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डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी पर संगोष्ठी

नव दिल्ली: आइ मिथिला राज्य आंदोलनक आधारस्तंभ डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी दिवस पर 5 सितंबर कें मिथिला चौक, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली मे एकटा संगोष्ठीक आयोजन कएल गेल। संगोष्ठीक विषय छल ‘‘लखनजी : व्यक्तित्व ओ कृतित्व।’’ कार्यक्रमक अध्यक्षता अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक प्रो. अमरेंद्र झा, संचालन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक वरिष्ठ अभियानी श्री शरत झा, मुख्य वक्ता विश्व मैथिल संघक अध्यक्ष श्री हेमंत झा एवं धन्यवाद ज्ञापन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कोषाध्यक्ष श्री संजीव सिन्हा कएलनि। सब मैथिल अभियानी लखनजीक चित्र पर पुष्पांजलि कए क’ हुनका नमन कएलनि।

कार्यक्रमक प्रारंभ मे लखनजीक विस्तृत परिचय लेल वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री मनोज झा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘लक्ष्मण झा’ सं हुनकर व्यक्तित्व पर आ अ.भा. मिथिला पार्टीक युवा नेता श्री रोहित यादव लखनजीक कृतित्व पर पाठ पढ़ि’क सुनौलनि। कार्यक्रम मे लखनजीक संक्षिप्त परिचय पर केंद्रित एकटा परचा सेहो वितरित कएल गेल।

संगोष्ठी मे विभिन्न संगठन सं जुड़ल पदाधिकारी लोकनि अपन विचार रखलनि। जाहि मे मैथिली साहित्य महासभाक उपाध्यक्ष श्रीमती बबीता झा, आप पार्टीक पूर्वांचल शक्ति संयोजक श्री नीरज पाठक, मैथिलीजिंदाबाद पाक्षिक पत्रिकाक संपादन सहयोगी श्री हरिशंकर तिवारी, अ. भा. मिथिला पार्टीक नेता श्री बीरबल यादव, मिथिला राज्य संघर्ष समितिक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शैलेंद्र झा, मैथिली साहित्य महासभाक सचिव श्री कंत शरण, वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री प्रसून झा एवं मैथिल मंचक पदाधिकारी श्री मणि भूषणजी राजूक संबोधन उल्लेखनीय अछि।

वक्ता सब एक स्वर मे लखनजी कें प्रखर मैथिल अभियानी आ उच्च कोटिक विद्वान बतबति कहलनि जे ओ ‘सादा जीवन-उच्च विचार’क प्रतिमूर्ति आ महान् त्यागी एवं सारस्वत साधक छलाह। ओ मिथिला प्रांतक निर्माण आ मातृभाषा मैथिलीक उत्थानक लेल जीवनपर्यंत संघर्षशील रहलाह। लंदन विश्वविद्यालय सं ‘मिथिला एंड मगध’ पर पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त क’ कैंब्रिज तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय मे अध्यापन कार्यक लेल निमंत्रण कें छोड़ि ओ मिथिला उत्थानक लेल आपस अएलाह। लखनजीक मिथिला ओ मैथिलीक संबंध मे 15 गोट पोथी मैथिली, हिंदी, संस्कृत आ अंगरेजी मे प्रकाशित छनि। एकर अतिरिक्त अंगरेजी मे 28, संस्कृत मे 7, मैथिली मे 6 आ हिंदी मे 10 गोट पोथीक पांडुलिपि सुरक्षित राखल छनि।

वक्ता सब एहि बात पर जोर दैत कहलनि जे सब मैथिल संगठन मिलि क’ मिथिला राज्य निर्माणक सपना साकार करय, इएह लखनजी कें वास्तविक श्रद्धांजलि होएत।

मिथिमीडिया — MithiMedia 6 September 2016
मैथिली फिल्म 'राखी के लाज' केर ट्रेलर रिलीज

मैथिली फिल्म दर्शक लेल खुशखबरी अछि. नरेश मंडल केर मैथिली फिल्म 'राखी के लाज' शीघ्र रिलीज भ' रहल अछि. पारिवारिक विषय-वस्तु पर बनल एहि फिल्म केर ट्रेलर रिलीज भ' गेल अछि. 

प्रोड्यूशर सुरेश मंडल केर ई फिल्म आनंद फिल्म प्रोडक्शन हाउस केर बैनर मे बनल अछि. फिल्म राम रसीला, आशुतोष सागर, नरेश मंडल, मंजुश्री दुबे आदि कलाकार सं सजल अछि.

मिथिमीडिया — MithiMedia 22 August 2016
युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (4)

एम्हर हमरा लोकनि होटल विदा भेलहुँ, ओम्हर मेघ सेहो घरमुँहा भेल. बरखाक आशंका निर्मूल साबित भेल. फ्लैग सेरेमनी छोड़ि कऽ अयबाक हमरा लोकनिक पश्चातापक आगिसँ प्रायः टेम्पूक ड्राइवरक हृदय पघिल गेलैक. ओ बिनु पुछनहि-आछने अपन गाड़ी अगरतलाक हेरिटेज पार्कक मुँहपर ठाढ़ करैत बाजल- ई पार्क घुमि लिअह, सभ किछु देख लेब. हम जाइत छी. अहाँ लोकनिक होटल एतयसँ मात्र पाँच मिनटक दूरी पर अछि. पयरहि चल जा सकैत छी.

हमरा लोकनि यंत्रवत् ओकर अनुदेशक पालन कयल. टिकट कटाय पार्कमे प्रवेश कयल प्राकृतिक सुषमा सम्पन्न ई पार्क वस्तुतः समस्त त्रिपुराक प्रतिबिम्ब अपना आँचरमे नुकओने छल. एतय राज्यक सभ प्रमुख पर्यटन स्थलक रिप्लिका निर्मित छैक. पार्क घुमैत-घुमैत बेस थाकि गेल रही हम सभ. मुदा मुखमण्डलपर ठेहीक बदला संतोषक भाव छल जे नहि असल तँ डुप्लीकेट तँ देखलहुँ!

