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सजग कविता संस्कृतिक अधिवेशन संपन्न

सजग कविता संस्कृति केर तेसर अधिवेशन दिनांक 29-30 दिसंबर केँ अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न भेल. उद्घाटन दीप जरा केँ प्रो. भीमनाथ झा केलनि. ओकरा बाद अजित आजाद स्वागत भाषण केलनि आ फेर अरुणाभ सौरभ एही सजग कविता संस्कृति आंदोलन पर विस्तार सं चर्चा केलनि. फेर एही विविध गतिविधि सँ जुड़ल वैचारिक आधार पत्रक लोकार्पण भेल. फेर वैचारिक सत्र प्रारंभ भेल - 'समकाल मे प्रतिरोध आ साहित्य संस्कृति'. विषय प्रवर्तन केलनि डॉ कमलानंद झा 'विभूति'. प्रतिरोध केर समस्त आयाम केँ ओ सोझाँ रखलनि. अध्यक्षता प्रो. विद्यानन्द झा (कोलकाता) केलनि. 

प्रो. भीमनाथ झा कहलनि जे मैथिली साहित्य मे प्रतिरोधक ज़मीन बड़ पुरान अछि. कवि रमेश विषय केँ आगू बढ़ेलनि. वैचारिक गहमागहमी सँ भरल रहल ई सत्र. संचालन करैत अरुणाभ सौरभ कहलनि जे संस्कृति आ साहित्य केर मूलधर्म थिक प्रतिरोध.
चाहक विराम केर उपरान्त दोसर सत्र 'समकाल मे सर्जना' केर अध्यक्षता उदयचंद्र झा विनोद केलनि. एही सत्र मोहन यादव, विभूति आनंद आ नारायण जी वक्ता छलाह. ई सत्र समकालीन मैथिली कविता आ युवा पीढ़ीक कविता पर अपन ध्यान झिकलक. विनोद जीक कहब छलनि जे मैथिली कविताक स्वर एखन बहुविध अछि. विभूति आनंद युवा कविक रचना सँ उदाहरण द' गप्प केँ सोझाँ राखलाह. मोहन यादव विषय केँ आर खोललनि. नारायण जी युवा पीढ़ीक कविता पर विस्तार सँ गप्प रखलनि. संचालन करैत अजित आजाद कहलनि जे एहन गहींर कविता केंद्रित चर्च मैथिली मे हम नहि सुनने रही.

साँझ मे 'आगि लग कविता' शुरू भेल. जाहि मे दू दर्जन महत्वपूर्ण रचनाकार अप्पन बेस्ट कविताक पाठ केलनि. दूटा बड़का धधरा जरा केँ ई सत्र शुरू भेल जकर अध्यक्षता विभूति आनंद केलनि. युवा कवि लोकनि केर दमदार उपस्थिति रहल- गुफरान जीलानी, अंशुमान सत्यकेतु, मलयनाथ मंडन, दीपनारायण विद्यार्थी, अरुणाभ, सतीश साजन, आनंद मोहन झा, दयाशंकर, ऋषि वशिष्ठ, सच्चिदानंद सच्चू, कंचन कर्ण, गोपाल झा अभिषेक केर संग संग नारायण जी, विद्यानन्द झा प्रभृति कवि अपन कविताक ताप सँ आगि केँ आर पजारलक. लगभग 400( चारि सए) श्रोता समूहक बीच ई सत्र भेल. संचालन- अजित आजाद आ पढ़ल गेल कविता पर टिप्पणी- डॉ कमलानंद झा विभूति देलनि. धन्यवाद ज्ञापन करैत डॉ दमन कुमार झा कहलनि जे मधुबनी मे एहन वृहत् आ गंभीर आयोजन हमरा सभक सोझाँ नहि भेल छल.

पहिल दिनका सभटा कार्यक्रम जानकी मैथिली पुस्तक केन्द्र गौशाला चौक पर भेल. कतेको श्रोता हॉल भरि गेलाक कारण ठाढ़ भ' कार्यक्रम मे उपस्थित छलाह. 

 'सजग कविता संस्कृति'क तेसर आ पहिल दिनक अंतिम सत्र- 'आगि लग कविता' मे अजित आजाद, ऋषि बशिष्ठ, आनंद मोहन झा, नारायणजी, विद्यानंद झा, सच्चिदानंद सच्चू, सतीश साजन, गोपीरमण, मोहन यादव, अरुणाभ सौरभ, अंशुमान सत्यकेतु, अमल झा, दयाशंकर मिथिलांचली, रामेश्वर निशांत, दीप नारायण विद्यार्थी, सुभाष स्नेही, गोपाल झा अभिशेष, अवधेश झा, विनय विश्वबंधु, रमेश, गुफरान जिलानी आदि लोकनि भाग लेलनि.

अध्यक्षता विभूति आनंद केलनि त' समीक्षकीय वक्तव्य कमलानंद विभूति ओ धन्यवाद ज्ञापन दमन कुमार झा केलनि. एकर संगहि मैथिली कविता आ साँस्कृतिक आन्दोलन कें समर्पित संगठन सेहो निर्मित भेल.

सजग कविता संस्कृति केर तेसर अधिवेशनक पाँचम सत्र 'सांस्कृतिक आदोलनक हस्तक्षेप'. एही मे नित्यानंद गोकुल, मनीष अरविन्द आ अरुणाभ सौरभ अपन अपन गप्प सँ सांस्कृतिक आंदोलन केर विविध हस्तक्षेप पर प्रकाश देलनि. अध्यक्षता श्याम दरिहरे केलनि आ संचालन अजित आज़ाद केलनि.

