डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी पर संगोष्ठी


नव दिल्ली: आइ मिथिला राज्य आंदोलनक आधारस्तंभ डॉ. लक्ष्मण झा केर जन्मशताब्दी दिवस पर 5 सितंबर कें मिथिला चौक, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली मे एकटा संगोष्ठीक आयोजन कएल गेल। संगोष्ठीक विषय छल ‘‘लखनजी : व्यक्तित्व ओ कृतित्व।’’ कार्यक्रमक अध्यक्षता अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक प्रो. अमरेंद्र झा, संचालन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक वरिष्ठ अभियानी श्री शरत झा, मुख्य वक्ता विश्व मैथिल संघक अध्यक्ष श्री हेमंत झा एवं धन्यवाद ज्ञापन मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कोषाध्यक्ष श्री संजीव सिन्हा कएलनि। सब मैथिल अभियानी लखनजीक चित्र पर पुष्पांजलि कए क’ हुनका नमन कएलनि।

कार्यक्रमक प्रारंभ मे लखनजीक विस्तृत परिचय लेल वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री मनोज झा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘लक्ष्मण झा’ सं हुनकर व्यक्तित्व पर आ अ.भा. मिथिला पार्टीक युवा नेता श्री रोहित यादव लखनजीक कृतित्व पर पाठ पढ़ि’क सुनौलनि। कार्यक्रम मे लखनजीक संक्षिप्त परिचय पर केंद्रित एकटा परचा सेहो वितरित कएल गेल।

संगोष्ठी मे विभिन्न संगठन सं जुड़ल पदाधिकारी लोकनि अपन विचार रखलनि। जाहि मे मैथिली साहित्य महासभाक उपाध्यक्ष श्रीमती बबीता झा, आप पार्टीक पूर्वांचल शक्ति संयोजक श्री नीरज पाठक, मैथिलीजिंदाबाद पाक्षिक पत्रिकाक संपादन सहयोगी श्री हरिशंकर तिवारी, अ. भा. मिथिला पार्टीक नेता श्री बीरबल यादव, मिथिला राज्य संघर्ष समितिक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शैलेंद्र झा, मैथिली साहित्य महासभाक सचिव श्री कंत शरण, वरिष्ठ मैथिल अभियानी श्री प्रसून झा एवं मैथिल मंचक पदाधिकारी श्री मणि भूषणजी राजूक संबोधन उल्लेखनीय अछि।

वक्ता सब एक स्वर मे लखनजी कें प्रखर मैथिल अभियानी आ उच्च कोटिक विद्वान बतबति कहलनि जे ओ ‘सादा जीवन-उच्च विचार’क प्रतिमूर्ति आ महान् त्यागी एवं सारस्वत साधक छलाह। ओ मिथिला प्रांतक निर्माण आ मातृभाषा मैथिलीक उत्थानक लेल जीवनपर्यंत संघर्षशील रहलाह। लंदन विश्वविद्यालय सं ‘मिथिला एंड मगध’ पर पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त क’ कैंब्रिज तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय मे अध्यापन कार्यक लेल निमंत्रण कें छोड़ि ओ मिथिला उत्थानक लेल आपस अएलाह। लखनजीक मिथिला ओ मैथिलीक संबंध मे 15 गोट पोथी मैथिली, हिंदी, संस्कृत आ अंगरेजी मे प्रकाशित छनि। एकर अतिरिक्त अंगरेजी मे 28, संस्कृत मे 7, मैथिली मे 6 आ हिंदी मे 10 गोट पोथीक पांडुलिपि सुरक्षित राखल छनि।

वक्ता सब एहि बात पर जोर दैत कहलनि जे सब मैथिल संगठन मिलि क’ मिथिला राज्य निर्माणक सपना साकार करय, इएह लखनजी कें वास्तविक श्रद्धांजलि होएत।

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