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चेतना समारोह मे मैथिली-मिथिलाकर्मीक भेल जुटानी

स्वाधीनता दिवसक अवसर पर महानगर कलकत्ताक उपनगरीय क्षेत्र रिषड़ा मे 'चेतना समारोह' आयोजित कएल गेल. मिथिला नव-चेतना समिति द्वारा नओम स्थापना दिवसक अवसर पर आयोजित एहि समारोह में संस्थाक सदस्य लोकनिक अतिरिक्त लेखक-कवि लोकनि ओ मिथिलाक कार्यकर्ता लोकनि नीक संख्या मे उपस्थित छलाह.


कार्यक्रमक आयोजन रिषड़ा रेलवे स्टेशन सं सटल 'रूपसी बांग्ला' सभागार मे भेल. एहि अवसर पर वार्षिक स्मारिका मिथिला नव-चेतना विमोचित भेल. संस्था दिस सं नव कार्यकारिणीक औपचारिक घोषणा कएल गेल. ज्ञात हो जे साल दिन पर एहि संस्थाक कार्यकारिणी अवश्यमेव बदलल जाइत रहल अछि.


कार्यक्रम मे साहित्यिक रामलोचन ठाकुर, नवीन चौधरी, लक्ष्मण झा सागर सहित वरिष्ठ मिथिला अभियानी कमलेश झा ओ रत्नेश्वर झा अपन उदगार व्यक्त केलनि. ओ लोकनि भाषा-साहित्य ओ क्षेत्रक जनचेतना सं जुड़ल पक्ष पर इजोत देलनि. 


मिथिमीडिया संपादक रूपेश त्योंथ वेब सेवाक 5 साल पूर्ण होएबा पर उपस्थित मैथिल लोकनि सं एहि माध्यमक संग जुड़बाक ओ सहयोग-समर्थनक आह्वान केलनि. ओ कहलनि जे आब युग स्मार्ट भेल गेल छै आ ऑनलाइन माध्यम बेस प्रभावी भेलैक अछि. पारंपरिक मीडिया संग ऑनलाइन मीडियाक इस्तेमाल समयक मांग छै.


उक्त सत्रक संचालन रंजीत कुमार झा 'पप्पू' केलनि. वक्ता कें आमंत्रित करबाक अपन अलग अंदाज सं ओ उपस्थित मैथिल लोकनि कें मंच सं जोड़ने रहलाह.


अंतिम सत्र मे कवि सम्मलेन आयोजित छल, जाकर सञ्चालन गंगा झा ओ अध्यक्षता लक्ष्मण झा सागर केलनि. कवि सम्मलेन मे उमाकान्त झा बक्शी, नबोनारायण मिश्र, गंगा झा, बिनय भूषण, मिथिलेश कुमार झा, आमोद कुमार झा, रंजीत कुमार झा 'पप्पू', विजय इस्सर, लक्ष्मण झा सागर ओ रूपेश त्योंथ कविता पाठ केलनि. 

बता दी जे मिथिमीडिया एहि कार्यक्रमक ऑनलाइन मीडिया पार्टनर छल.

#MithiEvents

मिथिमीडिया — MithiMedia 19 August 2017
स्वाधीनता संग्राम, मधुबनी आ गणेश बाबू

बाबा यौ...गांधीजी कें अहां देखने छियै? देश मे जखन सगरो अंगरेजक आतंक छल त’ अपनो गामक लोक डेराएल रहैत छल? एत्तहु ओ सभ जुलुम करैत छल? अहां कतेकटा रही जखन देश गुलाम छल? अहां लड़ाइ किए नै केलियै?

नेनहि सं अहीं सभ जकां हमरो साहित्य सं इतिहास धरि मे गुलामी सं अजादी धरिक खिस्सा पढाओल गेल. नाना प्रश्न नचैत रहैत छल. प्रश्नक अंबार आ जवाब देनिहार पितामहटा. 

जखन कखनो अजादीक बात अबैत छल, हुनक आंखि मे अलगे तेज आबि जाइत छलनि. ओ बेस गर्वित होइत बजैत छलाह, “गणेश भैया लड़ल छलाह अंगरेज सं. नान्हिएटा मे गोरका सभकें पानि पिया देने छलाह ओ. पूरा मधुबनी मे हुनक नाम चलैत छलनि. कहियो काल क’ ललका टोपीबला सिपाही अपनो गाम दिस अबैक. खोज-पुछारि क’ आपस चल जाइक. गणेश बाबू पर मोकदमा सेहो चलओने रहैक सरकार. एतबे नै गोली हुनका छूबि क’ निकलि गेल रहैक एकबेर. जान ओ उसरगिए रखने छलाह, तथापि बांचि गेल रहनि. एहि दिन धरि चेन्हांसी देखबैत छलाह हमरा.”

एतेक बजैत पिताहमक आंखि डबडबा जाइत छलनि. जिनगी भरि ओ खुदीराम बोस सनक गोलगला सिया क’ पहिरैत रहलाह. हुनका सं गप्प क’ लागि उठैत छल जे ई बेस निकट सं गुलामीक आगि आ अजादीक इजोत तपने छथि. एहि सं बेस किछु जनितहुं हुनका सं, से अवगति ता नै भेल.