छठम सत्र - मैथिल मोसलमान: स्थिति सन्दर्भ आ दिशा मे वक्ता- मुख्तार आलम, गुफरान जीलानी, सच्चिदानंद सच्चू आ दमन कुमार झा अपन बात रखलनि. संचालन- अजित आज़ाद ओ अध्यक्षता-रमेश केलनि. मैथिल मोसलमान आ मिथिलाक मोसलमान पर एही सत्र मे गहींर चर्च भेल.

सातम सत्र-'मैथिली नाट्य लेखन परम्परा' विषयक छल जाहि मे एकल व्याख्यान - डॉ कमलमोहन चुन्नू केर छलनि. संचालन- ऋषि वशिष्ठ केलनि. एहि सत्र मे मैथिलीक नाटक लेखन पर समग्रता मे गप्प भेल.

आठम आ अंतिम सत्र ''मैथिली कविताक समकाल'' छल जाहि मे 10टा बेजोड़ कविक कविता पाठ भेल. अध्यक्षता: श्याम दरिहरे  ओ संचालन-दिलीप कुमार झा केलनि. कविगण- अंशुमान सत्यकेतु, दीप नारायण विद्यार्थी, गुफरान जीलानी, प्रजापति ठाकुर, अजित आजाद, पंकज सत्यम, गोपाल झा 'अभिषेक', मैथिल प्रशांत, सतीश साजन कविता पढ़लनि ओ समापन यात्रीजीक कविता 'अंतिम प्रणाम' केँ चुन्नू भाइ द्वारा तेहन भावपूर्ण प्रस्तुति भेल जे सभ केँ कना देलक.

— अरुणाभ सौरभ

मिथिमीडिया — MithiMedia 7 January 2017
मैथिली व्यंग्यक एक उपलब्धि ‘खुरचनभाइक कछमच्छी’

तीत वस्तु कें मधुर चासनी मे बोरि प्रस्तुत करबाक विधि भेल व्यंग्य. जेना नेना कें आदक रस पियेबाक हेतु ओहि मे मधु मिलाओल जाइछ तहिना राज-समाजक कटु सत्य कें, ताहि मे सुधारक अपेक्षा सं, रुचिगर रूपें कहबाक विधा थिक व्यंग्य. ई गद्य किंवा पद्य कोनो तरहें भ सकैत अछि. व्यंग्य पढ़ैत काल मन मे भले गुदगुदी लागओ, धरि पढ़ि गेलाक बाद मस्तिष्क पर चोट सन अनुभव होइछ. एकरा माध्यमे मनुष्यक विचार, व्यवहार ओ व्यवस्थाक विभिन्न विडंबना कें सुधारबाक ओ जड़ता कें तोड़बाक चेष्टा कएल जाइछ.

मैथिल स्वभावे सं विनोदी होइत छथि. हंसी-ठट्ठाक नान्हि सं नान्हि अवसर ओ गमाबए नहि चाहैत छथि. एहि लेल परंपरागत रूपें सेहो कइएक अवसर ओ संबंधक विधान भेल अछि. से, एहन परिवेश नहि रहने गोनू झा नहि भ’ सकैत छलाह. एखनो हज्जारो गोनू झा विभिन्न भेष मे गामे-गाम भेटि जएताह. आ से हास्य-विनोदक क्रम मे व्यंग्य सेहो भेटैत रहत. खास क’ मैथिल समाज मे सोझ उक्तिक संगहि वक्रोक्तिक खूब प्रयोग होइछ आ अधिकांश वक्रोक्ति मे व्यंग्य निहित रहैछ.

मुदा, जखन व्यंग्य रचनाक बात होइत अछि त’ से एतेक सोझ-सरल नहि अछि, अपितु आन कइएकटा विधा सं बेसी कठिनाह अछि. आ ताहू पर व्यंग्य यदि ककरो रोजीना लिखय पड़इ तखन त’ आर बेसी झंझटियाह. से, एहने कठिन आ झंझटियाह काज करब गछलनि रूपेश त्योंथ.

जखन मैथिली दैनिक मिथिला समाद मे काज करैत रहथि त’ पत्रक हेतु नियमित व्यंग्य लिखबाक भार उठओलनि आ तकरा कुशलतापूर्वक निमाहलनि. ई नवकृष्ण एहिकक छद्म नामे व्यंग्य स्तंभ खुरचनभाइक कछमच्छी नियमित भ’ लिखैत रहलाह.

मैथिली मे व्यंग्य ओहुना बड्ड कम लिखल जाइत अछि. आ सेहो दैनिक रूपें व्यंग्य लेखन त’ गनले-गूथल भेल अछि. हमरा प्रसन्नता अछि जे रूपेशजी 'मिथिला समाद' मे छपल अपन व्यंग्य सभ मे सं पचास गोट बीछल व्यंग्यक एकटा संग्रह खुरचनभाइक कछमच्छी (स्तंभहिक नामे) शीर्षक सं प्रकाशित करबओलनिहें. मैथिली व्यंग्य साहित्य हेतु ई बड्ड सुखद बात थीक.

