अपन संस्कृति केर महत्व बूझथि युवा : अजेय मिश्र - मिथिमीडिया
अपन संस्कृति केर महत्व बूझथि युवा : अजेय मिश्र

अपन संस्कृति केर महत्व बूझथि युवा : अजेय मिश्र

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मूलतः सुपौल जिलान्तर्गत गिरिधरपट्टी केर रहनिहार अजेय मिश्र शास्त्रीय संगीत (ध्रुपद-धमार आ ख्याल) गायन केर क्षेत्र मे एकटा उदीयमान व्यक्तित्व छथि. 14 बरख धरि शास्त्रीय संगीतक विधिवत शिक्षा प्राप्त केलाक उपरान्त अपन परिपक्व गायकीक प्रभाव सं  समस्त भारतवर्ष मे युवा शास्त्रीय संगीत गायकक रूप मे नीक ख्याति अर्जित केने छथि. मिथिमीडिया दिस सं मनीष झा 'बौआभाइ' केर अजेय मिश्र संग भेल वार्तालापक किछु अंश :-

सभ सं पहिने त' हम अपनेक सांगीतिक पृष्ठभूमि सं अवगत होमय चाहब.
हम नान्हिएटा सं सुगम संगीत गबैत छलहुँ. १३ बरखक अवस्था मे पिताजीक कहला पर हम ख्यालक शिक्षा लेब शुरू क' देलहुँ, आ तकरा बाद हम अपन रूचि सं ग्वालियर, किराना, बनारस, इंदौर आदि घराना सभ मे ख्याल सीखय लगलहुँ, तत्पश्चात डागर परम्परा सं ध्रुपद-धमारक तालीम लेब शुरू क' देलहुँ.

की ! अपनेक घर मे पहिनहि सं संगीतक परिवेश छल वा ई स्वनिर्णय छल जे संगीत कें हम अपन कैरियर बनाबी ?
ओना जओ देखल जाय त' हमरा घर मे संगीतक कोनो तेहन माहौल नहि छल, मुदा पिताजी शौकिया गबैत छलाह. संगीत मे कैरियर बनेबाक निर्णय हमर स्वयं केर छल. 

 एहि निर्णय पर अभिभावाकक प्रतिक्रिया सकारात्मक छलनि वा नकारात्मक? 
पूर्ण सकारात्मक, कारण जे ओ सदिखन हमरा प्रोत्साहित करैत रहलाह.

अपनेंक झुकाव शास्त्रीय संगीत दिस कोना भेल आ ई प्रेरणा किनका सं भेटल?
छोटे टा सं रेडियो सुनबाक बड्ड सौख रहय. रेडियो पर शास्त्रीय संगीतक महान गायक पं. भीमसेन जोशी जी केर गायकी सं हम बड्ड प्रभावित रही आ हुनके गायकी सं हम प्रेरित भ' निर्णय लेलहुँ जे हम शास्त्रीय संगीतक विधिवत शिक्षा लेब. 

शास्त्रीय संगीत मे बहुत बेसी धैर्य केर आवश्यकता होइछ, जखन कि एहि आर्थिक युग मे नवयुवकक झुकाव पाश्चात्य संगीत दिस बेसी देखल जाइत अछि. एहि मादें अपनेक की कहब अछि ?
नीक गप्प कहल अपने, शास्त्रीय संगीत मे बहुत बेसी धैर्यक आवश्यकता होइछ. जखन कि लोक मे धैर्यक बेसी अभाव देखल जाइत अछि. आइ-काल्हि लोक अपन घरक दालि-रोटी खेबा सं बेसी बर्गर आ सैंडविच  खायब बेसी पसंद करैत छथि कियैक त' ई बनले बनल सुलभ रूप सं प्राप्त भ' जाइत अछि मुदा स्वास्थ्य केर दृष्टिकोण सं देखल जाय त' जे आनंद दालि-रोटी मे ओ बर्गर आ  सैंडविच मे कत' पाबी. तहिना कम समय मे बेसी पाइ आ नाम कमेबाक लालसा सं नवयुवकक झुकाव पाश्चात्य संगीत दिस बेसी भ' रहल अछि.