मैट्रिक क’ क’ कलकत्ता एलहुं त’ ज्ञात भेल जे गणेश बाबू मैट्रिक करबा लेल कलकत्ता आएल छलाह. मधुबनीक वाट्सन स्कूल मे क्रांतिकारी गतिविधिक चलते हुनका आगूक शिक्षा लेल कलकत्ता आबए पड़लनि. कलकत्ता हुनका आओर पकिया क्रांतिकारी बना देने छलनि. एतय आबि ओ अनेक क्रांतिकारी लोकनिक संपर्क मे आबि गेलाह आ सशस्त्र क्रांतिकारी बनि गेलाह.

देश भरि मे अंगरेजी सरकारक विरोधक जुआरि आबि गेल छलैक. मैट्रिक पास क’ गणेश बाबू पुनः मधुबनी आबि गेलाह आ पूर्णकालिक स्वतन्त्रता सैनिक भ’ गेलाह. छोट-छोट उमेरक बच्चा सबहक एक दल कें ल’ काज शुरू क’ देलनि जे ‘बाल सेना’ कहबैत छल. दल कें ओ ट्रेनिंग सेहो देइत छलाह जे कोना गिरफ्तारी सं बचल जाए वा कोना पुलिस कें गच्चा देल जाए. कोना सरकार आ सरकारी तंत्र कें उछन्नर देल जाए.

1857 ई. केर पहिल विद्रोह सं मधुबनीक आंदोलनी लोकनि स्वतंत्रता संग्राम मे उल्लेखनीय भूमिका निमाहलनि अछि. मंगरौनी गामक पंडित भिखिया दत्त झा सं प्रेरित भ’ वीर कुंवर सिंह लड़बा लेल तैयार भेल छलाह. अंगरेज झा कें गिरफ्तार क’ लेलक आ हुनक घर कें तबाह क’ देलक. ओ वीर कुंवर सिंह केर राजपुरोहित छलाह.

1917 ई. मे गाँधीजीक चंपारण सत्याग्रह मे मधुबनीक लौकहावासी बौयेलाल दास ओ शिबोधन दास सक्रिय रूप सं भाग लेलनि. गांधीजीक डांडी मार्च मे कुशेश्वर स्थान केर बेढ गामक गिरधारी चौधरी (जनतबक अनुसार समूचा बिहार सं एकसर) भाग लेने छलाह.

एही सभक गहींर प्रभाव गणेश चन्द्र झा पर पड़ल छलनि. 1930 ई. केर नमक सत्याग्रह मे नमक क़ानून कें तोडैत एसडीओ कार्यालय कें समक्ष सर्वप्रथम गिरफ्तारी देने छलाह.

मधुबनी स्थित फ्रीडम फाइटर फाउंडेशनक अध्यक्ष सुभेश चन्द्र झा कहैत छथि जे गणेश बाबू अगस्त क्रांतिक नायक छलाह. ई क्रांति मिथिला कें हलचल सं भरि देने छल. मिथिलाक 128 क्रांतिकारी शहादति देने छलाह, जाहि मे मधुबनीक कुल 19 आंदोलनी अपन आहुति देलनि. 10 गोटे कें फांसी सुनाओल गेल छलनि, जाहि मे सं 2टा सपूत फांसी चढलाह.

मधुबनी मे अगस्त क्रांति (1942 ई.)क नेतृत्व गणेश चन्द्र झा क’ रहल छलाह. सूरज नारायण सिंह कें गिरफ्तार क’ दड़िभंगा पठा देल गेलैक. गांधीजी बंबइ मे ‘अंगरेज भारत छोड़ो’ आ ‘करो या मरो’ केर नारा देलनि. समूचा देश मे आंदोलनी सभ पर एकर व्यापक प्रभाव भेल. नेता सभ कें जेल मे बंद क’ देल गेल. मधुबनी जेलक फाटक तोडिक’ कैदी सभ बाहर आबि गेल छल. लोक गाम-गाम मे गणेश बाबू, सूरज बाबू  केर लोकप्रियताक गीत गाबए लागल छल –
“चलल गणेश तिरंगा ल’क’, दहकैत सूरज तेज प्रताप
अंगरेजक छक्का छुटै छै, हेतै भारत आब आजाद”

सूडी स्कूल ताहि दिन आंदोलनक केंद्र बनल छल. गणेश बाबू अनेक युवा क्रांतिकारी तैयार केने छलाह. जाहि सं अंगरेजी शासन कें भारी ड’र छलैक. हिनका गिरफ्तार क’ मधुबनी जेल मे बन्न क’ देल गेलनि. गांधीजीक आह्वान पर 10 अगस्त 1942 कें 11 बजे दिन मे गणेश बाबू जेलक फाटक तोडि क’ 88 बंदीक संग मुक्त भ’ भूमिगत भ’ गेलाह. भूमिगत रहैत मधुबनी थाना आ कचहरी पर कब्जा क’ तिरंगा फहरएबाक योजना बनाओल गेल.

