'क़िस्त क़िस्त जीवन' कें साहित्य अकादेमी अवार्ड

नव दिल्ली/दड़िभंगा. साहित्य अकादेमी द्वारा एहि सालक पुरस्कारक घोषणा क' देल गेल अछि. मैथिली सहित 24 भाषा मे स्तरीय लेखन हेतु सभ साल ई पुरस्कार देल जाइत अछि. एहि बेरक साहित्य अकादेमी अवार्ड डॉ शेफालिका वर्मा कें हुनक आत्मकथा 'क़िस्त क़िस्त जीवन' हेतु देल जयबाक घोषणा भेल अछि. एकर संगहि कोंकणी उपन्यास केर मैथिली  अनुवाद 'कर्मलीन' लेल महेंद्र नारायण राम कें  अनुवाद पुरस्कार देल जयबाक घोषणा भेल अछि. मैथिलीक चर्चित युवा साहित्यकार 'अरुणाभ सौरभ' कें काव्य संग्रह 'एतबे टा नहि' लेल युवा पुरस्कार देल जयबाक घोषणा भेल अछि.
पुरस्कार घोषणाक बाद डॉ शेफालिका वर्मा मिथिमीडिया कें हरखित होइत कहलनिसाहित्य अकादमी, निर्णायक मण्डल आ' समस्त पाठककेँ धन्यवाद. हमरा लेल पाठकक प्रेम सभसँ पैघ पुरस्कार अछि. हं, पूर्वमे हमर 'एकटा अकास' पुरस्कारक पाँतिसँ छटा गेल रहए आ तहिया हमर पतिदेवकेँ अवस्से कनेक दुख भेल रहनि. फेर, तकरबाद मोनमे बैसि गेल जे ई सम्मान-पुरस्कारक हेर-फेरमे रहब हमरा वशक बात नहि आ तैँ एहिबेर सेहो किस्त किस्त....सँ व्यक्तिगत रूपेँ हमरा कोनो विशेष उमेद नहि छल. ओना किस्त किस्त...मात्र हमर जीवनी नहि बल्कि आत्माभिव्यक्ति अछि. एकरा लिखबाकाल हम अपन संपूर्ण जीवनक पुनर्दर्शन केलहुँ. अपना सभ समाजमे एकटा महिला लेल सामाजिक व्यवस्थामे अपन स्वतंत्र अस्तित्व बनायब कतेक कठिन छैक, कतेक संघर्षपूर्ण छैक तकर आत्म दर्शन छी किस्त-किस्त जीवन आ एहि जीवन संघर्षकाल हमर उर्जाक स्रोत हमर पति रहलाह तैँ हमर कोनो सफलताक श्रेय हुनके जेतनि. एहिठाम एकटा बात आओर जे हम किस्त किस्त...पहिने हिन्दीमे लिखब प्रारंभ केने रही मुदा, डॉ. रमानंद झा 'रमण'क प्रेरणा, पंचानन मिश्रक आ' शरदिन्दु चौधरीक अविस्मरणीय सहयोगसँ हम एहि ७०० पृष्ठकेँ मैथिलीमे लिखबामे सफल भेलहुँ आ'से एहि पुरस्कारक श्रेय हिनका सभक संग शेखर प्रकाशन कें सेहो जाइत छैक.
शेफालिका वर्मा कें पुरस्कार भेटला पर मैथिली साहित्यकार ओ प्रसिद्ध भाषाविद उदय नारायण सिंह 'नचिकेता' केर कहब छलनि जे ई बहुत सुखद समाद अछि. शेफालिका बहुत दिन सं उपेक्षित छलीह. ज्ञात हो जे
पुरस्कार केर दउग मे नचिकेता केर पोथी सेहो छल.
साहित्यकार रमानंद झा 'रमण' अपन प्रसन्नता प्रकट करैत कहलनि जे हमर सौभाग्य छल जे हम एहि पोथीक प्रारंभिक पाठकमे सँ छी आ एकर लोकार्पणक अवसरपर मुख्य वक्ताक रूपमे हमरा बाजैक अवसर भेटल अछि. शेफालिकाजीक किस्त-किस्त जीवन मैथिली साहित्यक एकटा अनमोल धरोहर अछि. पुरस्कारक लेल एहि पोथीक चयनक पाछाँ चयनकर्ताक जे तर्क रहल होइन किंतु चयन स्वागतयोग्य अछि. तखन शेफालिकाजी छल-प्रपंच नहि जनैत छथि तैँ एतेक दिन कतिआयल सन छलीह आ पुरस्कार विलंबसँ भेटलनि.
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किस्त-किस्त जीवन मैथिली साहित्यमे एकटा विशेष स्थान रखैत अछि,
बधाइ.
साहित्य अकादेमी केर परामर्शदात्री समिततिहासकार-आलोचक सेहो एहि बातके मानलथि. हुनकर प्रत्येक रचना भावपूर्ण होइत अछि. मैथिलीमे महिला साहित्यकारक खगता रहल अछि आ' एहनामे लीली रे, निरजा रेणु आ उषाकिरण खाँक बाद ई चारिम महिला छथि आ' तैँ ई पुरस्कार चयन एकटा विशेषार्थ रखैत अछि. पुरस्कार देरीसँ अवस्स भेटलनि मुदा, एहन तरहक विसंगति पहिने सेहो देखल गेल अछि. किस्त-किस्त जीवन मैथिली साहित्यमे एकटा विशेष स्थान रखैत अछि,
बधाइ.
साहित्य अकादेमी केर परामर्शदात्री समिति केर पूर्व सदस्य ओ मिथिला विकास परिषद् केर राष्ट्रीय अध्यक्ष
अशोक झा शेफालिका वर्मा कें बधाइ देइत कहलनि जे अकादेमी केर ई निर्णय अप्रत्याशित अछि. एतेक सुप्पत निर्णय आओत से आश नहि छल. शेफालिका वर्मा कें पुरस्कार भेटब आवश्यक छल. हम एकर स्वागत करैत छी.
एकर संगहि महेंद्र नारायण राम ओ अरुणाभ सौरभ कें सेहो बधाइ देबयवला केर नमहर संख्या अछि. अकादेमी पुरस्कार सं  पहिने डॉ शेफालिका वर्मा सं मिथिमीडिया केर कार्यकारी सम्पादक चन्दन कुमार झा साक्षात्कार लेने छलाह जे हुनक पुरस्कृत पोथी ओ अनेकानेक प्रसंग अपना मे समेटने अछि. साक्षात्कार पढबाक हेतु
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