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दशमी मे मैयाक आराधना: हे माय, अहां बिनु आस ककर!

दुर्गा पूजा प्रमुख पावनि अछि. शक्ति उपासना केर महान उत्सव कें दशमी, दशहरा वा नवरात्र सेहो कहल जाइत अछि. नौ दिन माँ शक्तिक नओ रूप केर आराधनाक बाद दशम दिन विजयादशमीक रूप मे मनाओल जाइत अछि. बंगालक दुर्गा पूजा बेस नामी अछि त' गुजरात केर डांडिया लोकक धियान आकर्षित करैत अछि. शक्तिक उपासक मिथिला मे ई पावनि बेस विधिपूर्वक कयल जाइत अछि.

> प्रथम शैलपुत्री रूप मे मायक पूजा  

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

श्री दुर्गा केर  प्रथम रूप श्री शैलपुत्री छनि. पर्वतराज हिमालय केर धिया छथि तें शैलपुत्री कहल जाइत छनि.  नवरात्र केर प्रथम दिन हिनक पूजा ओ आराधना कयल जाइत छनि. हिनक आराधना सं मनोवांछित फल प्राप्त होइछ.

> दोसर दिन माता ब्रह्मचारिणी केर आराधना

दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

श्री दुर्गा केर दोसर रूप श्री ब्रह्मचारिणी छनि. ई भगवान शंकर कें पति रूप मे प्राप्त करबाक लेल घोर तपस्या कयने छलीह. नवरात्रि केर दोसर दिन हिनक पूजा-अर्चना कयल जाइत छनि. जे दुनू कर-कमल मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करैत छथि. माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपन भक्त पर कृपादृष्टि रखैत छथि.

> तेसर दिन माता चंद्रघंटा केर पूजा

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

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श्री दुर्गा केर तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा छनि. इनके मस्तक पर घंटा आकार केर अर्धचंद्र छनि. नवरात्रि केर तृतीय दिन हिनक पूजन कयल जाइत अछि. हिनक पूजन सं साधक कें मणिपुर चक्र कें जाग्रत होयबाक सिद्धि स्वतः प्राप्त होइत अछि आ सांसारिक कष्ट सं मुक्ति भेटैत अछि. हिनक आराधना सं मनुक्ख केर हृदय सं अहंकार केर नाश होइत अछि. माँ चन्द्रघण्टा वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करैत छथि.

> चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तुमे॥

श्री दुर्गा केर चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा छनि. अपन उदर सं अंड अर्थात् ब्रह्मांड कें उत्पन्न करबाक कारण सं हिनका कूष्मांडा देवी कहल जाइत छनि. नवरात्रि केर चतुर्थ दिन हिनक पूजा कायल जाइत छनि. श्री कूष्मांडा केर उपासना सं हृदय कें शांति एवं लक्ष्मी केर प्राप्ति होइछ.

> पंचम स्कंदमाता

सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

श्री दुर्गा केर पंचम रूप श्री स्कंदमाता छनि. श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) केर माय होयबाक कारणें हिनका स्कंदमाता कहल जाइत अछि. नवरात्रिक पंचम दिन हिनक पूजा आ आराधना कयल जाइत अछि. सिंह केर आसन पर विराजमान तथा कमल केर पुष्प सं सुशोभित यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी छथि. हिनक विग्रह मे भगवान स्कंद बालरूप मे कोरा मे  विराजित छथि. माय कें चारि हाथ छनि. हिनक वर्ण एकदम शुभ्र छनि. ई कमल आसन पर विराजमान छथि तें हिनका पद्मासना सेहो कहल जाइत अछि. सिंह हिनक वाहन छनि. हिनक उपासना सं  सभ इच्छा पूर्ण होइत अछि.

> छठम माँ कात्यायनी 

चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना। 
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥

श्री दुर्गा केर षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी अछि. महर्षि कात्यायन केर तपस्या सं प्रसन्न भ' आदिशक्ति हुनका ओतय पुत्री रूप में जनम लेलनि. तें कात्यायनी कहबैत छथि. हिनक आराधना सं भक्त केर सभ काज सरल एवं सुगम भ' जाइत अछि. चन्द्रहास नामक तलवार केर प्रभाव सं हिनक हाथ चमकैत रहित अछि. श्रेष्ठ सिंह हिनक वाहन छनि.

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मिथिला भरि मे बेलनत्ती: षष्ठी कें मिथिला भरि मे बेल नओतल जाइत अछि. पूजन अनुष्ठान केर संग बेल नओतल जाइत अछि. आ फेर अगिला भोरहरबा मे बेल तोडि क' आनल जाइत अछि आ दुर्गा प्रतिमा केर सोलहो श्रृंगार कयल जाइत अछि. एकर बादे मायक पट भक्त लेल फुजैत अछि. एहि कें बादे पूजन उत्सव मे बदलि जाइत अछि.

> सप्तमी कें श्री कालरात्रि केर पूजन

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

श्री दुर्गा केर सप्तम रूप श्री कालरात्रि छनि. ई काल केर नाश करयबाली छथि. नवरात्रि केर सप्तम दिन हिनक पूजा आ अर्चना कयल जाइत अछि. एहि दिन साधक कें अपन चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) मे स्थिर क' साधना करबाक चाही. ई भगवती सभ दुःख-संताप हरण करयबाली छथि.

> महाष्टमीक दिन महागौरी केर पूजा

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

महाष्टमीक दिन महागौरी केर पूजा केर विशेष विधान अछि. मां गौरी कें शिव केर अर्धागनी आ गणेश केर माय रूप मे चिन्हल जाइत अछि. महागौरी केर शक्ति अमोघ आ सद्यः फलदायिनी अछि. हिनक उपासना सं पूर्वसंचित पाप सेहो विनष्ट भ' जाइत अछि. भगवती महागौरी वृषभ केर पीठ पर विराजमान छथि, जिनक मस्तक पर चन्द्र केर मुकुट छनि. अपन चारि भुजा मे शंख, चक्र, धनुष आ बाण धारण कयने छथि. महाष्टमी कें पूजनोत्सव केर अलगे धूम रहैत अछि.

> अंतिम स्वरूप श्री सिद्धिदात्री

सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

श्री दुर्गा केर नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री अछि. ई सभ प्रकारक सिद्धि देबयबाली छथि. सिद्धिदात्री केर कृपा सं मनुष्य सभ प्रकारक सिद्धि प्राप्त क' मोक्ष पयबाक मे सफल होइत अछि. मार्कण्डेयपुराण मे अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धि कहल गेल अछि. भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धि अपन उपासक कें प्रदान करैत अछि. माँ दुर्गा केर एहि अंतिम स्वरूप केर आराधनाक संगहि नवरात्र केर अनुष्ठानक समापन होइत अछि.

विजयादशमी: दशमीक दिन त्योहारक समापन होइत अछि. एकरा विजयादशमी कहल जाइत अछि. एहि दिन मिथिला कें छोडि देशक आन भाग मे रावणक पुतला जड़ाओल जाइत अछि. एही दिन भगवान राम राक्षस रावण केर वध क' मिथिलाक धिया सिया कें मुक्त करओने छलाह.

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MithiMedia 20 September 2017
खट्टरकका कें सुमिरन करैत कथा 'कॉर्नफ्लेक्स आ दही'

नॉर्वे मे रहैत छथि डॉक्टर साहेब प्रवीण झा 'वामागांधी. सोशल मीडिया पर अपन लेखनीक जादो सं लोक कें खूब आकृष्ट करैत छथि. हम अपने हिनक पोस्ट सबहक व्यसनी भ' गेल छी. ओ पोस्ट सभ बेसी भाग हिन्दी मे रहैत अछि. टूकटाक मैथिली पोस्ट सेहो देखबा मे अबैत अछि. एमहर आबि ज्ञात भेल जे ई सुअदगर व्यंग्य लिखैत छथि मैथिली मे. जनतब दी जे ई 'वामागांधी' उपनाम संग आएल हिंदी पोथी 'चमनलाल की डायरी' सं खूब चर्चा बटोरने छलाह. आशा अछि जे हमरा लोकनि कें हिनक मैथिली लेख ओ कथादि बरमहल पढबा लेल भेटत. – संपादक

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'काल्हि हमरा किछु विलंब होएत. स्टेशन जयबाक अछि.' 

'बाबूजी अबैत छथि?'

'नहि! भागलपुर सँ चूड़ा. पाँचहि बजे भोरे ट्रेन आओत. पैन्ट्रीबला कें दिया आबि जाइत अछि.'

'औजी! हद्द करइत छी. इडली-डोसा सनक सुपाच्य जलखइ छोड़ि गरिष्ठ भागलपुरी चूड़ा?'

'मुदा ओ दही-चीनी संग सानब संभव नहि.'

'साँभरक आगू दही-चीनी के' की औचित्य?'

