मिथिलाक भाखा-संस्कृति अनुपम : राज्यपाल


कलकत्ता : मिथिला भारतीय संस्कृतिक अग्रदूत रहल अछि. एतय एकसं एक विद्वान तपस्वी सभ भेलाह अछि. प्राचीन कालहिसं ई धरती विश्वकें धर्म, संस्कृति आ लोकाचार केर पाठ पढ्बैत रहल अछि. एहि पावन धरतीक एक दिस हिमालय आ दोसर दिस गंगा अछि. एहिसं ज्ञात होइछ जे मिथिला पावन धरती अछि जतय सीता जन्म लेलनि. एतय विद्यापति सन महात्मा भेल छथि, जिनक रचनाक आनंद लेबय हेतु स्वयं महादेव हुनक चाकर बनि आयल छलाह. मिथिला महोत्सवक उदघाटन समारोह मे बजैत राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी जनक, याज्ञवल्क्य, गौतम, कपिल, मंडन, अयाची, वाचस्पति जेहेन बहुतो विद्वतजन  के नमन करैत नारी-अस्मिता एवं चेतना के प्रतीक के रूप में जानकी, गार्गी, भारती समेत आधुनिक काल के विश्वविख्यात विद्वान डॉ. गंगानाथ झा, डॉ. अमरनाथ झा, उमेश मिश्र, डॉ. सुभद्र झा सन नामक उल्लेख केलनि. सत्रक संचालन अंजय चौधरी केलनि.

रविदिन 7 दिसंबर कें मिथिला विकास परिषद् द्वारा स्थानीय तारासुंदरी पार्कमे मिथिला महोत्सवक उदघाटन समारोह मे परिषदक राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक झा 14 दिवसीय मिथिला महोत्सवक विषय मे विस्तारसं जनतब देलनि.  सांस्कृतिक कार्यक्रम मे दर्शक पवन नारायणक गीत पर झूमि उठल. सुरेश पंकज केर गीत लोक कें बेस मनोरंजन केलक. मंच उद्घोषक किसलय कृष्ण दर्शक आ कलाकारक मध्य नीक तालमेल करैत कार्यक्रमक संचालन केलनि. एहि अवसर पर वीरेन्द्र मल्लिक, समाजसेवी कामदेव झा, जीवेन्द्र मिश्र, जुगल किशोर झा, पत्रकार तारकेश्वर मिश्र सहित मैथिलीप्रेमी लोकनि उपस्थित छलाह.

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