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कवि विद्यानंद झा केर चर्चित कविता 'भरदुतिया'

भाइ आ बहिन
एक्के आमक दू कतरा
एक्के गाछक दू ठाढ़ि
एकहि मायक रक्त आ मज्जा सँ
बनलनि जिनकर शरीर
एक्के माय बापक डी एन ए सँ 
बनलनि जिनकर मन प्राण
एक्के माटि मे लोटेला जे सब
एक्के बसातक सिहकी लगलनि जिनका सबकेँ
एक्के बरखाक बुन्न जुड़ौलकन्हिं जिनका
खेलेला एक्के संग कनियाँ पुतरा
खेलनि एक्के संग आमक झक्का
देखलनि एक्के संग खड़होरिक पार
सीटी बजबैत ट्रेनकेँ
हेलला एक्के संग सेमार लागल पोखरि मे
कटलनि जाड़क राति एकेटा फटलाहा सीरक मे जे
भिजलाह चुबैत चार बला एक्के घर मे जे
भोगलन्हिं एक्के संग
कैकटा उत्सव आनंद
कैकटा अभाव अभियोग
लागनि जे एकगोटेँकेँ कुसोक कलेप
चँछा जानि दोसरक भरि मन भरि प्राण
भरि नेनपन मे।

एकटा समय एलै
बसलीह बहिन सासुर
देसनिकाला
बेदख़ली
गेली एहन ठाम लागि जाइत छलनि देसाँस जत'
लगै छलनि बसात 
लगै छलनि बरखा
अनभुआड़ अनचिन्हार
रहै छलीह सासुक कैद मे
ननदिक नजरि मे
सुपुतहु बनबाक चेष्टा मे अपस्याँत।

आर पानि बहलै कमलाजी बाटे
आर कैकटा दाही
आर कैक टा रौदी
बितलै
बितलाह ओ सब।

आब मन मे त' रहिते छलखिन्ह
मुदा जत' रहैत छला भाइ
ओतेक दूर त' समादो ल' जेबा मे
कौओ सब होइत छल नचार
बिसरि जाइत रस्ता
टकराइत अनगिन मोबाइल टावर सँ
नहिं ल' जा पबै छलन्हिं
समाद भाइक एबाक
नहिं कुचरै छल कौआ आब।
जैब कहाँ पार लगैत छलनि आब?
मालिकक चाकर छलाह भाइ
हजारन कोस दूर कोनो ठाम
लागल कोनो गुनधुन मे
पोसैत अपन पेट
जैब कहाँ पार लगैत छलनि आब?

फ़ोन पर लगलनि
पूसक कनकनीक हल्लुके सन आभास
बजलखिन्ह जखन बहिन हल्लो
की भेल?
गुम
मात्र बाझल हिचुकी 
एक क्षणक लेल मात्र
किछुओ त' नहिं
बकौर लागि जाइत छन्हि भाइकेँ
दहो बहो नोर
देखि लैत छनि संगक लोक
आ फेरि लैत अछि मुँह
दोसर दिस
लाजेँ 
बचेबा लेल हुनका एहि
असहज स्थिति सँ।

नीके ना रहब
जुग जुग जीबह
चिन्ता नहिं करब
बौंसै छथि ओ सब
एक्के आमक दू फाँक
एक्के गाछक दू ठाढ़ि
एक दोसराकेँ।

बीतल
आर एकटा
भरदुतिया
बितलाह ओ सब
अपस्याँत अपन अपन
संसार मे
असमर्थ करक लेल किछु
एक दोसराक लेल
नुकौनेँ प्रेम, निछच्छ प्रेम 
एक दोसरा लेल
बितलाह ओ सब।

(मैथिली पत्रिका 'अंतिका' सं साभार)

MithiMedia 21 October 2017
हरखक ओरियान: चलू चली अन्हार सं इजोत दिस!

मिथिला मे दशमीए सं दीयाबाती जड़ायब शुरू भ' जाइत अछि. धनतेरस सं ओहुना पावनिक श्रृंखला सन शुरू भ' जाइत अछि. मिथिला मे दीयाबातीक महत्व एहू लेल बेसी अछि जे मैथिली (सिया) श्रीरामक संग चौदह बरखक बनवासक उपरांत अजोध्या आपस आयल छलीह. अन्हार पर इजोरियक विजय केर ई पावनि जन-जन सं जुडल अछि. लछमी केर आराधना केर संगहि राति मे कालीपूजा सं मिथिला केर माहौल श्रद्धा सिक्त रहैत अछि. दीयाबातीक लेल अनेकानेक कथा प्रचलित अछि. सोझ शब्द मे कहल जाय त' सुख-समृद्धि ओ आकांक्षा कें नव पाँखि देबय आ अपार हर्खक ओरियान केर पावनि अछि दीयाबाती.

> मिथिला मे एना होइछ पूजन
घर-आँगन केर साफ़-सफ़ाइ केर पश्चात गोबर सं नीपल जाइत अछि. ओहुना दीयाबती हेतु घर-आँगन पहिने सं चकाचक कयल गेल रहैत अछि. भगवती घर मे गोसाओन लग अरिपन देल जाइत अछि. कहल जाइत अछि जे आजुक दिन भगवती बहराइ छथि. फेर देवोत्थानक एकादशी दिन घरवास करैत छथि. सांझ होइते घर-दुआरि दीया सं चक-मक करय लगैत अछि. सांझू पहर लोक फटक्का आदि छोड़ैत छथि. हुक्का-लोली सेहो जराओल जाइत अछि, जे भगवती घर सं लोक गामक बाहरी भाग मे पोखरि वा बाध दिस जा फेकैत अछि. लक्ष्मी-गणेशक पूजन सेहो कयल जाइत अछि. राति बढ़ने कालीपूजन केर सेहो प्रथा अछि. बंगाल मे दीयाबातीक सांझ मे कालीपूजा प्रमुखता सं मनाओल जाइत अछि. मुदा मिथिला मे लोक दीयाबती केर संगहि लक्ष्मी-गणेश ओ तखन काली पूजन करैत छथि. गाम-गाम काली माय केर प्रतिमा बना पूजन कयल जाइत अछि. जतय काली मंदिर अछि, ओतय एहि दिन फराके माहौल रहैत अछि. बेसी ठाम दीयाबाती सं शुरू भ' पंचदिवसीय काली पूजनोत्सव आयोजित कयल जाइत अछि. 