14 अगस्त 1942 कें लगभग 5 हजारक संख्या मे किसान, मजदूर, छात्र सूडी स्कूल सं झंडा नेने थाना आ कचहरी दिस नारा लगबैत चलि पड़ल. आगू-आगू तिरंगा नेने गणेश बाबू चलि रहल छलाह. बैद्यनाथ पंजियार, इन्द्रलाल मिश्र, महावीर कारक, अनन्त महथा, भगवती चौधरी, तेजनारायण झा, राजकुमार पूर्वे, चतुरानन मिश्र, रामसुदिष्ट भगत, रामेश्वर दास, लक्ष्मी नारायण साह, मार्कंडेय भगत, महादेव साह, कामेश्वर साह आदि अनेक आंदोलनी भीड़क संग छलाह.

जुलूस जखन नीलम सिनेमा चौक लग पहुंचल कि गोली चलय लागल. गणेश ठाकुर आ अकलू महतो तत्क्षण शहीद भ’ गेलाह. गणेश बाबू पर बर्बर तरीका सं लाठी आ बन्नूकक कुन्दा सं प्रहार होमए लागल. भीड़ आओर बेसी उग्र भेल जा रहल छल. गणेश बाबू लहुलुहान भ’ अचेत खसि पडलाह. सिपाही हुनका घिसियबैत थाना अनलक. दारोगा राजबली ठाकुर निर्ममता पूर्वक हुनका पर बूट सं प्रहार करैत रहल. भीड़ पर गोली चलएबा लेल उद्यत दरोगा कें एक मुसलमान जमादार शांत करैत रहल, मुदा ओ मानबा लेल तैयार नै भ’ रहल छल. ताधरि दरभंगाक कलक्टर सैल्सबरी मधुबनी थाना पहुंचि दारोगा कें चेतौनी द’ शांत केलक.

पितामह भारी कंठ सं बाजि उठथि, “भैया कें हमरा सं बड्ड सिनेह छलनि. जा स्वस्थ रहलाह मधुबनी सं गाम आबथि. गाम हुनका आकर्षित करैत छलनि. डिस्ट्रिक्ट बोर्ड केर चेयरमैन पद सुशोभित केलनि ओ आ तैं चेयरमैन साहेब नामे ख्यात छलाह गाम मे. ने आब ओ चेयर रहल आ ने ओ मैन. देशभक्ति, अजादी, क्रान्ति...ई शब्द सभ आब नै धधकओबैत छैक लोक कें.”      

— रूपेश त्योंथ 
rupeshteoth.wordpress.com

मिथिमीडिया — MithiMedia 15 August 2017
मैथिलीक सेवा मे मिथिमीडिया पूरा कएलक 5 वर्ष!

आने भारतीय भाषा जकां वेब पर मैथिलीक स्थिति उत्तरोत्तर सुदृढ़ भेल गेल अछि. स्मार्टफोनक चलाचल्ती सोशल मीडिया पर मैथिलक सक्रियता बढ़ओलक त' मैथिली भाषा मे लिखल आखर सभ नजरिक सोझां आबए लागल आ फेर देखादेखी मैथिलीक प्रयोग बढ़ल गेल.

मात्र एक दशक पहिने वेब पर मैथिली बड्ड दुब्बर छल. बड्ड खोजने मैथिली मे एकाध ब्लॉग वा वेबसाइट भेटि जाइ छल. बेसी कंटेंट साहित्य आ व्यक्तिगत लेखनक रहैत छल. मुदा भाषाप्रेमी युवजन ओहू समय अपन मातृभाषा मे काज करबाक लेल अकुला रहल छलाह तैं खोजने किछु सामग्री भेटि जाइत छल.

साल 2008क 2 मइ छल. मैथिली दैनिक 'मिथिला समाद' केर कार्यालय मे हमर पहिल दिन छल. संपादक महोदय बातचीत करैत कहि देने छलाह जे अपने सभ एकटा बेस चुनौतीपूर्ण काज शुरू करय जा रहल छी. ने न्यूज एजेंसी, ने वेब कंटेंट आ ने कोनो तेहन लिखनिहार उपलब्ध अछि मुदा मैथिली मे दैनिक पत्र निकालबाक अछि. एही क्रम मे हम वेबसाइट सभ उधेशय लगलहुं. 'मिथिला समाद' लेल लेखन सहित कतिपय विभागीय काज करबाक बाद पलखति नहिए भेटै छल तथापि वेब पर मैथिली मे किछु लिखि रखैत रहलहुं.  

आइटी केर छात्र छलहुं आ पत्रकारक संसर्ग भेटल त' वेब पत्रकारिता आकृष्ट केलक. 'मिथिला समाद' कें वेब पर प्रचारित करब आ ओकर ब्लॉग अपडेट करय लगलहुं. बीच-बीच मे अपन व्यक्तिगत ब्लॉग सभ सेहो लिखल करी. पछाति साल 2010 मे एकटा दैनिक लेल मैथिली परिशिष्ट 'झलक मिथिला' संपादन करबाक अवसर भेटल. ओहि समय कने पलखति रहै छल आ हम वेब पर किछु ठोस करबाक दिशा मे सोचब शुरू क' देने छलहुं. एमहर मैथिली मे लेखन ओ क्रियाकलाप समानांतर रूप सं चलि रहल छल. 