एहि संग्रह मे खुरचनभाइ मुख्य पात्र छथि. आ अपन समाज, राष्ट्र सं ल’ परदेश धरिक विभिन्न घटना, व्यवहार आ विचारक विडंबना पर कछमछाइत छथि तथा नहि रहि होइ छनि त’ चोटगर प्रतिक्रिया देइत छथि. एहि मे हुनक सहायक पात्रगण मे लेखकक अतिरिक्त सुटकुन, सुगना, बिल्टू, बिन्देसरा, फसादी, सुट्टा, गुलटन आदि प्रमुख अछि. खुरचनभाइक संगहि आन पात्रक नाम सभ मिथिलाक बेस प्रचलित पारंपरिक नाम सभ अछि आ ई नामहि सं व्यंग्य-विनोदक अटगर लगैत अछि. खुरचनभाइक चिंतन आ ताहि पर व्यंग्य मे मैथिलक कुटचालि, हड़ताल, दहेज, भ्रष्टाचार, ईष्या, ओछ राजनीति, महगी, पड़ोसी देशक चालि-प्रकृति, अंतरराष्ट्रीय घटना आदि विभिन्न तरहक बिंदु सभ अछि जे सामान्य पाठक कें आकषित करैत अछि. एहि मे विभिन्न नेता पर फेकल जाएबला चप्पल-जूताक चर्चा सेहो अछि, त’ गामघर मे हांसू-खुरपी-लोटा आदि आवश्यक वस्तु मांगि क’ ल’ जाएब आ तकरा हेरा देबाक प्रवृत्ति पर व्यंग्य सेहो अछि.

व्यंग्य रचनाक शीर्षक सेहो खास महत्व रखैत अछि. प्रस्तुत संग्रहक किछु शीर्षक देखू जे कतेक प्रासंगिक अछि, जेना-चुप्प सुटकुनमा, टेबुल-कुर्सी सब पास, शोकतंत्र मे, नेताजीक नेत, उन्नत भेल अछि घेंट, पद्मश्री वा पैसाश्री, जूता न्यायक बेर, जेबी मे जोगार, मंगला मंगलक की, हुहुआइत जमाना, नमरा देलक नमरी, भगवान देलनि खौंसी इत्यादि.

एहि संग्रह मे ठेठ आ बातचीतक शब्दावलीक नीक प्रयोग भेल अछि. मैथिलीक वाक्य विन्यास, लोकोक्ति आ मोहाबराक प्रयोग चिक्कन अछि. मुदा सभ सं महत्वपूर्ण अछि गंभीर बात कें चौल बना कहि देब आ ताहि मादें पाठक कें सोचबा पर बाध्य करब. संगहि दैनिक जीवनक छोट-छोट विडंबना कें व्यंग्यक माध्यमे उजागर करब. लोकोक्तिक किछु उदाहरण देखू – दियाद आ दालि जते गलय तते नीक, कुकुरक नांगरि कतहु सोझ भेलैक अछि. अन्हराक जगने की...आदि.

मैथिलीक अप्पन वाक्य विन्यास ओ छटा बेस उजियाएल अछि. एकरो किछु उदाहरण देखू – तमसायल भेल घुरैत रहैत छी, टीक नब्बे डिग्रीक कोण बनबैत ठाढ़ भ’ जाइत छलनि, अहूं कें लगैत अछि जेना जीबिते भरि कष्ट अछि, जूता पहिरलनि से त’ नीके मुदा लुंगी-गंजी पहिरने भाइक पएर मे जूता कोनादन लगैत छल, हमर करेज पिसिया मसीन जकां धक-धक करय लागल, इत्यादि.

एहि व्यंग्य संग्रहक मादें कहि सकैत छी जे मैथिली व्यंग्यक ई एकटा उपलब्धि थीक. एकर भाषा, शिल्प, शब्द, वाक्य-विन्यास, कथाक परिवेश, कथोपकथनक शैली आदि दृष्टिएं ई मिथिला समाजक लग मे अछि त’ विषयक दृष्टिएं एहि मे विविधता छै. दरबज्जा, टोल, गाम, समाज, प्रदेश सं होइत राष्ट्र आ विश्वक चिंतन एहि मे छै. मैथिलक उकठपना छै, गप्प मारबाक प्रवृत्ति छै, बाट छेकबाक प्रकृति छै आ एहि सभटापर व्यंग्य क’ ताहि सं उप्पर उठबाक लक्ष्य छै. समस्त रचना शीर्षक सं अंत धरि संपूर्ण अर्थ मे व्यंग्य अछि. एकर अवरण रेखाचित्र संतोष मिश्रक बनाओल छनि जे एहि संग्रहक हेतु बेस आकर्षक आ उपयुक्त अछि.

एहि समस्त सुखद विशेषताक संग एकटा प्रमुख कमी अछि जे समस्त व्यंग्य रचना धरगर नहि बनि सकल अछि. ओना, ई कमी दैनिक स्तंभ लेखन मे स्वाभाविक थिक, से बात फराक. ताहि संगे बहुत रास पाठक कें एहि मे प्रयुक्त किछु शब्दक वर्तनी पर आपत्ति भ’ सकैत छनि, से मुदा व्यंग्य-प्रवाह कें अबाधित रखबाक हेतु भेल अछि. वाक्य सभ नमहर बनि गेल अछि आ पाराग्राफ सेहो बहुत कम देल अछि, एहि दिस धियान देल जा सकैत छलैक. एहि संग्रहक हेतु रचनाकार कें अशेष शुभकामना देइत छिअनि.

पोथीः खुरचनभाइक कछमच्छी
विधाः व्यंग्य
लेखकः नवकृष्ण ऐहिक 
प्रकाशकः मैलोरंग, दिल्ली (2015)
कुलपृष्ठः 144
दामः 120 टाका


समीक्षा: मिथिलेश कुमार झा

मिथिमीडिया — MithiMedia 15 December 2016
मैथिली साहित्य उत्सव : एहि पार, ओहि पार

जाड़ खसल अछि. उत्सवक दौर शुरू भ' रहल अछि. मैथिली भाषा-साहित्य कें केंद्र क' विद्यापति पर्व समारोह होइत रहल अछि आ से व्यापक स्तर पर. गाम-गाम सं शहर-शहर धरिक विद्यापति समारोह खूब चर्चा मे रहैए.