>गोधन पूजा केर विधान 
दीयाबाती केर अगिला दिन अर्थात कार्तिक मास केर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा कें गोवर्धन पूजा कयल जाइत अछि. एहि दिन बलि पूजा, अन्न कूट, मार्गपाली आदि उत्सव सेहो मनाओल जाइत अछि. एहि पावनि केर मिथिलाक लोकजीवन मे विशेष महत्व अछि. एहि पावनि कें ल' कथा ओ मान्यता सेहो जुडल अछि. श्रीकृष्ण ओ गोवर्धन केर कथा प्रसंग सं के' परिचित नहि अछि. एहि दिन मिथिला मे माल-जाल केर दुलार होइत अछि. गोधन केर पूजन कयल जाइत अछि. गाय आ बरदक थैर मे गोबर, पिठार ओ सिन्दूर सं गोवर्धन बना पूजा कयल जाइत अछि. मिथिलाक कृषि परम्परा मे पशु केर महत्व बहुत बेसी अछि. एहि दिन माल-जाल कें तेल ओ बकेन पीयाओल जाइत छैक. सिंघ मे तेल लगाओल जाइत छैक. गोधन कें पान-सुपारी सेहो देल जाइत छैक. माल-जाल कें नवका नाथ-गरदानी पहिराओल जाइत अछि. चरवाह आ जन-बोनिहार जे कृषि कार्य मे सहयोग करैत छथि, हुनका एहि दिन नओत द' खुआओल जाइत अछि. बहुतो लोक जन-बोनिहार कें सीधा सेहो देइत छथि. एहि दिन पहलवानी खेलयबाक सेहो परंपरा रहल अछि. एहि दिन मिथिलाक धीया नवनिया (लवनिया) चिपड़ी पथइ छथि. एही चिपड़ी सं नवान्न केर अन्न उसनय लेल चूल्हा पजाडल जाइत अछि.

> यम द्वितीय कें चित्रगुप्त केर पूजन 
दीयाबातीक दू दिन बाद अर्थात यम द्वितीय कें चित्रगुप्त केर पूजा कयल जाइत अछि. एहि दिन कलम आ चित्रगुप्त केर पूजन कयल जाइत अछि. प्रचलित कथाक अनुसार चित्रगुप्‍त ब्रह्माक पुत्र छथि. एहि संदर्भ मे एक कथा अछि जे यमराज सृष्टिक आकार बढ़ने  सृष्टिक रचनाकार ब्रह्माजी लग पहुँचलाह आ प्राणीक पाप-पुण्य केर लेखा-जोखा रखबा लेल कोनो ठोस बेवस्था कार्बा लेल कहलनि. यमराज अपना लेल योग्य मंत्रीक व्यवस्था करबाक प्रार्थना कयलनि. ब्रह्माजी यमराज कें हल तकबाक आश्वासन द' समाधि मे चल गेलाह. 11 हजार सालक समाधिक बाद ब्रह्मा जी केर काया सं एक दिव्य पुरुष उत्पन्न भेल. श्यामल वर्ण केर एहि दिव्य पुरुषक कमल सामान नेत्र छल, कान मे कुण्डल, गर मे मुक्तासर, शरीर पर पीताम्बर वस्त्र आ हाथ मे कलम दवात छल. उत्पन्न पुरुष भगवान ब्रह्मा सं अपन नाम आ काज पूछलनि त' ब्रह्मा जी कहलनि, अहां हमर काया सं उत्पन्न भेल छी तें अहां कायस्थ छी. अहां हमर चित्त मे गुप्त छलहुँ तें अहांक नाओ चित्रगुप्‍त होयत.  अहां यमलोक जा मनुक्खक पाप-पुण्य केर लेखा तैयार करब. कायस्थ लोकनि चित्रगुप्तक वंशज मानल जाइत छथि. एहि दिन मिथिला मे कायस्थ लोकनि कलम-दवात संगहि चित्रगुप्त केर प्रतिमा पूजन सेहो करैत छथि. कलम-दवात केर पूजन मे कायस्थ सहित मिथिलाक अन्य वर्णक लोक सेहो भाग लेइत छथि. देश-विदेश मे रहनिहार मैथिल लोकनि ई पावनि मनबैत छथि.

> भरदुतिया केर धूम 
भरदुतिया कार्तिक मासक शुक्ल पक्ष केर द्वितीया तिथि कें मनाओल जाइत अछि. एकरा यम द्वितीया सेहो कहल जाइत अछि. भरदुतिया मे बहिन भायक ललाट पर पिठार आ सिंदुरक ठोप क' उज्ज्वल भविष्यक कामना करैत अछि. मिथिला मे एहि अवसर पर भाइ उपहार वा नगद देइत अछि. ई पर्व भाइक प्रति बहिनक प्रेम केर सूचक अछि. एहि पावनि लेल एकटा कथा सेहो प्रचलित अछि. यम देवता अपन बहिन जमुना कें एही दिन दर्शन देने छलाह. जम महाराज व्यस्तता केर कारणें अपन बहिन सं भेट नहि क' पबैत छलाह. एहि दिन बहिन ठाओ पीढ़ी क' भाइ केर बाट तकैत अछि. मिथिला मे अलग तरहक अरिपन पाडल जाइत अछि. दीयाबाती आ छठि केर बीच मे ई पावनि भेने हर्ख कतेको गुण बढैत अछि.

> छठि परमेसरी केर अराधना 
लोक आस्थाक महान पर्व छठि समूचा भारत-नेपाल मे प्रमुखता सं मनाओल जाइत अछि. ई पावनि सभ धर्मावलम्बी लेल समान महत्व रखैत अछि. दुनू पार मिथिला मे एहि पावनि कें ल' लोक मे अपार आस्था अछि. हिन्दू सहित मुस्लिम ओ सिख समुदायक लोक ई पावनि मनबैत छथि. कातिक शुक्ल पक्षक षष्ठी कें मनाओल जायवला छठि सूर्योपासना केर अनुपम विधि-विधान लेल सेहो प्रचलित अछि. पारिवारिक सुख-स्मृद्धि तथा मनोवांछित फलप्राप्तिक लेल ई पावनि मनाओल जाइत अछि. छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव अछि. व्रतधारी लगातार 36 घंटा व्रत रखैत छथि. पहिल दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ केर रूप मे मनाओल जाइत अछि. दोसर दिन कातिक शुक्ल पंचमी कें छठिव्रती दिन भरि उपास क' सांझ मे अन्न ग्रहण करैत छथि, एकरा ‘खरना’ कहल जाइत अछि. तेसर दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी कें दिन मे छठि केर प्रसाद बनाओल जाइत अछि. सांझ मे जलकर पर जा सूर्य कें अरघ देल जाइत अछि. चारिम दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी कें भोरे उगैत सूर्य कें अरघ देल जाइत अछि.  अंत मे छठिव्रती कांच दूध केर शरबत पी क' आ कनेक प्रसाद खा क' व्रत पूर्ण करैत छथि.