साढे सात बजेसँ डिनर टेबुल सभपर चहल-पहल बढ़य लागल रहैक भरि दिनुका थाकल-ठेहिआयल हमहूँ विचार कयलहुँ जे सवेर-सकाल भोजन कए आराम करब. आठ बजे भोजनोपरान्त, रिसेप्सनक सोझाँमे बनाओल बैसकीपर बैसि अखबार उनटाबय लगलहुँ. हमरा ओतय बैसल देखि किछु जिज्ञासु साहित्यकार सभ सेहो आस-पासमे एकाएकी जुमय लगलाह. नओ बजैत-बजैत बेस जमघट लागि गेल रहैक. करीब पन्द्रहो भाषाक प्रतिनिधि ओतय बैसल रहथि. क्रमशः वातावरणसँ औपचारिकताक धोन्हि छँटय लागल. परिचय-पातसँ प्रारम्भ भेल सम्वाद, आत्मीयताकेँ अंगीकार करय लागल. दस बजैत-बजैत हँसी-मजाक, गप-ठहक्का आ गीत-नाद चारूकात अनुगुंजित होमय लगलैक. फेर तँ सुतलाहा सभ सेहो उठि-उठि अबैत गेलाह. गोलमे सन्हिआइत गेलाह. करीब अढ़ाइ बजे भोरबामे जखन बैसकी उसरल तँ “विभिन्न भाषाक प्रतिनिधि युवा साहित्यकार” सभ “भारतीय भाषाक युवा-साहित्यकार” बनि चुकल छलाह. गुजरातीक राम मोरी, सिन्धीक रेखा पोहानी, अंग्रेजीक आशिया जहूर, कोंकणीक गोरक सिरसत, बंगलाक प्रशान्त सरकार, नेपालीक पवित्र लामा, ओड़ियाक ज्ञानी देवाशीष मिश्रा, कश्मीरीक साबिर मागामी ओ कतिपय अन्यान्य भाषाक साहित्यकार हमर अभिन्न बनि गेल छलाह.

अगिला दिन 12.30सँ हमरा लोकनिक काव्यपाठक सत्र निर्धारित छल. असमिया, बोडो, बांगला, चकमा, मणिपुरी, मोग, नेपाली, पंजाबी आ सिन्धी भाषाक कविलोकनिक संग हमरा कविता-पाठ करबाक छल. बंगला कवि कल्याण गुप्ताक अध्यक्षतामे सत्र आरम्भ भेल. एक-एक कऽ कवि लोकनि कविता पढ़य लगलाह. भाषासँ अपरिचितो श्रोता-समाज भावक सूत्र धरबामे समर्थ छलाह. भाव-सम्प्रेषणीयताक बाटमे जँ कोनो बाधा अबैत छल तँ तकरा अनुवाद दूर करैत छल. हॉल थपड़ीसँ बेर-बेर अनुगुंजित होइत रहल. प्रायः सभ भाषाक कविता सुनलाक बाद हमरा गौरवबोध भेल जे समकालीन मैथिली कविता कोनो भाषाक समकालीन कवितासँ झूस नहि अछि.


सत्र-समापनक पश्चात भोजनोपरान्त सभ दहोदिस छिड़िया गेलाह. किओ होटलमे अराम करय गेलाह तँ किओ अगरतला भ्रमणपर बहरेलाह. हमरा आ शालूकेँ आइ फेर भारत-बंगलादेश बॉर्डरपर जयबाक छल. फ्लैग-सेरेमनी नहि देखि सकबाक क्षतिपुर्तीमे, आ ताहूसँ बेसी सीमा-सुरक्षाबलकेँ पुनः अयबाक देल वचनपूर्तिक लेल. आइ एहि यात्रामे राम, गोरक, आशिया, रेखा आ संस्कृत कवि हेमचन्द सेहो हमरा लोकनिक संग देलनि. उत्तराखण्डमे हेमचन्दक कएट टा ने गुरु मैथिल छथिन्ह आ हुनका सभक मुँहे ओ मैथिली सुनैत रहैत छथि तेँ हुनका हमर कविता बुझबामे कोनो भाङ्गठ नहि भेलनि से बड़ उत्साहपूर्वक जनौलनि. जे किओ बाघा-वॉर्डरक फ्लैग-सेरेमनी देखने छलथि हुनका लोकनिक लेल ई कोनो कुतूहल नहि छल मुदा हमरा लेल ई निश्चये अत्यंत कौतुकक विषय छल. सेरेमनीक बाद 'भारत माताक जय' कहबा काल जे स्वाभिमान-बोध भेल से वर्ण्य नहि. माटिसँ मनुक्खक सम्बंध कदाचित् एहने क्षण सभमे सोझराइत छैक.

आइ साढ़े आठ बजे सभ किओ डिनर हेतु पहुँचि गेल छलाह. भोजनोपरान्त किछुकाल हँसी-ठट्ठा आइयो चललै मुदा, बेर-बेर आगत वियोगक पीड़ा ओकरा मलिन करैत रहल. सभ किओ सम्पर्क-सूत्रक आदान-प्रदानक संग एक-दोसरासँ भविष्यहुमे सम्पर्कमे बनल रहबाक आश्वस्ति देमय लगलाह. मुँहपर मुसकी आ आँखिमे वियोगी भाव लेने सब अपन-अपन कमरा दिस विदा भेलाह. कन्नड़ कवि चिदानन्द शाली, मलयालम कवियत्री आर्याम्बिका, हिन्दी कवियत्री अर्चना भैसारे आ ओड़िया कथाकार आइपीएस देवाशीष पाणिग्रहीक सानिध्य एहि यात्राकेँ आरो उपलब्धिपूर्ण बनौलक. भाषा- साहित्य ओ कला ठिक्के लोककेँ जोड़ैत छैक!! (समाप्त)

— चंदनकुमार झा 

मिथिमीडिया — MithiMedia 21 August 2016
प्रेममोहन कें बाल साहित्य ओ दीपनारायण कें युवा पुरस्कार

नवदिल्ली: एहि बरख मैथिली मे साहित्य अकादेमी दिस सं बाल साहित्य पुरस्कार लेल प्रेममोहन मिश्र केर 'भारत भाग्य विधाता' जीवनी लेल चयन कएल गेल अछि. चयन समिति मे डा. अमरनाथ झा, प्रो. भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता एवं डा. महेंद्र नारायण राम छलाह.  

युवा पुरस्कार लेल दीपनारायण विद्यार्थी केर 'जे कहि नहि सकलहुँ' कें चुनल गेल अछि. विज्ञप्तिक अनुसार चयन समिति मे डॉ बासुकी नाथ झा, डॉ रामनरेश सिंह ओ डॉ शंभुनाथ मिश्र छलाह.