एम्हर आबि क' लिटरेचर फेस्टिवल से ट्रेंड मे छै. विश्व भरि मे साहित्य उत्सव मनाओल जा रहल अछि. एहना मे मैथिली कोना ककरो सं पाछू रहत. एखन धरि दू बेर लिटरेचर फेस्टिवल मना चुकल मैथिली लेखक संघ,पटना तेसर खेपक आयोजनक दिवस घोषित क' देलक अछि. आयोजनक कार्यकारी विनोद कुमार झा जनबैत छथि जे तेसर आयोजन 17, 18 ओ 19 फरवरी 2017 कें होएत.

ओतहि बेस दिन सं ओहि पार मिथिला मे उत्सवक सुगबुगाहटि देखल जाइत छल. साहित्यिक अजित आजाद आह्लादित होइत जनतब देलनि जे जनकपुर मे सेहो 9, 10 ओ 11 दिसंबर 2016 कें लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित होएत.

दुनू लिटरेचर फेस्टिवलक दिवस सार्वजनिक भेला उपरान्त साहित्यिक वर्ग लोकनि मे कार्यक्रम विवरण जनबाक उत्सुकता देखल जा रहल अछि. ई आयोजन मैथिली साहित्य लेल कतेको अर्थ मे बेस महत्वक होइत अछि.

मिथिमीडिया — MithiMedia 6 November 2016
डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी पर संगोष्ठी

नव दिल्ली: आइ मिथिला राज्य आंदोलनक आधारस्तंभ डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी दिवस पर 5 सितंबर कें मिथिला चौक, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली मे एकटा संगोष्ठीक आयोजन कएल गेल। संगोष्ठीक विषय छल ‘‘लखनजी : व्यक्तित्व ओ कृतित्व।’’ कार्यक्रमक अध्यक्षता अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक प्रो. अमरेंद्र झा, संचालन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक वरिष्ठ अभियानी श्री शरत झा, मुख्य वक्ता विश्व मैथिल संघक अध्यक्ष श्री हेमंत झा एवं धन्यवाद ज्ञापन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कोषाध्यक्ष श्री संजीव सिन्हा कएलनि। सब मैथिल अभियानी लखनजीक चित्र पर पुष्पांजलि कए क’ हुनका नमन कएलनि।

कार्यक्रमक प्रारंभ मे लखनजीक विस्तृत परिचय लेल वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री मनोज झा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘लक्ष्मण झा’ सं हुनकर व्यक्तित्व पर आ अ.भा. मिथिला पार्टीक युवा नेता श्री रोहित यादव लखनजीक कृतित्व पर पाठ पढ़ि’क सुनौलनि। कार्यक्रम मे लखनजीक संक्षिप्त परिचय पर केंद्रित एकटा परचा सेहो वितरित कएल गेल।

संगोष्ठी मे विभिन्न संगठन सं जुड़ल पदाधिकारी लोकनि अपन विचार रखलनि। जाहि मे मैथिली साहित्य महासभाक उपाध्यक्ष श्रीमती बबीता झा, आप पार्टीक पूर्वांचल शक्ति संयोजक श्री नीरज पाठक, मैथिलीजिंदाबाद पाक्षिक पत्रिकाक संपादन सहयोगी श्री हरिशंकर तिवारी, अ. भा. मिथिला पार्टीक नेता श्री बीरबल यादव, मिथिला राज्य संघर्ष समितिक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शैलेंद्र झा, मैथिली साहित्य महासभाक सचिव श्री कंत शरण, वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री प्रसून झा एवं मैथिल मंचक पदाधिकारी श्री मणि भूषणजी राजूक संबोधन उल्लेखनीय अछि।

वक्ता सब एक स्वर मे लखनजी कें प्रखर मैथिल अभियानी आ उच्च कोटिक विद्वान बतबति कहलनि जे ओ ‘सादा जीवन-उच्च विचार’क प्रतिमूर्ति आ महान् त्यागी एवं सारस्वत साधक छलाह। ओ मिथिला प्रांतक निर्माण आ मातृभाषा मैथिलीक उत्थानक लेल जीवनपर्यंत संघर्षशील रहलाह। लंदन विश्वविद्यालय सं ‘मिथिला एंड मगध’ पर पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त क’ कैंब्रिज तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय मे अध्यापन कार्यक लेल निमंत्रण कें छोड़ि ओ मिथिला उत्थानक लेल आपस अएलाह। लखनजीक मिथिला ओ मैथिलीक संबंध मे 15 गोट पोथी मैथिली, हिंदी, संस्कृत आ अंगरेजी मे प्रकाशित छनि। एकर अतिरिक्त अंगरेजी मे 28, संस्कृत मे 7, मैथिली मे 6 आ हिंदी मे 10 गोट पोथीक पांडुलिपि सुरक्षित राखल छनि।

वक्ता सब एहि बात पर जोर दैत कहलनि जे सब मैथिल संगठन मिलि क’ मिथिला राज्य निर्माणक सपना साकार करय, इएह लखनजी कें वास्तविक श्रद्धांजलि होएत।

मिथिमीडिया — MithiMedia 6 September 2016
मैथिली फिल्म 'राखी के लाज' केर ट्रेलर रिलीज

मैथिली फिल्म दर्शक लेल खुशखबरी अछि. नरेश मंडल केर मैथिली फिल्म 'राखी के लाज' शीघ्र रिलीज भ' रहल अछि. पारिवारिक विषय-वस्तु पर बनल एहि फिल्म केर ट्रेलर रिलीज भ' गेल अछि. 

