संगप्रसंग : लोकभवन मे मिथिलाक लोक - रश्मिरथी रामधारी सिंह दिनकर केर दीप्ति आद्यावधि पसरल अछि। कालजयी कृति रचनाकार कें सेहो कालजयी बना देइत छै। कोनो रचनाकार अपन देशकाल अनुरूप रचना करैत अछि। मुदा समय केर संग किछु रचना जनप्रियता संगहि अपन सार्थकता सिद्ध करैत आगां बढ़ैत अछि। कोलकाता स्थित राज भवन जे कि आब लोक भवन कहबैत अछि, मे मिथिलाक सपूत दिनकर केर जयंती कार्यक्रम अवसर पर जेबाक सुयोग भेल। कार्यदिवस रहितो माननीय राज्यपाल श्री आरएन रवि महाशय केर हकार पर कार्यक्रम मे उपस्थित भेल छलहुँ।
आयोजनक पहिल सत्र मे माननीय राज्यपाल महोदय सहित विषय विशेषज्ञ लोकनि अपन विचार आदि प्रकट केलनि। दोसर सत्र मे रश्मिरथी केर मंचन राखल गेल छल। बैकड्रॉप मे डिजिटल डिस्प्ले चलि रहल छल कि कलाकार दल मंच पर दृष्टिगत भेल। महाभारत केर पात्र लोकनि सुसज्जित भेल ठाढ़ छलाह। महारथी कर्ण कें दुर्योधन सम्मानित करैत राजमुकुट पहिरा रहल छलाह। महारथी कर्ण पहिल दृश्य सँ दर्शकक आँखि केर प्रिय पात्र बनि जाइत छथि। कर्ण केर आवाज कान मे पड़ल तऽ सहजें मैथिली सिनेमा केर लोकप्रिय अभिनेता संजीव पूनम मिश्र मोन पड़लाह। हम अपन संगी साहित्यिक श्री विजय इस्सर जी कें कहलियनि जे ई संजीव छथि से आवाज सँ बुझना जा रहल अछि। पछाति दोसर-तेसर दृश्य सँ संजीवे छथि से निजगुत भऽ सकल छलहुँ।
जेना-जेना कथा मंचित होइत अछि, कलाकार लोकनि दर्शकक हृदयतल धरि पहुँचि जाइत छथि। एक नाटक प्रेमी रूप मे अभिनयकला केर एहन प्रदर्शन एहि सँ पहिने हम देखि सकितहुँ से संभव नहि भेल छल। नाटक अपन नव कलेवर नव कला दिस डेग बढ़ा चुकल अछि। मंच-माइक-परदा आदि केर कोनो प्रयोजन नै, पहिने भेल जे डायलॉग रिकार्ड कएल अछि, तेहन परफेक्ट, तेहन टनगर से गौर कएल जे सब कलाकार केर संग मे सुक्ष्म माइक-यंत्र लागल छनि। फेर एक आम दर्शक जकाँ अचंभित छलहुँ जे कलाकार लोकनि रश्मिरथी केर नमहर-नमहर पद स्मरण कोना रखने छथि। ई सब अनुभव हमरे नहि, बेसी भाग दर्शकक रहलनि। एहन प्रदर्शन आ अभिनय निश्चित सिनेमा-टीवी कें टक्कर देइत बुझना गेल।
मिथिलाक सपूत दिनकर केर रश्मिरथी केर नाट्य मंचन मे मिथिलाक नामी कलाकार संजीव पूनम मिश्र कें देखैत गौरवबोध भऽ रहल छल। संजीव जाहि उर्जा आ कला संग मंच पर अपन प्रतिभा साबित कऽ रहल छलाह से सबकें मोहित केने छल। एहना खूब कम होइत अछि जे हम दर्शक रूप मे उपस्थित छी आ मंच दिस जाइत छी। मुदा ओहि दिन हम अपना कें नहि रोकि सकल छलहुँ आ संजीव जी सँ ने मात्र भेट केलहुँ, एकटा सेल्फी सेहो लेलहुँ। हमरा लेल एकटा फैन जकाँ ई विशेष अवसर रहल।
किछु वर्ष पूर्व मधुबनी फिल्म फेस्टिवल मे संजीव जी भेटल छलाह। अपन लगातार काज सँ पर्दा पर भेटिते रहैत छथि। ओना हम हिनक काज कें सौभाग्य मिथिला टीवी केर समय सँ देखैत आबि रहल छी। जाहि लगन सँ कला कें लगातार निखारि रहल छथि से प्रशंसनीय मात्र नै अपितु अदम्य साहसक बात अछि। साहित्यिक श्रीमती हिमाद्री मिश्र जी कें आभार जे एहि कार्यक्रम सँ हमरा जोड़लनि। लोक भवन मे एहन विशेष आयोजन लेल माननीय राज्यपाल महोदय कें हृदय सँ धन्यवाद।
— रूपेश त्योंथ
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रूपेश त्योंथ सुपरिचित कवि, स्तम्भकार ओ सम्पादक छथि। सम्प्रति कलकत्ता मे रहैत आइटी प्रोफेशनल रूप मे कार्यरत छथि आ स्वतंत्र लेखन क्षेत्र मे सेहो लगातार सक्रिय छथि। मैथिलीक प्रतिष्ठित ऑनलाइन पत्रिका मिथिमीडिया केर सम्पादन व संचालन करैत छथि। रूपेश मैथिली भाषा मे नवकृष्ण ऐहिक नाम सँ व्यंग्य लिखैत आबि रहल छथि। हिनका लेखन हेतु साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार सहित कतेको सम्मान प्राप्त छनि। रूपेश अनेक राष्ट्रीय ओ अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन सब मे मैथिलीक प्रतिनिधित्व कऽ चुकल छथि।
