सरस्वती वन्दना


हे माँ सरस्वती शारदे !
हे माँ सरस्वती शारदे !! 

संस्कृति कला श्री शोभिनी,
साहित्य ज्योति विमोहिनी।
सुर-उर मधुर मृदु गीतकेँ,
नित अमित नव झंकार दे ।।

कुन्देदुतन तन्द्रातरल,
अरुणेन्दु मन निश्चल बनल।
नीलेन्दु वसना भारती,
पीतेन्दु प्रभ विस्तार दे ।।

आनन्द ऋतु-ऋतुरंगिनी,
शुभ्रात्म सौरभ संगिनी।
हे शाब्द, वीणा वादिनी,
सुर-ताल-लय अधिकार दे ।।

हे माँ सरस्वती शारदे !
हे माँ सरस्वती शारदे !!

— पं.सर्वनारायण झा 'शास्त्रचूडामणि'

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