कर्ण कायस्थ समाजक विकास लेल जन-एकात्मता जरूरी: शेफालिका वर्मा - मिथिमीडिया
कर्ण कायस्थ समाजक विकास लेल जन-एकात्मता जरूरी: शेफालिका वर्मा

कर्ण कायस्थ समाजक विकास लेल जन-एकात्मता जरूरी: शेफालिका वर्मा

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'कोनो समाजक विकास लेल एकात्मता जरूरी होइ छै. वर्तमान समय मे कर्ण कायस्थ समाज मे लोकक मध्य एकात्मताक नितांत आवश्यकता महसूस भ' रहल अछि.' ई कहलनि साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कवयित्री डॉ. शेफालिका वर्मा रविदिन गांधी शांति प्रतिष्ठान सभागार, नव दिल्ली मे आयोजित 'कर्ण कायस्थ महासभा' मे, जतय ओ विशिष्ट अतिथिक रूपें उपस्थित छलीह. डॉ. वर्मा कहलनि जे परंपराक विकास होइत रहबाक चाही आ एहि दिशा मे एहि महासभाक आयोजन एक शुभ संकेत अछि.
  
'कर्ण कायस्थ महासभा'क उद्देश्यक विषय मे बतबैत महासभा संयोजक बी. के. कर्ण अपन वक्तव्य मे कहलनि जे भारत मे कर्ण कायस्थ समाज कें एक सजग एवं बुद्धिजीवी समाज होएबाक गौरव प्राप्त अछि, मुदा एम्हर आबि क' एहन भावनाक विकास भेल जा रहल अछि जाहि सं हम सभ अपन अस्मिता गमा रहल छी. हमरा सभ कें मिलि क' अपन अनमोल धरोहर कें अक्षुण्ण रखबाक प्रयास करैत रहबाक चाही.

कार्यक्रम मे मुख्य वक्ताक रूप मे इतिहासकार भैरब लाल दास कहलनि जे कर्ण कायस्थ कर्नाटकक मूल निवासी छथि. ओ कहलनि जे ई चिंताक विषय अछि जे हम सभ अपन इतिहास आ संस्कृतिक प्रति उदासीन छी. जाहि समाजक इतिहास नै होइत अछि, ओ अपन अस्तित्व गमा लेइत अछि. ओ कहलनि जे कर्ण कायस्थ केर पहिचान तलवार सं नै, बौद्धिकता सं होइत अछि आ ई हमरा लोकनिक विशिष्ट पहिचान अछि. ओ पंजी प्रथा कें अमूल्य धरोहर बतबैत एकर डिजिटाइजेशनक आवश्यकता पर जोर देलनि.
  
कार्यक्रमक अध्यक्षता क' रहल वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र मल्लिक कहलनि जे ई दुःखद अछि जे वर्तमान समय मे मैथिल कर्ण कायस्थ अपन संस्कार कें बिसरल जा रहल अछि. जे किछु हमरा सभ लग संरक्षित अछि. ओहि मे महिला लोकनिक बेस योगदान अछि. मल्लिक जी कहलनि जे दुनिया बहुत तेजी से बदलि रहल अछि. लोक चान पर पहुंचि गेल अछि. हमरो सब कें बदलबाक चाही मुदा धियान रखबाक चाही जे हमर सभक पएर सदा जमीन पर हो.

एहि महासभा मे कुल चारिटा सत्र मे चर्चा भेल. 'कर्ण कायस्थ केर इतिहास आ संस्कार' विषयक सत्र कें भैरब लाल दास, अंजनी कुमार, आर. के. दास एवं राजेश कर्ण संबोधित केलनि. 'कर्ण कायस्थ मे के' बड़का, के' छोटका' विषय पर भैरब लाल दास, प्रकाश कुमार दास, अभय कुमार दास एवं सी.के. चौधरी इजोत देलनि. 'कर्ण कायस्थ विवाह, रीति-रिवाज, परंपरा बनाम आधुनिकता' विषयक सत्र मे सरिता दास, बिनीता मल्लिक एवं नूतन कंठ अपन विचार प्रस्तुत केलनि. 'कर्ण कायस्थ युवा लोकनिक आचार-विचार आ संस्कार' विषयक सत्र कें के. के. चौधरी, मानबर्द्धन कंठ, संजीव सिन्हा एवं आनंद कुमार 'पंकज' संबोधित केलनि.

कार्यक्रमक अंत मे कुल 18 महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर प्रस्ताव पारित कएल गेल, जाहि मे दहेज प्रथाक विरोध मे, बत्तीसगामा कें अमान्य करब, कर्ण कायस्थ मे केओ छोट-पैघ नै आ सरनेम रखबाक समर्थन मे प्रस्ताव उल्लेखनीय अछि.

कार्यक्रमक शुभारम्भ चित्रगुप्त आरती सं भेल. कार्यक्रम कतेको अर्थ मे विशिष्ट रहल. अधिकांश वक्ता सभ पीपीटीक माध्यम सं अपन विचार रखलनि. सभ प्रतिनिधि लोकनि अपन लिखित सुझाओ देलनि. सभ वक्ता एवं प्रतिनिधि लोकनि कें मानपत्र देल गेल. दुपहरिया मे पारंपरिक भोजन भेल, जाहि मे चूड़ा, दही, चीनी आ अचार परोसल गेल. महासभा मे दिल्ली सहित हैदराबाद, पटना, बम्बइ, चेन्नइ, बंगलुरु आदि जगह सं 138 प्रतिनिधि लोकनिक उपस्थिति उल्लेखनीय रहल. कार्यक्रमक कुशल संचालन मानबर्द्धन कंठ केलनि.


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