मातृभाषा दिवस: आखिर कहिया धरि जागब हमसब?


साल 2006 मे इण्टर केर परीक्षा देलाक बाद गाम छुटि गेल. माने गाम छोड़ला 15 वर्ष भ' गेल. समय कें त' जेना पांखि लागल छै! कोना जल्दी-जल्दी ई पन्द्रह वर्ष बीति गेल से नहि जानि!

जखन गाम मे रहैत छलहुं तखनहि सं बदलाओ देखि रहल छी. परिवर्तन त' संसार केर नियम छै, मुदा एकटा परिवर्तन जे सभ सं बेसी अखरैत अछि ओ अछि  विलुप्त होइत मातृभाषा, मैथिली भाषा! एहि मे कोनो सन्देह नहि जे बिहारक सम्पूर्ण सरकारी तंत्र मैथिलीक प्रति दुर्भावनाक भाव रखैत अछि, मुदा हम सब मैथिलीभाषी सेहो अपन मातृभाषा प्रति सिनेह नहि राखि पबैत छी!
 
जखन गाम मे रहैत छलहुं तखन हमहूं अपन दोस्त-महीम सङ्ग हिन्दी बाजए लागल छलहुं। मुसलमान दोस्त उर्दू बजैत छल। नहिए हमरा सभ कें दुःख होएत छल, नहिए कोनो आश्चर्य। आब सोचैत छी जे किएक एना भेल जे हमसब अपन मातृभाषाक प्रति सिनेह कें बिसरि गेलहुं। की हिन्दी माध्यम सं पढ़ाइ-लिखाइ एकर कारण छै? की दड़िभंगा शहर कारण छै जतए कॉलेज सं ल' विश्वविद्यालय, नगर-निगम सं ल' शहरी विधानसभा पर मारवाड़ी लोकिनक कब्जा छनि! वा फेर सरकारी षड्यंत्र जे हिन्दी राष्ट्रभाषा छै कहि मिथिला प्रचारित करैत अछि. आ कि ओ न्यूजपेपर जे दरबज्जे-दरबज्जे हिन्दी अखबार पहुंचओबैत अछि. 

एहना कोना भेलै जे गाम सं मात्र आधा किलोमीटर दूर चौक पर सब हिन्दीए बतियाइत छै। हिन्दी बजनाइ आओर मैथिली नहि बजनाइ ई बदलाओ 15 वर्ष पहिनहि देखने रही, तथा एहि मे सहभागी रही। गाम मे रहैत एकटा मास्टर/व्यक्ति किओ नहि सिखेलनि जे अपन मातृभाषा पर गर्व करू, अपन मातृभाषा सं सिनेह करू। अपन मातृभाषाक प्रयोग करू। एहन सिखेनिहार कोनो व्यक्ति सं संसर्ग नहि भेल! 

मातृभाषाक प्रति सम्मान, मातृभाषा पर अभिमान किछ नहि बुझैत छलियै। मिथिला मे मैथिली नहि बाजि हिन्दी बजनाइ मात्र दुःखद नहि भयाओन सेहो अछि। हम अपन अगिला जेनरेशन सं एतेक त' कहि सकैत छी जे हमसब मैथिली भाषी छी। हमर अपन मातृभाषा मैथिली पर गर्व अछि। हम 2टा मैथिलीभाषी सदिखन मैथिली मे गप करब। हमर शिक्षाक माध्यम मैथिली हेबाक चाही। हमरा एतय मीडिया सेहो मैथिली चाही। हमर विधायक, मेयर सेहो मैथिलीभाषी मैथिल हेताह/हेतीह। हमसब कहिया जागब, कहिया अपन अधिकार छिनब। कहिया हमरा सभ कें पलायन सं मुक्ति भेटत!

— रोशन चौधरी 

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