Rupesh Kumar Jha 17 October 2017
मिथिला पेंटिंग सं बिहुंसि रहल अछि मधुबनी टीसन

मधुबनी टीसन एम्हर किछु दिन सं चर्चा मे बनल अछि. अव्यवस्था आ गंदगी लेल फेमस ई रेलवे स्टेशन यात्री लोकनि कें एखन अचंभित क' रहल अछि, जखन ओ लोकनि मिथिला पेंटिंग सं चकाचक स्टेशन देखैत छथि. एहन नै छै जे एहि स्टेशन पर पहिल खेप ई पेंटिंग लागल अछि. एहि सं पहिनहुं कलाकृतिक किछु नमूना स्टेशन पर देखबा मे अबैत छल. मुदा यात्री ई देखि चकित होइ छथि जे पूराक पूरा स्टेशनक देवाल पेंटिंग सं सजल अछि.


मधुबनी रेलवे स्टेशनक देवाल पर गैर सरकारी संस्था 'क्राफ्टवाला' केर प्रयास सं लगभग 7,000 वर्गफीट सं बेसी क्षेत्रफल मे मिथिला पेंटिंग बनाओल गेल अछि. सय सं बेसी कलाकार टीसन पर चित्रकारी मे भाग लेलनि, जाहि मे रेलवे सेहो सहयोग केलक अछि. संस्थाक संयोजक आ मधुबनीक ठाढ़ी गाम निवासी राकेश कुमार झा कहैत छथि जे ई विश्व रिकार्ड बनि सकैत अछि.



कलाकार सभ द्वारा टीसनक देवाल पर अलग-अलग थीम पर मिठिया पेंटिंग बनाओल गेल अछि. रेलवे टीसन पर ई चित्रकारी एकरा दर्शनीय स्थल जकां बना देलक अछि. आब एकरा सुरक्षित-संरक्षित करब चुनौतीपूर्ण काज अछि, जाहि पर रेलवे अधिकारी कें धियान देबाक आवश्यकता अछि.


एहि काज हेतु 'क्राफ्टवाला' आ कलाकारक लोकनिक जतेक प्रशंसा कएल जाय से कम अछि. ई एकटा डेग मिथिलाक बहुविधा मे काज केनिहार लोक सभ लेल एक उदाहरण अछि जे प्रयास केने मिथिलाक पावन कला-संस्कृति ओ भाखा जे मिथिलो मे उजरल-उपटल अछि, पुनः स्थापित भ' सकैत अछि.

Rupesh Kumar Jha 16 October 2017
पूनम कें 'मिथिला विभूति सम्मान' देल जएबाक घोषणा

मैथिलीक सुप्रसिद्ध लोकगायिका पूनम मिश्र कें विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा द्वारा एहि वर्ष 'मिथिला विभूति सम्मान' देल  जएबाक घोषणा भेल अछि. ई संगीतकला प्रेमी लोकनिक लेल बेस आह्लादकारी समाद अछि. पूनम मैथिली लोकगायन कलाक क्षेत्र मे शीर्ष पर विराजमान कलाकार मे गानल जाइत छथि.

ज्ञात हो जे बेनीपट्टी प्रखंडक मनपौर गाम निवासी रोहित नारायण मिश्र केर सुपुत्री पूनम मैथिली लोकगायन कें एक नव आयाम देखओलनि अछि. मिथिला क्षेत्र मे हिनक गाओल पारंपरिक गीत बिनु शाइते कोनो मांगलिक काज संपन्न होइत हो, से कहल जा सकैत अछि. मधुबनी सं ल' देश विभिन्न भाग मे ई मैथिली मंच कें अपन स्वर सं सजओलनि अछि.


पूनम अपन ई सम्मान अपन पिता कें समर्पित करैत छथि जे हिनक संगीत गुरु ओ पथ प्रदर्शक रहलाह अछि. नेनहि मे संगीतक प्रति पूनमक रुचि कें देखैत हिनक पिता हिनका उचित प्रशिक्षण ओ गाइडेंस देलनि जे आइ पूनम मिथिलाक स्वर पहिचान बनल छथि. बता दी जे हिनक पिता संगीत शिक्षक रहल छथि.

विद्यापति सेवा संस्थान दिस सं तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोहक अवसर पर पूनम कें सम्मानित कएल जेतनि. ई जनतब सस्थानक महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौाधरी 'बैजू' देलनि. ओ कहलनि जे समारोह 2 नवंबर कें शुरू होएत जे 4 नवम्बर धरि चलत. एहि अवसर पर संस्कृत, मैथिली, पत्रकारिता, संगीत, कला सहित अन्य क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्य केनिहार व्यक्ति कें मिथिला विभूति सम्मान सं सम्मानित कएल जाएत.

पूनमक गीत YouTube पर सुनबा लेल चैनल Subscribe करी.

Rupesh Kumar Jha
नव आस, नव विश्वास नेने आबि रहल अछि फिल्म 'प्रेमक बसात'

मैथिली फिल्म उद्योग एखन धरि प्रयोग मात्र करैत रहल अछि. बेर आबि गेल अछि जे एकरा व्यावसायिक मान्यता भेटै आ एहि उद्योग सं प्रत्यक्ष रूपे जूड़ल कलाकार ओ तकनीकी टीम कें रोजगारक अवसर प्राप्त होइन. मैथिली फिल्म ओ रंगमंचक अभिनेता अनिल मिश्रा एहि संदर्भ मे कएक टा मंच सं बाजल छथि जे मैथिली फिल्म उद्योग कें भाइ-भतीजावाद सं मुक्त रखबाक बेगरता छैक आ तखने जा क’ ई व्यावसायिक रूपे स्थापित हएत. हुनक ई अपील एखन शूटिंग भ’ रहल फिल्म 'प्रेमक बसात' पर लागू होइत नजरि आबि रहल अछि. 


फिल्मक निर्माता कुणाल ठाकुर सं प्राप्त जानकारी अनुसार एहि फिल्मक यूनिट मे कलाकार सं ल’ तकनीकी टीम पूर्ण व्यावसायिक अछि आ मैथिली फिल्म उद्योग कें स्थापित करबा मे एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निमाहत से आश्वस्त छी. दर्शक मध्य जे मैथिली फिल्मक प्रति उदासीनता अछि ओहि तमाम आवश्यकता कें पूर करबाक प्रयास कएल जा रहल अछि.

     
फिल्म 'प्रेमक बसात' केर निर्माता-वेदान्त झा एवं कुणाल ठाकुर, कथा-पटकथा-संवाद-लेखक एवं निर्देशक-रूपक शरर, अभिनय-पियूष कर्ण, रैना बनर्जी, गोविन्द पाठक, मोना रे, एस.सी.मिश्रा, राकेश, प्रज्ञा झा, शैल झा, कल्पना मिश्रा, संजना, आशुतोष सागर, आकाशदीप, राजीव झा, प्रेम झा, शरद सोनू, नेहा, राकेश त्रिपाठी आदि, संगीत-प्रवेश मल्लिक एवं सरोज सुमन, नृत्य निर्देशन-केदार सुब्बा, कला निर्देशन-प्रेम जी, कैमरा-नरेन्द्र पटेल, निर्माण नियंत्रक-अजीत सिंह, निर्माण प्रबंधन-सिंटू झा, प्रवीण पाठक एवं नवीन झा, मेकअप-पंकज झा एवं आइटम गीत पर नृत्य प्रशिक्षण द’ रहल छथि गौलौरी महन्था.


