रंगमंच पर मैथिलानीक उपस्थिती संतोषजनक : प्रेम

विभिन्न सम्मान सं सम्मानित मैथिली रंगमंचक पहिल रंगकर्मी एवं साहित्यानुरागी प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' सं मिथिमीडिया केर सिने संपादक भास्कर झा द्वारा लेल साक्षात्कारक प्रमुख अंश—

अपन प्रांरंभिक जीनगीक संबंध मे किछु कही? 
हमर नैहरि रहिका (मधुबनी) अछि आ सीतामढी जिलाक अन्तर्गत धाधी-सिरसी हमर सासुर. हमर शिक्षा गामे केर इसकूल मे भेल. मैट्रिक प्रथम श्रेणी सं पास केने छलहुं. हमर पति रहिका स्कूल मे शिक्षक पद पर कार्य करैत छलाह मुदा 'कक्का' (यात्री जी/नागार्जुन)क कहने पटना आबि गेलहुं. किछु दिन धरि हम कक्काक महेन्द्रु स्थित डेरा पर रहलहुं. चूंकि कक्काक पहिचान बड्ड पैघ-पैघ लोक सं छलनि, तें हमर पतिक नौकरी एकटा प्रकाशन मे लागि गेल छल. चूंकि हमहूँ नीक पढल छलहुंत' हमरो कहलनि जे अहां कोनो स्कूल मे शिक्षिका रूप मे काज करू. से करय लगलहुं. 

अहांक रंगंकर्मक यात्रा कोना प्रारंभ भेलअपन अनुभव बताबी?
पटना अयला पर एक दिन कक्काजी (बाबा नागार्जुन-हमर पिताजीक पिसियौत भाय) हमरा आकाशवाणी लय गेलाह आ कहलाह जे अहां आकाशवाणी मे विभिन्न गोष्ठीसंगोष्ठीवार्तापरिचर्चा आदि मे भाग लिअयसे हम  कार्यक्रम सबमे अपन सहभागिता देबय लगलहुं. हमरा एखनो स्पष्ट रूप सं मोन अछि. कक्का कें हम आंगुर पकड़ि कए आकाशवाणी गेल छलहुं. आ ओहि ठाम वार्ता कें संग-संग रेडियोमे नाटक सबमे भाग लेबय लगलहुं. आकाशवाणी मे गोपेशजीबटुक भाइइन्द्रकान्त झा सन बड़का रंगकर्मीक आबा-जाही बड होयत छलहुनका सबक सम्पर्क मे एलहुं. चेतना समिति सं जुड़लहुं आ हुनके सबक साथ नाटक करैत-करैत नाट्यमंच आ रंगकर्म सं जुड़ि गेलहुं. कम्पीयरिंग सेहो केलहुं. रंगकर्मीक सम्पर्क मे अबितहि चेतना समिति आदि बहुत रासे नाट्य संस्था सं जुड़ि गेलहुं. ई बात 1964-65 केर अछि. तकरा बाद हमर रंगयात्रा चलिते गेल. एहि समयमे रंगमंचीय अभिनयक लेल नारी पात्रक अभाव छल. पुरुख सब नारीक भेषमे अभिनय करैत छलाह. परिस्थिति एहन बनल जे हमरा एहि कें दूर करयमे रंगमंच पर आबय पड़ल. हमर प्रारंभिक रंगमंचीय जीनगीमे 'टुटैत लोक', 'लेटायत आंचर' आदि मे हमर अभिनयक बड्ड प्रशंसा भेल. 'टुटैत लोक' मे हम पहिल बेर अभिनय कयलहुं जे चेतना समिति द्वारा मंचित कयल गेल छल.