'साँभर सँ चित्त शांत कोना होयत? सबटा उत्तेजक पदार्थ घोरि बीच मे मुनिगा!'

'नहि! अहाँ कें भ्रम अछि. मुनिगाक 'फाइबर' पाचक-तंत्र लय सर्वोत्तम.'

'से ठीके. मुदा हम चित्तक शांति कहि रहल छी, उदरक नहि.'

'चूड़ा-दही-चीनी त्रिगुणात्मक अछि अहाँक विचारे? खट्टर ककाक दूर्वाक्षत पड़ल अछि?' हम व्यंग्य केलियनि.

'डॉक्टर भ' क' अहाँ खट्टर ककाक कुचेष्टा क' रहल छी? तीनहि टा नाहि पाँचू टा तत्व.'

'आब पाँच टा भ' गेल?'

'औजी ओ दार्शनिक छला. अपने विज्ञान सँ जुड़ल छी. कॉर्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, फाइबर, मिनरल. की नहि अछि?'



'ई सभटा इडली-साँभर मे सेहो उपलब्ध.'

'अहि ठाम चित्तक गप्प अछि. चूड़ा-दही-चीनी खाय ठोर पसरि जाइत छैक. साँभर खाय जी फड़फड़ैल आगि भ' जाइत अछि.'

'हमरा त' दक्खिनक लोक सुभाषित लगैत छथि.'

'भाषहि मे भिन्नता आबि गेलनि. चूड़ा-दही खेनिहारक भाषा मे विराम छहि, कोनो तीव्रता नहि. एक मिनट मे दू सँ तीन शब्दक गति छहि. दक्खिनक भाषा मे पाँच शब्द प्रति सेकंड फड़फड़ाइत अगड़म-बगड़म बाजल जाइत अछि.'

'द्रविड़ संस्कृति छहि. भाषाक संरचना इडली-डोसाक युग से पहिलुका थीक.'

'संस्कृत भाषा क उपयोग अपनहु सभ करैत छी, आ दक्खिनो मे. ओहि बेर मे दूनू के गति एक. अपितु हम सभ नैवेद्य आ दूर्वाक्षतक मंत्रक गति मे हुनकहु सभ सँ आगू. पहिल आ अंतिम स्वर के अतिरिक्त किछु नहि बूझि सकबह.'

'सभ मंत्र बिसरि गेल छथि.'

'एकर इतिहास भिन्न-भिन्न जलखइ विधाक आक्रमण अछि.'

'से की कहलियइ?'

'पहिने मगह सँ सत्तू आयल. त्रिगुण सँ 'तम' लुप्त भय गेल.'

'तथार्थ दही?'

'तत्पश्चात् अंडाक आमलेट आबि 'रज' सेहो समाप्त कयलनि.'

'तथार्थ चिन्नी?'

'आब मात्र सत्व सँ बौद्धिकता क्षीण भय रहल अछि. अंडा खा क' मंत्रोच्चारण करबह मंत्र अंडे जेकाँ गोल भ' जेतह.'

'अहाँ त' चूड़ा मँगा लइत छी. हम त' विदा भेलहुँ बिदेश.'

'ओतय त' एक पर एक चूड़ा भेटत'. धान-मकइ-गहूम सबटा कतरि दइत छहि सुनइत छी. की कहइत छहि, कॉर्नफ्लैक्स?'

'से की?'

'बस कॉर्नफ्लेक्स मे चीनी आ दही सानि त्रिगुणक आनंद लेबह.'

– डॉ. प्रवीण झा 'वामागंधी'

                                                                                                  ADVERTISEMENT

MithiMedia 18 September 2017
आधुनिक मैथिली गद्यक शिखर पुरुष 'हरिमोहन झा'

मैथिली साहित्य जगत मे महाकवि विद्यापतिक बाद सर्वाधिक लोकप्रिय साहित्यकार मे हरिमोहन झाक नाम पहिल स्थान पर गानल जाइत अछि. अपन हास्य व्यंग्यपूर्ण शैली मे सामाजिक-धार्मिक रूढ़ि, अंधविश्वास आ पाखण्ड पर चोट हिनकर रचनाक अन्यतम वैशिष्टय कहल जाइत अछि आ तेँ हिनका मैथिली साहित्यक 'हास्य सम्राट'क उपाधि सेहो देल जाइछ.

हिनक जन्म 18 सितम्बर 1908 ई. केँ वैशाली जिलाक कुमार वाजितपुर गाम मे भेल. हिनक पिता पं. जनार्दन झा 'जनसीदन' मैथिलीक स्वनामधन्य उपन्यासकार आ कथाकारक रूप मे प्रतिष्ठित छथि. 'जनसीदन'क 'निर्दयी सासु', शशिकला, कलियुगी सन्यासी वा बाबा ढकोसलानन्द प्रहसन, पुनर्विवाह, आदि मैथिली साहित्यक अनमोल धरोहर अछि. संस्कृत, बांग्ला, हिन्दी आ मैथिलीक विद्वान पं.जनार्दन झा 'जनसीदन'क पुत्र प्रो. झा मूलतः दर्शनशास्त्रक विद्वान रहथि आ पटना विश्वविद्यालयक दर्शन विभागक अध्यक्ष पदसँ सेवानिवृत भेल छलाह.

हिनक प्रकाशित कृति मे 'कन्यादान' (उपन्यास, 1933), 'द्विरागमन' (उपन्यास 1943), 'प्रणम्य देवता' (कथासंग्रह, 1945), 'रंगशाला' (कथासंग्रह, 1949), 'चर्चरी' (विविध, 1960), 'खट्टर ककाक तरंग' (व्यंग्य, 1948), एकादशी (कथासंग्रह) आदि प्रमुख अछि. हिनका मरणोपरान्त 1985 ई. मे 'जीवन यात्रा' (आत्मकथा, 1984) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ अलंकृत कएल गेलनि. 

हरिमोहन बाबूक कथा आ उपन्यास आधुनिक मैथिली गद्य केँ लोकप्रियताक शिखर पर पहुँचओलक. आधुनिक कालक ई सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक मानल जाइत छथि. हिनक 'द्विगारमन' ततेक लोकप्रिय भेल जे दुरगमनिया भार मे अन्य वस्तुक संग साँठय जाय लागल. हरिमोहन झाक रचना बहुतो अमैथिल केँ मैथिली सिखौलक. 

उपन्यास आ कथाक अतिरिक्त एकांकी, प्रहसन, निबंध, कविता आदि आन-आन विधा मे सेहो हरिमोहन बाबूक विलक्षण रचना छनि. हिनक रचना केँ भारतक अनेक भाषा मे अनुदित कएल गेल अछि. डॉ. झा अपन कथाक माध्यमे वेद, पुराण, सांख्य, दर्शन आदिक अनेकानेक रुढ़िवादी सिद्धांत केँ तर्क, जीवनक व्यवहारिकता आ तीक्ष्ण व्यंगवाण सँ ध्वस्त करैत सहजहि भेटैत छथि. 

हिनक कथाक मूल उद्देश्य मनोरंजनक संगहि मैथिल समाज मे व्याप्त रूढ़ि विचारधाराक उद्घाटन करब थिक. 'खट्टरकाकाक तरंग' एकदिस जतय हास्य-विनोदक सृष्टि करैत अछि त' दोसर दिस ओही हास्यवाण सँ रुढ़ि पर जबर्दस्त प्रहारो करैत अछि. हरिमोहन झाक सभ रचना एक पर एक आ कालजयी अछि. एखनो हिनक पोथी मैथिली मे सभ सँ बेसी कीनल आ पढ़ल जाइत अछि. प्रो. डॉ. हरिमोहन झाक निधन 23 फरवरी 1984 ई. केँ भ' गेलनि.

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MithiMedia
डॉ. बीरबल झा पाग पुरुष सम्मान सं सम्मानित

मैथिली पत्रिका मिथिला दर्पण द्वारा मुम्बई  केर डी जी खेतान इंटरनेशनल सभागार मे आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मिथिलालोक फांउडेशनक चेयरमैन डॉ. बीरबल झा कें 'पाग पुरूष सम्मान' सं सम्मानित कएल गेलनि. मिथिलाक संस्कृति कें देश-विदेश मे अलग पहिचान दिएबा हेतु संघर्ष लेल डॉ बीरबल झा कें ई सम्मान प्रदान कएल गेल.

पछिला किछु साल सं 'पाग बचाउ अभियान' चला रहल डॉक्टर झा विगत किछु दिन सं मिथिलाक लाल प्रद्युम्न ठाकुर हत्याकांड मे बच्चाक अभिभावक कें कानूनी मदद उपलब्ध करेबाक हेतु चर्चा मे रहल छथि. डॉक्टर झा केर प्रयासक परिणामस्वरूप किछु दिन पहिने केन्द्र सरकार 'मिथिला पाग' पर डाक टिकट जारी केलक अछि.