एहि फिल्मक निर्माणक विशेषता अछि जे तकनीकी टीमक अधिकाधिक सदस्य बॉलीवुडक प्रतिष्ठित नाम छथि आ तहिना हिनका लोकनि द्वारा आधुनिक तकनीकी यंत्रक प्रयोग सेहो कएल जा रहल अछि. तहिना मैथिल कलाकार लोकनि सेहो अपन-अपन विधाक प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व छथि. एहि फिल्मक शूटिंगक लोकेशन समस्तीपुर जिलाक करियन एवं ओकर ल’ग-लगीचकक गाम सभ मे भेल अछि.

रिपोर्ट: मनीष झा 'बौआभाइ'

Rupesh Kumar Jha
'क्लाइमेट रियलिटी लीडर' हेतु चयनित मैथिल युवा अविनाश

मधुबनी जिलाक झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत पैटघाट (लालगंज) निवासी श्री दुर्गानन्द झा केर सुपुत्र अविनाश कुमार जलवायु परिवर्तन विषयक प्रशिक्षण मे अमेरिकामे बिहार राज्यक प्रतिनिधित्त्व करताह. 

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय स’ कंप्यूटर साइंस मे मास्टर (एम.सी.ए) डिग्री धारक अविनाश एक प्रतिष्ठित कम्पनीक नोकरी छोड़ि अपन देशक किसानक हितमे काज करबा लेल दृढ़संकल्पित ओ चिन्तनशील देखना जाइ छथि. 

विगत पाँच बर्ख स’ कौशल्या फाउंडेशन नामक स्वयंसेवी संस्था संग डेग मे डेग मिला किसान लोकनिकें अन्न, तरकारी आदिकें उचित दाम दिया हुनका लोकनिक पक्ष मे ठाढ़ देखल गेलाह अछि. किछुए मास पूर्व मिथिला सहित समूचा बिहार मे बाढिक प्रकोप मे उक्त संस्था द्वारा सराहनीय कार्य कएल गेल अछि जाहि मे हिनक लगनशीलता ओ तत्परता कें बेस प्रशंसित कएल गेल छल. 

ज्ञात हो जे अविनाश “वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम” केर 'ग्लोबल शेपर्स कम्युनिटी'क पटना हब केर वाइस क्यूरेटर सेहो छथि आ एहि फोरम केर वार्षिक क्यूरेटर सेमिनारमे बिहारक प्रतिनिधित्व करैत जेनेवा मे पहिनहि अपन उपस्थिति दर्ज करा चुकल छथि.

अमेरिका केर पूर्व उप-राष्ट्रपति एवं नोबेल पुरस्कार विजेता अल गोर केर संस्था 'द क्लाइमेट रियलिटी प्रोजेक्ट' जेकि किसानकें जैविक खेती हेतु प्रोत्साहित करैत अछि मे एहि बेर विश्व कें १०० प्रतिभाशाली युवा मध्य बिहार दिस स’ प्रशिक्षित करबा लेल अविनाश कें आमंत्रित कएल गेल अछि. अल गोर स्वयं हिनका लोकनिकें प्रशिक्षित करता आ ई प्रशिक्षण कार्यक्रम १७ सं १९ अक्टूबर धरि अमेरिकामे चलत.

अविनाश कें समाजसेवाक संग-संग फोटोग्राफी मे सेहो बेस दिलचस्पी छनि जेकि हिनक फेसबुक पेज खलिहान लाइव केर माध्यम सं देखल जा सकैछ. हिन्दी पत्रकारिता ओ कविता लेखनक संग-संग आब मैथिली साहित्य सृजन ओ साहित्यिक चौपड़ि मे सेहो हिनक सक्रियता नीक जेंका बनल रहैत अछि. एहि उपलब्धि हेतु बधाइ ओ हिनक जीवनक उत्तरोत्तर उन्नति हेतु हार्दिक मंगलकामना!

रिपोर्ट: मनीष झा 'बौआभाइ'

Rupesh Kumar Jha 15 October 2017
शिक्षा हेतु Google गैर-सरकारी संगठन सभ कें देत एक अरब डॉलर
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गूगल दिस सं कहल गेल अछि जे आगामी पांच वर्ष मे ओ गैर-सरकारी संगठन सभ पर एक अरब डॉलर खर्च करत. विश्वभरि में शिक्षाक स्तर कें बढ़ेबा हेतु कएल जाएत. कंपनी एहि बातक संकल्प प्रकट केलक जे गूगल कर्मचारी एहि लेल दस लाख घंटा स्वैच्छिक तरीका सं काज करत.

सर्च इंजनक सिरमौर वेबसाइट गूगलक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई पिट्टसबर्ग मे एकर घोषणा केलनि अछि. ओ 24 वर्ष पहिने भारत सं एही शहर मे आएल छलाह. पिचाई 'ग्रो विथ गूगल' नामक कार्यक्रम केर शुरूआत सेहो केलनि.

एहि कार्यक्रमक मूल उद्देश्य अमेरिकी नागरिक लेल नौकरी आ व्यापार बढ़एबा मे सहयोग करब अछि. कंपनी उडासिटी आ कोरसेरा सन ऑनलाइन कंपनीक संग-संग गुडविल एवं 4-एच सन चैरिटेबल संगठनक संग साझेदारी क' रहल अछि.

Rupesh Kumar Jha 14 October 2017
कवि नारायण झाक 'अविरल-अविराम' मे सं 3 गोट कविता

1. गाम-शहर

आब गाम हकोप्रत्यास
गरदनि उठा-उठा
तकैत रहैए बाट दिस
सोचैत रहैए गाम
नहि रहत केयो मरद
जनानाक कहाओत गाम
कि ओहो धरत गाड़ी
के बुझैए 

शहर थिक विकासक नाम
लोक शहर दिस
उठा चुकल कहिया ने डेग
कतेक नगर
बसा चुकल लोक
अरजै खातिर ढौआ
कS चुकल अछि
साम्राज्यक विस्तार
गामक हवा-पानि
हुनका लेल मरखाह

खेती-पाती,चास-समार
ताहि पर जोत तेखार
धन रोपनी आ कदबा पखार
छीटब खाद ,पटायब खेत
बिसरि चुकल अछि
गामक लोक

बिधक बास्ते बाँसक बासन
माटिक बासन काज-उदेम
टेटिआइत रहैए
कारीगर करीन्दा
जीबै लेल कतेको आसन
नहि भरै छै तखनो पेट
काटय कतबो घेंट
नहि बनैए सूच्चा सेठ

