कर्पूरी ठाकुर : मिथिलाक एकटा सामान्य बालक जे बनल ‘जननायक’


जखन अपन समूल जीवन दोसरक कल्याण लेल, सामाजिक सरोकार लेल आ देशक हित लेल लगाओल जाइत अछि तखन एकटा विशिष्ट नाम सामने अबैत अछि, ओ नाम थिक "जननायक कर्पूरी ठाकुर". देशक सपूत कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी सेहो रहथि जे भारत छोड़ो आन्दोलनक समय मे 26 मास जहलक जिनगी बितौने रहथि. ओ सफल शिक्षक सेहो रहथि तैं अपन पढ़ौनीक खर्च ट्यूशन कए निकालि लैत छलथि. संघर्षशील सामाजिक नेता होइबा कारणें बिहारक दोसर उपमुख्यमंत्री आ दू बेर मुख्यमंत्रीक पद कें सुशोभित केलनि.

कर्पूरी ठाकुर केर जीवन राजनीति सँ सम्बद्ध रहलाक बादो, हिनका समाजक संग फराक ढंगक लगाउ रहनि जे गुण सामान्य नेता सँ अलग करै छनि. ताहि कारण सं आइयो समाज मे अमर बनल छथि. देशक खातिर अपना कें उत्सर्ग कएने रहथि तैं देशहि नहि विदेशो मे जीवित छथि, जिनका हम सभ प्रेरणाक स्रोत बुझि श्रद्धेय रूप मे गुणि रहल छी. 

प्रारंभे सँ सामाजिक कार्य आदि सँ बड्ड लगाउ रहनि. लोकक दर्द देखि देह सिहरि जाइत रहनि. मुख्यमंत्री बनलाक बादो ओ लोकक उचित-कल्याण आदि मे पहुँचि जाइत छलथि. कतेक बेर तँ कोनो दुखदायी घटना घटिते पहिने पहुँचि ओहि ठाम सभ स्थिति कें अनुकूल कए मीडिया कें ओहि सम्बन्ध मे कहैत छलथिन. जनता सँ भेट-घाँट, ओकर दुख सुनैत-सुनैत बहुत देरी भए जाइत छलनि कतेको बेर. जाहि सँ मुख्यमंत्रीक फाइल आदि पर हस्ताक्षर होमय मे विलम्ब भए जाइत छलै, ताहि सँ सचिव आदि कतेक बेर टोकि देइत छलनि. मुदा लोक-समाजक दुख जे असह्य रहनि, तैं सर्वोपरि काज रहनि हुनकर जनता संग समय बिताएब. 

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र कहने छथि जे "जननायक जी अपनो सरकार वा विपक्षो मे परिवर्तन चाहैत छलथि. ओ परिवर्तन हो-हल्ला सँ नहि सहमति सँ, विचार सँ चाहै छलथि. "समाजक नायक रहथि तेँ जननायक केर उपाधि सँ विभूषित छथि आ समाज मे सदिखन प्रणम्य रहताह!

जननायक कर्पूरी ठाकुर केर जन्म 24 जनवरी 1924 कें समस्तीपुरक पितौंझिया गाम जे आब कर्पूरी ग्राम जँ जानल जाइत अछि, मे भेल छलनि. हिनक पिता गोकुल ठाकुर जे गृहस्थ रहथि आ अपन पारम्परिक काज हजामत सेहो करैत रहथि. जन्मदात्रीक नाम रहनि रामदुलारी देवी! हिनक विवाह फुलेश्वरी देवी सँ भेल रहनि. कर्पूरी जी कें दू पुत्र आ एक पुत्री छनि. जेष्ठ पुत्र रामनाथ ठाकुर, छोट पुत्र डॉ वीरेंद्र आ पुत्रीक नाम छियनि रेणु.

हिनक शिक्षा ग्रामीण वातावरण मे समस्तीपुरक स्कूल मे भेल छलनि. किछु दिन सीएम कॉलेज दरभंगा मे सेहो अध्ययन कएने रहथि. उच्च शिक्षा नहि प्राप्त कए सकलाह. ओ प्रारंभे सँ मेधावी रहथि तैं मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी सँ उत्तीर्ण भेल रहथि. मुख्यमंत्री बनलाक बादो फाटल कुरता, टूटल चप्पल आ उजरल-उजरल केश पहिचान छलनि. कतेको बेर ओ मुख्यमंत्री पद पर रहितो अपन नीजी काज लेल रिक्शा सँ चलैत छलाह. हुनक जीवन आर्थिक समस्या सँ भीजैत रहलनि.

एकटा संस्मरण अछि नेता हेमवती नंदन बहुगुणा जीक, ओ लिखने छथि, "कर्पूरी जी आर्थिक तंगी मे रहथि. हम एकटा मित्र कें कहलियनि जे अहाँ सँ जँ किछु टाका मांगथि तँ अहाँ देल करबनि. हम जखन ओइ मित्र सँ पुछलियनि जे की हुनका मददि करैत छियनि अहाँ? ओ कहलथि जे हमरा सँ कहियो मंगबे नहि करैत छथि!" 

जननायक कर्पूरी जी कहैत छलथिन, "अधिक विद्या, पैघ तपस्या, अथाह धन, बलवान शरीर, नव उमेर, आ यशस्वी खानदान ई छ: वस्तु सज्जन पुरुषक गुण थिक. मुदा अत्यधिक लोक एकरा प्राप्त कए अहंकारी आ मोचंड बनि जाइत अछि!"