मिथिला स्थित मधुबनी जिलाक सिजौल गाम मे स्व. दयानंद झा एवं जयपुरा देवीक घर 22 जनवरी 1972 कें जनमल डॉक्टर बीरबल झा बहुमुखी प्रतिभाक धनिक छथि. देशक प्रसिद्ध अंग्रेजी शिक्षण संस्थान ब्रिटिश लिंग्वाक संस्थापक एवं दर्जनो पुस्तकक लेखक डॉक्टर बीरबल झा ने मात्र मिथिलाक सामाजिक, सांस्कृतिक आ आर्थिक विकासक प्रति समर्पित छथि, अपितु ई देश भरि मे युवा लोकनिक रोजगारपरकता बढ़एबा हेतु अप्रतिम योगदान देलनि अछि. कम्युनिकेशन स्किलक क्षेत्र मे लगातार 24 साल सं अपन संगठन ब्रिटिश लिंग्वा कें देश भरि मे पसरल विभिन्न सेन्टर सभक माध्यम सं छात्र एवं युवा सभ कें प्रशिक्षित करएबला डॉक्टर झा एखन धरि लाखो युवा कें स्किल्ड क' चुकल छथि. बिहार प्रान्त मे 30 हजार सं बेसी महादलित छात्र-छात्रा सभ कें स्पोकेन इंग्लिश केर ट्रेनिंग द' एक मिशाल कायम केलनि अछि.

वर्ष 2010 मे देशक राजधानी दिल्ली मे आयोजित राष्ट्रमंडल खेलक दौरान होमगार्ड्स जवान सभ कें प्रशिक्षित केनिहार बीरबल झा मिथिलाक सर्वांगीण विकास हेतु समर्पित छथि.

MithiMedia 17 September 2017
झंझारपुर मे मासिक साहित्यिक गोष्ठीक शुभारंभ!

झंझारपुरक मैथिली पुस्तक केन्द्र मे साहित्यिक गोष्ठी आयोजन भेल जाहि मे रचनाकार अपन रचनाक संग आनोआन रचनाकारक रचना पढ़लनि. दू सत्र मे आयोजित गोष्ठीक पहिल सत्र मे उपस्थित रचनाकार स्वरचित रचनाक पाठ केलनि त' दोसर सत्र मे रचनाकार अपन पसिनक अन्य रचनाकारक रचना पाठ केलनि.

साहित्यिक आनंद कुमार झा जनबैत छथि जे एहि तरहक कार्यक्रम सं साहित्य सं दूर जाइत पाठक कें फेर साहित्य सं जोड़ल जा सकत. एही कें धियान मे राखि शनिदिन (16 सितम्बर 2017) कें झंझारपुर मे साहित्यिक सारस्वत केर देखरेख मे कार्यक्रमक शुभारंभ भेल.

विदित हो जे आब ई कार्यक्रम प्रत्येक मास  आयोजित कएल जाएत. कार्यक्रमक रूपरेखा डा. खुशीलाल झा, सारस्वत, प्रवीण कुमार मिश्र, आनन्द कुमार झा सहित गठित कार्यकारिणी यथाशीघ्र विस्तार सं तय करत. 

उक्त कार्यक्रम कविता पर आयोजित छल जाहि मे सारस्वत, अनुभव आनंद, आनंद कुमार झा, रिंकू देवी, पार्थ प्रीतम ओ प्रवीण कुमार मिश्र कविता सभक पाठ केलनि. एहि विशेष आयोजन मे छाह सोहाआओन (जीवकांत), जाइ सं पहिने (उषाकिरण खान), फुलवाइर (रामलखन राम 'रमण'), मुक्त-उन्मुक्त (डा. चन्द्रमणि झा), सोना आखर (मिथिलेश कुमार झा), बनिजाराक देस मे (दिलीप कुमार झा), समय सं संवाद करैत (कामिनी), एक मिसिया (रूपेश त्योंथ), ई कोना हेतै (डा. वैद्यनाथ मिश्र) ओ अरुणिमा (स्मारिका) मे सं रचना पढ़ल गेल.

आनंद कुमार झा आगू कहैत छथि जे एहि मासिक गोष्ठी केर रूपरेखा धीरे-धीरे स्पष्ट हेतै आ एकर खगता क्षेत्र मे बुझना जा रहल छलैक. मैथिलीक पाठक वर्ग तैयार करब गोष्ठीक मूल उद्देश्य राखल गेल अछि. साहित्यिक आयोजन सभ मे पाठकक भागीदारी खूब कम देखबा मे अबैत छै.

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MithiMedia
वशिष्ठ कुमार झा केर कविता 'संघर्षक करू शंखनाद'

हमरा सभक मध्य बहुत रास प्रतिभावान कवि-लेखक एहू लेल सोझां नै आबि पबै छथि, जे सही समय पर प्रोत्साहन वा प्लेटफ़ॉर्म नै भेटि पबै छनि. एहने एक निस्सन प्रतिभा छथि वशिष्ठ कुमार झा जे किशोरवय सं कविता करैत छथि (यात्री-नागार्जुन संगे मंच शेयर केने छथि), ग्रामीण रंगमंचक नीक कलाकार रहल छथि आ केना ने केना विगत दू कार्यकाल सं त्योंथ केर सरपंच ओ जिला सरपंच संघ केर शीर्ष पद पर जा बैसल छथि. साहित्यक दिस हिनक फोकस वा साहित्यक हिनका दिस फोकस शार्प-डिम होइत रहैत अछि. – संपादक

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तिरस्कारक जीवन कतेक दिन जीब 
अपमानक घोंट कतेक दिन पीब 
हे मिथिला कें मैथिल जनगण 
संघर्षक करू शंखनाद 
मिथिला मैथिली जिंदाबाद 

चिर उपेक्षित मैथिल 
मूकदर्शक बनल अछि ठाढ़ 
संघर्ष मांगि रहल अछि धरती 
तखने भेटत जन्मसिद्ध अधिकार 
संघर्षक बल पर भेटत वाणी 
आखर तखने होयत आजाद 
हे मिथिला कें मैथिल जनगण 
संघर्षक करू शंखनाद 
मिथिला मैथिली जिंदाबाद 

उठू अबेर भेल 
पसरल अन्हार टारि करू भोर 
आंचर खींचि रहल दुःशासन 
पोछू मां मिथिला कें नोर 
कृष्ण बनि उठाउ सुदर्शन 
मां मिथिला कें करू जीवन अर्पण 
छोडू अपन भीरू संवाद 
हे मिथिला कें मैथिल जनगण 
संघर्षक करू शंखनाद 
मिथिला मैथिली जिंदाबाद 

देखि लेबै, कते छै ककरा मे दम 
नष्ट क' देबै रावण सन अहं
नहि देत त' छीनि लेबै हम 
अपन मान ओ अप्पन राज 
जाति-धर्म केर झगड़ा छोडू 
जन-जन जपियौ मिथिलावाद 
हे मिथिला कें मैथिल जनगण 
संघर्षक करू शंखनाद 
मिथिला मैथिली जिंदाबाद 


— वशिष्ठ कुमार झा 
सरपंच, ग्राम पंचायत राज त्योंथ
अध्यक्ष, सरपंच संघ - मधुबनी
मोबाइल - 9199736739 

MithiMedia 14 September 2017
मैथिली वेब पत्रकारिता ओ मिथिमीडिया

मिथिइवेंट 2014मे आयोजित 'वेब पत्रकारिता ओ मैथिली' विषयक संगोष्ठीमे युवा साहित्यकार चन्दनकुमार झा द्वारा पढ़ल आलेख.