प्रोड्यूशर सुरेश मंडल केर ई फिल्म आनंद फिल्म प्रोडक्शन हाउस केर बैनर मे बनल अछि. फिल्म राम रसीला, आशुतोष सागर, नरेश मंडल, मंजुश्री दुबे आदि कलाकार सं सजल अछि.

मिथिमीडिया — MithiMedia 22 August 2016
युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (4)

एम्हर हमरा लोकनि होटल विदा भेलहुँ, ओम्हर मेघ सेहो घरमुँहा भेल. बरखाक आशंका निर्मूल साबित भेल. फ्लैग सेरेमनी छोड़ि कऽ अयबाक हमरा लोकनिक पश्चातापक आगिसँ प्रायः टेम्पूक ड्राइवरक हृदय पघिल गेलैक. ओ बिनु पुछनहि-आछने अपन गाड़ी अगरतलाक हेरिटेज पार्कक मुँहपर ठाढ़ करैत बाजल- ई पार्क घुमि लिअह, सभ किछु देख लेब. हम जाइत छी. अहाँ लोकनिक होटल एतयसँ मात्र पाँच मिनटक दूरी पर अछि. पयरहि चल जा सकैत छी.

हमरा लोकनि यंत्रवत् ओकर अनुदेशक पालन कयल. टिकट कटाय पार्कमे प्रवेश कयल प्राकृतिक सुषमा सम्पन्न ई पार्क वस्तुतः समस्त त्रिपुराक प्रतिबिम्ब अपना आँचरमे नुकओने छल. एतय राज्यक सभ प्रमुख पर्यटन स्थलक रिप्लिका निर्मित छैक. पार्क घुमैत-घुमैत बेस थाकि गेल रही हम सभ. मुदा मुखमण्डलपर ठेहीक बदला संतोषक भाव छल जे नहि असल तँ डुप्लीकेट तँ देखलहुँ!

साढे सात बजेसँ डिनर टेबुल सभपर चहल-पहल बढ़य लागल रहैक भरि दिनुका थाकल-ठेहिआयल हमहूँ विचार कयलहुँ जे सवेर-सकाल भोजन कए आराम करब. आठ बजे भोजनोपरान्त, रिसेप्सनक सोझाँमे बनाओल बैसकीपर बैसि अखबार उनटाबय लगलहुँ. हमरा ओतय बैसल देखि किछु जिज्ञासु साहित्यकार सभ सेहो आस-पासमे एकाएकी जुमय लगलाह. नओ बजैत-बजैत बेस जमघट लागि गेल रहैक. करीब पन्द्रहो भाषाक प्रतिनिधि ओतय बैसल रहथि. क्रमशः वातावरणसँ औपचारिकताक धोन्हि छँटय लागल. परिचय-पातसँ प्रारम्भ भेल सम्वाद, आत्मीयताकेँ अंगीकार करय लागल. दस बजैत-बजैत हँसी-मजाक, गप-ठहक्का आ गीत-नाद चारूकात अनुगुंजित होमय लगलैक. फेर तँ सुतलाहा सभ सेहो उठि-उठि अबैत गेलाह. गोलमे सन्हिआइत गेलाह. करीब अढ़ाइ बजे भोरबामे जखन बैसकी उसरल तँ “विभिन्न भाषाक प्रतिनिधि युवा साहित्यकार” सभ “भारतीय भाषाक युवा-साहित्यकार” बनि चुकल छलाह. गुजरातीक राम मोरी, सिन्धीक रेखा पोहानी, अंग्रेजीक आशिया जहूर, कोंकणीक गोरक सिरसत, बंगलाक प्रशान्त सरकार, नेपालीक पवित्र लामा, ओड़ियाक ज्ञानी देवाशीष मिश्रा, कश्मीरीक साबिर मागामी ओ कतिपय अन्यान्य भाषाक साहित्यकार हमर अभिन्न बनि गेल छलाह.

अगिला दिन 12.30सँ हमरा लोकनिक काव्यपाठक सत्र निर्धारित छल. असमिया, बोडो, बांगला, चकमा, मणिपुरी, मोग, नेपाली, पंजाबी आ सिन्धी भाषाक कविलोकनिक संग हमरा कविता-पाठ करबाक छल. बंगला कवि कल्याण गुप्ताक अध्यक्षतामे सत्र आरम्भ भेल. एक-एक कऽ कवि लोकनि कविता पढ़य लगलाह. भाषासँ अपरिचितो श्रोता-समाज भावक सूत्र धरबामे समर्थ छलाह. भाव-सम्प्रेषणीयताक बाटमे जँ कोनो बाधा अबैत छल तँ तकरा अनुवाद दूर करैत छल. हॉल थपड़ीसँ बेर-बेर अनुगुंजित होइत रहल. प्रायः सभ भाषाक कविता सुनलाक बाद हमरा गौरवबोध भेल जे समकालीन मैथिली कविता कोनो भाषाक समकालीन कवितासँ झूस नहि अछि.