मैथिलीक पहिल फ़िल्म 'ममता गाबय गीत' मे अहांक भूमिका सेहो अछि. ई भूमिका अहांके कोना भेटल छल?
एहि सब नाटक करयक क्रम मे रबीन्द्रनाथ ठाकुरजी (रवीन्द्र-महेन्द्र) सं भेंट भेल छल जे हमरा सक्षम बुझैत हमरा कहलाह– 'अहां मुम्बइ चलू'. त' हम हुनका सं पूछलियनि जे ओतय हमरा की करय पड़त? त' ठाकुरजी कहलनि जे किछु नहिबस जे अहां अतय करैत छी मात्र सैह करय पड़त. ई बर्ख छल 1981-82क। 1981 सं सत्रह साल पहिने एकटा मैथिली फ़िल्म ममता गाबय गीत' डिब्बामे बंद छल. रबीन्द्रजी एहि फ़िल्म कें डिब्बा सं निकालि कए अकर पुनर्निर्माणक काज मे लागल छलथि. एहि फ़िल्ममे पहिलुका कथामे किछु आरो कथा जोड़ि देने छलथि आ ओहिमे किछु पात्रक आवश्यकता छल. अजराक आवाजक डबिंग केर संग-संग हम नबका कथामे विधवा भाउजक भूमिका केलहुं. ललितेश हमर पुत्रक भूमिका केलथि.

अहां मैथिली आर भोजपुरी फ़िल्ममें अभिनय केने छी. भोजपुरी फ़िल्ममे अभिनय करबाक अवसर कोना भेटल?
प्रकाश झा फ़िल्म 'दामूल' बना रहल छलथि आ कास्टिंग लेल समस्त रंगकर्मी कें बजेने छलथि. एहि ठाम  'दामूल'क शूटिंगक दौरान हमरा 'कन्यादान' फ़िल्ममे झारखंडी झाक भूमिका केनिहार जे गया केर छलाहसं भेंट भेल. ओ हमर अभिनय देखने छलाहओ लक्ष्मण शाहाबादी कें अपन संग लय कए बिनु बतौने हमरा डेरा पर चलि अयलाह. ओहि समयमे लक्ष्मण शाहाबादी एकटा भोजपुरी फ़िल्म दूल्हा गंगा पार के' बना रहल छलाह. एहि फ़िल्ममे हम मायक भूमिका केलहुं. तकरा बाद एकटा आरो भोजपुरी फ़िल्म 'बबुआ हमार' मे काज केलहुं. फ़ेर मैथिली फ़िल्म 'सस्ता जिनगी महग सेनूर' में काज केलहुं. यद्यपि निर्देशक मुरलीधर हमर भूमिका बढाबय चाहैत छलाह मुदा हमरा किछु असुविधा छल. डीडी पटना लेल प्रमोद चौधरी द्वारा निर्मित धारावाहिक 'पर्व भरा मिथिला’ मे काज केलहुं. शिव पूजन सहाय केर 'देहाती दुनिया’ मे हमर अभिनय छल. सुनील कुमार (रायपुरसीतामढी)क भोजपुरी फ़िल्म 'माटी' मे अभिनय केने छी. राजकमल चौधरीक कहानी पर आधारित श्रीकान्त मंडल जी द्वारा निर्देशित मैथिली फ़िल्म 'ललका पाग'क लेल हम पहिल बेर कॉन्ट्रैक्ट साइन केने रही मुदा दुर्भाग्यवश ई फ़िल्म रिकॉर्डिंग बादो नहि बनि सकल. हिन्दी आ भोजपुरी फ़िल्म ओ सीरियल मे काज करय लेल कयकटा ऑफ़र आयल मुदा किछु परिवारिक कारणसं आ समयाभावक कारण हमरा ऑफ़र छोड़ि देबय पड़ल.

अहां कोन-कोन रंगमंच सबसं जुड़ल छी ?
महिला रंगकर्मीक रूपें हम बहुत रास संस्था सबसं जुड़लहुं जेना भंगिमाअरिपन, चेतना समितिमैथिली महिला संघ आदि सं. आ एखनो एहि संस्था सं जुड़ले छी कोनो ने कोनो रूपे.