मैथिली पत्रकारिता:
1780 ई.मे बंगाल गजेटक प्रकाशनक संगहि भारतमे पत्रकारिताक आरम्भ भेल आ तकर चारि दशक बाद 1819 ई.मे बंगाली पत्र-संवाद कौमुदीक प्रकाशनक संगहि भारतीय भाषामे पत्रकारिताक आरम्भ भेल. भारतमे पत्रकारिताक शुरुआतक करीब 125 बरख आ भारतीय भाषामे पत्रकारिताक शुरुआतक करीब  करीब 86 बरखक बाद मैथिली-पत्रकारिताक शुरूआत भेल जखन 1905ई.मे जयपुरसँ "मैथिल हित साधन"क प्रकाशन आरम्भ भेल. एहि तरहेँ देखैत छी जे मैथिलीमे पत्रकारिताक जन्म अन्यान्य भारतीय भाषाक अपेक्षा बेस पछुआयल छल मुदा, आइयो करीब 110 बरखक वयस बितलाक बादहु मैथिली पत्रकारिता ठीकसँ चलब नहि सीखलक अछि, तखन फेर एकटा प्रशिक्षित आ प्रोफेसनल धावक सन दौगब तँ दीगर बात थिक. पछिला सय बरखक अपन जीवन-यात्रामे मैथिली पत्रकारिताक रूग्णावस्था नहि दूर भेलैक. ई कहियो व्यावसायिक रूपेँ स्वस्थ नहि रहल. मैथिली पत्रकारिता मात्र घाटाक व्यवसायक पर्याय बनल. फलस्वरूप मात्र अस्तित्वक लड़ाइ लड़ैत मैथिली पत्रकारिता एखनधरि जनाकांक्षाक अबाज नहि बनि सकल. एहि सम्बन्धमे मिथिला मिहिरक सम्पादक पं.शुधांशु शेखर चौधरीक हैत छथि—“असलमे पत्रकारिताक चरम उद्देश्य होइत अछि जनाकांक्षाक पूर्तिक दिशामे ओकर वाणीकेँ मुखरित करब जे कि मैथिली पत्र-पत्रिका एहि आदर्शसँ च्युत रहल अछि तेँ ने तँ ओकर समुचित विकास भेलैक अछि आ ने ओ जनमासक अपनत्व प्राप्त कऽ सकल अछि ।” (स्रोत-मिथिला दर्पण,मार्च-अप्रैल 2012, मे डॉ.बुचरू पासवानक आलेख "मैथिली पत्रकारिताक आधुनिकीकरण”)

मैथिली पत्रकारिताक एहि विफलताक पाछाँ कारण गनाओल जाइत अछि जे-"पत्रकारिता की थिक, ओकर उद्देश्य की होइत छैक, ओ कतेक काज कऽ सकैत अछि, ओकरा बढ़ौनिहारक की योग्यता हेबाक चाही, एहि सभ पर सम्यक विचार प्रस्तुत करबाक बदला जिनकामे पत्रकारिताक विधाक ज्ञान लेशो मात्र नहि छनि तिनकर विचारकेँ जँ प्राथमिकता देल गेल-(स्रोत-मिथिला दर्पण,मार्च-अप्रैल 2012,डा. बुचरू पासवान) लेकिन फेर जँ एहि कारण गनौनिहार व्यक्ति सभसँ प्रतिप्रश्न कएल जाइत अछि तँ इहो सभ घूरि-फिरि ओतहि अटकि जाइत छथि जे-मैथिली पत्रकारिताक क्षेत्रमे व्यवसायिक प्रबन्धकीय दृष्टिकोणक अभाव छैक. मैथिली पत्रकारिताक एहि दूरावस्थापर "मिथिला दर्शन"क संपादक श्री नचिकेताक निम्नलिखित टिप्पणी सेहो ध्यान देबाक योग्य अछि-“मैथिली पत्रकारिता, खास कऽ पत्रिकाक प्रकाशनसँ संबंधित तीन टा मुख्य समस्या हमरा वर्तमान मे देखाइत अछि. पहिल आ' सभसँ पैघ समस्या छैक जे मैथिलीमे एखनो नियमित रूपेँ स्तरीय रचना नहि भेटि पबैत छैक. लेखक सभ अपन रचनाकेँ जल्दी सँ जल्दी प्रकाशित करबा लेल अगुताएल रहैत छथि. नव आ' नीक रचना ताकब खाली हमरे लेल नहि अपितु प्रायः सभ संपादकक लेल समस्या छन्हि.

दोसर समस्या छैक जे हम सभ एखनो व्यवसायिक दृष्टिकोणसँ नहि सोचैत छी, पत्र-पत्रिकाक वितरणक व्यवस्था पर धेयान नहि दैत छी. पाठक मोफतमे पत्रिका पढ़य चाहैत छथि. एहिठाम कहि दी जे हमसभ (मिथिला दर्शन) मुफ्तमे बाँटब बन्न केने छी. एहिलेल किछु गोटे कहबो केलाह जे हमर सभकेँ तऽ सभदिन मोफते मे पत्र-पत्रिका भेटैत रहल अछि आ' तैँ हमरा सभक प्रति हुनका सभक मोनमे कष्ट सेहो हेतैन्ह. मुदा, आब ई परिपाटी बंद करबाक बेगरता अछि आ' प्रकाशक सभकेँ अपन-अपन बिजनेस मॉडल बना पत्र-पत्रिका बहार करबाक चाहियनि.

एहि क्षेत्रक तेसर समस्या छैक जे पत्र-पत्रिका तऽ बहुत बहरायत छैक मुदा फेर अनियमित भऽ जाइत छैक आ' क्रमशः बंद बऽ जाइत छैक. हमर सभक प्रयास रहैत अछि जे पत्रिका अपन नियमित प्रकाशनक तिथिसँ सात दिन पहिनहि तैयार भऽ जाए. अनियमित प्रकाशनक समस्या आब ई-पत्रिका सभमे सेहो देखबामे अबैत अछि किंतु ओ' बहुत कम छैक."

उपर जे अनेक समस्या सभक चर्च कएल अछि तकरे परिणाम थिक जे-पछिला सय बरखमे मैथिलीमे करीब तीन सय पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन आरम्भ तँ भेल मुदा, अधिकांश अल्पायु-एमे काल-कवलित भऽ गेल. आश्चर्यक विषय थिक जे, हमसभ तकर अकाल मृत्युपर बिना कोनो शोक प्रकट कएने, एहिसँ बचबाक कोनो विशेष उपाय तकने बस एही बातपर अपन पीठ ठोकैत रहलहुँ जे- जँ एकटा पत्रिका मरलै तँ दोसराक जन्मो तँ भेलैक...क्रमतँ कहियो नहि टुटलैक...! किन्तु हम सभ आइ मैथिली पत्रकारिताक जाहि इतिहासपर गौरव करैत छी ताहि सम्बन्धमे पं. सुधांशु शेखर चौधरीक निम्न विचारपर सेहो हमरा सभकेँ चिन्तन करबाक चाही. ओ कहैत छथि –“विशाल संख्यामे जे मैथिली पत्र-पत्रिका अकाल मृत्यु भेलैक अछि से मैथिली भाषीक हेतु कहियो गौरवमय चित्र नहि प्रस्तुत कऽ सकैत अछि, अपितु ई कहबाक चाही जे मैथिलीक एक-एक मुइल पत्र मैथिलीक वक्षपर उगि आयल फोका थिक जकरा फोड़लासँ प्रत्येक मैथिली-स्नेहीकेँ मर्मान्तक पीड़ाक अनुभव भऽ सकैत छैक.” (स्रोत-मैथिली पत्रकारिताकःदशा ओ दिशा).

पं.चन्द्रनाथ मिश्र 'अमर', “मैथिली पत्रकारिताक इतिहास”मे सेहो स्वीकार करैत छथि जे- मैथिली पत्रकारिताक आइ धरिक उपलब्धि एतबे कहल जा सकैत अछि जे पत्रकारिता विकासक संभावनाकेँ जियौने रहल अछि तहिना इहो कहल जा सकैत अछि जे मैथिली पत्र-पत्रिका अपना भीतर एतबा साक्ष्य अवश्य रखने अछि जे समाजमे होइत परिवर्तनकेँ ओहिमे अकानल जा सकय." ...मुदा, की एखनो मात्र अकानले जा सकय? ओकर स्पष्ट प्रतिबिंब किएक नहि झलकैत छैक आबहु? एहि तरहेँ जँ आइ धरिक मैथिलीक पारम्परिक (प्रिन्ट) पत्रकारिताक इतिहास जकरा हम मात्र मैथिली साहित्यिक पत्रिकाक इतिहास बुझैत छी, केर अध्ययन केलासँ प्रतीति होइत अछि जे मैथिली पत्रकारिताक जन्म अन्यान्य भारतीय भाषाक पत्रकारितका अपेक्षा जहिना पछता भेल रहैक तहिना, विकासक क्रममे सेहो मैथिली पत्रकारिता आइ प्रायः सय बरख पछुआयल अछि.जखन कि विश्व-पत्रकारिता कि अन्यान्य भारतीय भाषाक पत्रकारिताक समकक्ष ठाढ़ हेबाक हमरा सभकेँ अपेक्षाकृत अधिक प्रयास करबाक छल मुदा, दुर्भाग्यवश हमसभ आइयो प्रायः 1905सँ आगाँ नहि बढ़ि सकलहुंअछि.

मिथिला मिहिर केर प्रकाशन कालकेँ मैथिली पत्रकारिताक स्वर्णकाल मानल जाइत अछि मुदा, ई पत्रिका चूँकि एकटा साहित्यिक पत्रिका छल तेँ पत्रकारिताक सभटा गुण एकरामे नहि छलैक. हमरा हिसाबेँ 2004 केर बादक वर्षकेँ मैथिली पत्रकारिताक इतिहासमे सर्वाधिक महत्वपूर्ण काल मानल जायत जखन मैथिलीमे दू टा दैनिक, ई-पत्रिका आ अनेक वेब पोर्टल, रेडियो तथा टेलीविजनपर मैथिलीमे समाचार प्रसारण आदि शुरू भेल आ देशक विभिन्न ठामसँ साहित्य-संस्कृतिकेँ समर्पित पत्रिकाक प्रकाशन भेल.

