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गुंजन श्री केर गजल

गुंजन श्री केर गजल

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राइत जेना अधिया गेल छै
कियो ककरो बिसरा गेल छै

समय तेना ने चुम्मा लेलकै
लोलक धार भोथरा गेल छै

प्रेम कोना हेतैक ककरो सँ
बात सबटा ओझरा गेल छै

रूक्ख केश मुदा लट औंठिया
गरीबी कोना अगरा गेल छै

'गुंजन' कहू की बात रातिक
की अदिंता घरघरा गेल छै

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