जें हमर करियर संघर्षक ओ समय छल, राजस्थान पत्रिका सहित कतिपय मीडिया हाउस लेल काज करबाक अवसर भेटल, अनुभव भेटल. कखनो काल क' होइत छल, ई की क' रहल छी? हमरा आइटी सेक्टर मे कोशिश करबाक चाही. एही सभ समयक मन-मंथनक परिणाम 'मिथिमीडिया' छी. एतहि जा क' हम अपन किछु आत्मीय सहयोगी लोकनिक संग-सहयोग सं मिथिमीडिया लेल काज करब शुरू केलहुं.


'अत्यधिक प्रसन्नता भ' रहल अछि जे मैथिली वेब न्यूज़ पोर्टलक एक महत्त्वपूर्ण नाम "मिथिमीडिया" 15 अगस्त 2017 क' अपन पाँचम बर्ख पूर कएलक अछि. मैथिली भाषाक हलचल ओ हालचाल हेतु एक साकांक्ष समदियाक भूमिका निमाहैत मिथिमीडिया एक निष्पक्ष वेब पोर्टलक रूप मे मैथिली भाषानुरागी मध्य सुवासित होइत रहल अछि. प्रवासक जिनगी मे अर्थक सामंजस बैसबैत-बैसबैत लोक जतय अपसियांत रहैत अछि, ओत्तहि किछु युवा चेतनाक सक्रियताक बदौलैत मातृभाषा सेहो संवर्धित ओ संरक्षित भ' रहल अछि. एहि कड़ी मे रूपेश त्योंथ केर समर्पणता केँ कथमपि बिसरल नहि जा सकैत अछि. सफलतापूर्वक पाँच बर्ख पूर करबा लेल मिथिमीडिया ओ संपादक केँ हमर शुभकामना ओ बधाइ!' — मनीष झा 'बौआभाइ'

आइ मिथिमीडिया 5 साल पूरा क' लेलक अछि. आरम्भहि सं हम सभ साहित्य सहित ओ सभ समाद प्रसारित करब शुरू केलहुं जे वेब पर मैथिली मे उपलब्ध नै छल. साहित्य भेटि जाइ छल मुदा मिथिला-मैथिली-मैथिल सं जुड़ल समाद मैथिली मे तकने नै भेटै छल. 'मिथिमीडिया' मैथिली मे 'न्यूज पोर्टल' केर स्वरूप ल' क' आएल. पछाति बहुत लोक एहि पैटर्न कें अंगीकार केलनि आ मैथिली पत्रकारिता कें वेब पर स्थापित करबा मे भूमिका निमाहलनि. आइ-काल्हि ई व्यापक रूप ल' लेलक अछि.


'मिथिमीडिया मैथिली मे तेजी सं लोकप्रिय होइत न्यूज पोर्टल अछि, जे अपन कंटेंट कें ल' चिन्हल जाइत अछि.' — मिथिला दर्शन 

एहि 5 साल मे मिथिमीडिया अपन अलग पहिचान बनेलक अछि. अपन कंटेंट सहित ई यूजर एक्सपीरियंस मे बेटर अछि. हमरा लोकनि आरम्भहि सं भाषा शुद्धता सहित ओहि सभ क्षेत्र मे काज करैत रहलहुं अछि जाहि दिस आम पोर्टल वा पत्रकार लोकनिक धियान नै जाइ छनि. मिथिमीडिया केर #साहित्य #साक्षात्कारसीरीज ओ #इवेंटकवरेज सं जुड़ल पोस्ट कें बेस सराहना भेटल अछि त' एकर #मिथिइवेंट#मिथिबुक्स प्रोग्राम विशेष अछि.



मिथिमीडिया 5 वर्ष पूरा क' लेलक अछि. एकरा जियओने राखब एकटा बड़का चुनौती रहल अछि, धरि एतेक रास्ता तय केलक अछि से हमरा आत्मिक खुशी भ' रहल अछि. आगू आओर बेस चुनौती छै.

मैथिली मे काज करैत लगभग 13 साल भेल अछि, मिथिमीडिया पर 5 साल, मुदा कोना चलैए, कोना चलत पुछनिहार एकदम कम छै. जाहि अवस्था मे एखन पोर्टल अछि, ओहू अवस्था मे चलबैत रहब आ दैनिक अपडेट करब बिनु सहयोग-समर्थन कें संभव नै छै.

मिथिमीडिया कें जियओने रखबा लेल सालक लगभग 1 लाख टाका खर्चा छै. एतेक खर्च मे दैनिक 1-2 पोस्ट आ सोशल मीडिया एक्टिविटी संभव भ' सकैत छै. खर्चक भरपाइ लेल मिथिमीडिया पर विज्ञापन वा पार्टनरशिपक माध्यम सं मदति करबाक बाट खुजल अछि.