मिथिमीडिया — MithiMedia 19 June 2016
वीरेन्द्र मल्लिकक सम्मान मे जुटलाह मैथिलीसेवी

कलकत्ता: वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र मल्लिकक सम्मान मे एक कार्यक्रम अायोजित भेल. पछिला रविदिन माने बारह जूनकेँ कलकतिया मैथिल साहित्यकार आ साहित्यप्रेमी पैघ संख्या मे वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र मल्लिकक संतोषपुर स्थित निवासस्थान पर जुटलाह.

लगभग छह दशक सं कलकत्ता रहैत भाषासेवा मे लागल वीरेन्द्र मल्लिक किछु समय सं दिल्ली रहैत छथि कलकत्ता स्थायी रूपें नहि रहताह जानि साहित्यिक लोकनि हुनक अावास पर जुटि एहि छह दशकक क्रियाकलाप ओ वीरेन्द्र मल्लिकक भूमिका पर चर्च केलनि.

एहि अवसर पर राजनंदनलाल दास, रामलोचन ठाकुर, नवीन चौधरी, विद्यानंद झा, अशोक झा, लक्ष्मण झा सागर, बिनय भूषण, मिथिलेश कुमार झा सहित सभ खाढ़ीक मैथिली साहित्यकार लोकनि जुटल छलाह. नवीन चौधरीक अध्यक्षता मे एक कवि गोष्ठी सेहो अायोजित भेल. 

फोटो: साभार विद्यानंद झा 

मिथिमीडिया — MithiMedia
मैथिलीसेवी कुमरकांत झा कें पत्नीशोक

कलकत्ता : कर्णामृतक अाजीवन सदस्य, अनेकानेक सामाजिक संस्था सं जुड़ित राघोपुर-बलाट (मधुबनी) निवासी सुपरिचित मैथिलीसेवी कुमरकांत झाक धर्मपत्नी विभा झा कें हृदयगति रुकि गेलाक कारणें 11 जून 2016 कें कोलकाता स्थित लेकरोड अावास पर असामयिक निधन भ' गेलनि. ओ धर्मपरायण महिला मात्र 49 बरखक अायु मे अपन भरल-पूरल परिवार छोड़ि गेलीह अछि.

उक्त अवसर पर उपस्थित कोकिल मंच कोलकाताक नबोनारायण मिश्र दिबंगत अात्माक शांतिक कामना करैत हुनक शोकाकुल परिवारक प्रति संवेदना प्रकट केलनि.

मिथिमीडिया — MithiMedia
युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (3)

हमरा बड़ मोन छल जे उनाकोटि देखि आबी मुदा, ताहि लेल समय हाथ मे नहि छल. स्थानीय लोक सब कहलनि जे उनाकोटि जयबाक लेल पूरा एकदिन समय हाथ मे रहबाक चाही. अगरतला सँ अबैत-जाइत छओ सँ आठ घण्टाक यात्रा. अपनहुँ बूझल छल जे ओतय चारिये बजे साँझ पड़ि जाइत छैक, कारण चारू कात उँच-ऊँच पहाड़ सँ बेढ़ल अछि ई स्थान. डॉ. शालू आ हम अंततः दूटा स्थान घुमबाक नेयार कयलहुँ- नीर महल आ त्रिपुर सुन्दरी मंदिर. होटलक एकटा कर्मचारी एकटा गाड़ी ठीक कऽ देलनि. योजनानुसार हमरा लोकनि केँ उद्घाटन सत्रक बाद टूर पर निकलबाक छल आ राति आठ बजे धरि होटल घुरबाक छल.

युवा लेखक महोत्सवक उद्घाटन सत्र चलि रहल छल. दर्शक लोकनि बेस ध्यानस्थ भऽ भाषण सुनि रहल छलाह. हमर नजरि कखनो मंचपर तँ कखनो दर्शक मे बौआइत छल. शालू बेरि-बेरि घड़ी दिस ताकथि. हुनका शाइत उद्घाटन सत्र समाप्तिक प्रतीक्षा छल. पूर्वोत्तर भारतक प्राकृतिक सौन्दर्यक परिदर्शनक उत्कंठा हमरो भीतर कछमच्छी पैसाइये देने छल. मुदा, हमरा लोकनि पूर्वोत्तरक प्रकृति सँ परिचय पयबाक लेल बहराइ ताहि सँ पूर्वहि प्रकृतिक दूत बनि हमरा लोकनि सँ भेंट करबा निमित्त मेघखण्ड आबि जुमलाह. बिजलौका चमकय लागल. मेघक सिंहगर्जना सँ भयभीत भगतसिंह युवा ऑडिटोरियमक खिड़कीक पल्ला सभ काँपय लागल. झमाझम वर्षाक सेलार संग नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरीक दर्शनक हमरा लोकनिक योजना भासय लागल. अयनाक बिना अपन मुँखाकृति तँ किओ नहि देखि पबैए मुदा, शालूक मुँह पर हमरा चिन्ता आ तामसक रेह स्पष्ट नजरि आबि रहल छल.


उद्घाटन सत्र समाप्त भेल. हॉलसँ बहराय किओ बुक-स्टॉल दिस पड़यलाह तँ किओ लंचक इन्तजामक टोह लेबय लगलाह। तावत् मंच सँ व्यवस्थापक दिस सँ घोषणा भेल जे लंच मे दस मिनट आर देरी छैक. आब हॉलक बाहर सब अपना-अपना हिसाबे छोट-छोट गोल मे तितिर-बितिर भऽ गेल छल. किछु गोटे बुक-स्टॉल पर पोथी बेसाहय मे व्यस्त छलाह. बंगला पोथीक प्रति कीननिहार मे विशेष आग्रह बुझायल. मैथिली साहित्येतिहास सँ सम्बन्धित किछु अनुदित पोथी सेहो एकात मे अवडेरल पड़ल छल.

