राजनन्दन लाल दास: मैथिली पत्रकारिता केर अडिग स्तम्भ


मैथिलीक अनन्य सेवक, कर्णामृत पत्रिकाक सम्पादक राजनन्दन लाल दास (Rajnandan Lal Das) केर देहावसान सं एकटा पैघ क्षति भेल अछि. लगभग 40 वर्ष धरि पत्रिका केर सम्पादन-संचालन क' एकटा कीर्तिमान स्थापित केलनि. दरभंगाक घनश्यामपुर-गोनौन मे हिनक पैतृक छलनि आ 
हिनक जन्म 5 जनवरी, 1934 कें मातृक पटोरी (पंचगछिया, सहरसा) मे भेल छलनि. कार्यक्षेत्र कोलकाता रहलनि आ कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) सं राजनीति विज्ञान विभाग मे एमए कएलाक बाद एक कम्पनी मे मार्केटिंग मैनेजर पद पर काज केलनि. एहि क्रम मे मैथिली-मिथिला क्रियाकलाप मे आरम्भहि सं जुड़ल रहलाह.
 
राजनन्दन लाल दास केर सन्तो (नाटक), चित्रा-विचित्रा (आलेख संग्रह), प्रबोध नारायण सिंह (विनिबंध, साहित्य अकादेमी) आदि पोथी प्रकाशित छनि. कर्णगोष्ठी (Karnagoshthi) संस्था मे सक्रिय रहैत पोथी-पत्रिका प्रकाशन-सम्पादन मे हिनक अमूल्य योगदान रहल अछि. दासजी आखर पत्रिका (1967) सं सेहो प्रकाशक रूप मे जुड़ल छलाह त' ओतहि अखिल भारतीय मिथिला संघ (1962), मिथिला संग्राम समिति (1967) ओ मिथिला दर्शन (कम्पनी सेक्रेटरी) सं सेहो जुड़ल रहल छलाह. विद्यापति स्मारक मंच कोलकाता सहित अनेक साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था हिनका सम्मानित केने अछि.

86 वर्षीय राजनन्दन लाल दास पछिला किछु समय सं बीमार छलाह. हिनक देहावसान 4 जुलाइ, 2021 कें कोलकाता मे हुनक आवास पर भ' गेलनि. हिनक निधन सं मैथिली जगत मे शोक पसरल अछि. सोशल मीडिया पर संवेदना-श्रद्धांजलि व्यक्त केनिहार लोकक कोनो कमी नै देखल गेल अछि. कोलकाता सहित देशक कतेको शहर-गाम मे शोकसभा आयोजित कएल गेल अछि. कर्णगोष्ठी दिस सं हिनका श्रद्धांजलि देइत कहल गेल अछि जे हिनक योजना आ काज कें आगू बढ़ाओल जाएत आ कर्णामृत (Karnamrit) पत्रिका सेहो निर्बाध रूप सं निकालल जाइत रहत.

मिथिमीडिया दिस सं एहि महान विभूति कें सादर नमन अछि!