सत्र-समापनक पश्चात भोजनोपरान्त सभ दहोदिस छिड़िया गेलाह. किओ होटलमे अराम करय गेलाह तँ किओ अगरतला भ्रमणपर बहरेलाह. हमरा आ शालूकेँ आइ फेर भारत-बंगलादेश बॉर्डरपर जयबाक छल. फ्लैग-सेरेमनी नहि देखि सकबाक क्षतिपुर्तीमे, आ ताहूसँ बेसी सीमा-सुरक्षाबलकेँ पुनः अयबाक देल वचनपूर्तिक लेल. आइ एहि यात्रामे राम, गोरक, आशिया, रेखा आ संस्कृत कवि हेमचन्द सेहो हमरा लोकनिक संग देलनि. उत्तराखण्डमे हेमचन्दक कएट टा ने गुरु मैथिल छथिन्ह आ हुनका सभक मुँहे ओ मैथिली सुनैत रहैत छथि तेँ हुनका हमर कविता बुझबामे कोनो भाङ्गठ नहि भेलनि से बड़ उत्साहपूर्वक जनौलनि. जे किओ बाघा-वॉर्डरक फ्लैग-सेरेमनी देखने छलथि हुनका लोकनिक लेल ई कोनो कुतूहल नहि छल मुदा हमरा लेल ई निश्चये अत्यंत कौतुकक विषय छल. सेरेमनीक बाद 'भारत माताक जय' कहबा काल जे स्वाभिमान-बोध भेल से वर्ण्य नहि. माटिसँ मनुक्खक सम्बंध कदाचित् एहने क्षण सभमे सोझराइत छैक.

आइ साढ़े आठ बजे सभ किओ डिनर हेतु पहुँचि गेल छलाह. भोजनोपरान्त किछुकाल हँसी-ठट्ठा आइयो चललै मुदा, बेर-बेर आगत वियोगक पीड़ा ओकरा मलिन करैत रहल. सभ किओ सम्पर्क-सूत्रक आदान-प्रदानक संग एक-दोसरासँ भविष्यहुमे सम्पर्कमे बनल रहबाक आश्वस्ति देमय लगलाह. मुँहपर मुसकी आ आँखिमे वियोगी भाव लेने सब अपन-अपन कमरा दिस विदा भेलाह. कन्नड़ कवि चिदानन्द शाली, मलयालम कवियत्री आर्याम्बिका, हिन्दी कवियत्री अर्चना भैसारे आ ओड़िया कथाकार आइपीएस देवाशीष पाणिग्रहीक सानिध्य एहि यात्राकेँ आरो उपलब्धिपूर्ण बनौलक. भाषा- साहित्य ओ कला ठिक्के लोककेँ जोड़ैत छैक!! (समाप्त)

— चंदनकुमार झा 

मिथिमीडिया — MithiMedia 21 August 2016
प्रेममोहन कें बाल साहित्य ओ दीपनारायण कें युवा पुरस्कार

नवदिल्ली: एहि बरख मैथिली मे साहित्य अकादेमी दिस सं बाल साहित्य पुरस्कार लेल प्रेममोहन मिश्र केर 'भारत भाग्य विधाता' जीवनी लेल चयन कएल गेल अछि. चयन समिति मे डा. अमरनाथ झा, प्रो. भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता एवं डा. महेंद्र नारायण राम छलाह.  

युवा पुरस्कार लेल दीपनारायण विद्यार्थी केर 'जे कहि नहि सकलहुँ' कें चुनल गेल अछि. विज्ञप्तिक अनुसार चयन समिति मे डॉ बासुकी नाथ झा, डॉ रामनरेश सिंह ओ डॉ शंभुनाथ मिश्र छलाह.

मिथिमीडिया — MithiMedia 19 June 2016
वीरेन्द्र मल्लिकक सम्मान मे जुटलाह मैथिलीसेवी

कलकत्ता: वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र मल्लिकक सम्मान मे एक कार्यक्रम अायोजित भेल. पछिला रविदिन माने बारह जूनकेँ कलकतिया मैथिल साहित्यकार आ साहित्यप्रेमी पैघ संख्या मे वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र मल्लिकक संतोषपुर स्थित निवासस्थान पर जुटलाह.

लगभग छह दशक सं कलकत्ता रहैत भाषासेवा मे लागल वीरेन्द्र मल्लिक किछु समय सं दिल्ली रहैत छथि कलकत्ता स्थायी रूपें नहि रहताह जानि साहित्यिक लोकनि हुनक अावास पर जुटि एहि छह दशकक क्रियाकलाप ओ वीरेन्द्र मल्लिकक भूमिका पर चर्च केलनि.

एहि अवसर पर राजनंदनलाल दास, रामलोचन ठाकुर, नवीन चौधरी, विद्यानंद झा, अशोक झा, लक्ष्मण झा सागर, बिनय भूषण, मिथिलेश कुमार झा सहित सभ खाढ़ीक मैथिली साहित्यकार लोकनि जुटल छलाह. नवीन चौधरीक अध्यक्षता मे एक कवि गोष्ठी सेहो अायोजित भेल. 

फोटो: साभार विद्यानंद झा 

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मैथिलीसेवी कुमरकांत झा कें पत्नीशोक

कलकत्ता : कर्णामृतक अाजीवन सदस्य, अनेकानेक सामाजिक संस्था सं जुड़ित राघोपुर-बलाट (मधुबनी) निवासी सुपरिचित मैथिलीसेवी कुमरकांत झाक धर्मपत्नी विभा झा कें हृदयगति रुकि गेलाक कारणें 11 जून 2016 कें कोलकाता स्थित लेकरोड अावास पर असामयिक निधन भ' गेलनि. ओ धर्मपरायण महिला मात्र 49 बरखक अायु मे अपन भरल-पूरल परिवार छोड़ि गेलीह अछि.

उक्त अवसर पर उपस्थित कोकिल मंच कोलकाताक नबोनारायण मिश्र दिबंगत अात्माक शांतिक कामना करैत हुनक शोकाकुल परिवारक प्रति संवेदना प्रकट केलनि.