एखन धरि कतेक मंच आ मुख्यतः कोन-कोन शहर मे अपन प्रस्तुति द' चुकलहुं अछि ?  
करीब चालीस टा सं बेसी मंच. जाहि मे मुख्यतः पटना, भोपाल, दिल्ली, हल्द्वानी, कोलकाता, मुंबई आदि-आदि शहर मे.

श्रोता कें धैर्य कतबा देख' मे अबैत अछि आ केहन प्रतिक्रया होइछ शास्त्रीय संगीतक प्रति ?
पुरान श्रोता मे त' धैर्य देखबा मे अबैत अछि मुदा नवतुरक श्रोता मे किछु कालक बाद कछ्मछी बुझना जाइत रहैत अछि.

गुरु शिष्य परम्परा मे गुरु लोकनि सं केहन सहयोग भेटल आ तहिना अपन शिष्य लोकनि सं केहेन अपेक्षा रखैत छी ? 
ओना त' अपना मूंहे अपने बड़ाइ नीक गप्प नहि तथापि अपने पूछल त', हम अपन सभ गुरु लोकनिक तन-मन-धन सं सेवा करैत रहलहुँ अछि तकरे प्रतिफल थिक जे हुनका लोकनिक आशीर्वादे  किछु ज्ञानार्जन क' पओलहुँ. हम अपन शिष्य लोकनि सं सेहो आशा करैत छी जे ओहो लोकनि समर्पित भाव सं संगीत सीखथि.

हिन्दी जगतक संगीत क्षेत्र मे स्थापित छीहे मुदा जओ अपन मातृभाषा मैथिली हेतु अवसर भेटय त' अपने केहन योगदान देमय चाहब ?
सभ सं पहिने त' मैथिली हमर मातृभाषा थिक आ एहि भाषाक मधुरता त' विश्वविदित अछि , तैं एहि मे योगदान कें  हम अपन सौभाग्य बुझब. बहुत दुःख होइत अछि जखन मैथिली मे अश्लील गीत सुनबा में अबैत अछि. महाकवि विद्यापति जीक रचना हम अंतरात्मा सं पसीन करै छी आ अपेक्षा रहैत अछि जे साफ़ आ सुन्दर मैथिली गीत कें ल' ओकरा शास्त्रीय संगीत आधार पर अधिकतम योगदान दी.   

एहि भागदौड़ सन व्यस्त जिनगी मे परिवारक वास्ते समय निकालब कतेक मोसकिल बुझना जाइत अछि ?
हँ! कने कठिनाइ त' बुझाइ छै मुदा बेसी नै कियैक त' हमरा बुझने कोनो व्यक्ति अपन कैरियरक संग-संग अपन परिवारक जिम्मेवारी कें सेहो ओतबे महत्त्व देइत अछि जतेक कैरियर कें. ओहुना हमरा लोकनिक वास्ते उठब-बैस, खायब-पीयब परिवार-समाज सभ संगीते केर एकटा अंग अछि तैं इहो सब ओही मे संभव भ' जाइछ. 

नवयुवकक वास्ते अपनेक सन्देश ?
हुनका लोकनिक वास्ते सन्देश ई जे अपन संस्कृति, अपन संगीत केर गरिमा बरक़रार रखैत ओकर महत्त्व बूझथि आ सदिखन सन्मार्ग दिस अग्रसर होइथ . 

अजेय जी, अपने अपन एतेक बहुमूल्य समय मे सं हमरा लेल जे किछु देल ताहि लेल अपनेक आभारी रहैत स्वर्णिम भविष्यक कामना करैत छी.
जी! बहुत बहुत धन्यवाद.

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