एहि बीच हमरा असमिया कथाकार कंजलोचन पाठक सँ परिचय भेल. पाठक जी केन्द्रिय विद्यालय मे प्रिंसिपल छथि मुदा, ताहि सँ विपरीत हुनक बात-व्यवहार मे बाल-सुलभ चाञ्चल्य सहज परिलक्षित भेल. अगिला सत्र मे हिनका कथापाठ करबाक छलनि. सद्य: समाप्त सत्र मे कविता पाठ सेहो भेल छल जाहि मे अंग्रेजी कवियत्री आशिया जहूर आ उर्दू कवि डॉ. सूर्य बाली बड़ प्रभावित कयलनि. दुनू गोटे सँ सेहो एहि खाली समय मे परिचय-पात भेल. आशिया जहूर शोधार्थी छथि. कविता पढ़ैत काल अहंकारी बुझेलीह मुदा, गपशप भेला पर हिनक सरल-मृदु स्वभावक परिचय पाओल. डॉ. सूर्यबाली बहुमुखी प्रतिभाशाली छथि. इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज सँ एम.डी. केलाक बाद ई इग्नू सँ डीएचएचएम (डिप्लोमा इन हॉस्पिटल & हैल्थ मैनेजमेंट) आ यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लॉरिडा , यू॰एस॰ए सँ एमएचए (मास्टर ऑफ हैल्थ एड्मिनिसट्रेशन) कयलनि. फेर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज मे सह आचार्य एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारीक रूप मे अपन सेवा देलाक बाद सम्प्रति एम्स भोपाल मे कार्यरत छथि. फोर्ड फैलोशिप सहित अनेक सम्मान सँ सम्मानित छथि. चारिगोट कविता आ गजल संग्रह प्रकाशित छनि. देशी-विदेशी मंच पर मुशायरा मे लोकप्रिय भेल छथि. सर्वोपरि जे एकटा सहृदय साहित्यकार आ सूच्चा समाजसेवक छथि. डॉ. सूर्यबाली सँ गपशप करैत देखि विक्टर सेहो सहटि कऽ ओतय पहुँचि गेल रहथि. डॉ. बालीक व्यस्ततम दिनचर्या आ एतेक रास उपलब्धि जानि ओ हठात् पुछलथिन्ह- सूतय कखन छी?

- भोरबा मे, मात्र तीन घण्टा.

डॉ. सूर्यबालीक उत्तर पर विश्वास नहि भेल हमरा. कारण सामान्यतः इएह सुनैत छियैक जे कम सुतनिहार स्वभावतः खौंझाह भऽ जाइए. मुदा, हिनकर मुँह पर तँ सदिखन हँसिए पसरल रहैत छनि. फेर ओ महापुरुष सभ मोन पड़लाह जिनका सम्बन्ध मे सुनैत आयल छी जे ओहो लोकनि बड़ कम काल सुतैत छलाह. अपना मोन केँ बुझाओल जे हिनका अनिद्राक बेमारी नहि ‘स्वान-निद्रा'क लूरि छनि.


भोजन तैयार भऽ गेल छल. सभ किओ पंक्तिबद्ध भऽ अपन रुचिक अनुसार सामग्री लऽ टेबुल धरैत गेलाह. हम, शालू आ शालूक पिता एकटा टेबुल पर बैसलहुँ. लरगुज रोटी देखि शालूक पिता केँ भाँज नहि चललनि जे ई कथीक रोटी थिकैक? ओ जिज्ञासावश शालू दिस तकलनि. तावत् हम एक कओर मुँह मे धऽ देने रहियैक. हुनकर जिज्ञासा शान्त करैत कहलियनि- चाउरक रोटी थिक. ओ कोनो प्रतिक्रिया नहि देलनि. कोनो तरहेँ दू टा रोटी गिरलाह. बाहर बुनछेक भऽ गेल रहैक. हमरा सभक मोन मे एकबेर पुनः पर्यटनक आशा अँकुराय लागल छल. मुदा, समय बहुत हाथ सँ निकलि चुकल छल. गाड़ीबला सँ पुछारी कयल तँ कहलक जे आब नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरी दुनू देखब आइ सम्भव नहि होयत. कोनो एक जगह जा सकैत छी. विकराल समय केँ देखैत शालूक पिताजी सलाह देलनि जे अनभुआर जगह मे एतेक रिस्क लेब ठीक नहि. फेर योजना बनल जे अगरतला घुमल जाय. दोसर सत्रक बाद एकटा टेम्पू कय तीनू गोटे अगरतला घुमल.

सर्वप्रथम पहुँचलहुँ- गवर्मेंट संग्रहालय. ई संग्रहालय अगरतलाक प्रसिद्ध उज्जयंता महल मे बनल अछि. उज्यंता महल निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक द्वारा सन् 1899-1901 ई. मे कराओल गेल अछि. ई आलीशान महल 1 वर्गकिलोमीटर मे पसरल अछि. महलक सोझाँ मे मुगल गार्डेन जकाँ बगैचा सेहो बनाओल गेल छैक. संग्रहालय मे त्रिपुराक शासक लोकनिक तथा बौद्ध परम्परा सँ सम्बन्धित अनेक प्रस्तर मूर्ति ओ पुरातात्विक बस्तु-जातक प्रदर्शनी लगाओल गेल अछि. बंगला साहित्य ओ त्रिपुराक लोकजीवन सँ जुड़ल अनेक कला-कृति एतय देखल-परिचय पाओल.

संग्रहालय घुमलाक बाद गौडीय सम्प्रदायक जगन्नाथ मंदिर पहुँचलहुँ. मंदिर शताधिक वर्ष पुरान अछि. चारूकात नव-नव मन्दिर सेहो निर्मित छैक. मंदिर-प्रांगण मे साग-सब्जीक खेती सेहो खूब देखल. शाइत भगवान केँ अपनहि बाड़ीक उपजा भोग लगैत हेतनि. पट खुजबा मे देरी रहैक. तेँ दर्शन नहि भऽ सकल. हमरा लोकनि आब भारत-बंगलादेश बॉर्डर दिस विदा भऽ गेल रही.

अगरतलाक एहि बॉर्डर पर बेस अबरजात रहैत अछि. अगरतला-ढाका-कोलकाता बस सेवा सेहो एतय सँ गुजरैत छैक. तेँ सीमा-सुरक्षा बलक जवान सभ बेस मोस्तैद रहैत छथि. दुनू देशक बीच एहि क्षेत्र मे आब कोनो तेहन सीमा विवाद नहि छैक तेँ माहौल तनावपूर्ण नहि रहैत छैक. सीमा लोहाक टाट सँ बेढ़ल छैक. सुरक्षाबल केँ खाली तस्कर आ घुसपैठी पर नजरि रखबाक रहैत छनि.

