राजकमल चौधरी पर परिचर्चा ओ कवितापाठ आयोजित



कलकत्ताक ताज़ाटीवी सभागार मे मैथिली-हिन्दी केर बहुचर्चित साहित्यकार राजकमल चौधरी पर परिचर्चा आयोजित भेल. जाहि मे महानगरक प्रबुद्ध साहित्यिक लोकनि भाग लेलनि.

मिथिला विकास परिषद् द्वारा आयोजित परिचर्चा सं पहिने अशोक झा बीजभाषण देलनि. ओ कहलनि जे हमरा लोकनि कें राजकमल सं प्रेरणा लेबाक चाही. बहुत कम आयु मे ओ विपुल साहित्य रचलनि. ओ वर्त्तमान कें देखैत भविष्यक बात लिखलनि. रविदिन 16 जुलाइ कें बेरूपहर आयोजित कार्यक्रम मे प्रो. शंकर झा, नवीन चौधरी, गीतेश शर्मा, अजय तिरहुतिया, भास्कर झा आदि राजकमलक जीवन ओ साहित्य केर विविध पक्ष पर चर्चा केलनि. कार्यक्रमक दोसर सत्र मे रूपा चौधरी, बिनय भूषण, अमर भारती, विजय इस्सर, नबोनाथ झा, रूपेश त्योंथ आदि कवि लोकनि राजकमलक कविताक पाठ केलनि. 


ज्ञात हो जे राजकमल चौधरीक कर्मक्षेत्र कलकत्ता रहल छल. हुनक मृत्यु मात्र 38 वर्षक अवस्था मे भ' गेलनि. ओ मैथिली-हिंदी मे प्रचुर साहित्य लिखलनि. मैथिली मे करीप 100 कविता, तीन उपन्यास, 37 कथा, तीन एकांकी आ चारिटा  आलोचनात्मक निबंध लिखने छलाह. संगहि ओ हिंदी मे आठ उपन्यास, करीब 250 कविता, 92 कथा, 55 निबंध आ तीनटा नाटक लिखलनि.


कार्यक्रम मे राजकमल पर पोथी प्रकाशित करबाक घोषणा करैत मिविप अध्यक्ष अशोक झा कहलनि जे हमरा लोकनि कें विद्यापति सं आगू बढि क' सोचबाक चाही. साहित्यक फलक बढेबाक चाही. शोध संबंधी पोथी सबहक नितांत अभाव देखबा मे आबि रहल अछि. अंजय चौधरी धन्यवाद ज्ञापन केलनि.

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