ग्रामीण संस्कृति मे जनमि, पलि आ बढ़ि जननायक जी शहर गेलाक बादो, ओहन पद पर आसीन रहितहुँ, आधुनिकताक आवरण नहि ओढ़लथि. अपन माटिक प्रति लगाव सदिखन रहलनि. अपन माटिक लेल संघर्ष करैत रहलथि. जखन ओ पहिल बेर मुख्यमंत्री बनलाह तखन ओ स्त्री शिक्षा लेल आठ कक्षा धरि मुफ्त मे पढ़ौनीक व्यवस्था करौलनि. ओ देखलथिन जे समाजक स्त्री कोनो परिवारक धुरी होइत छैक, जकर शिक्षाक व्यवस्था सँ समाज व्यवस्थित भए सकैए. 

समाजक दीन दशा देखि 11 नवम्बर 1978 कें 26 प्रतिशत आरक्षणक घोषणा कएलनि अपन मुख्यमंत्रित्व कालमे!  मैट्रिक धरि शिक्षा मुफ्त कएलनि, ओना मोन रहनि जे स्नातक तक कए दियै, जे नहि कएल भेलनि. ओइ समय मे गाम मे रहै वला बच्चा अंग्रेजी नहि पढ़ि पबै छल. किछु उच्च वर्गक बच्चा तँ पढ़ियो लैथि, मुदा हिनक मोन रहनि जे सभ वर्गक बच्चा पढ़ि आगू बढ़ए. तखन ओ एहि परिदृश्य कें देखि समाजक सर्वांगीण विकास लेल मैट्रिक मे अंग्रेजी विषयक अनिवार्यता समाप्त कए देलथिन. तकर बाद गरीबोक बच्चा सभ आगू बढ़ए लागल. आगुक पढ़ाइ दिस जाए लागल, जे अहम योगदान कहल जा सकैत अछि समाजक विकास लेल! 

कर्पूरी बाबू समाजक खराब दशा सहन नहि कए पबैत छलाह. कहियो ओ अपन व्यक्तिगत लाभ सँ लाभान्वित नहि भेला. जँ सरकारक ऑफिसर आ प्रशासन लाभ बिनु पुछने देबाक प्रयास करितो छलनि तँ बुझिते मना कए दैत छलाह. एकटा प्रसंग अछि एहि सन्दर्भ केर जे एकबेर जननायक जीक पिता कें कोनो कारण सं गामक लठैत सभ प्रताड़ित करए लगलथिन. ई बात जिला प्रशासनक कान तक चलि गेलै. जिला प्रशासन मुख्यमंत्रीक पिताक सुरक्षा बुझि दलबल संगे सुरक्षा करबा लए आबि सभ लठैत कें जिला हाजत मे आनि लेलथिन. सभ बात जननायक जी बुझिते जिला प्रशासन कें डटैत कहलथिन, "पहिने अहाँ सम्पूर्ण देश मे शोषित-पीड़ित कें ओहन शोषक सँ बचाउ तखन अहाँ हमर पिता कें बचाएब! सभ कें छोड़ि घर पठाउ, हम कहैत छी." 

सभ ओहि ठाम सँ छुटि आबि गेलाह. ई भेलै समाजक हितसाधकक उदाहरण, जे आइ-काल्हि एहन सन बात सुनब दुर्लभ अछि! प्रायः गुणी लोक कोनो गुरुदेवक शरण मे ज्ञान अरजै छथि तहिना जननायक जी सेहो अपन राजनीतिक गुरु लोकनायक जयप्रकाश नारायण, समाजवादी चिंतक डॉ राममनोहर लोहिया सँ राजनीति संग ज्ञानक पाठ सिखलथि. तहिना हिनको सानिध्य मे पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता रामविलास पासवान, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, गौड़ीशंकर नागदंश आदि राजनीति केर ज्ञान सीखि राजनीति क्षेत्र मे देशक सेवा कए रहल छथि. जननायक पहिल बेर 1952 मे विधायक बनलाह. महामाया प्रसादक मंत्रीमंडल मे शिक्षामंत्री आ उपमुख्यमंत्री भेल छलाह. 22 दिसम्बर 1970 कें अपन सामर्थ्यक बल पर, संघर्षक बल पर, अपन कद कें बढ़बैत पहिल बेर मुख्यमंत्री बनलाह. जून 1971 कें पहिल सत्रक मुख्यमंत्रित्व काल पूर्ण भेल छलनि. पुनः 24 जून 1977 सँ 21 अप्रैल 1979 धरि मुख्यमंत्री रहि जनताक सेवा कएलनि.

17 फरवरी 1988 कें एकटा सूर्यक समान जननायक केर अवसान भए गेल छल. सम्पूर्ण लोक मे उदासी देखाइत छल. देशक सम्पूर्ण अखबार मे न्यूज छपल छल. विभिन्न नेता, प्रशासक गण, विचारक गणक विचार आएल छल. जननायक जी कुशल राजनीतिक योद्धा मात्र नहि छलाह, ओ समाजक सेवक, नायक आ देशक चिंतक छलाह. अपन कर्मक बल पर चहुँ दिस इजोत पसारि चुकल छलथि. नेता लोकनि ओहने दीप फेर सँ जरबथि, गरीबक हिस्सा फेर सँ दियाबथि. अत्याचार पर अंकुश लगै राज्य मे, तखने हिनका सुच्चा श्रद्धांजलि देल जा सकैत अछि. नमन अछि एहन विराट व्यक्तित्व आ विमल हृदयक स्वामी कें, जे जन सँ जननायक बनि इतिहास पुरुष बनि गेलाह.

 नारायण झा

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नारायण झा मैथिलीक सुपरिचित युवा साहित्यकार, शिक्षक ओ अध्येता छथि. 

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