एखनुका लोक अछि पड़िकल
पगाड़ पबै मे,पन्नी बीछैमे
ईटा-गारा खूब उघैमे
किलाक-किला जीरी काटय
धोकरा-धोकरी खूब सीबैमे
होटलक बासन खूब मलैमे।

आब गाम हकोप्रत्यास
गरदनि उठा-उठा
तकैत अछि बाट दिस।


2. ई केहेन हूलि-मालि

बनल छै छोट-छोट
खोपड़ी आ कपड़ाघर
रहैत छै मास करबाक लेल
स्त्री आ पुरूख
सार्थक करै लेल जीवन
अरजै खातिर धर्म 

एक दिस घाट पर
राखल छै लहास
जकर कयल जेतै गति
अन्तिम यात्राक पूर्ण विराम हेतु
जे भेटि पओते मोक्ष 

एक दिस पतियानीमे
बैसल छै
लुल्ह-नांगर, बहीर-आन्हर 
तकरा कप्पा पर
फेकल जाइत छै
टाका आ अन्न
भरय लेल पेट
कमयबा लेल धर्म 

एम्हर गंगाक बीचोबीच पैसि
किछु सन्त
पढ़ि रहल छै निरंतर मंत्र
लगबाक लेल सुठाम
जीवनसँ पएबा लेल उद्धार 

धर्रोहि लागल छै लोकक
डूब देबय लेल 
आ कटएबा लेल 
जन्म-जन्मांतरक पाप 

एम्हर काते-कात 
लागल छै दोकान
जाहिमे नहा-नहा सभ
खाइत छै चूड़ा-दही, जिलेबी
ओ बेचि रहल छै
चलएबा लेल पेट
अरजबा लेल अर्थ 

किछु पतित कामी
आँखि गड़ेने छै
नहाइत स्त्री दिस
करबा लेल पूर्ण काम 

जीवनक ई केहेन हूलि-मालि 
देखि रहल छी 
से मोने-मोन 
गुनि रहल छी।


3. टीस

तकैत छथि कवि
बैसि ऊँचका चबूतरासँ
मिस्स पड़ैत महानगरमे
गामक गोइठबीछनी
मुरेठा बान्हल माथ 

अकानै छथि कवि
शहरक ध्वन्यालापमे
दुखनीक दु:ख
फेकनीक संगे जे घटलै  

करै छथि कवि गणित
एसी घरमे
रौदी-दाही पर
माछ-मखानक लगता पर 

ठठै छथि कवि
अट्टालिकामे रहि
मड़ैयाक ठाठ, कोनियाँ
आ बुनै छथि टाट-फरक 

लेबै छथि कवि
शीशमहलसँ
घरक दाबा
नीपै छथि
गोबरसँ अंगना-ओसार ।

कविक सिहरै छनि देह
पड़ले-पड़ल
सुनलाक ढ़ोलिया जकाँ
धोइध बढ़ा कवि
मारै छथि अर्राहटि
प्रसव-पीड़ासँ
लिखै छथि व्यथा-कथा-स्रष्टाक 

कवि लिखै छथि गठूल्लासँ
समुद्रक ज्वार-भाटा
करै छथि कवि
लाइवटेलिकास्टिंग व्हाइट हाउसक
अन्तर्ध्यान भS
देखै छथि कवि
घरक कोनटासँ तीनू भुवन।

कवि लिखैत छथि
लिखिये रहल छथि
कल्पनाक अनन्त अकास
जोड़ै छथि
भावनाक पैघ-पैघ महल
तखन
डेगाडेगी डेगे यथार्थक रस्ता पर
दौगबै कहिया
आ पुरबै बाँहि सभहक संगे
कहिया।


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MithiMedia 4 October 2017
तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोक उत्सव मे जुटलाह मिथिला सहित देशभरिक कलाकार

लगातार तीन दिन सं मधुबनीक भटसिमरि मे राष्ट्रीय लोक उत्सव कें ल' लोक कलाकार ओ कलाप्रेमीक जमघट लागल रहल. अछिंजल ओ नारी उद्गार संस्थान संगहि संस्कृति मंत्रालयक संयुक्त प्रयासें आयोजित भेल 'राष्ट्रीय लोक उत्सव' मे मिथिला सहित देशभरिक कलाकार शामिल भेलाह. 27 सितम्बर 2017 कें बिहार सरकारक पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत द्वारा उद्घाटन सं शुरू भेल कार्यक्रम 29 सितम्बर 2017 कें कलाक विभिन्न रंग नेने संपन्न भेल.



कार्यक्रमक तेसर दिन कारुख महाराय-जट-जटिन गायन, झिझिया-डांडिया नृत्य, कबीरा ओ आल्हा गायनक संगहि आधुनिक मैथिली लोकगीतक प्रस्तुति भेल. एकर संगहि 'अछिंजल' द्वारा प्रवीण कुमारक निर्देशन मे मैथिली नाटक 'छुतहा घैल' केर मंचन, मध्यप्रदेशक कलाकारक द्वारा नाटक 'एकलव्य केर मंचन कएल गेल. एहि अवसर पर आरा जिलाक कलाकार बिदेसिया लोक नाट्य प्रस्तुत केलनि. 



एहि अवसर पर जिलाक कलाप्रेमी सहित पाहुन लोकनि उपस्थित छलाह। ई कार्यक्रम मिथिला कें लोककलाक क्षेत्र मे नव परिचिती देबाक काज केलक अछि. तीन दिवसीय कार्यक्रम मे देशभरिक लोक संगीत, गीत, नाट्य आदि विभिन्न कलाक संगम देखल गेल.

#MithiEvents

MithiMedia 30 September 2017
राष्ट्रीय लोक उत्सव मे लोककलाक अद्भुत प्रदर्शन

मधुबनीक भटसिमरि मे राष्ट्रीय लोक उत्सवक दोसर दिन कला-प्रदर्शनक नीक नमूना देखल गेल. देशक विभिन्न भागक कलाकार लोकनि संगीत, गीत, नाटक ओ लोककलाक विभिन्न विधाक प्रदर्शन केलनि. मिथिलाक कलाप्रेमी एहि उत्सवक माध्यमे एक दिस देशक अन्यान्य कला कें लगीच सं देखि रहल छथि त' आन भागक कलाकारक समक्ष अपन कलाक प्रदर्शन क' एकर प्रसार मे भूमिका निमाहि रहल छथि.


अछिंजल ओ नारी उद्गार संस्थान संगहि संस्कृति मंत्रालयक संयुक्त प्रयासें कएल जा रहल 'राष्ट्रीय लोक उत्सव' कार्यक्रमक दोसर दिन महेंद्र पासवान ओ टीम द्वारा 'रसनचौकी वादन', पूण्यदेव पासवान ओ टीम दिस सं कबीरपंथी गायन, रामनारायण राम द्वारा सलहेस गाथा गायन, काश्यप कमल द्वारा 'भोट' केर एकल नाट्य अभिनय, राधा मोहन मिश्र ओ टीम द्वारा विद्यापति संगीत परम्परा, हाजीपुरक जादूगर द्वारा 'जादू का खेल' केर प्रदर्शन, पश्चिम बंगालक जय जोहार फाउंडेशन द्वारा मैथिलीक ललका पाग केर एकल नाट्य प्रस्तुति लोकक मोन मोहि लेलक.