उक्त विषयक विशेष जनतब:

1. मिथिमीडिया कम सं कम 1000 टाका मोलक विज्ञापन स्वीकार करैत अछि जे मास भरिक लेल वेब पर रहैत अछि, यएह साल भरिक लेल 10000 टाका मे देखाओल जाइत अछि.

2. मिथिमीडिया संस्था ओ कार्यक्रमक एकबेरक न्यूज कवरेज ओ प्रमोशन कम सं कम 1000 टाका ओ एकसंग सालाना अनुबंध भेने 10000 टाका लेबाक प्रावधान रखने अछि. साल मे 12 कार्यकम सं बेसी भेने फराक चार्ज लागि सकैत अछि.

3. मिथिमीडिया 'बुक प्रमोशन' करैत अछि जाहि अंतर्गत 1 किताबक प्रमोशन वेब और सोशल मीडिया पर करैत अछि. बुक लांचिंग केर कवरेज ओ लेखक इंटरव्यू करैत अछि. एहू सेवा लेल कम सं कम 1000 टाका चार्ज कएल जाइ छै.

4. मिथिमीडिया #Sponsored पोस्ट सेहो देबाक प्रावधान रखने अछि, जाहि लेल कम सं कम 1000 टाका देने प्रोडक्ट, संस्था, अभियान ओ व्यक्तिक प्रमोशन पोस्ट ओ सोशल मीडिया माध्यम सं कएल जाइत अछि.

5. मिथिमीडियाक काज पसंद भेने ओ सहयोगक इच्छा भेने सीधे डोनेट क' सेहो एकरा मदति कएल जा सकैत अछि.

अनेको रचनाशील युवा मिथिमीडिया सं कंट्रीब्यूटरक रूप मे जुड़ल छथि आ पाठक लेल चुनल आ उपयोगी अपडेट उपलब्ध करबैत छथि. एहि प्लेटफॉर्म कें मजगूत करबाक लेल अपने सेहो मिथिमीडिया सं जुड़ि सकै छी. कंटेंट कंट्रीब्यूटर बनबाक हो, विज्ञापन देबाक हो वा कोनो तरहक पार्टनरशिप, सहयोग करबाक हो त' सोझे mithimedia@gmail.com पर मेल पठाबी.

चलू संगे किछु डेग जे वेब पर मैथिली कें बेहतरी दिस ल' जाएत. जय मैथिली!


— रूपेश त्योंथसंपादक, मिथिमीडिया 

मिथिमीडिया — MithiMedia
अजीत झा केर 3 गोट मैथिली कविता

दड़िभंगा जिलाक बड़की तरौनी गामक निवासी ओ आबू धाबी प्रवासी अजीत झा आइटी सेक्टर मे सेवारत छथि. लेखन ओ पठन-पाठन मे बेस रुचि छनि. हिंदी मे हिनक कविता संग्रह 'मेरा गांव मेरे खेत' प्रकाशित छनि. दोसर कविता संग्रह प्रकाशनाधीन छनि. हिनक कविता सभ अकनगर बुझना जा रहल अछि. यात्री-नागार्जुन संग गाम मे बिताओल क्षण कें संजोगने अजीत मैथिली लेखन दिस प्रवृत्त भेलाह अछि जे आह्लादकारी अछि.  – संपादक

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(1)

अन्हरिया राति

सांप-छुछुंदर, बांस आ बाती
डोका नुकाइ छल, कोनो चोरक भांति
पहिरने छल गांती, ओकर माथ पर आंटी
रस्ता देखल छल, कोनो पैघक भांति

मुरही आ लाइ, पड़ल छल बाटी
अपने रुसल छल, पिटै छल छाती
माय चिकरलै, पकड़ि कें बाटी
खेमए जनपिट्टा, की द' अबियौ टाटी

कुइद-कुइद कहै छल, गाँव हमर रांटी 
बुरहबा कें ओ, लगै छल नाती
नंगटे घूमै छल, लेपने छल नेटा
ओकरा कहै छल सब, बदरियाक बेटा

आब, ताड़ी पिबइए, घुल्टल रहइए
नशाक जोड़ पर, गीतो गबइए
याद अबइए हमरा, कर्रा कें माटि
ओहि मे खेलाइत, हम आ बुरहबा कें नाति

आब सोचै छी त' मोन पड़इए
छोटका कें सुख सं जे बड़का जरइए
कनी देर बुझलियै, जनउ आ जाति
गामक जीवन आ अन्हरिया राति

(2)

करेज डाहइत माय 

औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

हम अपन आंखि कें
नोर सं सजेलहुं
छातीक खून कें
दूध बनेलहुं
दिन-दिन आओर
हमर बौआ बरहैए
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

हमर जीवन नइ अछि
बौआ सं बढि कें
ई छौरा आएत
लंदन-फ्रांस सं पढि कें
पढए लेल कहियै त'
रुसि-रुसि पड़ाय
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

डिग्री जे लेलक
सौंसे डिग-डिगिया बजेलक
छाती फुलेलक
हमर इज्ज़त बरहेलक
नौकरीक नाम पर
आब, बॉम्बे- दिल्लीये ओगरैए
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