मैथिली रंगमंच पर मैथिलानीक उपस्थितिक खगताक विषयमे की कहय चाहब?
नीक प्रश्न अछि. समीचीन प्रश्न. मुदा एहि संबंधमें हम ई कहय चाहब जे मैथिली रंगमंच पर मैथिलानीक उपस्थितिक स्थिति मोटा-मोटी ठीके रहल अछि. हंई बात अवश्ये अछि जे मैथिलानी आब कैरियरओरियेन्टेड भ' गेलीह, परिवारिक काज-धाज मे ओझरा गेलीहअपन बच्चाक शिक्षा देबयमे बेसी सं बेसी समय देबय चाहैत छथिचाकरी करय बालीक ट्रांसफ़रक समस्या से अलगे. एहन परिस्थितिमे आब ओ नाटक केना करतीह? नाटक मे समर्पण चाहीसमय चाही. महिला रंगकर्मीमे बहुत रास महत्वपूर्ण नाम अछि. ककर-ककर नाम कहू. स्वाती सिंहप्रियंकाशारदा सिंहआशा चौधरीरितु कर्ण, कल्पना, ज्योति झा कयकटा कलाकार. पहिने तनुजा शंकर अभिनय करै छलीह. आब छोड़ि देलीह.

कोन-कोन सम्मान भेटल अछि ?
हमरा साहित्य, कला, संस्कृति, अभिनय लेल बहुत रास सम्मान भेटल अछि. पटनाक चेतना समित, कोलकाताक मिथिला सांस्कृतिक परिषद, दिल्लीक अखिल भारतीय संस्थान, दरभंगाक विद्यापति सेवा संस्थान, दिल्लीक नाट्य संस्था  मैलोरंग द्वारा (ज्योतिरीश्वर सम्मान) हमरा सम्मानित कयल गेल अछि. मैथिली संस्थाक तुलनामें हमरा हिन्दी संस्थासं बेसी सम्मान भेटल अछि. नूर फ़ातिमा सम्मान, पाटलिपुत्र अवार्ड, मिथिला विभूति दू दू बेर कोलकाता द्वारा, रहिका द्वारा सम्मान.

अहांक परिवारमे केs केs छथि ?
हमर परिवार मे 3टा पुत्र एकटा पुत्री, ज्येष्ठ मनमोहन मिश्रा (आईबी मे), दोसर रवि रंजन मिश्रा (ILFS मे वाइस प्रेसिडेंट), तेसर अनुपमा जे म्यूजिक मे एमए कय रहल अछि. गीत गबैत छथि. छोटका बेटा सत्यजीत मिश्रा तबलाबादक अछि.

अभिनयक सं संग अहां सुपरिचित साहित्यकार सेहो छी. अपन साहित्यिक रचना बारे मे किछु बताबी ?
आकाशवाणि सं जुड़ला पर  एहिमे वार्ता प्रस्तुत करबाक लेल हमरा लिखय पड़ैत छल. बादमे विभूति आनन्द केर प्रेरणा पर हम  अपन लेखन कार्यके गति  प्रदान करय लगलहुं. विभिन्न पत्र पत्रिकाक सम्पादन केलहुं आर एखनो कय रहल छी. हमर रचना विभिन्न पत्र पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल अछि. हमर  कथा संग्रह अछि- “एगो छली सिनेह”,  हमर संस्मरण “वो दिन वो पल” आओर कथा- संग्रह “शेखर प्रसंग” अछि जेकि हमर पीएचडी केर विषय छल. साहित्यिक गतिविधिमे सतत लागल रहैत छी. पटनामे अपन घर पर सब मासमे एक दिन “सांध्य गोष्ठी” केर आयोजन करैत छी जाहिमे मैथिली, हिन्दी रचना आदिक पाठ तथा ओकर विश्लेषण होयत अछि. एकटा रंगमंच विशेषांक जल्दिये आबय बला अछि.

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