साँझ पड़ल जा रहल छलैक. लोकक जुटानी सेहो बढ़ल जा रहल छलैक. सभ किओ संध्याकालीन फ्लैग-सेरेमनी देखबाक लेल आबि रहल छलथि. जवानक रिहर्सल चलि रहल छलैक. हमरा लोकनि एम्हर जवान सभ सँ गपशप मे बाझल रही. हुनका सभक आत्मीयता देखि गद्गद रही. तावत् मेघ पुनः अकास केँ घेरि लेने छलैक. हमरा सभ केँ हेरिटेज पार्क घूमब बाँकिए छल एखन. हम सभ अगिला दिन धरि फ्लैग-सेरेमनी देखबाक योजना स्थगित कयल आ सीमा सुरक्षा बलक जवान सभ सँ काल्हि पुनः अयबाक वचन दैत तत्काल विदा लेल. (क्रमशः)

— चंदनकुमार झा 

मिथिमीडिया — MithiMedia 18 June 2016
मैथिली लिटरेचर फेस्टीवल पर कलबल!

एमकी पटना हमरा नीक लागल. टीशन पर उतरि जखने बाहर एलहुँ कि एकटा हवाइबस उपर सं गेल जे हमर धियान आकर्षित केलक. तखने हनुमान मंदिरक घंटाक स्वर कान मे पड़ल. चंदनजी दतमनि पकड़ओबैत कहलनि, आब बेसी समय हाथ मे नै अछि. स्नान आदि क' सोझे सेशन ज्वाइन करय पड़त. ओ एतेक कहितथि कि बुद्धा पार्क लग सफइयति देखि आश्चर्य कि खुशी भ' रहल छल से तय नै क' पाबि रहल छलहुं. डेगा-डेगी दूरदर्शनक ठीक सामने यूथ हॉस्टल मे दाखिल भेलहुं. ता दतमनि भरकुस्सा भ' गेल छल. 

जेम्हरे नजरि जाए मैथिली एक्टिविस्ट, लेखक, कवि सभ देखबा मे आबथि. ओ जिनका सभ सं भेंट पत्र-पत्रिका मे होइ छल, से सभ साक्षात टहलैत, बुलैत, बतियाइत, खाइत देखबा मे अबथि. ई बस रोमांच जगा रहल छल कि चंदनजी नेने नेने एकटा कमरा मे ल' गेलाह जतय एकटा खाट रिक्त छल. ओही पर दुनू गोटे झोड़ा-झंटी धेलहुँ. बगल केर खाट पर रामलोचन ठाकुर हमरा दुनू कें देखि मंद मुस्कान छोड़ि रहल छलाह. हुनका बगल मे बैसल विनोद कुमार झा हमरा दुनू कें आयोजन दिस सं रिसीव केलनि, स्वागत जनओलनि.  

नहा-सुना क' रेडी भेले छलहुं कि चंदनजी केर बजाहटि भेलनि, सत्र संचालन हेतु. एकर बादेबला सत्र हमर संयोजन मे मैथिली सोशल मीडिया पर छल. हुनके संगे हमहूं सभा स्थल पर पहुंचि ऑडियंस मे बैसि गेलहुं. एक एकटा ऑडियंस सेलिब्रिटी. खन मंच पर ताकी खन ऑडियंस मे बैसल सेलिब्रिटी लोकनि कें ठेकियाबी. 

पहिल सत्र समापनक बाद अल्पविराम आ फेर सोशल मीडिया पर सत्र. कलकत्ता मे रहैत कतिपय साहित्यिक कार्यक्रम होस्ट करैत रहलहुं अछि से रेहल-खेहल छल. आ विषय सेहो भोगल-जीयल छल त' कोनो तेहन दिक्कत नै भेल. सत्र संचालन सं किछु काल पहिने हमर उमेर वा धुआ देखि संचालक मे सं एकटा नीक लोक हमरा बजा निजगुत केलनि जे हम क' सकब कि नै. तकर बादे मंच पर गेल छलहुं. 

सत्र समापनक बाद उपस्थित बुद्धिजीवी लोकनिक रिस्पांस हमरा आश्वस्त केलक जे सत्र अपेक्षा सं बेस नीक रहल. किछु गोटे कहथि, नीक तैयारी क' क' आएल छलहुं. कहनिहार मे सं बेसी लोक यएह कहलनि. असहजो लागि रहल छल आ सभ कें जवाबो देब संभव नै. हम मुसकिया देइत छलहुं. नीक लागल जे लोक खोजि-खोजि क' चाबस्सी देइत रहलाह आ ई सिलसिला दिनभरि चलल.

बिहार-पटना मे तैयारी बहुत बड़का फैक्टर होइ छै. भोज-भातक तैयारी, परीक्षाक तैयारी, इलेक्शनक तैयारी, मेला देखबा जाए लेल तैयारी, ई तैयारी, ओ तैयारी मने बिनु तैयारीक किछु संभव नै छै. तहिना आयोजनक तैयारी सेहो नीक आ व्यवस्थित रूप मे छल. जखन पॉजिटिव सोचक संग आगू बढ़बै त' बहुत किछु नीक होइ छै जे तैयारीमुक्त रहै छै. ई जरूरी नै छै जे जे किछु नीक घटित भेल अछि, ओहि मे तैयारी सन्हियाएल छै. बहुत किछु स्वाभाविक आ बिनु तैयारीक सेहो होइ छै. बस इंटेशन नीक हो, सोच पॉजिटिव हो.

पॉजिटिव सोचक संग पटनाक मैथिली साहित्यमेला उभरि क' आएल अछि आ एखन धरिक मात्र दू संस्करण मे नीक प्रभाव छोड़बा मे सफल रहल अछि. साहित्य मेलाक आयोजक सभ बेस अनुभवी लोक सभ छथि, वरिष्ठ लोक सभ छथि. पूरा कार्यक्रम तेना ने सजाओल रहैछ जेना साहित्यपुष्प केर कसगर गूँथल माला हो. साहित्यिक लोकनिक संगहि संग बुक स्टॉल, मिथिला पेंटिंगक स्टॉल सभ लगओनिहार लोकनि सभ सं सेहो गप्प भेल. मेला कें ल' ओ सभ सेहो संतुष्ट लगैत छलाह आ एकरा एक अवसर जानि प्रसन्न छलाह. बिक्रीक जे गति रहल हो, मेला सं सभ उमंग मे बुझाएल.

