लोकरंग: लोक कला आ संस्कृति संरक्षण हेतु जुटलाह कलाप्रेमी


आधुनिकता केर दउग मे हम सब अपन लोक संस्कृति कें बिसरा देने छी. लोक कंठ मे विराजमान पुरातन गीत-संगीत एखन खूब कम देखबा मे अबैत अछि. ओना देशभरि मे पसरल कलाप्रेमी, कलाकार संस्कृति केर अनमोल गीत सब कें अपन क्षमता अनुसार बचा क' रखबाक कोशिश क' रहल छथि. एही प्रयास में लागल किछु कलाप्रेमी शनिदिन बेरिया 17 अप्रील कें फुजल अकासतर एक गोष्ठी 'लोकरंग' केर आयोजन केलनि. गोष्ठी मे लोक गीत-संगीत कें कोना संरक्षित कएल जा सकैत अछि, एहि पर विस्तार सं चर्चा कएल गेल.

बाजा म्यूजिक एंड रेडियो ऐप दिस सं आयोजित 'लोकरंग' कार्यक्रम मे संतोष मिश्र बीज भाषण प्रस्तुत करैत सुगम तकनीक केर इस्तेमाल पर प्रकाश देलनि. ओ कहलनि जे हमरा सबहक वाचिक परंपरा बेस पुरातन आ सुदृढ़ अछि. मैथिली, हिन्दी, राजस्थानी, अवधि, बांग्ला आदि लोकभाषा सबहक सौंदर्य कें ऑडियो रूप मे बाजा ऐप पर अपलोड क' संरक्षित करबाक संगहि प्रसार पर सेहो ध्यान देल जा सकैत अछि. एहि काज मे बाजा ऐप कलाकार आ कलाप्रेमी लोकनिक बीच सेतु केर काज करैत अछि आ ई एक अभियान जकां आगू बढ़ि रहल अछि.

'लोकरंग' कार्यक्रम केर संयोजक आ मिथिमीडिया केर सम्पादक रूपेश त्योंथ कोलकाता महानगर आ उपनगरीय क्षेत्र मे निवास केनिहार विभिन्न भाषा-संस्कृति केर लोक सबहक भूमिका पर अपन बात रखलनि. रूपेश त्योंथ कहलनि जे देश केर सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता मे रहनिहार कलाकार आ कलाप्रेमी जओ लोककला केर संरक्षण पर ध्यान देथि त' पैघ सफलता भेटि सकैत अछि. मैदान केर फुजल वातावरण मे दैहिक दूरी सहित जरूरी एहतियात रखैत एहि 'लोकरंग' कार्यक्रम केर आयोजन कएल गेल. एहि मे महानगरक विभिन्न भाग सं लगभग दर्जनभरि कलाकार आ कलाप्रेमी लोकनि भाग लेलनि.
 
कला-संस्कृति कें समर्पित संस्था 'नवआयाम' दिस सं उपस्थित वरिष्ठ रंगकर्मी ओ निर्देशक श्रीमती किरण झा ऑडियो प्लेटफॉर्म केर उपयोगिता पर अपन विचार रखलनि. ओ कहलनि जे हमरा सबहक घर मे पारम्परिक लोक गीत-संगीत केर जे परंपरा रहल अछि तकरा हम सब एहि प्लेटफॉर्म पर आसानी सं अपलोड क' सकैत छी. जाहि सं एकर उपयोगिता बहुत बेसी भ' जाइछ. ओतहि 'जी मैथिली' म्यूजिक केर प्रमुख प्रकाश ठाकुर लोक गीत-संगीत मे युवा लोकनिक रुझान पर अपन बात रखलनि. कार्यक्रम मे उपस्थित कृष्णानन्द मिश्र लोककला आ सांस्कृतिक रूप सं समृद्ध बंगभूमि केर महत्व पर प्रकाश देलनि. वरिष्ठ रंगकर्मी आ कवि रंजीत पप्पू कवि आ अन्यान्य प्रस्तुति लेल सेहो बाजा प्लेटफॉर्म कें उपयोगी बतओलनि.
 
कार्यक्रमक दोसर सत्र मे किरण झा, हिमाद्रि मिश्र, केशव ठाकुर, आशीष कुमार झा अपन विचार रखैत गीत-संगीत केर प्रस्तुति द' सब कें मोहित केलनि. ओतहि रंजीत पप्पू, श्रवण कुमार आ मायानन्द मिश्र काव्य रचना केर पाठ क' सब कें मंत्र-मुग्ध केलनि. उपस्थित समस्त गोटे एहन कार्यक्रम बार-बार होएबाक आवश्यकता महसूस केलनि. कार्यक्रमक अंत मे बाजा ऐप दिस सं संतोष मिश्र धन्यवाद ज्ञापन करैत बाजा कम्युनिटी केर विस्तार करबाक लेल सब कलाप्रेमी लोकनि सं अपील केलनि.

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