.

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