ई मेला एहि तरह कोनो आन मेला सं नीक अछि. उद्देश्य आ स्वरूप वैश्विक इवेंट केर छै. मैथिली मे एहन आयोजन सं साहित्यिक समुदाय आ मिथिला समाजक गौरव बढ़ल अछि. आवश्यकता छै एकरा जारी रखबाक, एकरा उन्नति पथ पर ल' जेबाक. आयोजक मैथिली लेखक संघ अछि आ आयोजन साहित्य पर अछि त' एकर स्वरूप आ संचालन उत्तम छै. किछु प्रबंधकीय बिंदु पर आयोजक लोकनि कें धियान देब आवश्यक छनि, जे एहि कार्यक्रम कें आगूक भविष्य तय करत.

आमलोकक भागीदारी:
कार्यक्रम साहित्य मेला छै, तैं साहित्यकारेटा जुटथि जरूरी नै. जाबे आम लोक जुड़त नै, भीड़ नै होएत. भीड़ नै होएत त' मेलाक पेंटिंग प्रदर्शनी, बुक स्टॉल आदि व्यवसाय नै क' सकत आ एहना मे लेखक-प्रकाशक, कलाकार केर रुचि घटत. मैथिली मे साहित्य साहित्यकारे मध्य घुरिया रहल अछि. लोक कें जोड़ब आवश्यक, सम्भवतः ई मेलाक मूल उद्देश्य अछि. लोक कोना जुटत एहि पर सोचब जरूरी.

युवाक सोझ भागीदारी:
पटना मे लगभग दर्जन भरि युवा साहित्य लेखन मे सक्रिय छथि. मुदा किनको सोझ भागीदारी नै बुझाएल. वरिष्ठ लोक सभ काउंटर सभ पर बैसल भेटलाह। एक-आध कें छोड़ि स्थानीय युवा साहित्यिक लोकनि उपस्थिति देबा लेल आएल छलाह. नवतुरियाक सही उपयोग करब आवश्यक छै. एही मे सं काल्हि भेने केओ मेला आयोजन मे महत्वपूर्ण भूमिका निमाहि सकैत अछि. आयोजनक भविष्य कें देखैत ई अत्यन्त आवश्यक बुझना गेल.

मीडिया प्रबंधन: 
कार्यक्रम राजधानी क्षेत्र मे आयोजित होइए आ ई राज्य लेल सेहो महत्वपूर्ण भ' जाइ छै. मीडिया कें समाद देनिहार कोनो चिन्हित लोक आ केंद्र होएबाक चाही. बहुत लोक कैमरा देखि अपन राग गबैत देखल गेलाह. भोरे अखबार सभ सेहो अनजान-सुनजान समाद छपइए जकर मुंह आ पेनी ताकब संभव नै लगैछ.

वित्तीय प्रबंध: 
एकटा विराट खर्चाबला कार्यक्रम अछि ई. आयोजक लोकनि कें वित्तीय व्यवस्था केना होइ छनि ताहि तह मे नै जा एतेक कहब जे चंदा जओं कोनो सरकारी-गैर सरकारी वैध स्रोत सं अबैत अछि त' सहज स्वीकार करबाक चाही. सत्र-सत्र केर प्रायोजक, बैनर, होर्डिंग, कैम्पस सभ ठामक व्यवस्था कॉर्पोरेट केर स्पांसरशिप मे हेबाक चाही. लेखक संघ कें सदस्य आ सदस्यता पर धियान द' कोष एकत्र करबाक चाही. एकटा सालभरि काज केनिहार वित्तीय टीम चाही जे एकर वित्तीय पक्ष पर काज करत. मौसमी रूपेँ सक्रिय भेने काज नै चलत. वित्त कार्यक्रमक धूरी होइ छै. 

मैथिली लेखक संघ कें अपना मे सेहो सुधार क' साहित्य मेलाक चिरजीविता लेल काज शुरू करबाक चाही. वर्तमान मे एहन प्रतिभा आ प्रभावी लोक सभ छथि जे मेला लेल समर्पित छथि मुदा व्यवस्था व्यक्ति आधारित नै हो ताहि दिशा मे काज हेबाक चाही. जय मैथिली!

— रूपेश त्योंथ 

मिथिमीडिया — MithiMedia 11 June 2016
युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (2)
मेघाच्छादित अगरतलाक अकास

विक्टर आ कृष्णमोहन कविता सुनैत-सुनैत बेस राति भऽ गेल छल. मुदा, सुनबा-सुनयबाक अतृप्ति दुहू-दिस बनले छल. विक्टरक कविता बेस परिपक्व। कम लिखैत छथि. मुदा जे लिखैत छथि से समधानल, किछु तेहने आभास भेल. हुनकर एक गोट कविता 'मुखा' (मुखौटा)क भाव एखनो आँखिक सोझाँ नचैए. कृष्णमोहन धुरझार लिखैत छथि. सभ तरहक लिखैत छथि. हुनकर दू-गोट कविता बड़ प्रभावी लागल. खासक' हुनक ओ कविता जाहि मे क्षेत्रीय अराजकता ओ अशांति सँ कनछी कटैत स्थानीय निवासी आस-पासक इलाका मे विस्थापित तँ होइए मुदा, सभतरि एकहि रंगताल पबैए आ थाकिकऽ सहसा बाजि उठैए-आब कतय जाउ? सामाजिक-राजनीतिक कैनवास पर सँ जखन 'व्यक्ति'क चित्र धोखड़ि जाइत छैक तँ प्रायः इएह परिस्थिति उपजैत छथि सभतरि.