मैथिली वेब पत्रकारिता:
वेब पत्रकारिता कमप्यूटर ओ इन्टरनेटक सहायतासँ, डिजिटल तरंगकेर माध्यमसँ संचालित होमयबला पत्रकारिता थिक जकरा ऑनलाइन, इन्टरनेट, साइबर पत्रकारिता, आदिक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि. वेब पत्रकारिताक अन्तरगत मुख्यतः तीन तरहेँ सामग्री प्रकाशित कएल जाइत अछि-1. प्रिन्ट मीडियामे प्रकाशित सामग्रीक ऑनलाइन संस्करण 2. ऑनलाइन सामग्री जकर आंशिक प्रकाशन प्रिन्ट सेहो होइत अछि आ 3. एहन पोर्टल वा समाचार साइट जे मात्र इन्टरनेट पर संचालित होइत अछि. आब इन्टरनेट पर दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, द्वैमासिक, त्रैमासिक, आदि हरेक आवृतिक पत्र-पत्रिका सहज उपलब्ध अछि. एखन जे पत्र-पत्रिका वा व्लॉग-वेवसाइट आदि इन्टरनेट पर वेब-पत्रकारिताक क्षेत्रमे सक्रिय अछि तकरा विषय-वस्तुक दृष्टिसँ साहित्यिक,आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक,समाचार प्रधान आदिमे वर्गीकृत कएल जा सकैत अछि. हलाँकि इन्टरनेटपर प्रकाशित कोनो सामग्रीकेँ सीमा विशेषमे बान्हल नहि जा सकैए मुदा एकर सांदर्भिकताकेँ रेखांकित करैत एहिपर  प्रकाशित सामग्रीक दृष्टिकोणसँ एहि पत्र-पत्रिकादिकेँ स्थानीय, राष्ट्रीय ओ अन्तराष्ट्रीय स्तर केर पत्र-पत्रिकादिमे वर्गीकृत कएल जा सकैए. आइ भलेँ वेब-पत्रकारिताक विश्वसनीयतापर विश्वभरिक किछु प्रतिशत आबादी प्रश्नचिन्ह ठाढ़ करैत हो मुदा ई कहबामे कोनो अतिशयोक्ति नहि होयत जे- जाहि तरहेँ लोकक जीवन प्रोद्योगिक केन्द्रित भऽ रहल अछि, लोकक टेक्नोलॉजीपर निर्भरता बढ़ि रहलैक अछि, आ सम्पुर्ण विश्व समुदाय संचार क्रान्तिक संवाहक बनल अछि, निकट भविष्यमे विश्वक प्रत्येक भाषामे वेब-पत्रकारिता सर्वाधिक लोकप्रिय आ विश्वसनीय होयत.

1980 केर दशकमे न्यूयार्क टाइम्स, वालस्ट्रीट जर्नल, आदि कतिपय समाचार-पत्र अपन वेब-संस्करण प्रकाशित आरम्भ कएलक आ प्रायः एतहिसँ  वेब-पत्रकारिताक आरम्भ मानल जाइत अछि. प्रसिद्ध टाइम मैगजिन 1994ई. मे पहिल बेर इन्टरनेटपर उपलब्ध होमय बला पत्रिका बनल. भारतमे "द हिन्दु" पहिल भारतीय अखबार छल जे 1995मे अपन वेब-संस्करण संग इन्टरनेटपर अवतरित भेल आ तकर तीन बरखक बाद 1998मे केवल अंगरेज़ीमे नहीं अपितु अन्य भारतीय भाषा यथा- हिंदी, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती आदि भाषामे  देशक करीब 48 गोट समाचारपत्र केर वेब-संस्करण प्रकाशित होइत छल. एकटा आँकड़ाक मोताबिक 1997मे भारतक विभिन्न भाषामे वेब-पत्रकारिताक जे निम्न स्थिति छलः
भाषावार कुल पंजीकृत और ऑनलाइन पत्रक संख्या: 
1) अंगरेज़ी - 338 -19,2) हिंदी -2118 – 05, 3) मलयालम -209 – 05,4) गुजराती -99 – 04, 5) बंगाली -93 - 03
6) कन्नड - 279 – 03, 7) तेलुगु - 126 – 03, 8) ऊर्दू -495 – 2, 9) मराठी -283 – 01

1997 धरि अन्य भाषा यथा असमिया, मणिपुरी, पंजाबी, उडिया, संस्कृत, सिन्धी, मैथिली,आदि भाषामे ऑनलाइन पत्रकारिताक उदय नहि भेल छल. एकैसम शताब्दीक मध्य अबैत-अबैत देशक प्रायः हरेक भाषामे वेब-पत्रकारिताक जन्म भऽ गेल. इन्टरनेटपर ब्लाग तकनीकक विकास आ देवनागरीमे प्रकाशनक सुविधाक विकास भेलैक आ तकर बाद अन्य भारतीय भाषाक संग मैथिली भाषामे सेहो ऑनलाइन पत्रकारिता केर नव बाट खूजल. जे रकर्ड उपलब्ध अछि, ताहि अनुसारेँ 5 जुलाई 2004केँ "भालसरिक गाछ" ब्लॉगक माध्यमसँ मैथिलीक पहिल ई-पत्रिका विदेह-पाक्षिक केर प्रकाशन प्रारम्भ भेल आ एहि तरहेँ मैथिली वेब-पत्रकारिताक सूत्रपात भेल. बादमे ई पत्रिका Videha.co.in पर प्रकाशित होइत रहल अछि आ एखन धरि एकर कुल 166 अंक केर प्रकाशन भऽ चुकल अछि. एहि पत्रिकाक एकटा और महत्वपूर्ण विशेषता अछि जे एकर सभ अंक देवनागरी, तिरहुताक संग ब्रेल लिपिमे सेहो प्रकाशति होइत अछि. विदेह-पाक्षिकक प्रकाशन वस्तुतः मैथिली पत्रकारिता जगतमे एकटा आन्दोलन ठाढ़ कएलक. एखन धरि एहि पत्रिकाक माध्यमे नव रचनाकारक एकटा पीढ़ी तैयार भेल जे मैथिली साहित्यक विकासमे अपन महत्वपूर्ण अवदान दए रहल छथि. संगहि एहि पत्रिकाक माध्यमे एखनधरि अनेक विधा यथा- उपन्यास, कथा, कविता, गीत, गजल, हाइकु, शेर्न्यू, नाटक, निबंध, समालोचना, आदिक उत्थान लेल अभियान चलाओल जा रहल अछि । पोथी प्रकाशनक क्षेत्रमे सेहो विदेह समूहक महत्पूर्ण योगदान अछि. अनुमानतः एखनधरि एहि पत्रिकाक अंक सभकेँ विश्वभरिमे करीब पाँच लाखसँ बेसी बेर देखल जा चुकल अछि.

ओना कुमार पद्मनाभ (आदि यायावर)  सेहो दावा करैत छथि जे "कतेक रास बात" नामक हुनकर बनाओल ब्लाग Vidyapati.Org मैथिलीक पहिल वेब-पोर्टल थिक. नेपालसँ धीरेन्द्र प्रेमर्षी द्वारा संचालित पल्लव, हितेन्द्र ठाकुर द्वारा संचालित हेल्लोमिथिला, मिथिला लाइव आदि मैथिली वेब-पत्रकारिताक आरम्भिक समयक महत्वपूर्ण वेबसाइट सभ अछि. बादमे मैथिली वेब-पत्रकारिताक जगतमे इसमाद, मिथिमीडिया, मिथिलाप्राइम, मिथिलामिरर, नवमिथिला आदि अनेक समाचार पोर्टल आयल जे इन्टरनेट पर मैथिली पत्रकारिताकेँ आर अधिक सक्षमताक लेल निरन्तर कार्यरत अछि. एकर अलावे साहित्य, कला ओ संस्कृतिसँ जुड़ल सैकड़ो ब्लॉग आ पोर्टल अछि जतय मैथिली भाषा-साहित्यकविविध गतिविधिक जनतब उपलब्ध अछि.

मिथिमीडिया:
15 अगस्त 2012केँ मिथिमीडियाक जन्मक संगहि मैथिली वेब-पत्रकारिताकेँ नितांत मौलिक आ नवीन बाट भेटलैक. मौलिक एहि अर्थमे जे ओहि समयमे मिथिमीडिया एकमात्र वेब-पोर्टल छल जे मात्र मिथिला-मैथिलीसँ सम्बन्धित गतिविधिक समाचार प्रसारण संकल्पक संग सभक सोझाँ आयल छल. जेनाकि एकर परिचयमे सेहो लिखल छैक-"मैथिली मे अछिनरे वेब पोर्टल अछि. समाद, संगीत, साहित्य आदि विषयक वेबसाइट केर कोनो कमी नहि अछि. वेब पर मैथिली केर उपस्थिति अन्य भारतीय भाषा सं कम नहि अछि. तथापि शुद्ध ओ सटीक मैथिली समाद पोर्टलक खगता बनले अछि. एहि खगता कें पूर्ण करबाक उद्देश्यक एक प्रयास थिक मिथिमीडिया".