बच्चे से पोसलहुं
बुरहारी कें लाठी
कन्हा पर ल' जाएत
चढ़ाएत हमरा काठी
आब के' देखत हमर
नीक आ बेजाए
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

समय-बेगरता पर
संगे ओ रहितय
कतौ सं आबि कें
माय जे कहितय
चलू, ओकरे खुशी सं
हमर मौन जुराइए
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

नोरक ई खिस्सा
घरही भेटइए
विकासक कथा सब
फुइसे छटइए
देखियौ आ बुझियौ
विकासक सजाय
औरह मारइत मिथिला
करेज डाहइत माय

(3)

हे यौ ताल केलहुं, अहूं त'

बियाहक नाम सुनि
दौड़ गेलहुं
नान्हिटा गप्प पर
बौड़ गेलहुं
बियाह केलहुं त', सहू त'
हे यौ ताल केलहुं, अहूं त'

नाके तामस
टांगल छनि,
जीह त' हुनकर
दागल छनि,
हाथ धेलहुं त', बहू त',
हे यौ ताल केलहुं, अहूं त'

आब नइ खिसियाएब
कहै छी,
झूठेक घी किए
महै छी
अखनो नइ मानबै, कहू त'
हे यौ ताल केलहुं, अहूं त'


– अजीत झा 
ajit.jha31@gmail.com

मिथिमीडिया — MithiMedia 13 August 2017
शौचालय उपयोगक सीख देइत बाल कथा 'मुत्ती'
फोटो साभार : India Today

मध्याह्न भोजनक बाद सोहन क'ल पर जा थारी धोलक, कुर्रा केलक, मुंह पोछलक. थारी डबलूआ कें थमहा मुत्ती करबा लेल इसकूल भवनक पाछां गेल कि एकटा सांप कें फेंच काटि बैसल देखलक. ओकर मुत्ती सुटकि गेलै. ओ भागल-भागल डबलूआ लग आएल आ ओकरा ल' गेल सांप देखेबाक लेल. सांप एखनो बैसले छलै. कनिए काल मे इसकूलक आओर बच्चा सभक जुटानी होमए लगलै. सांप आब देखा नै रहल छलै तइयो बच्चा सभ जुटिते गेलै. किछु कालक बाद भीड़ कम होइत-होइत खतम भ’ गेलै.

किलास शुरू भ' गेलै मुदा डबलूक कोनो पता नै छल. सोहन ओकर बाट तकैत रहल. ओ चिंता मे पड़ल छल जे ओकर थारी डबलू रखने अछि. किलास ख़तम भ' गेलै मुदा डबलू नै एलै. सोहन डबलू कें तकैत-तकैत इसकूल भवनक पाछां आएल कि मुंह बौने रहि गेल. डबलू नोरे-झोरे कानि रहल छल. ओकर मुंह कारी झामर भेल छलै. सोहन कें बुझैत देरी नै भेलै जे ओकरा सांप काटि लेलकैए. ओ डबलू कें नेने नेने मास्टर साहब लग गेल आ सबटा खेरहा सुना टाहि पारि कानए लागल.

मास्टर साहब झट द' डबलूक जांघ कें गमछा सं कसि क' बान्हि देलनि. सोहन कें ब्लेड अनबा लेल किलास में भेजलनि. मास्टर साहब ब्लेड सं डबलूक आंगुर चीरि देलनि. डबलू बपहारि काटि रहल छल. मास्टर साहब मोटर साइकिल इसटाट केलनि आ सोहन कें बैसबा लेल इशारा केलनि. ओम्हर सं प्रधान शिक्षक डबलू कें मास्टर साहब आ सोहनक मध्य बैसा देलनि. प्रधान शिक्षक सोहन सं डबलू कें कसि क' ध' बैसबाक हिदायत देलनि.

डबलू कें कनैत देखि सोहन सेहो नोरे झोरे कानि रहल छल मुदा डबलू कें कसिया क' धेने छल. ओ ग्लानि सं भरि गेल छल. वएह ओकरा सांप देखबा लेल बजओने छलै. आइ जे ओ सांप देखबा लेल ओतेक बच्चा सभ कें एकट्ठा नै केने रहैत त' ई घटना नै होइतै. 

सोहन यएह सभ सोचिए रहल छल कि ओ सभ बेनीपट्टी अस्पताल पहुंचि गेल. डबलू बेहोश जकां भ' गेल छल. ओकर मुंह सं गाउज निकलि रहल छल. मास्टर साहब डबलू कें कोरा नेने डाक्टरक चैंबर मे ल' गेलाह. झटपट इलाज शुरू भ' गेलै. करीप आध घंटाक बाद मास्टर साहब बाहर आबि सोहनक माथ पर हाथ फेरैत ओकरा चाबस्सी देलनि. ओकर तत्परता सं डबलूक जान बांचि गेल छलै. संगहि मास्टर साहब शौचालय इस्तेमाल करबाक हिदायत देलनि. आइ ने ओ मुत्ती करबाक लेल इसकूल भवनक पाछां गेल रहैत आ ने एतेक किछु भेल रहैत!

