चिरस्मरणीय भेल 'भामती' नाटकक मंचन

साहित्यिक ओ सिने एक्टिविस्ट भास्कर झा 'भामती' नाटकक मंचन पर अपन विचार किछु एहि तरहें रखलनि अछि—

मैथिली नाट्य संस्था मिथियात्रीक झंकार, कोलकाता द्वारा 19 जनवरी 2014कें कला कुंज, कला मंदिर मे सुशील झा द्वारा लिखित ऐतिहासिक मैथिली नाटक 'भामती'क मंचन शंभूनाथ मिश्रक निर्देशन मे भेल. नाटकक मंचनसं पहिने एहि अवसर पर आयोजित सम्मान समारोहमे लब्ध प्रतिष्ठित लेखक आ 'भामति' केर नाट्यकार सुशील झा कें स्व. डॉ अशर्फ़ी झा अमरेश स्मृति मातॄभाषा संवर्धन सम्मान 2014सं सम्मानित कयल गेल. डारवेफ़ (डॉ अशर्फ़ी झा अमरेश वेलफ़ेयर एजुकेशनल फ़ाउन्डेशन)क चेयरमैन प्रो शंकर झा द्वारा सुशील झाकें 11001/- टाकाक नगद सम्मान राशिक संग प्रशस्ति पत्र प्रदान कएल गेल. ई सम्मान मातॄभाषा आ साहित्यक क्षेत्रमे उत्कृष्ट योगदानक लेल प्रतिवर्ष प्रदान कएल जायत अछि. पछिला बर्ख बरिष्ठ साहित्यकार गुणनाथ झाकें ई सम्मान प्रदान कएल गेल छल. कार्यक्रमक अन्तमे मिथियात्रीक झंकारक सचिव रंगकर्मी संजय ठाकुर सांगठनिक प्रतिवेदन पढि संस्थाक गतिविधि आ उपलब्धिपर इजोत देलनि. मंचक संचालन भास्कर झा कयलनि.
माननीया पूर्व सांसद आ हिन्दी विभागक पूर्व अध्यक्षा डॉ चन्द्रकला पाण्डेय द्वारा कार्यक्रमक उदघाटन कएल गेल. एहि अवसर पर मुख्य अतिथिक रूपमे एसके दास, सीमा शुल्क आयुक्त (पोर्ट) आ विशिष्ट अतिथिक रूपमे वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर उपस्थित छलाह. मिथिलाक इतिहासक पृष्ठभूमिक आधार पर भामती ठाढी गाम निवासी पं. वाचस्पति मिश्रक धर्मपत्नी छलीह. भामती नाटक जनश्रुति कथा पर आधारित अछि. ध्यातव्य अछि जे ई कथा मात्र भामतीक महान त्याग, तपस्या आ चरित्र पर आधारित अछि, जकर चर्च मिथिले धरि नहिं, अपितु समस्त भारतवर्षमे प्रसिद्ध अछि. भामती प्रतीक थीक मिथिलाक नारीक. मिथिलाक नारी माने भेल एकटा एहन प्रकाशकीय आभा जाहि आलोकमे सम्पूर्ण भारतीय नारीत्व प्रकाशित होयत अछि. ओना आदिकालहिंसं मिथिलाक नारी प्रखर एवं तेजस्विनी रहलीह अछि, जतय स्वयं शंकराचार्यकें मिथिलामे परास्त होबय पड़लनि आ एतS वाचस्पति मिश्र अपने घरमे, अपने स्त्री भामतीसं परास्त होइत छथि. स्त्री शक्ति स्वरुपा होइछ, तकर प्रमाण मिथिलामे प्राचीने कालसं निरन्तर भेटैत आयल अछि. उदाहरणार्थ त्रेतायुगमे जनक पुत्री सीता आ एहि कलियुगमे भामती अकाट्य प्रमाण अछि.