मिथिमीडियासँ पूर्व जे मैथिली समाद-पोर्टल सब छल ताहिमे मिथिलाक मौलिक आ निष्पक्ष खबरिक अभाव रहैत छलैक. ओ पोर्टल सभ हिन्दी-अंग्रेजीक विभिन्न पोर्टल सभक बासि-तेबासि समादकेर मैथिली अनुवाद परसैत छल जाहिसँ ओकरा सभक प्रति पाठकक मोनमे कोनो विशेष लगाव नहि उत्पन्न भेल. मिथिमीडियाक कलेवर, एहिपर प्रसारित सामग्रीक गुणवत्ता, एकर निष्पक्षता आ मौलिकता विश्वक विभिन्न कोनमे बसल मैथिलकेँ अपना दिस आकर्षित करबामे सफल भेल. एहि पोर्टलक उत्कृष्ट डिजाइनिंग आ भाषा शुद्धता एखनो मैथिलीक समस्त वेब-पोर्टलसँ कएक धाप बढ़िकऽ अछि. एहिपर प्रसारित विभिन्न सामग्रीक गुणवत्ता ओ विश्वसनीयताक सहज अनुमान एहिसँ लगाओल जा सकैत अछि जे ई विभिन्न मैथिली पत्र-पत्रिकाक अलावे नेपालसँ प्रसारित होमयबला रेडियो कान्तिपुरक "हेल्लो-मिथिला" सन लोकप्रिय कार्यक्रमक लेल सेहो कन्टेन्ट प्रोवाइडर केर काज करय लागल.

मिथिला-दर्शनक संपादक श्री नचिकेता सेहो एहि पोर्टलक प्रशंसक छथि. मात्र तीन बरखक अपन पत्रकारिताक यात्रामे मिथिमीडिया आइ मैथिली-वेबपत्रकारिताक एकटा महत्वपू्र्ण परिचिति बनि गेल अछि. समाज, साहित्य, राजनीति, कला-संस्कृति, रंगमंच,सिनेमा, आदि विभिन्न क्षेत्रसँ सम्बन्धित 600सँ अधिक पोस्ट आइधरि एहिपर भेल अछि, जाहिमे 27 गोट साक्षात्कार आ' विविध विषयक 34 गोट आलेख अछि. संगहि अनेको नव-पुरान रचनाकार लोकनिक रचना एतय प्रकाशित भेल छनि. मिथिमीडिया प्रायः मैथिलीक पहिल वेब-पोर्टल छल जे राजनीति,साहित्य, समाजसेवा, पत्रकारिता, रंगमंचसँ जुड़ल गणमान्य लोक यथा- श्री नचिकेता, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, किशोरीकान्त मिश्र, गुणनाथ झा, प्रेमलतामिश्र प्रेम, शेफालिका वर्मा, धनाकर ठाकुर आदिक साक्षात्कार शृंखलाबद्ध ढंगसँ प्रस्तुत केलक. मैथिली साहित्यक विभूति लोकनिपर आधारित एकर परिचय शृंखला सेहो बेस लोकप्रिय भेल. संगहि ई समाद-पोर्टल अपन सामाजिक दायित्वकेँ चिन्हैत आ जनाकांक्षाकेँ स्वर दैत मिथिला-मैथिलीसँ जुड़ल ज्वलन्त सामाजिक-राजनैतिक मुद्दापर निर्भीक टिप्पणी करैत रहल अछि से चाहे मैथिली-भोजपुरी अकादमीमे भोजपुरीक बढ़ैत वर्चस्वपर हो कि मध्यमग्रामक घटनापर. अकर्मण्य मिथिला-मैथिली संस्थाक सेहो कटु आलोचनासँ मिथिमीडिया वंचित नहि रहल अछि. एकर अलावे कलकतिया मिथिला-मैथिली गतिविधि, देशभरिमे मनाओल जाए बला विद्यापति समारोह, कि कोनो विशेष समारोह आदिपर सेहो एकर विशेष नजरि रहैत छैक. मंगलिया नाट्यउत्सव दिल्ली, नेपालक साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधि समेत विविध मैथिली समारोहक विशेष कवरेज सेहो एकर महत्वपूर्ण आकर्षण अछि. प्रगतिशील मैथिली पोर्टल अछि मिथिमीडिया. एकर मुख्य उद्देश्य मिथिला ओ मैथिलीक विभिन्न हलचल ओ हालचाल प्रकाशित ओ प्रसारित करब अछि. संगहि ई मिथिला, मैथिली ओ मैथिलक संस्था, अभियान व कार्यक्रमक ऑनलाइन प्रचारक काज सेहो करैत अछि.

उपसंहार:
1. एखनधरि मात्र 10 प्रतिशत भारतीय जनसंख्या इन्टरनेटपर सोशल नेटवर्कसँ जुड़ल अछि अतः आगामी समयमे एकर विकासक असीम संभावना छैक.
2. आजुक समयमे वेब एकमात्र माध्यम अछि जकरा माध्यमसँ मैथिली पत्रकारिता जगत १००००सँ मैथिलक बीच पहुँच सकैत अछि.
3. मैथिली वेब-पत्रकारिताक भविष्यमे महत्वकेँ देखैत आवश्यक अछि जे एकर शैशवावस्थेँ सँ उचित देख-रेख कएल जाए अन्यथा कहीँ भविष्यमे इहो अपंग-दुर्बल नहि बनि जाए.
4. एखन मैथिली वेब-पत्रकारिताक समक्ष जे सभसँ पैघ दू गोट समस्या छैक से थिक- १. संसाधन आ २. सामग्री. एकरा लग टेक्निक आ टैलेन्ट छैक.
5. मिथिमीडिया सन वेबपोर्टलकेँ जँ सालाना एक लाख रुपैयाक इन्वेस्टमेंट भेटि जाए (जे कि कोनो प्रिन्ट पत्रिकाक मात्र एक-दू अंकक लागतिक बरोबरि अछि) तँ मैथिली-पत्रकारिता जगतमे क्रान्ति आबि सकैत अछि. संगहि रोजगारक अवसर सेहो उपलब्ध हेतैक.
6. जेना कि नचिकेताक कथनकेँ पहिने उद्धृत कएल- नीक कन्टेन्टक सेहो बड़ अभाव छैक. स्थापित रचनाकार वेबपर अपन रचना नहि देबय चाहैत छथि जानि नहि किएक. तहिना हम सभ जे आयोजन करैत छी तकर समाचार छपाबय हेतु हिन्दी-अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाकेँ विज्ञापन दैत छियैक, लॉबिन्ग करैत छी मुदा, मिथिमीडिया सन वेब-पोर्टलकेँ प्रेस-विज्ञप्तियो ससमय उपलब्ध नहि करबैत छी. एहिसँ मैथिली पत्रकारिता आ संस्था दुनूकेँ हानि होइत छनि.

हम आशा करैत छी जे आजुक एहि चर्चाक बाद हम सभ मैथिली वेब-पत्रकारिताक महत्वकेँ बूझब आ एकरा विकासक हेतु सार्थक प्रयास आ सहयोग करब.


#पेटारमेसं 

MithiMedia 13 September 2017
रमाकांत चौधरी ओ कमलाकांत झा कें पाग सम्मान

मिथिलालोक फांउडेशनक तत्वाधान मे पाग सम्मान समारोहक आयोजन राजधानी दिल्ली मे कएल गेल. समारोह मे वरिष्ठ पत्रकार रमाकांत चौधरी एवं मैथिली अकादमीक पूर्व अध्यक्ष कमलाकांत झा कें 'पाग सम्मान' सं सम्मानित कएल गेलनि. 

पाग सम्मान रमाकांत चौधरी कें मिथिला मे कएल उत्कृष्ट समाजिक काज लेल दल गेलनि अछि, त' कमलाकांत झा कें मैथिली भाषा मे उल्लेखनीय योगदान लेल सम्मानित कएल गेलनि.  

एहि अवसर पर रमाकांत चौधरी कहलनि. 'हम बहुत आभारी छी जे मिथिलालोक फांउडेशन हमर सामाजिक काज कें स्वीकार केलक आ हमरा सम्मानित कएल गेल अछि. कोनो सम्मान लोक कें आओर बेसी मेहनति करबा लेल प्रेरित करैत छै. तैं हम ई निजगुत करब जे सामजिक काज मे अपन योगदान कें निरंतर जारी राखब.'