एकर संगहि मधुबनीक इप्टा द्वारा हिन्दी नाटक 'महाभारत एक्सटेंशन' इंद्रभूषण रमण केर निर्देशन मे खेलल गेल. एही संस्था द्वारा गांधी चौक नाटक सेहो प्रदर्शित कएल गेल. प्रभात कुमारक संरचना मे मिथिलाक झिझिया आ डोमकछ नृत्य सेहो प्रस्तुत कएल गेल.  मध्यप्रदेशक एक्सट्रीम आर्ट सोसाइटी द्वारा चन्दनुआ नाटक प्रस्तुति एहि लोक उत्सव कें उत्कर्ष पर ल' गेल.


एहि तीन दिवसीय लोक उत्सवक आइ अंतिम दिन अछि. दशमी मे छुट्टी हो आ मधुबनी मे छी त' एकबेर भटसिमरि घूमब नीक विकल्प साबित भ' सकैत अछि. जतय अहां अपन माटिक गमक आ विभिन्न रंग कें देखि-सुनि सकैत छी.

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MithiMedia 29 September 2017
मधुबनीक भटसिमरि मे राष्ट्रीय लोक उत्सवक धूम

मधुबनीक भटसिमरि मे राष्ट्रीय लोक उत्सव शुरू भ' चुकल अछि. अछिंजल ओ नारी उद्गार संस्थान संगहि संस्कृति मंत्रालयक संयुक्त प्रयासें कएल जा रहल 'राष्ट्रीय लोक उत्सव' कार्यक्रमक उद्घाटन बुधदिन 27 सितम्बर 2017 कें बिहार सरकारक पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत केलनि. 


अवसर पर मुख्य अतिथिक रूप मे मैथिली नाट्यकार महेंद्र मलंगिया उपस्थित छलाह त' विशिष्ट अतिथिक आसन पूर्व मंत्री रामलखन राम 'रमण' ओ लौकहीक विधायक लक्ष्मेश्वर राय ग्रहण केलनि. बिहार विधान परिषद् सदस्य सुमन महासेठ ओ राजनगरक विधायक रामप्रीत पासवानक गरिमामयी उपस्थिति मे कार्यक्रमक शुभारम्भ भेल.


एहि लोक उत्सवक पहिल दिन उपस्थित पाहून लोकनि लोक कला ओ संस्कृति पर अपन वक्तव्य प्रस्तुत केलनि. संगहि विभिन्न लोक कलाकार लोकनि द्वारा कलाक प्रदर्शन सेहो कएल गेल. कार्यक्रम में जिलाक लोक कला प्रेमी ओ साहित्यिक लोकनिक नीक जुटानी देखल गेल.

कार्यक्रम मे रसनचौकी वादन, बांसुरीवादन, छऊ नृत्य, पारंपरिक गीतनादक संगहि 'अछिंजल' द्वारा मैथिली नाटक 'हाय रे हमर घरबाली' प्रस्तुत कएल गेल. एहि अवसर पर सलहेस लोकनाट्य प्रस्तुतिक संगहि मध्य प्रदेशक संस्था अंगराग द्वारा महाबली नाटक सेहो देखाओल गेल.


ज्ञात हो जे तीन दिवसीय कार्यक्रम आइ दोसर दिवस अछि, जाहि मे देश भरिक लोक कलाकार लोकनि जुटल छथि. लोक कलाक एहि महापर्व मे मिथिला सहित देशक विभिन्न भू-भागक कला प्रदर्शन होएत. 

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MithiMedia 28 September 2017
दशमी मे मैयाक आराधना: हे माय, अहां बिनु आस ककर!

दुर्गा पूजा प्रमुख पावनि अछि. शक्ति उपासना केर महान उत्सव कें दशमी, दशहरा वा नवरात्र सेहो कहल जाइत अछि. नौ दिन माँ शक्तिक नओ रूप केर आराधनाक बाद दशम दिन विजयादशमीक रूप मे मनाओल जाइत अछि. बंगालक दुर्गा पूजा बेस नामी अछि त' गुजरात केर डांडिया लोकक धियान आकर्षित करैत अछि. शक्तिक उपासक मिथिला मे ई पावनि बेस विधिपूर्वक कयल जाइत अछि.

> प्रथम शैलपुत्री रूप मे मायक पूजा  

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

श्री दुर्गा केर  प्रथम रूप श्री शैलपुत्री छनि. पर्वतराज हिमालय केर धिया छथि तें शैलपुत्री कहल जाइत छनि.  नवरात्र केर प्रथम दिन हिनक पूजा ओ आराधना कयल जाइत छनि. हिनक आराधना सं मनोवांछित फल प्राप्त होइछ.

> दोसर दिन माता ब्रह्मचारिणी केर आराधना

दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

श्री दुर्गा केर दोसर रूप श्री ब्रह्मचारिणी छनि. ई भगवान शंकर कें पति रूप मे प्राप्त करबाक लेल घोर तपस्या कयने छलीह. नवरात्रि केर दोसर दिन हिनक पूजा-अर्चना कयल जाइत छनि. जे दुनू कर-कमल मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करैत छथि. माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपन भक्त पर कृपादृष्टि रखैत छथि.

> तेसर दिन माता चंद्रघंटा केर पूजा

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

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श्री दुर्गा केर तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा छनि. इनके मस्तक पर घंटा आकार केर अर्धचंद्र छनि. नवरात्रि केर तृतीय दिन हिनक पूजन कयल जाइत अछि. हिनक पूजन सं साधक कें मणिपुर चक्र कें जाग्रत होयबाक सिद्धि स्वतः प्राप्त होइत अछि आ सांसारिक कष्ट सं मुक्ति भेटैत अछि. हिनक आराधना सं मनुक्ख केर हृदय सं अहंकार केर नाश होइत अछि. माँ चन्द्रघण्टा वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करैत छथि.

> चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तुमे॥

श्री दुर्गा केर चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा छनि. अपन उदर सं अंड अर्थात् ब्रह्मांड कें उत्पन्न करबाक कारण सं हिनका कूष्मांडा देवी कहल जाइत छनि. नवरात्रि केर चतुर्थ दिन हिनक पूजा कायल जाइत छनि. श्री कूष्मांडा केर उपासना सं हृदय कें शांति एवं लक्ष्मी केर प्राप्ति होइछ.