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युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (3)

हमरा बड़ मोन छल जे उनाकोटि देखि आबी मुदा, ताहि लेल समय हाथ मे नहि छल. स्थानीय लोक सब कहलनि जे उनाकोटि जयबाक लेल पूरा एकदिन समय हाथ मे रहबाक चाही. अगरतला सँ अबैत-जाइत छओ सँ आठ घण्टाक यात्रा. अपनहुँ बूझल छल जे ओतय चारिये बजे साँझ पड़ि जाइत छैक, कारण चारू कात उँच-ऊँच पहाड़ सँ बेढ़ल अछि ई स्थान. डॉ. शालू आ हम अंततः दूटा स्थान घुमबाक नेयार कयलहुँ- नीर महल आ त्रिपुर सुन्दरी मंदिर. होटलक एकटा कर्मचारी एकटा गाड़ी ठीक कऽ देलनि. योजनानुसार हमरा लोकनि केँ उद्घाटन सत्रक बाद टूर पर निकलबाक छल आ राति आठ बजे धरि होटल घुरबाक छल.

युवा लेखक महोत्सवक उद्घाटन सत्र चलि रहल छल. दर्शक लोकनि बेस ध्यानस्थ भऽ भाषण सुनि रहल छलाह. हमर नजरि कखनो मंचपर तँ कखनो दर्शक मे बौआइत छल. शालू बेरि-बेरि घड़ी दिस ताकथि. हुनका शाइत उद्घाटन सत्र समाप्तिक प्रतीक्षा छल. पूर्वोत्तर भारतक प्राकृतिक सौन्दर्यक परिदर्शनक उत्कंठा हमरो भीतर कछमच्छी पैसाइये देने छल. मुदा, हमरा लोकनि पूर्वोत्तरक प्रकृति सँ परिचय पयबाक लेल बहराइ ताहि सँ पूर्वहि प्रकृतिक दूत बनि हमरा लोकनि सँ भेंट करबा निमित्त मेघखण्ड आबि जुमलाह. बिजलौका चमकय लागल. मेघक सिंहगर्जना सँ भयभीत भगतसिंह युवा ऑडिटोरियमक खिड़कीक पल्ला सभ काँपय लागल. झमाझम वर्षाक सेलार संग नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरीक दर्शनक हमरा लोकनिक योजना भासय लागल. अयनाक बिना अपन मुँखाकृति तँ किओ नहि देखि पबैए मुदा, शालूक मुँह पर हमरा चिन्ता आ तामसक रेह स्पष्ट नजरि आबि रहल छल.


उद्घाटन सत्र समाप्त भेल. हॉलसँ बहराय किओ बुक-स्टॉल दिस पड़यलाह तँ किओ लंचक इन्तजामक टोह लेबय लगलाह। तावत् मंच सँ व्यवस्थापक दिस सँ घोषणा भेल जे लंच मे दस मिनट आर देरी छैक. आब हॉलक बाहर सब अपना-अपना हिसाबे छोट-छोट गोल मे तितिर-बितिर भऽ गेल छल. किछु गोटे बुक-स्टॉल पर पोथी बेसाहय मे व्यस्त छलाह. बंगला पोथीक प्रति कीननिहार मे विशेष आग्रह बुझायल. मैथिली साहित्येतिहास सँ सम्बन्धित किछु अनुदित पोथी सेहो एकात मे अवडेरल पड़ल छल.

एहि बीच हमरा असमिया कथाकार कंजलोचन पाठक सँ परिचय भेल. पाठक जी केन्द्रिय विद्यालय मे प्रिंसिपल छथि मुदा, ताहि सँ विपरीत हुनक बात-व्यवहार मे बाल-सुलभ चाञ्चल्य सहज परिलक्षित भेल. अगिला सत्र मे हिनका कथापाठ करबाक छलनि. सद्य: समाप्त सत्र मे कविता पाठ सेहो भेल छल जाहि मे अंग्रेजी कवियत्री आशिया जहूर आ उर्दू कवि डॉ. सूर्य बाली बड़ प्रभावित कयलनि. दुनू गोटे सँ सेहो एहि खाली समय मे परिचय-पात भेल. आशिया जहूर शोधार्थी छथि. कविता पढ़ैत काल अहंकारी बुझेलीह मुदा, गपशप भेला पर हिनक सरल-मृदु स्वभावक परिचय पाओल. डॉ. सूर्यबाली बहुमुखी प्रतिभाशाली छथि. इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज सँ एम.डी. केलाक बाद ई इग्नू सँ डीएचएचएम (डिप्लोमा इन हॉस्पिटल & हैल्थ मैनेजमेंट) आ यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लॉरिडा , यू॰एस॰ए सँ एमएचए (मास्टर ऑफ हैल्थ एड्मिनिसट्रेशन) कयलनि. फेर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज मे सह आचार्य एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारीक रूप मे अपन सेवा देलाक बाद सम्प्रति एम्स भोपाल मे कार्यरत छथि. फोर्ड फैलोशिप सहित अनेक सम्मान सँ सम्मानित छथि. चारिगोट कविता आ गजल संग्रह प्रकाशित छनि. देशी-विदेशी मंच पर मुशायरा मे लोकप्रिय भेल छथि. सर्वोपरि जे एकटा सहृदय साहित्यकार आ सूच्चा समाजसेवक छथि. डॉ. सूर्यबाली सँ गपशप करैत देखि विक्टर सेहो सहटि कऽ ओतय पहुँचि गेल रहथि. डॉ. बालीक व्यस्ततम दिनचर्या आ एतेक रास उपलब्धि जानि ओ हठात् पुछलथिन्ह- सूतय कखन छी?

