नीक विषयवस्तु पर बनल सिनेमा चलत : रूपक शरर

मैथिली फिल्म 'घोघ मे चाँद' सं चर्चा मे आएल अभिनेता रूपक शरर सं मैथिली सिनेमाक विभिन्न बिंदु पर बात कयलनि मिथिमीडिया संपादक रूपेश त्योंथ. प्रस्तुत अछि बातचीत केर प्रमुख अंश— 

रूपकजी, सभ सं पहिने अपने कें 'घोघ मे चाँद' लेल बधाई. फ़िल्मक बेस प्रशंसा भेल अछि. केहन लगइए प्रतिक्रिया बुझि?
जी, बहुत-बहुत धन्यवाद! सभ सं पहिने हम समग्र मिथिलावासी कें आभार प्रकट क’ रहल छी जे हुनका लोकनि कें ई सिनेमा नीक लगलनि. आ संगहि “घोघ मे चाँद” सिनेमा कें प्रशंसा योग्य बनेबाक हेतु समस्त टीम कें धन्यवाद.

अच्छा, ई कहू जे अभिनय मे करियर बनयबाक हेतु कोना आ की सभ कयलहुँ? 
सांच पुछू त’ अभिनय कें शुरुआत तखने भ’ गेल छल जखन कि हमरा अभिनय कें ‘अ’ अक्षर नै अबैत छल... कनिएटा रही, तखने सं मंच पर ठाढ़ क’ देल जाइत रहय, कखनो ‘कृष्ण’जी कें रूपमे त' कखनो ‘कोरस’क रूप मे... समय बितला पर ‘अभिनय,’ ‘आदत’ बनि  ‘अंग-अंग’ मे समा गेल... रहल गप्प अभिनय कें करियर बनयबाक, त' एकर सपना ओही दिन देख लेल, जाहि दिन अपना आप कें पहिल बेर टी.वी पर देखल... मौका छल मुज़फ्फ़रपुर दूरदर्शन पर एकटा कार्यक्रम कें ‘होस्ट’ करय कें... एकरा तुरंत बाद ‘व्यावसायिक थिएटर’ दिस रुख केलहुँ आ मंडी ड्रामा स्कूल सं अभिनय मे एक वर्षीय ‘डिप्लोमा’ ल’ करियर बनेबा हेतु मुंबई बिदा भेलहुँ.

फिल्म 'घोघ मे चाँद' कोना भेटल आ एहि सं पहिने बतौर अभिनेता की सभ कयलहुँ? 
दिल्ली मे थिएटर करबा काल किछु मैथिली एल्बम करबाक मौका भेटल छल, जकर श्रेय हमर मित्र चन्दन झा कें जाइ छनि... मुंबइ पहुंचला पर एकता कपूरक धारावाहिक, “कसौटी ज़िन्दगी की” मे पहिल काज भेटल छल... छोट-छीन रोल छल मुदा ओकरा करबा मे कोनो झिझक नै भेल कारण जे एहि सं पहिने दिल्ली मे डी.डी. मेट्रो पर आब’बला धारावाहिक, ‘सब गोलमाल है’ मे अभिनय क’ चुकल रही... एकरा बाद क्रमशः कुमकुम, काजल, भाभी, तुम्हारी दिशा, क्राइम पेट्रोल, वारिस, ज़िन्दगी के रंग, सजनवा बैरी हो गइलें हमार, स से सरसती इत्यादि धारावाहिक मे बतौर अभिनेता काज करबाक अवसर भेटल... अहि बीच “याद रखेंगे आप”, हिन्दी सिनेमा आ “साथी संघाती” भोजपुरी सिनेमा मे अभिनय करबाक मौका सेहो भेटल... मुदा एकटा नीक आ सटीक अवसरक तलाश अखनो पूर्ण नै भेल छल... हम शुक्रगुज़ार छी “घोघ मे चाँद” सिनेमा कें निर्माता-निर्देशक, श्री उदय राजजी कें, जे हमरा अपन सिनेमा मे मुख्य भूमिका हेतु चयन केलनि... दरअसल उदयजी कें ई कथन हमरा दिल आ दिमाग मे बसि गेल जे रूपकजी, अहाँ कें चयन हमरा वास्ते एकटा चैलेन्ज अछि, किएक त' दुनू गोटा वास्ते ई पहिल सिनेमा छी... 

सिनेमा मे करियर बनायब चुनौतीपूर्ण काज छैक.… अहाँ एकरा कोना देखैत छी?
बहुत सटीक सवाल केलहुँ अहाँ हमरा सं... देखू, करियर अहाँ कोनो क्षेत्र मे बनाबी, चुनौतीपूर्ण त' होइते अछि... कारण जे आब सब विधा मे प्रतिस्पर्धा बढ़ि गेल अछि... जगह एक, प्रतिभागी अनेक... रहल गप्प सिनेमा मे करियर बनयबाक, त' ई स्पष्ट छै जे अहि क्षेत्र मे आब’ से पहिने एकर बारीकी के बुझल जाय... एकटा सम्पूर्ण कला कें एकत्रित फलाफल केर नाम अछि सिनेमा... जाहि मे ‘स्क्रिप्ट’ सं ल’ क’ गीत-संगीत, कैमरा, लाइट, साउंड, कॉस्टयूम, मेक-अप, अभिनय आ निर्देशनक अलावा आरो बहुत किछु शामिल अछि... ई अत्यंत आवश्यक अछि जे सिनेमा मे करियर बनेबा सं पहिने संबंधित विधा मे विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त करी, जाहि सं प्रतिस्पर्धा मे भाग लेबाक काल आत्मविश्वास बनल रहय... दोसर, ई जे सफलताक कोनो ‘शार्टकट’ नै होइत अछि... ईमानदारी सं लगनशील भ’ कठिन परिश्रम करी त, देरे सं सही, सफलता भेटैत अवश्य अछि...  