— रूपेश त्योंथ 
rupeshteoth.wordpress.com

रचना साभार: मैथिली बाल पत्रिका 'बाल बन्धु'

मिथिमीडिया — MithiMedia 12 August 2017
हे सहोदर...राखी पाबनि पर बहिन तकै छथि बाट!

राखी पूर्णिमा भाइ-बहिनक प्रेमक पाबनि अछि. 21सम शताब्दी मे आब skype/hangout पर सेहो राखी बन्हाओल जाए लागल अछि मुदा एहि दिन बहिन भाइ कें राखी बन्हबा लेल बाट तकैत छलीह. ई गाम-घर मे एखनो एहिना देखल जाइत अछि.

साधन-संसाधन रहने आब लोक कें ताइदिन जकां बटतक्की नै रहै छै, तखन प्रेम त' प्रेमे होइ छै ओ जुग बदलने थोड़हि ने बदलै छै! 

एम्हर कएक दिन सं मैथिली गायिका पूनम मिश्राक गाओल ओ शिवकुमार झा 'टिल्लू' द्वारा लिखित ई गीत यूट्यूब ओ सोशल मीडिया पर लोकक धियान आकर्षित क' रहल अछि.

आउ, ई गीत सुनैत मिथिमीडिया दिस सं राखीक बहुत रास बधाइ ओ शुभकामना स्वीकार करी.



पूनम मिश्राक गीत-संगीत सुनबा लेल हिनक YouTube चैनेल Subscribe करी.


मिथिमीडिया — MithiMedia 5 August 2017
15 अगस्त कें रिषड़ा मे 'चेतना समारोह'

आने साल जकां एहू साल 15 अगस्त कें महानगर कोलकाताक उपनगरीय क्षेत्र रिषड़ा मे 'चेतना समारोह' आयोजित होएत. एहि अवसर पर स्मारिका विमोचन सेहो कएल जाएत. स्मारिका मे पर्याप्त साहित्यिक रचना प्रकाशित होइत अछि, जाहि सं साहित्यिक ओ पाठक लोकनि मे एहि स्मारिका कें ल' खूब जिज्ञासा रहैत अछि.

स्वतंत्रता दिवसक अवसर पर आयोजित होमएबला ई कार्यक्रम दिनक 4 बजे सं शुरू होएत, जाहि मे 'मिथिला नवचेतना समिति'क नव कार्यकारिणीक औपचारिक घोषणा कएल जाएत. 

कार्यक्रमक अंतिम सत्र मे कविगोष्ठी आयोजित होएत. गोष्ठी मे महानगर ओ उपनगरीय क्षेत्रक मैथिली कवि लोकनि भाग लेताह. एहि कार्यक्रम मे हुगली नदीक दुनू कात निवास केनिहार मैथिलीकर्मी लोकनिक जुटानी होइत अछि.

रिषड़ा रेलवे स्टेशनल 3 नं. फाटक सं सटले रूपसी बांग्ला (खाबार घर) प्रेक्षागृह मे 'चेतना समारोह' केर आयोजन राखल गेल अछि. ई कार्यक्रम मिथिला नवचेतना समितिक स्थापना दिवसक रूप मे मनाओल जाइत अछि. अवसर पर विद्वतजन अभिभाषण बेस महत्व रखैत अछि.



उक्त कार्यक्रम 'मिथिमीडिया' ऑनलाइन मीडिया पार्टनर अछि. अपने लोकनि आबि मैथिली-मिथिलाक प्रति चेतना जगेबाक एहि जाग मे समिलात होइ, से अनुरोध अछि. ज्ञात हो जे एही 15 अगस्त कें मिथिमीडिया अपन स्थापनाक 5 वर्ष पूरा क' रहल अछि.




मिथिमीडिया — MithiMedia
कृपया धियान देब...सुनू रेलवे टीसन पर मैथिली मे उद्घोषणा!
फोटो: गूगल सं साभार 
मिथिलाभरिक रेलवे टीसन पर मैथिली मे उद्घोषणा होएबाक चाही, ई आवश्यक छै. बहुतो स्थानीय यात्री हिंदी-अंगरेजी ठीक सं बुझबा मे असमर्थ छथि. हालांकि आब हिंदी-अंगरेजी शिक्षाक प्रसार आ मैथिलीक अवहेलनाक चलते स्थिति बहुत बदलि गेल छै. हिंदी नै बुझनिहार लोकक संख्या खूब कम भ' गेल अछि. तथापि मातृभाषाक महत्व सर्वोपरि होइत अछि. कोनो थोपल भाषा सं बेसी लोक मे मातृभाषाक आग्रह रहैत अछि से स्वभाविक.

मैथिली संवैधानिक भाषा अछि, संगहि रेलवे प्रावधानक अनुसार स्थानीय भाषा मे उद्घोषणा अनिवार्य अछि. रेल अधिकारी ओ जन चेतनाक अभाव मे मैथिली कें अवहेलित कएल जा रहल छल.

