छठि पावनि पर ग़ज़ल


अजगुत उद्गार भेटल छठिक घाट परमे
सभटा सहियार भेटल छठिक घाट परमे

पावनि बड ई पवित्तर सविधि आ सुफल छी
सरधा भरमार भेटल छठिक घाट परमे

ठकुआ भुसबा पिरिकिया सजाओल डाला
फल फुल कुसियार भेटल छठिक घाट परमे

छाती भरि पानिमे ठाढ कल जोड़ने सब
सुरुजक मनुहार भेटल छठिक घाट परमे

पवनैतिन साँझकेँ अर्घ राजीव देलथि
भोरे तैय्यार भेटल छठिक घाट परमे

२२२ २१२२ १२२१ २२
— राजीव रंजन मिश्र

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