मैथिली सिनेमा एखन ततेक विकसित नहि भेल अछि आ फिल्म निर्माण सेहो कम होइत छै. लगैए जे मैथिली फिल्म अन्य भाषाक फिल्म जकाँ अपना कें स्थापित क' सकत?
अहि मे कोनो संशय नै, जे मैथिली सिनेमा अखन विकसित नै भेल अछि... मुदा विकासशील त’ अछिए... रहल गप्प फिल्म निर्माण कम होइ कें, त' आब लोक सभ आगू आबि रहल छथि... बजार सेहो बनि रहल अछि... जे कि एकटा नीक संकेत अछि... देखियौ, क्रांति कखनो एक दिन मे संभव नै अछि... नीक विषयवस्तु पर बनल सिनेमा कें प्रोत्साहन भेटबेटा करत... आ ओ दिन दूर नै जे अन्य भाषाक सिनेमा जकां  मैथिली सिनेमा सेहो अपना आप कें स्थापित करबा मे सफल होयत...

मैथिली फ़िल्मक बात करी त' अहाँ एहि हेतु की सभ क' रहल छी आ की किछु नियार अछि? 
देखू रूपेश जी! अहाँकें ई सुनि हैरानी होयत जे हम मुम्बइयो मे अपन संगी सभ लग अथवा हाट-बजार मे मैथिली बजैत छी, जिनका कि मैथिली बुझए मे दिक्कत होइ छनि... हुनका सभ कें नै बुझला पर हिन्दी मे अनुवाद करैत छी... हमर कहै कें मतलब ई जे, आदमी कोनो ठाम रहय, अपन भाषा कें प्रचार-प्रसार क’ सकैत अछि... रहल गप्प मैथिली सिनेमा कें, त' हमर नियारेटा नै बल्कि प्रयासो रहैत अछि जे बेसी सं बेसी लोक तक अपन भाषा सिनेमेक माध्यम सं पहुँचल करय.

अहाँ रचनात्मक लेखन सेहो करैत छी. लेखक रूपेँ फिल्म की सभ कयलहुँ अछि? 
एकटा पटकथा आ संवाद लेखक कें रूप मे हमर कतेको धारावाहिक टेलीविजन पर प्रसारित भ’ चुकल अछि... जाहि मे ‘संकट मोचन हनुमान’, ‘कभी तो मिल के सब बोलो’, ‘सजना है मुझे’ इत्यादि प्रमुख अछि... रहल गप्प सिनेमा कें, त' अखने एकटा हिन्दी सिनेमा वास्ते संवाद लिखलहुँ जकर शूटिंग जल्दीए प्रारम्भ होयत... जहाँ तक बात अछि मैथिली सिनेमा कें... त' ई जानकारी देइत प्रसन्नता भ’ रहल अछि जे एक्के संगे तीनटा सिनेमा केर स्क्रिप्ट तैयार अछि, निर्माताक तलाश अछि.  

मैथिली फिल्म मे संवाद-कथा-गीत पर बेसी काज नहि कयल जाइछ। फिल्म मे भाषा जानकार आ रचनात्मक लेखक केर कतेक खगता बुझना जाइछ?
रूपेशजी! ई एकटा यक्ष प्रश्न अहाँ हमरा सं क’ देलहुँ... मुदा हम जवाब अवश्य देब... देखू, सिनेमा निर्माणक सभ सं पैघ मन्त्र ई अछि जे संबंधित संकाय केर ज्ञाता कें निर्विकार रूप सं जिम्मेदारी सौंप देल जाय... आ ओ व्यक्ति अपन उत्तम देबाक कोशिश करथि... निसंदेह एकर परिणाम उत्तमोत्तम होयत... अखन बहुत जरुरी अछि जे रचनात्मक लेखक सब आगू अबथि आ लेखन केर बागडोर अपना हाथ मे लेथि.    

अहाँ वर्त्तमान मे कोन प्रोजेक्ट पर काज क' रहल छी?
अखन एकटा नव मैथिली सिनेमाक तैयारी चलि रहल अछि... जेकर शूटिंग संभवतः अगस्त-सितम्बर मे होयत... अहि बीच मे एक-दू टा ‘शॉर्ट फिल्म’ आ किछु ‘डॉक्यूमेंट्री’ करबाक हमर प्रतिबद्धता सेहो अछि.   

मैथिली फिल्म प्रेमी लेल किछु संदेश?
हिनका सभ सं अतबे आग्रह जे अपन प्यार आ दुलार अहिना बना कें राखथि जाहि सं हम सब नीक-नीक सिनेमा बना क’ हिनका सभहक समक्ष आनि सकी... आभार.

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