सामान्यतः आठ बजे सँ पहिने हम नहि जगैत छी, मुदा ओहि दिन अबेर सँ सूतलाक बादहुँ छओ बजे आँखि फूजि गेल छल. अपरिचित ओछाओन कि अगरतलाक नैसर्गिक सौन्दर्य केँ भरि पोख निहारबाक उत्कंठा, कारण की छल से जानि नहि. ओछाओन सँ उठि खिड़की लग ठाढ़ भऽ गेलहुँ. अनुपम दृश्य! शहर निपत्ता छल. चारू कात मात्र हरियरी. अर्थशास्त्रक पन्ना मे भनहि एहि क्षेत्रक स्थान सभ सँ पछड़ल होइ मुदा, जीवनक लेल एतुका वातावरण मे अजस्र ऑक्सीजन सहज-सुलभ छैक. थोड़बे काल मे शांत-स्निग्ध भोर केँ मेघ सेहो अपन स्नेह सँ सराबोर करय लागल. हमर मोन जेना मोनेमोन चहकय लागल. होटल सँ बाहर आबि बरखाक आनन्द लेबय लगलहुँ…

नओ बाजि गेल रहैक. शहर सँ हमर परिचिति आब लगभग सत्रह घंटा पुरान भऽ चुकल छल. एहि बीच तीनटा साहित्यकार सेहो मित्र बनि चुकल छलाह. तहिना सभ प्रतिभागी लोकनि छोट-छोट मित्र-मण्डली तैयार कऽ चुकल छलाह. मुदा, वातावरण सँ एखनो औपचारिकताक धुन्ध छँटल नहि छलैक. अपरिचित लोकनि, परिचितिक लोभ मे दहोदिस मुसकी बिलहि रहल छलाह. छोट-छोट टोली ब्रेकफास्ट टेबुल पर बैसल छल. प्रायः सभ किओ एक-दोसराक भीतर झँकबाक-अँकबाक प्रयासरत छल.

बामसँ साहित्य अकादेमीक सचिव, के. श्रीनिवास राव, हम, असमिया साहित्यकार नागेन साइकिया आ बंगला साहित्यकार एवं त्रिपुराक पूर्वमंत्री ब्रजगोपाल राय.
एकाएक डाइनिंग हॉल मे उज्जर धोती-कु्र्ता पहिरने एकटा बुजुर्गक प्रवेश भेल आ हुनका देखितहिँ प्रायः पूर्वोत्तरक समस्त उपस्थित साहित्यकार हुनकर सम्मान मे ठाढ़ भऽ गेल छल. हमरा एतबा स्पष्ट छल जे किओ असाधारण व्यक्तित्व छथि. मुदा, हुनकर परिचय पयबाक जिज्ञासा भीतर मे हिलकोर मारय लागल. चारुकात अपन सौम्य मुसकी फेरैत, बुजुर्ग एकटा नमहर टेबुलपर बैसलाह. चारूकात पूर्वोत्तरक नवतूर छल. दृश्य अनमन ओहिना छल जेना कोनो भोजनक टेबुलपर एकटा सम्पूर्ण संभ्रान्त परिवार बैसल हो. ब्रेड-बटर संग चाह पीबि, बुजुर्ग अपन ब्रेकफास्ट समाप्त कयलनि. एही बीच आसपासक नवतुरियाक कतिपय जिज्ञासा केँ सेहो गंभीरतापूर्वक शांत कयलनि. मृदु मुसकान मुदा हुनकर मुँहक स्थायी भंगिमा छल. हुनका ओतय सँ विदा होइतहिँ हम सहटि कऽ विक्टर लग गेलहुँ, बुजुर्गक परिचिति पाबय.

-ई छथि प्रसिद्ध असमिया साहित्यकार डॉ.नगेन साइकिया.

विक्टरक स्वर मे गौरवानुभूति स्पष्टतः आभासित भेल. हम आगाँ किछु पुछियनि ताहि सँ पहिनहि विक्टर स्वतः हुनका संबंध मे जे मारिते रास गप जनौलनि ताहि मे किछु महत्वपूर्ण इएह जे सतहत्तर वर्षीय डॉ. साइकिया असमिया साहित्यक एकटा अत्यंत प्रतिष्ठत हस्ताक्षर छथि. शताधिक पोथी लिखने छथि. साहित्य अकादेमी समेत अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार सँ पुरस्कृत छथि. नब्बेक दशक मे राज्यसभाक सदस्य सेहो रहि चुकल छथि. पश्चात् उद्घाटन सत्र मे हिनक विद्वताक साक्षात् दर्शन सेहो भेल, अध्यक्षीय भाषण सुनैत काल. डॉ. नागेन साइकिया केँ सुनब हमरा लेल अत्यंत प्रेरणादायक छल.

साइकिया साहेब केँ देखि हमर दृष्टि मैथिलीक साहित्यांगन मे हुनकहि सन सरल-मृदुभाषी, नवतुरियाक पक्षधर, नवताक संपोषक, सुहृद, प्रबुद्ध ओ प्रतिष्ठित साहित्यकार केँ तकबा मे बाझि गेल छल. भक टूटल जखन शालू कौर टोकलीह. आब हम दुनू गोटे अगरतला आ आसपासक पर्यटनस्थल सभक भ्रमणक योजना बनबय मे बाझि गेल छलहुँ… (क्रमशः)

— चंदनकुमार झा

मिथिमीडिया — MithiMedia 9 June 2016
युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (1)
बाम भाग सँ बंगाली कवि प्रशान्त सरकार, असमिया कवि विक्टर राजकुमार आ मणिपुरी कवि ख.कृष्णमोहन सिंहक बीच मे हम.

विगत 28-29 मइ केँ अगरतला मे 'अखिल भारतीय युवा लेखक महोत्सव'क आयोजन भेल. आयोजक छल, साहित्य अकादेमी. एहि महोत्सव मे चौबीसो मान्यता प्राप्त भाषाक अलावे तीन गोट पूर्वोत्तर भारतक जनजातीय भाषा-कोकबोरॉक, चकमा आ मोग केँ सेहो प्रतिनिधित्व छल. सौभाग्यवश एहि खेप मैथिलीक प्रतिनिधित्व करबाक अवसर हमरहि भेटल.