ओ आगू कहलनि, 'हमर पिता स्वर्ण पदक विजेता एवं मैथिलीक प्रोफेसर छलाह, हमरा मिथिला-मैथिलीक प्रति सिनेह परिवार परंपरा सं भेटल अछि. हम डॉ बीरबल झा कें ह्रदय सं धन्यवाद देइत छी जे ओ दिन-राति लगन सं 'पाग बचाउ अभियान' चलओलनि जे एतेक प्रसिद्ध भेल आ भारत सरकार कें पाग पर डाक टिकट जारी करबा लेल प्रेरित केलक.

ज्ञात हो जे रमाकांत चौधरी अपन पेशा (पत्रकारिता) आ अपन व्यस्त कार्यक्रमक उपरान्त रमाकांत चौधरी सामाजिक हित लेल सदा काज करैत छथि. कतेको अवसर पर भ्रष्टाचार आ भ्रष्ट अधिकारी सभक खिलाफ आवाज उठओलनि अछि. संगहि रमाकांत चौधरी कतेको अन्य कल्याणकारी गतिविधि सभ सं जुड़ल रहल छथि.

कार्यक्रम मे मिथिलालोक फांउडेशनक उद्देश्य स्पष्ट करैत कहलनि जे जीवन मे सफल वएह होइत अछि जकरा अपन संस्कृति पर गर्व रहैत छै.

MithiMedia 8 September 2017
यूट्यूब पर पूनमक टहाटोहि इजोरिया!

पूनम मैथिलीक लोकप्रिय गायिका छथि आ गायन मे एक मोकाम हासिल केने छथि. कइएक सालक मेहनतिक प्रतिफल अछि जे गाम गेने हमरा सभक कान में जे गीत सभ सं पहिने पड़ैत अछि ओ पूनम गाओल रहैत अछि. संस्कार गीतक क्षेत्र मे हिनका विशिष्ट स्थान प्राप्त छनि त' आधुनिक गीतक सेहो नीक संख्या मे प्रशंसक बना नेने छथि.

एकटा आओर बात कहि दी जे यूट्यूब पर पूनमक गीत 'जहिये सँ गेलखिन सजना, निन्न उड़ि गेलए' 1 मिलियन सं बेसी लोक सुनि चुकल छथि आ से मात्र लगभग सवा दू सय दिन मे. जें कि तकनीकक प्रसार भेने म्यूजिक इंडस्ट्री करोट ल' रहल अछि, यूट्यूब पर ई नीक संख्या मे दर्शक तैयार क' लेने छथि.

उक्त गीत शिव कुमार झा 'टिल्लु' केर लिखल छनि जे पूर्वी धुन पर अछि. अपने सेहो एहि गीतक आनंद एतय ल' सकै छी.

MithiMedia
'पाग पुरुष पुरस्कार' सं सम्मानित होयताह डॉ. बीरबल झा

सामाजिक आ सांस्कृतिक विकासक लेल काज केनिहार संस्था मिथिलालोक फांउडेशनक चेयरमैन आ बिटिश लिंग्वा केर प्रबंध निदेशक डॉ़ बीरबल झा कें सांस्कृतिक ओ सामाजिक योगदान लेल 'पाग पुरुष पुरस्कार' सं सम्मानित कएल जेतनि. हुनका ई सम्मान मुंबई मे 16 सितंबर कें डी़ जी़ खेतान इंटरनेशनल ऑडिटोरियम मे मैथिली पत्रिका 'मिथिला दर्पण' दिस सं आयोजित एक कार्यक्रम मे देल जेतनि.

कार्यक्रमक संयोजक संजय झा कहलनि अछि जे ई पुरस्कार डॉ़ झा कें मिथिलाक विकास एवं पाग कें राष्ट्रीय-अंर्तराष्ट्रीय पहिचान दिएबाक कारणे देल जाएत. ओ कहलनि जे मिथिलाक सांस्कृतिक पहिचान 'पाग' कें लोक लगभग बिसरि गेल छलाह, मुदा डॉ. झा केर प्रयास सं आइ मिथिला सहित देश मे एक बार फेर सं मिथिलाक संस्कृतिक प्रतीक पाग केर चर्चा होमए लागल अछि. हालहि मे केंद्र सरकार पाग पर डाक टिकट जारी क' मिथिलाक सांस्कृतिक प्रतीक पर अपन मोहर लगा देलक अछि आ एहि पर देश-विदेश मे पसरल मिथिलावासी गर्वित छथि.

पुरस्कारक घोषणा सं प्रसन्न डॉ़ झा कहलनि जे ई सम्मान मात्र हुनक नहि, अपितु प्रत्येक मिथिलावासीक अछि. ओ कहलनि जे ई पुरस्कार सब मिथिलावासीक मेहनत आ अपन सांस्कृतिक पहिचान कें पुनर्जीवित करबाक प्रयासक प्रतिफल अछि. ओ कहलनि जे पुरस्कार सं जवाबदेही बेस बढि जाइत छै.

ज्ञात हो जे डॉ. झा केर मिथिलालोक फाउंडेशन विगत कुछ साल सं 'पाग बचाउ अभियान' देशभरि मे चला रहल अछि. एहि अभियान सं एखन धरि लगभग एक करोड़ सं बेसी लोक जुड़ल छथि. 

डॉ. बीरबल झा केर जन्म मधुबनीक एक सुदूर गाम मे 22 जनवरी 1972 कें एक अत्यंत गरीब परिवार मे भेल छलनि. बीरबल जखन एक सालक छलाह, तखने हुनक पिताक देहांत भ' गेलनि. हुनक माय जयपुरा देवी खेत मे काज क' अपन बच्चा सबहक लालन-पालन केलनि. डॉ. झा नेनहि सं संघर्ष केने छथि. हुनक प्रारंभिक शिक्षा गामक सरकारी स्कूल सं भेलनि. तकर बाद आगूक शिक्षा लेल ओ पटना अएलाह. पटना विश्वविद्यालय सं ओ पीएचडी केलनि. ओ देश मे अंग्रेजी प्रशिक्षण संस्थान ब्रिटिश लिंग्वाक माध्यम सं फराक पहिचान बनओलनि. 

डॉ. झा केर कहब छनि, 'शिक्षा एकमात्र एहन हथियार अछि, जे मानव जीवन संग्राम मे सफल बना सकैए. शिक्षा कें वैल्यू एडेड होएबाक आवश्यकता छै.' डॉ. झा बिहार सरकारक संग मिलि 3० हजार सं बेसी महादलित कें स्पोकेन इंग्लिश स्किल केर प्रशिक्षण द' जीवन मे आगू बढबा मे मदति केलनि अछि. ओ अंग्रेजी एवं व्यक्तित्व विकास पर दर्जनो किताब लिखने छथि.

MithiMedia 4 September 2017
जओं आंखि सं हम नोर बहबितहुं: अजीत झा केर गीत शिवानीक स्वर मे!

अजीत झा एखन मैथिली लेखन मे डेग रखलनि अछि कि ओ सोशल मीडिया पर बेस चर्चा बटोरि रहल छथि. हुनक पछिला वीडियो 'हे यौ पहुना' एक लाख सं बेसी बेर देखल गेल अछि. मैथिली कविता ओ गीतक म्यूजिक रहित वीडियो मे सं ई पहिल वीडियो अछि एतेक रास बेर देखल गेल अछि.

ज्ञात हो जे उक्त वीडियो सेहो शिवानी झा केर स्वर मे छलनि आ गीत अजीत झा केर लिखल छलनि.

प्रस्तुत वीडियो एक ऑडियो/वीडियो सीरीजक पहिल खेप अछि जे अजीत झा लिखित ओ शिवानी झा केर स्वर मे 'मिथिमीडिया यूट्यूब' चैनल पर रिलीज कएल जाएत.

'जओं आंखि सं हम नोर बहबितहुं' गीत शिवानी झाक स्वर मे एतय सुनू:



मिथिमीडिया केर YouTube चैनल Subscribe करी. 

MithiMedia 3 September 2017
'डाक टिकट पर पाग सजल' गीत लोकक ठोर चढ़ल

'डाक टिकट पर पाग सजल' गीत आइ-काल्हि लोकक ठोर पर अछि. एहि गीत कें मिथिलाक पारंपरिक लोक गायक मानवर्धन कंठ अपन स्वर सं सजओने छथि.  एहि गीतक माध्यम सं मिथिलावासी लोकनिक हर्ष आ भावना कें देखोल गेल अछि, संगहि सरकारक प्रति आभार व्यक्त कएल गेल अछि. ज्ञात हो जे ई गीत मिथिलालोक फांउडेशन द्वारा सोशल मीडिया पर जारी कएल गेल अछि. मिथिलाक पाग कें डाक टिकट पर स्थान भेत्लाक बाद ई गीत जारी कएल गेल, जकरा खूब देखल-सुनल जा रहल अछि.