> पंचम स्कंदमाता

सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

श्री दुर्गा केर पंचम रूप श्री स्कंदमाता छनि. श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) केर माय होयबाक कारणें हिनका स्कंदमाता कहल जाइत अछि. नवरात्रिक पंचम दिन हिनक पूजा आ आराधना कयल जाइत अछि. सिंह केर आसन पर विराजमान तथा कमल केर पुष्प सं सुशोभित यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी छथि. हिनक विग्रह मे भगवान स्कंद बालरूप मे कोरा मे  विराजित छथि. माय कें चारि हाथ छनि. हिनक वर्ण एकदम शुभ्र छनि. ई कमल आसन पर विराजमान छथि तें हिनका पद्मासना सेहो कहल जाइत अछि. सिंह हिनक वाहन छनि. हिनक उपासना सं  सभ इच्छा पूर्ण होइत अछि.

> छठम माँ कात्यायनी 

चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना। 
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥

श्री दुर्गा केर षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी अछि. महर्षि कात्यायन केर तपस्या सं प्रसन्न भ' आदिशक्ति हुनका ओतय पुत्री रूप में जनम लेलनि. तें कात्यायनी कहबैत छथि. हिनक आराधना सं भक्त केर सभ काज सरल एवं सुगम भ' जाइत अछि. चन्द्रहास नामक तलवार केर प्रभाव सं हिनक हाथ चमकैत रहित अछि. श्रेष्ठ सिंह हिनक वाहन छनि.

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मिथिला भरि मे बेलनत्ती: षष्ठी कें मिथिला भरि मे बेल नओतल जाइत अछि. पूजन अनुष्ठान केर संग बेल नओतल जाइत अछि. आ फेर अगिला भोरहरबा मे बेल तोडि क' आनल जाइत अछि आ दुर्गा प्रतिमा केर सोलहो श्रृंगार कयल जाइत अछि. एकर बादे मायक पट भक्त लेल फुजैत अछि. एहि कें बादे पूजन उत्सव मे बदलि जाइत अछि.

> सप्तमी कें श्री कालरात्रि केर पूजन

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

श्री दुर्गा केर सप्तम रूप श्री कालरात्रि छनि. ई काल केर नाश करयबाली छथि. नवरात्रि केर सप्तम दिन हिनक पूजा आ अर्चना कयल जाइत अछि. एहि दिन साधक कें अपन चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) मे स्थिर क' साधना करबाक चाही. ई भगवती सभ दुःख-संताप हरण करयबाली छथि.

> महाष्टमीक दिन महागौरी केर पूजा

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

महाष्टमीक दिन महागौरी केर पूजा केर विशेष विधान अछि. मां गौरी कें शिव केर अर्धागनी आ गणेश केर माय रूप मे चिन्हल जाइत अछि. महागौरी केर शक्ति अमोघ आ सद्यः फलदायिनी अछि. हिनक उपासना सं पूर्वसंचित पाप सेहो विनष्ट भ' जाइत अछि. भगवती महागौरी वृषभ केर पीठ पर विराजमान छथि, जिनक मस्तक पर चन्द्र केर मुकुट छनि. अपन चारि भुजा मे शंख, चक्र, धनुष आ बाण धारण कयने छथि. महाष्टमी कें पूजनोत्सव केर अलगे धूम रहैत अछि.

> अंतिम स्वरूप श्री सिद्धिदात्री

सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥

श्री दुर्गा केर नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री अछि. ई सभ प्रकारक सिद्धि देबयबाली छथि. सिद्धिदात्री केर कृपा सं मनुष्य सभ प्रकारक सिद्धि प्राप्त क' मोक्ष पयबाक मे सफल होइत अछि. मार्कण्डेयपुराण मे अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धि कहल गेल अछि. भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धि अपन उपासक कें प्रदान करैत अछि. माँ दुर्गा केर एहि अंतिम स्वरूप केर आराधनाक संगहि नवरात्र केर अनुष्ठानक समापन होइत अछि.

विजयादशमी: दशमीक दिन त्योहारक समापन होइत अछि. एकरा विजयादशमी कहल जाइत अछि. एहि दिन मिथिला कें छोडि देशक आन भाग मे रावणक पुतला जड़ाओल जाइत अछि. एही दिन भगवान राम राक्षस रावण केर वध क' मिथिलाक धिया सिया कें मुक्त करओने छलाह.

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MithiMedia 20 September 2017
खट्टरकका कें सुमिरन करैत कथा 'कॉर्नफ्लेक्स आ दही'

नॉर्वे मे रहैत छथि डॉक्टर साहेब प्रवीण झा 'वामागांधी. सोशल मीडिया पर अपन लेखनीक जादो सं लोक कें खूब आकृष्ट करैत छथि. हम अपने हिनक पोस्ट सबहक व्यसनी भ' गेल छी. ओ पोस्ट सभ बेसी भाग हिन्दी मे रहैत अछि. टूकटाक मैथिली पोस्ट सेहो देखबा मे अबैत अछि. एमहर आबि ज्ञात भेल जे ई सुअदगर व्यंग्य लिखैत छथि मैथिली मे. जनतब दी जे ई 'वामागांधी' उपनाम संग आएल हिंदी पोथी 'चमनलाल की डायरी' सं खूब चर्चा बटोरने छलाह. आशा अछि जे हमरा लोकनि कें हिनक मैथिली लेख ओ कथादि बरमहल पढबा लेल भेटत. – संपादक

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'काल्हि हमरा किछु विलंब होएत. स्टेशन जयबाक अछि.' 

'बाबूजी अबैत छथि?'

'नहि! भागलपुर सँ चूड़ा. पाँचहि बजे भोरे ट्रेन आओत. पैन्ट्रीबला कें दिया आबि जाइत अछि.'

'औजी! हद्द करइत छी. इडली-डोसा सनक सुपाच्य जलखइ छोड़ि गरिष्ठ भागलपुरी चूड़ा?'

'मुदा ओ दही-चीनी संग सानब संभव नहि.'

'साँभरक आगू दही-चीनी के' की औचित्य?'

'साँभर सँ चित्त शांत कोना होयत? सबटा उत्तेजक पदार्थ घोरि बीच मे मुनिगा!'

'नहि! अहाँ कें भ्रम अछि. मुनिगाक 'फाइबर' पाचक-तंत्र लय सर्वोत्तम.'

'से ठीके. मुदा हम चित्तक शांति कहि रहल छी, उदरक नहि.'

'चूड़ा-दही-चीनी त्रिगुणात्मक अछि अहाँक विचारे? खट्टर ककाक दूर्वाक्षत पड़ल अछि?' हम व्यंग्य केलियनि.

'डॉक्टर भ' क' अहाँ खट्टर ककाक कुचेष्टा क' रहल छी? तीनहि टा नाहि पाँचू टा तत्व.'

'आब पाँच टा भ' गेल?'