विभिन्न भाषा-साहित्यक प्रतिनिधि समानधर्मा लोकनि सँ साक्षात्कारक उल्लास आ भारतीय भाषा-साहित्यक समकालीन गतिविधि केँ चिन्हबाक-जनबाक जिज्ञासाक संग जखन 27 मइ केँ प्रायः चारि बजे अपराह्न मे अगरतला एयरपोर्ट सँ बहरेलहुँ, तँ सभ सँ पहिने भेटलीह पंजाबीक प्रतिनिधि-डॉ. शालू कौर. औपचारिक अभिवादनक पश्चात दुनू गोटे गाड़ी मे बैसि होटल दिस विदा भेलहुँ. एयरपोर्ट सँ होटल धरिक करीब 7 किलोमीटरक यात्रा मे शालू जीक बहुमुखी प्रतिभाक परिचय पओलहुँ. जखन ओ स्नातक केर छात्रा छलीह तखनहि सेना मे लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्ति पओलनि. चारि वर्षक सेवाक बाद त्यागपत्र दए पुनः आगाँक अध्ययन मे जुटलीह. पंजाबी साहित्य मे पीजी कयलनि. पश्चात एम.फिल. आ पी.एच.डी.क उपाधि सेहो अर्जित कए, सम्प्रति दिल्ली विश्वविद्यालय मे अध्यापन करैत छथि. इहो जानल जे फैमिनिज्म आ सूफीज्म हुनक प्रिय विषय छनि, जकर प्रभाव पश्चात हुनकर कविता सभ मे सेहो पाओल. पंजाबी साहित्य मे सूफी परम्परा हुनक शोधक विषय सेहो छलनि. एकर अलावे शालू पिस्टल शूटिंग मे राष्ट्रीय स्तरक खेलाड़ी सेहो छथि. महत्वपूर्ण इहो जे शालू जे केलनि, पूरा मनोयोग सँ केलनि. सभ क्षेत्र मे प्रशंसनीय सफलता पओलनि. तकर प्रमाण देखल हुनकर मोबाइल मे-हुनका प्राप्त सोरहि सँ अधिक स्वर्ण-पदकक फोटो.

विक्टर राजकुमारक असमिया कविता केँ एकाग्रचित्त भऽ सुनैत मणिपुरी कवि ख.कृष्णमोहन सिंह

28 वर्षीया शालूक प्रतिभा-परिचय सँ मुग्ध भेल होटल पहुँचलहुँ. नियत स्थानपर डेरा खसाओल. संध्याकाल जखन डाइनिंग हॉल मे पैसलहुँ तँ ओतय परिचय भेल असमिया कवि विक्टर राजकुमार आ मणिपुरीसेवी- ख.कृष्णमोहन सिंहसँ. विक्टर मूलतः साफ्टवेयर इंजिनीयर छथि आ अपन कम्पनी चलबैत छथि. कृष्णमोहन एखन छात्रजीवने व्यतीत कए रहलाह अछि मुदा, भाषा-साहित्यकर्मीक रूपमे बेस ख्यातिलब्ध छथि। तीनू गोटे भोजन करैत रही, हठात् असमिया आ मणिपुरीक साहित्यिक गतिविधिक प्रति जिज्ञासा भेल आ दुनू गोटेसँ समवेत पुछलियनि- एकटा रचनाकारक रूप मे अहाँ लोकनि केँ अपन साहित्यक सभ सँ पैघ समस्या की अभरैत अछि? अपेक्षा छल जे उत्तर भेटत- पाठकक अभाव, प्रकाशकक अभाव, वितरण व्यवस्थाक अभाव...... तावत् कृष्णमोहन उत्तर देलनि- हमर सभक पाठकक अति-संवेदनशीलता। विक्टर सेहो समर्थनमे मूड़ी डोलौलनि. हमरा उत्तरक गंभीरता, कही तँ निहितार्थक भाँज नहि लागि रहल छल. भेल जेना प्रश्न टारबाक लेल किछु कहि देलनि अछि, मुदा विक्टरक सहमति हमरा अपनहि आशंका सँ असहमति करा रहल छल। पुनः हमर जिज्ञासा छल- कने विस्तारसँ कहू।
कृष्णमोहन अत्यंत पीड़ित स्वर मे कहय लगलाह- हम सभ अपन आस-पास जे देखैत छी, जे अनुभव करैत छी, जे भोगैत छी तकर यथावत् चित्रण अपन साहित्य मे नहि कए पबैत छी। कारण ई बात हमरा एतुका घोषित-अघोषित सत्ता केँ अखरैत छैक....

हम टोकलियनि- तकर माने जे ओ सब डेराइत अछि अहाँ लोकनिक कलमक बल सँ?

विक्टर स्पष्टीकरण दैत बजलाह- डेराइत तँ अछि सत्ते मुदा डेरायल देखाय नहि चाहैत अछि. अपन डर केँ नुकेबाक हेतु हमरा सभ केँ डेरबैत अछि. जँ हमरा लोकनि एहि सत्ता-व्यवस्थाक विरुद्ध कोनो बात लिखैत छी तँ चौबीस घण्टाक भीतर समाद भेटैत अछि-जँ खएर चाहैत छी तँ अपन रचनाक स्पष्टीकरण छापि मूल बात केँ काटू. अन्यथा तीन दिनक भीतर....!

बजैत-बजैत विक्टर रुकि गेलाह. हमरा लेल ओहि अव्यक्त अभिव्यक्तिक व्यक्त भाव केँ ठेकानब मोसकिल नहि छल. अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता पर कुठाराघातक संत्रास ओ अपन भुक्त-अनूभूत पीड़ाक अव्यक्त रहि जयबाक अतृप्ति आ टीस, एहि दुनू नवतुरिया साहित्यकारक मुँह पर स्पष्ट झलकि रहल छल. मुदा, हम वातावरणक गंभीरताक परिधि केँ फानि पहुँचि गेल रही अपन साहित्यांगन मे. एकाएक हमरा मुँह सँ बहराय गेल- अहाँ सभ अति-संवेदनशीलता सँ पीड़ित छी आ हम सभ असंवेदनशीलता सँ! हुनका लोकनि केँ हमर संकेत बुझबा मे भाङ्गठ नहि भेल रहनि. एकटा ठहक्का मुखरित भेल. हँसल हमहूँ रही. मुदा मनेमन ताहि सँ अधिक कानल रही अपनहि लोकक बीच अपन उपेक्षाक स्वर अकानि. अंतरात्मा सहसा बाजि उठल छल- हमरो गप पर किओ कान दितैक एहिना...!!!

वातावरण मे पुनः आत्मीयता आ उल्लासक प्रवेश भऽ गेल छल. डाइनिंग हॉल सँ बहराय हमहूं एहि दुनू कविक काव्यलोक मे फेर दुपहर रातिधरि विचरण करैत रहलहुँ. (क्रमशः)

— चंदनकुमार झा

मिथिमीडिया — MithiMedia 6 June 2016

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