अपन लोक, अपन माटि सं साक्षात्कार करबैत अछि 'मिथिला यात्रा'



दशमी सं पहिने किछु युवा लोकनि 'मिथिला यात्रा' पर निकलल छलाह नेपालीय मिथिला मे. निश्चये ई युवा लोकनि आम युवा त' नहिए छलाह, कारण एतेक अवगति भेलनि तखने ई लोकनि ख़ास भ' गेलाह. 

'मिथिलाक अनुपम डेग' नामक संस्था दिस सं 3 गोटेक टीम दशमी सं एकदिन पहिने मिथिला यात्रा पर निकलल छलाह जाहि मे पत्रकार ध्रुब झा, निर्देशक/अभिनेत्री सरिता साह आ मैथिली एक्टिविस्ट निराजन झा शामिल छलाह.


सोशल मीडिया पर खूब चर्चित भेल ई यात्रा कतेक तरहक जिज्ञासा जगेने छल. केहन यात्रा, किए यात्रा आदि कतोक प्रश्न लोकक मोन मे उमड़ल मुदा निस्सन किछु नै देखना-बुझना गेल. मिथिमीडिया एहि विषय पर जखन मिथिला यात्री मे सं निराजन झा सं बात केलक त' बहुत किछु स्पष्ट भेल, जे हमरा सभ लेल अनुकरणीय अछि.

यात्राक संबंध मे निराजन कहैत छथि जे ओ लोकनि दशमी सं एकदिन पहिने मिथिला यात्रा शुरू केलनि जे विजयादशमी धरि चलल. ई यात्रा नेपालीय मिथिला मे अपन सभ्यता, संस्कृति, समाज तथा मातृभाषा कें पुनः जागृत आ सबल बनेबाक उदेश्य सं कएल गेल. विभिन्न भू-भाग में लोकक बीच जा अपन माटिक लेल जनजागरण पसारब हिनका लोकनिक मूल ध्येय छलनि.


जें ई लोकनि पत्रकार, कलाकार आ कार्यकर्ताक टीम बनओने छलाह तें ई लोकनि कहनो लोक कें जे जहिना बुझबाक अवगति रखैत अछि, अपन भाषा-संस्कृतिक बात बुझा सकबा मे सक्षम छलाह. ई लोकनि ठाम-ठाम भाषण, गायन, मंचन आदि माध्यम सं लोक कें जगेबाक काज केलनि.

मिथिला मे लोक अप्पन भाषा-संस्कृतिक प्रति उदासीन अछि आ एतहि कार्यकर्ता लोकनि कें काज करबाक बेगरता बूझल जा रहल अछि. ई लोकनि अपन यात्रा मिथिलाक अन्तिम राजधानी सिमरौनगढ सं शुरू क' नेपालक पर्सा जिल्ला होएत झापा जिल्लाक किचकबद्ध मे समाप्त केलनि.


निराजन कहैत छथि जे अपना सभक पुरुखा सभ पहिनहु सँ तीन तरहक मिथिला यात्रा करैत आएल छलथि. जाहि मे मध्य परिक्रमा आ अन्तर्गृही परिक्रमा अखनो जीवन्त अछि. पारम्परिक मिथिला यात्राक उद्देश्य सेहो अपन लोकसभक रंगरूप देखब, लोकवेद सं साक्षात्कार करब आ अपन विशेषता सभक पहिचान करब सेहो छल. ओही काज कें ई लोकनि आगू बढ़ेलनि अछि, जे पुरुखा लोकनि करैत छलाह.

निराजन अपन प्रतिबध्दता जनबैत कहै छथि जे मिथिला सदति सं चलि आएब रहल युद्ध छी. ज्ञानक युद्ध, दर्शनक युद्ध, समाजिक न्यायक युद्ध. ई यात्रा बेर-बेर चलैत रहत.


सोशल मीडियाक जुग आ एखुनका परिस्थिति मे दुनू पार मिथिलाक युवा लोकनिक पहिल काज होइए जे ओ पहिने अपन लोक, अपन भाखा-संस्कृति सं साक्षात करथि. अपनो जागथि, लोको कें जगाबथि. ई देखाउंस लगाबथि, एकरा वायरल बनाबथि. एक बेर फेर मिथिला बनाबथि. जय मैथिली!

— रूपेश त्योंथ

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