- भोरबा मे, मात्र तीन घण्टा.

डॉ. सूर्यबालीक उत्तर पर विश्वास नहि भेल हमरा. कारण सामान्यतः इएह सुनैत छियैक जे कम सुतनिहार स्वभावतः खौंझाह भऽ जाइए. मुदा, हिनकर मुँह पर तँ सदिखन हँसिए पसरल रहैत छनि. फेर ओ महापुरुष सभ मोन पड़लाह जिनका सम्बन्ध मे सुनैत आयल छी जे ओहो लोकनि बड़ कम काल सुतैत छलाह. अपना मोन केँ बुझाओल जे हिनका अनिद्राक बेमारी नहि ‘स्वान-निद्रा'क लूरि छनि.


भोजन तैयार भऽ गेल छल. सभ किओ पंक्तिबद्ध भऽ अपन रुचिक अनुसार सामग्री लऽ टेबुल धरैत गेलाह. हम, शालू आ शालूक पिता एकटा टेबुल पर बैसलहुँ. लरगुज रोटी देखि शालूक पिता केँ भाँज नहि चललनि जे ई कथीक रोटी थिकैक? ओ जिज्ञासावश शालू दिस तकलनि. तावत् हम एक कओर मुँह मे धऽ देने रहियैक. हुनकर जिज्ञासा शान्त करैत कहलियनि- चाउरक रोटी थिक. ओ कोनो प्रतिक्रिया नहि देलनि. कोनो तरहेँ दू टा रोटी गिरलाह. बाहर बुनछेक भऽ गेल रहैक. हमरा सभक मोन मे एकबेर पुनः पर्यटनक आशा अँकुराय लागल छल. मुदा, समय बहुत हाथ सँ निकलि चुकल छल. गाड़ीबला सँ पुछारी कयल तँ कहलक जे आब नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरी दुनू देखब आइ सम्भव नहि होयत. कोनो एक जगह जा सकैत छी. विकराल समय केँ देखैत शालूक पिताजी सलाह देलनि जे अनभुआर जगह मे एतेक रिस्क लेब ठीक नहि. फेर योजना बनल जे अगरतला घुमल जाय. दोसर सत्रक बाद एकटा टेम्पू कय तीनू गोटे अगरतला घुमल.

सर्वप्रथम पहुँचलहुँ- गवर्मेंट संग्रहालय. ई संग्रहालय अगरतलाक प्रसिद्ध उज्जयंता महल मे बनल अछि. उज्यंता महल निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक द्वारा सन् 1899-1901 ई. मे कराओल गेल अछि. ई आलीशान महल 1 वर्गकिलोमीटर मे पसरल अछि. महलक सोझाँ मे मुगल गार्डेन जकाँ बगैचा सेहो बनाओल गेल छैक. संग्रहालय मे त्रिपुराक शासक लोकनिक तथा बौद्ध परम्परा सँ सम्बन्धित अनेक प्रस्तर मूर्ति ओ पुरातात्विक बस्तु-जातक प्रदर्शनी लगाओल गेल अछि. बंगला साहित्य ओ त्रिपुराक लोकजीवन सँ जुड़ल अनेक कला-कृति एतय देखल-परिचय पाओल.

संग्रहालय घुमलाक बाद गौडीय सम्प्रदायक जगन्नाथ मंदिर पहुँचलहुँ. मंदिर शताधिक वर्ष पुरान अछि. चारूकात नव-नव मन्दिर सेहो निर्मित छैक. मंदिर-प्रांगण मे साग-सब्जीक खेती सेहो खूब देखल. शाइत भगवान केँ अपनहि बाड़ीक उपजा भोग लगैत हेतनि. पट खुजबा मे देरी रहैक. तेँ दर्शन नहि भऽ सकल. हमरा लोकनि आब भारत-बंगलादेश बॉर्डर दिस विदा भऽ गेल रही.

अगरतलाक एहि बॉर्डर पर बेस अबरजात रहैत अछि. अगरतला-ढाका-कोलकाता बस सेवा सेहो एतय सँ गुजरैत छैक. तेँ सीमा-सुरक्षा बलक जवान सभ बेस मोस्तैद रहैत छथि. दुनू देशक बीच एहि क्षेत्र मे आब कोनो तेहन सीमा विवाद नहि छैक तेँ माहौल तनावपूर्ण नहि रहैत छैक. सीमा लोहाक टाट सँ बेढ़ल छैक. सुरक्षाबल केँ खाली तस्कर आ घुसपैठी पर नजरि रखबाक रहैत छनि.

साँझ पड़ल जा रहल छलैक. लोकक जुटानी सेहो बढ़ल जा रहल छलैक. सभ किओ संध्याकालीन फ्लैग-सेरेमनी देखबाक लेल आबि रहल छलथि. जवानक रिहर्सल चलि रहल छलैक. हमरा लोकनि एम्हर जवान सभ सँ गपशप मे बाझल रही. हुनका सभक आत्मीयता देखि गद्गद रही. तावत् मेघ पुनः अकास केँ घेरि लेने छलैक. हमरा सभ केँ हेरिटेज पार्क घूमब बाँकिए छल एखन. हम सभ अगिला दिन धरि फ्लैग-सेरेमनी देखबाक योजना स्थगित कयल आ सीमा सुरक्षा बलक जवान सभ सँ काल्हि पुनः अयबाक वचन दैत तत्काल विदा लेल. (क्रमशः)

— चंदनकुमार झा 

मिथिमीडिया — MithiMedia 18 June 2016

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