'औजी ओ दार्शनिक छला. अपने विज्ञान सँ जुड़ल छी. कॉर्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, फाइबर, मिनरल. की नहि अछि?'



'ई सभटा इडली-साँभर मे सेहो उपलब्ध.'

'अहि ठाम चित्तक गप्प अछि. चूड़ा-दही-चीनी खाय ठोर पसरि जाइत छैक. साँभर खाय जी फड़फड़ैल आगि भ' जाइत अछि.'

'हमरा त' दक्खिनक लोक सुभाषित लगैत छथि.'

'भाषहि मे भिन्नता आबि गेलनि. चूड़ा-दही खेनिहारक भाषा मे विराम छहि, कोनो तीव्रता नहि. एक मिनट मे दू सँ तीन शब्दक गति छहि. दक्खिनक भाषा मे पाँच शब्द प्रति सेकंड फड़फड़ाइत अगड़म-बगड़म बाजल जाइत अछि.'

'द्रविड़ संस्कृति छहि. भाषाक संरचना इडली-डोसाक युग से पहिलुका थीक.'

'संस्कृत भाषा क उपयोग अपनहु सभ करैत छी, आ दक्खिनो मे. ओहि बेर मे दूनू के गति एक. अपितु हम सभ नैवेद्य आ दूर्वाक्षतक मंत्रक गति मे हुनकहु सभ सँ आगू. पहिल आ अंतिम स्वर के अतिरिक्त किछु नहि बूझि सकबह.'

'सभ मंत्र बिसरि गेल छथि.'

'एकर इतिहास भिन्न-भिन्न जलखइ विधाक आक्रमण अछि.'

'से की कहलियइ?'

'पहिने मगह सँ सत्तू आयल. त्रिगुण सँ 'तम' लुप्त भय गेल.'

'तथार्थ दही?'

'तत्पश्चात् अंडाक आमलेट आबि 'रज' सेहो समाप्त कयलनि.'

'तथार्थ चिन्नी?'

'आब मात्र सत्व सँ बौद्धिकता क्षीण भय रहल अछि. अंडा खा क' मंत्रोच्चारण करबह मंत्र अंडे जेकाँ गोल भ' जेतह.'

'अहाँ त' चूड़ा मँगा लइत छी. हम त' विदा भेलहुँ बिदेश.'

'ओतय त' एक पर एक चूड़ा भेटत'. धान-मकइ-गहूम सबटा कतरि दइत छहि सुनइत छी. की कहइत छहि, कॉर्नफ्लैक्स?'

'से की?'

'बस कॉर्नफ्लेक्स मे चीनी आ दही सानि त्रिगुणक आनंद लेबह.'

– डॉ. प्रवीण झा 'वामागंधी'

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MithiMedia 18 September 2017
आधुनिक मैथिली गद्यक शिखर पुरुष 'हरिमोहन झा'

मैथिली साहित्य जगत मे महाकवि विद्यापतिक बाद सर्वाधिक लोकप्रिय साहित्यकार मे हरिमोहन झाक नाम पहिल स्थान पर गानल जाइत अछि. अपन हास्य व्यंग्यपूर्ण शैली मे सामाजिक-धार्मिक रूढ़ि, अंधविश्वास आ पाखण्ड पर चोट हिनकर रचनाक अन्यतम वैशिष्टय कहल जाइत अछि आ तेँ हिनका मैथिली साहित्यक 'हास्य सम्राट'क उपाधि सेहो देल जाइछ.

हिनक जन्म 18 सितम्बर 1908 ई. केँ वैशाली जिलाक कुमार वाजितपुर गाम मे भेल. हिनक पिता पं. जनार्दन झा 'जनसीदन' मैथिलीक स्वनामधन्य उपन्यासकार आ कथाकारक रूप मे प्रतिष्ठित छथि. 'जनसीदन'क 'निर्दयी सासु', शशिकला, कलियुगी सन्यासी वा बाबा ढकोसलानन्द प्रहसन, पुनर्विवाह, आदि मैथिली साहित्यक अनमोल धरोहर अछि. संस्कृत, बांग्ला, हिन्दी आ मैथिलीक विद्वान पं.जनार्दन झा 'जनसीदन'क पुत्र प्रो. झा मूलतः दर्शनशास्त्रक विद्वान रहथि आ पटना विश्वविद्यालयक दर्शन विभागक अध्यक्ष पदसँ सेवानिवृत भेल छलाह.

हिनक प्रकाशित कृति मे 'कन्यादान' (उपन्यास, 1933), 'द्विरागमन' (उपन्यास 1943), 'प्रणम्य देवता' (कथासंग्रह, 1945), 'रंगशाला' (कथासंग्रह, 1949), 'चर्चरी' (विविध, 1960), 'खट्टर ककाक तरंग' (व्यंग्य, 1948), एकादशी (कथासंग्रह) आदि प्रमुख अछि. हिनका मरणोपरान्त 1985 ई. मे 'जीवन यात्रा' (आत्मकथा, 1984) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ अलंकृत कएल गेलनि. 

हरिमोहन बाबूक कथा आ उपन्यास आधुनिक मैथिली गद्य केँ लोकप्रियताक शिखर पर पहुँचओलक. आधुनिक कालक ई सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक मानल जाइत छथि. हिनक 'द्विगारमन' ततेक लोकप्रिय भेल जे दुरगमनिया भार मे अन्य वस्तुक संग साँठय जाय लागल. हरिमोहन झाक रचना बहुतो अमैथिल केँ मैथिली सिखौलक. 

उपन्यास आ कथाक अतिरिक्त एकांकी, प्रहसन, निबंध, कविता आदि आन-आन विधा मे सेहो हरिमोहन बाबूक विलक्षण रचना छनि. हिनक रचना केँ भारतक अनेक भाषा मे अनुदित कएल गेल अछि. डॉ. झा अपन कथाक माध्यमे वेद, पुराण, सांख्य, दर्शन आदिक अनेकानेक रुढ़िवादी सिद्धांत केँ तर्क, जीवनक व्यवहारिकता आ तीक्ष्ण व्यंगवाण सँ ध्वस्त करैत सहजहि भेटैत छथि. 

हिनक कथाक मूल उद्देश्य मनोरंजनक संगहि मैथिल समाज मे व्याप्त रूढ़ि विचारधाराक उद्घाटन करब थिक. 'खट्टरकाकाक तरंग' एकदिस जतय हास्य-विनोदक सृष्टि करैत अछि त' दोसर दिस ओही हास्यवाण सँ रुढ़ि पर जबर्दस्त प्रहारो करैत अछि. हरिमोहन झाक सभ रचना एक पर एक आ कालजयी अछि. एखनो हिनक पोथी मैथिली मे सभ सँ बेसी कीनल आ पढ़ल जाइत अछि. प्रो. डॉ. हरिमोहन झाक निधन 23 फरवरी 1984 ई. केँ भ' गेलनि.

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