गायक मानवर्धन कंठ कहलनि जे मिथिलालोक फांउडेशनक अथक प्रयास सं मिथिला पाग कें राष्ट्रीय पहिचान भेटल अछि, जाहि सं देश-विदेश मे पाग पर चर्चा होमय लागल अछि. ओ कहलनि जे मिथिलाक सभ्यता-संस्कृति माछ, मखान और पान अछि मुदा मिथिलाक सांस्कृतिक प्रतिक चिन्ह पाग अछि.

ज्ञातव्य अछि जे मिथिलालोक फाउंडेशन किछु साल सं मिथिलाक समाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान हेतु  'पाग बचाउ अभियान' राष्ट्रीय स्तर पर चला रहल अछि. एहि अभियान सं देश-विदेश मे पसरल एक करोड़ सं बेसी मैथिल जुड़ल छथि. फलतः सरकारक धियान एहि दिस गेल आ डाक टिकट जारी कएल गेल. मिथिलालोक फांउडेशन दिस सं दिल्ली आ बिहार मे पाग मार्च निकालल गेल छल. एकर संगहि दिल्ली सं देवघर धरि सैकड़ो पाग कावरियां गेल छल. एम्हर आबि क' पागक उपयोग बढल अछि आ लोक पाग पहिरब बेसी क' देलनि अछि. एतेक धरि भेल जे आब विधायक लोकनि विधानसभा मे पाग पहिरि क' पहुंचलाह. केन्द्र सरकार पाग टिकट जारी क' मिथिलाक एहि पहिचान कें सम्मानित केलक अछि.


मिथिलालोक फाउंडेशनक चेरयमैन डॉ. बीरबल झा केर कहब छनि जे मिथिलालोकक तहति चलि रहल कार्यक्रम 'पाग बचाउ अभियान' सं प्रवासी मैथिल कें सेहो हुनक मूल संस्कृति सं जोड़बाक प्रयास कएल जा रहल अछि, जाहि सं देशक संस्कृति मजगूत होयत, संगहि समाजिक समरसता एवं अर्थव्यवस्था पर अपेक्षित प्रभाव पड़त. 

डॉ. झा कहलनि जे मिथिलालोक प्रवासी एवं स्थानीय मैथिल सबहक बीच सेतुक काज क' रहल अछि. पाग मिथिला सभ जाति, समुदाय केर पहिचान अछि. ई मिथिला संस्कृतिक प्रतीक अछि. संगहि ओ समस्त मिथिलावासी सं पत्राचार मे पाग डाक टिकटक प्रयोग करबाक अपील केलनि, जीहि सं एहि प्रतीक कें बेसी बढ़ावा भेटि सकतै.

MithiMedia 28 August 2017
चलू संगे किछु डेग जे वेब पर मैथिली कें बेहतरी दिस ल' जाएत...


मिथिमीडिया 5 वर्ष पूरा क' लेलक अछि. एकरा जियओने राखब एकटा बड़का चुनौती रहल अछि, धरि एतेक रास्ता तय केलक अछि से हमरा लोकनि कें आत्मिक खुशी भ' रहल अछि.

मैथिली मे काज करैत लगभग 13 साल भेल अछि, मिथिमीडिया पर 5 साल, मुदा कोना चलैए, कोना चलत पुछनिहार एकदम कम छै. जें कि एकर आगूक यात्रा बिनु सहयोग-समर्थन कें मोश्किल छै, एक अपील क' रहल छी. 

मिथिमीडिया कें जियओने रखबा लेल सालक लगभग 1 लाख टाका खर्चा छै. एतेक खर्च मे दैनिक 1-2 पोस्ट आ सोशल मीडिया एक्टिविटी संभव भ' सकैत छै. खर्चक भरपाइ लेल मिथिमीडिया पर विज्ञापन वा पार्टनरशिपक माध्यम सं मदति करबाक बाट खुजल अछि.

विशेष जनतब एतय देल अछि:

1. मिथिमीडिया कम सं कम 1000 टाका मोलक विज्ञापन स्वीकार करैत अछि जे मास भरिक लेल वेब पर रहैत अछि, यएह साल भरिक लेल 10000 टाका मे देखाओल जाइत अछि.

2. मिथिमीडिया संस्था ओ कार्यक्रमक एकबेरक न्यूज कवरेज ओ प्रमोशन (MithiEvents) कम सं कम 1000 टाका ओ एकसंग सालाना अनुबंध भेने 10000 टाका लेबाक प्रावधान रखने अछि. साल मे 12 कार्यकम सं बेसी भेने फराक चार्ज लागि सकैत अछि.

3. मिथिमीडिया 'बुक प्रमोशन' (MithiBooks) करैत अछि जाहि अंतर्गत 1 किताबक प्रमोशन वेब और सोशल मीडिया पर करैत अछि. बुक लांचिंग केर कवरेज ओ लेखक इंटरव्यू करैत अछि. एहू सेवा लेल कम सं कम 1000 टाका चार्ज कएल जाइ छै.

4. मिथिमीडिया प्रायोजित पोस्ट सेहो देबाक प्रावधान रखने अछि, जाहि लेल कम सं कम 1000 टाका देने प्रोडक्ट, संस्था, अभियान ओ व्यक्तिक प्रमोशन पोस्ट ओ सोशल मीडिया माध्यम सं कएल जाइत अछि. एहन तरहक पोस्ट #Sponsored रूप मे चिन्हित रहैत अछि.

5. मिथिमीडियाक काज पसंद भेने ओ सहयोगक इच्छा भेने सीधे डोनेट क' सेहो एकरा मदति कएल जा सकैत अछि.

कोनो तरहक विज्ञापन/पार्टनरशिप लेल सोझे mithimedia@gmail.com पर मेल पठाबी.

चलू संगे किछु डेग जे वेब पर मैथिली कें बेहतरी दिस ल' जाएत. जय मैथिली!

MithiMedia 24 August 2017
चेतना समारोह मे मैथिली-मिथिलाकर्मीक भेल जुटानी

स्वाधीनता दिवसक अवसर पर महानगर कलकत्ताक उपनगरीय क्षेत्र रिषड़ा मे 'चेतना समारोह' आयोजित कएल गेल. मिथिला नव-चेतना समिति द्वारा नओम स्थापना दिवसक अवसर पर आयोजित एहि समारोह में संस्थाक सदस्य लोकनिक अतिरिक्त लेखक-कवि लोकनि ओ मिथिलाक कार्यकर्ता लोकनि नीक संख्या मे उपस्थित छलाह.


कार्यक्रमक आयोजन रिषड़ा रेलवे स्टेशन सं सटल 'रूपसी बांग्ला' सभागार मे भेल. एहि अवसर पर वार्षिक स्मारिका मिथिला नव-चेतना विमोचित भेल. संस्था दिस सं नव कार्यकारिणीक औपचारिक घोषणा कएल गेल. ज्ञात हो जे साल दिन पर एहि संस्थाक कार्यकारिणी अवश्यमेव बदलल जाइत रहल अछि.


कार्यक्रम मे साहित्यिक रामलोचन ठाकुर, नवीन चौधरी, लक्ष्मण झा सागर सहित वरिष्ठ मिथिला अभियानी कमलेश झा ओ रत्नेश्वर झा अपन उदगार व्यक्त केलनि. ओ लोकनि भाषा-साहित्य ओ क्षेत्रक जनचेतना सं जुड़ल पक्ष पर इजोत देलनि. 


मिथिमीडिया संपादक रूपेश त्योंथ वेब सेवाक 5 साल पूर्ण होएबा पर उपस्थित मैथिल लोकनि सं एहि माध्यमक संग जुड़बाक ओ सहयोग-समर्थनक आह्वान केलनि. ओ कहलनि जे आब युग स्मार्ट भेल गेल छै आ ऑनलाइन माध्यम बेस प्रभावी भेलैक अछि. पारंपरिक मीडिया संग ऑनलाइन मीडियाक इस्तेमाल समयक मांग छै.


उक्त सत्रक संचालन रंजीत कुमार झा 'पप्पू' केलनि. वक्ता कें आमंत्रित करबाक अपन अलग अंदाज सं ओ उपस्थित मैथिल लोकनि कें मंच सं जोड़ने रहलाह.


अंतिम सत्र मे कवि सम्मलेन आयोजित छल, जाकर सञ्चालन गंगा झा ओ अध्यक्षता लक्ष्मण झा सागर केलनि. कवि सम्मलेन मे उमाकान्त झा बक्शी, नबोनारायण मिश्र, गंगा झा, बिनय भूषण, मिथिलेश कुमार झा, आमोद कुमार झा, रंजीत कुमार झा 'पप्पू', विजय इस्सर, लक्ष्मण झा सागर ओ रूपेश त्योंथ कविता पाठ केलनि. 

बता दी जे मिथिमीडिया एहि कार्यक्रमक ऑनलाइन मीडिया पार्टनर छल.

#MithiEvents

MithiMedia 19 August 2017

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