रेलवे टीसन पर मैथिली उद्घोषणा कें ल' अनेक मैथिली-मिथिला सं जुड़ल संस्था सभ प्रयासरत छल, फलस्वरूप मधुबनी ओ दड़िभंगा सहित क्षेत्रक किछु टीसन पर मैथिली मे उद्घोषणा शुरू भेल जे आब शिथिल भेल जा रहल अछि. कखनो मैथिली मे होइए त' कखनो नै. मने जे अवस्था अछि, मैथिली उद्घोषणा बन्नो भ' सकैत अछि जओं समय-समय पर मैथिली कार्यकर्ता एहि पर धियान नै देथि त'.

आउ एतय सुनै छी पूर्व मे रिकार्ड कएल मैथिली उद्घोषणा...




मिथिमीडिया केर YouTube चैनेल Subscribe करी. 



मिथिमीडिया — MithiMedia 2 August 2017
मैथिली लघु फिल्म 'कवि कल्पना' मुंबइ मे प्रदर्शित

बहुप्रतीक्षित मैथिली लघु फिल्म 'कवि कल्पना' आइ मुंबइ मे प्रदर्शित भेल. अंधेरी (पश्चिम) केर शाकुंतलम थियेटर मे लगातार तीन शो देखाओल गेल. भास्कर झा ओ रोशनी झा केर मुख्य भूमिकाबला ई लघु फिल्म यूट्यूब पर सेहो रिलीज कएल जाएत.

विकास झा निर्देशित ई लघु फिल्म मे काव्यात्मक संवाद अछि जे मैथिली मे एहन प्रयोग पहिल खेप भेल अछि संगहि देशभरिक फिल्म मे एहि तरहक संवाद विरल देखल जाइत अछि.

मुख्य पात्र कवि छथि आ कथा हुनके ल' क' सजाओल गेल अछि त' संवाद सेहो कविते रूप मे राखल गेल. ई एहि फिल्म कें विशेष बना देइत अछि.


25 मिनट केर एहि लघुफिल्म केर पार्श्वध्वनि देने छथि प्रवेश मल्लिक त' छायांकन, फिल्मांकन ओ संवाद विकास झा केर छनि. एडिटर मो. सुहेल ओ ध्वनि डिजाइन केने छथि शंकर सिंह.

जनतबक अनुसार एक्सट्रीम्ज़ पिक्चर ओ महेश्वर फिल्म्स इंटरनेशनल केर संयुक्त प्रस्तुतिबला ई फिल्म लगभग 150 दर्शक देखलनि. एहि अवसर पर बॉलीवुड अभिनेता नरेन्द्र झा सेहो उपस्थित भेलाह. 

ज्ञात हो जे निर्देशक विकास झा एहि सं पहिने मैथिली फिल्म 'मुखियाजी' सं बेस चर्चित भेल छलाह. मैथिली सिनेमा मे नवीन प्रयोग लेल अकानल जाइत छथि. 

मिथिमीडिया — MithiMedia 29 July 2017
अकासतर बैसकी: मेघ बरसैत रहल, कविता बिहुंसैत रहल

कोलकाताक न्यू टाउन अवस्थित इको-पार्क (प्रकृति तीर्थ) मे बरसैत मेघक संग अकासतर बैसकी आयोजित भेल. बीतल रवि 23 जुलाइ कें दिनक 3 बजे सं रमणीय उद्यान मे कवि लोकनि कविता पाठ केलनि.

महानगर मे कएक दिन सं लगातार बरखा भ' रहल अछि आ अपतकाल जकां स्थिति बनल अछि मुदा तइयो पूर्व घोषित बैसकी भेल आ दूर-दूर सं कवि लोकनि उपस्थित भ' प्रतिबद्धता देखओलनि जे अनुकरणीय अछि.


वैज्ञानिक ओ साहित्यकार डॉ. योगेन्द्र पाठक वियोगी केर अध्यक्षता में बैसकी आयोजित भेल. जाहि मे किरण झा, रानी मिश्र, राजीव रंजन मिश्र, भास्कर झा, चंदन कुमार झा, सीतेश कुमार झा ओ रूपेश त्योंथ कविता पाठ केलनि.


एहि बैसकी मे आन कविक रचना पढ़बाक सेहो विधान अछि फलतः अश्विनी कुमार तिवारी द्वारा पठाओल कविता भास्कर झा पढ़लनि त' रूपेश त्योंथ साहित्य अकादेमी सं पुरस्कृत कवि चंदनकुमार झाक पुरस्कृत पोथी 'धरती सं अकासधरि' मे सं कविता पढ़लनि. ओतहि चंदन कुमार झा हैदराबाद सं शारदा झा केर कविता संग्रह 'प्रेम कविताक बाद' मे सं कविता पढ़लनि.

बैसकी मे रानी मिश्र जे मैथिली सं स्नाकोत्तर छथि पहिल खेप उपस्थित भेलीह आ अपन कविता पाठ केलनि. बैसकीक संयोजक भास्कर झा धन्यवाद ज्ञापन केलनि.

मिथिमीडिया — MithiMedia 25 July 2017

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