नाट्य निर्देशक शंभूनाथ मिश्रक वाचस्पतिक भूमिकाक बड्ड सराहनीय छल. प्रारंभिक गंभीरता आ साहित्यक प्रति प्रगाढ अनुराग मे रमल ग्रन्थकार आ नाटकक उत्तरार्धमे हुनक हॄदयमे जगल प्रेमक अनुभूति सं अभिभूत वाचस्पति मिश्रक चरित्रकए अपन भावाभिनय द्वारा जीवन्तता प्रदान कए शंभूनाथ मिश्र एक बेर फ़ेरसं अपन मनोहारी अभिनय आ कुशल नाट्य निर्देशनसं मैथिली नाट्यप्रेमीक हॄदयमे बनल अपन स्थानकें आरो पुख्ता केलनि अछि. जाहि गंभीरतासं वाचस्पति मिश्रक जीवनकें अपन अभिनयक प्रदर्शन सं रंगमंचीय कौशल देखौलनि, ओ अपने आपमे एकटा पैघ थिक. साहित्यिक जटिल वाक्यांशकें रंगमंचक भाषामे परिवर्तन कए नाटकमे प्रयुक्त सहज संवादक बले सब कलकारक अभिनयकें एकटा नव आयाम भेटल. नाटकक प्रमुख् नायिका भामतीक चरित्रमे श्रीमती शशिता रायक अभिनय उत्कृष्ट छल. संवाद सम्प्रेषण, हाव-भावक सहज अभिव्यक्ति नाटकक सफ़ल मंचनमे उल्लेखनीय यॊगदान बुझना गेल. नवोदित रंगकर्मी कुमारी पूजा पाठकक अभिनय नाटककें एकटा जीवन्त रुप प्रदान कयलक. ई हुनक पहिल नाट्याभिनय छल जाहिमे ओ अपन प्रभाव छोड़यमे बड्ड सफ़ल भेलीह.
मैथिली रंगमंच आ फ़िल्मक सशक्त अभिनेता रंगकर्मी दिनेश मिश्र द्वारा अभिनीत पुरन्धरक भूमिका उपस्थित दर्शककें अपन दिस खींचयमे सफ़ल भेल. नाटकमे पुरन्धर एकटा नकारात्मक चरित्र अछि जेकि भामतीक सहपाठी रहैत अछि. पुरन्धर पंडित वाचस्पति मिश्रक रचना वा पाण्डुलिपि सब चोरयबाक असफ़ल प्रयास करैत अछि. एहि खलपात्रकें विविध भाव-भंगिमासं जीवन्तता आ यथार्थता प्रदान करैत दिनेश मिश्रक अभिनय उत्कॄष्ट आ बड्ड प्रभावी रहल. हुनक हास्य आ व्यंग्य मिश्रित संवाद नीक लागल.  एकमात्र दृश्य मे मंच पर बहुत दिनक बाद अवतरित भेल छलाह लोकप्रिय अभिनेता आ रंगकर्मी भवनाथ झा. वैद्य जीक एकटा छोटछीन भूमिकामे हुनक दमदार अभिनय बड्ड प्रशंसनीय रहल. दोसर दिस, सुधीर झाक शौमित्रक रुपमे सहज अभिनय सेहो बड्ड नीक लागल सब दर्शनकें.
'भामती’ नाट्यमंचनक सबसं पैघ विशेषता छल प्रयुक्त बैकग्राउन्ड गीत-संगीत. प्रत्येक दृश्यक समापन केर उपरान्त किछु गीतक बोलअक सहयोगसं संबंधित कथानक सार कहि नाटकक सहज सामंजस्यता रखबाक यथेष्ट प्रयास कएल गेल. गीतक माध्यमे कथा सारक अदभुत प्रस्तुति अपने आपमे विलक्षण छल गायक दिनेश सिंहक स्वर आकृष्ट कएलक. प्रकाश आ संगीतक मनोहारी संयोजन अदभुत छल.

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