युवा लेखक महोत्सव: अगरतला सं आबि क' (3)


हमरा बड़ मोन छल जे उनाकोटि देखि आबी मुदा, ताहि लेल समय हाथ मे नहि छल. स्थानीय लोक सब कहलनि जे उनाकोटि जयबाक लेल पूरा एकदिन समय हाथ मे रहबाक चाही. अगरतला सँ अबैत-जाइत छओ सँ आठ घण्टाक यात्रा. अपनहुँ बूझल छल जे ओतय चारिये बजे साँझ पड़ि जाइत छैक, कारण चारू कात उँच-ऊँच पहाड़ सँ बेढ़ल अछि ई स्थान. डॉ. शालू आ हम अंततः दूटा स्थान घुमबाक नेयार कयलहुँ- नीर महल आ त्रिपुर सुन्दरी मंदिर. होटलक एकटा कर्मचारी एकटा गाड़ी ठीक कऽ देलनि. योजनानुसार हमरा लोकनि केँ उद्घाटन सत्रक बाद टूर पर निकलबाक छल आ राति आठ बजे धरि होटल घुरबाक छल.

युवा लेखक महोत्सवक उद्घाटन सत्र चलि रहल छल. दर्शक लोकनि बेस ध्यानस्थ भऽ भाषण सुनि रहल छलाह. हमर नजरि कखनो मंचपर तँ कखनो दर्शक मे बौआइत छल. शालू बेरि-बेरि घड़ी दिस ताकथि. हुनका शाइत उद्घाटन सत्र समाप्तिक प्रतीक्षा छल. पूर्वोत्तर भारतक प्राकृतिक सौन्दर्यक परिदर्शनक उत्कंठा हमरो भीतर कछमच्छी पैसाइये देने छल. मुदा, हमरा लोकनि पूर्वोत्तरक प्रकृति सँ परिचय पयबाक लेल बहराइ ताहि सँ पूर्वहि प्रकृतिक दूत बनि हमरा लोकनि सँ भेंट करबा निमित्त मेघखण्ड आबि जुमलाह. बिजलौका चमकय लागल. मेघक सिंहगर्जना सँ भयभीत भगतसिंह युवा ऑडिटोरियमक खिड़कीक पल्ला सभ काँपय लागल. झमाझम वर्षाक सेलार संग नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरीक दर्शनक हमरा लोकनिक योजना भासय लागल. अयनाक बिना अपन मुँखाकृति तँ किओ नहि देखि पबैए मुदा, शालूक मुँह पर हमरा चिन्ता आ तामसक रेह स्पष्ट नजरि आबि रहल छल.


उद्घाटन सत्र समाप्त भेल. हॉलसँ बहराय किओ बुक-स्टॉल दिस पड़यलाह तँ किओ लंचक इन्तजामक टोह लेबय लगलाह। तावत् मंच सँ व्यवस्थापक दिस सँ घोषणा भेल जे लंच मे दस मिनट आर देरी छैक. आब हॉलक बाहर सब अपना-अपना हिसाबे छोट-छोट गोल मे तितिर-बितिर भऽ गेल छल. किछु गोटे बुक-स्टॉल पर पोथी बेसाहय मे व्यस्त छलाह. बंगला पोथीक प्रति कीननिहार मे विशेष आग्रह बुझायल. मैथिली साहित्येतिहास सँ सम्बन्धित किछु अनुदित पोथी सेहो एकात मे अवडेरल पड़ल छल.

एहि बीच हमरा असमिया कथाकार कंजलोचन पाठक सँ परिचय भेल. पाठक जी केन्द्रिय विद्यालय मे प्रिंसिपल छथि मुदा, ताहि सँ विपरीत हुनक बात-व्यवहार मे बाल-सुलभ चाञ्चल्य सहज परिलक्षित भेल. अगिला सत्र मे हिनका कथापाठ करबाक छलनि. सद्य: समाप्त सत्र मे कविता पाठ सेहो भेल छल जाहि मे अंग्रेजी कवियत्री आशिया जहूर आ उर्दू कवि डॉ. सूर्य बाली बड़ प्रभावित कयलनि. दुनू गोटे सँ सेहो एहि खाली समय मे परिचय-पात भेल. आशिया जहूर शोधार्थी छथि. कविता पढ़ैत काल अहंकारी बुझेलीह मुदा, गपशप भेला पर हिनक सरल-मृदु स्वभावक परिचय पाओल. डॉ. सूर्यबाली बहुमुखी प्रतिभाशाली छथि. इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज सँ एम.डी. केलाक बाद ई इग्नू सँ डीएचएचएम (डिप्लोमा इन हॉस्पिटल & हैल्थ मैनेजमेंट) आ यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लॉरिडा , यू॰एस॰ए सँ एमएचए (मास्टर ऑफ हैल्थ एड्मिनिसट्रेशन) कयलनि. फेर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज मे सह आचार्य एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारीक रूप मे अपन सेवा देलाक बाद सम्प्रति एम्स भोपाल मे कार्यरत छथि. फोर्ड फैलोशिप सहित अनेक सम्मान सँ सम्मानित छथि. चारिगोट कविता आ गजल संग्रह प्रकाशित छनि. देशी-विदेशी मंच पर मुशायरा मे लोकप्रिय भेल छथि. सर्वोपरि जे एकटा सहृदय साहित्यकार आ सूच्चा समाजसेवक छथि. डॉ. सूर्यबाली सँ गपशप करैत देखि विक्टर सेहो सहटि कऽ ओतय पहुँचि गेल रहथि. डॉ. बालीक व्यस्ततम दिनचर्या आ एतेक रास उपलब्धि जानि ओ हठात् पुछलथिन्ह- सूतय कखन छी?

- भोरबा मे, मात्र तीन घण्टा.

डॉ. सूर्यबालीक उत्तर पर विश्वास नहि भेल हमरा. कारण सामान्यतः इएह सुनैत छियैक जे कम सुतनिहार स्वभावतः खौंझाह भऽ जाइए. मुदा, हिनकर मुँह पर तँ सदिखन हँसिए पसरल रहैत छनि. फेर ओ महापुरुष सभ मोन पड़लाह जिनका सम्बन्ध मे सुनैत आयल छी जे ओहो लोकनि बड़ कम काल सुतैत छलाह. अपना मोन केँ बुझाओल जे हिनका अनिद्राक बेमारी नहि ‘स्वान-निद्रा'क लूरि छनि.


भोजन तैयार भऽ गेल छल. सभ किओ पंक्तिबद्ध भऽ अपन रुचिक अनुसार सामग्री लऽ टेबुल धरैत गेलाह. हम, शालू आ शालूक पिता एकटा टेबुल पर बैसलहुँ. लरगुज रोटी देखि शालूक पिता केँ भाँज नहि चललनि जे ई कथीक रोटी थिकैक? ओ जिज्ञासावश शालू दिस तकलनि. तावत् हम एक कओर मुँह मे धऽ देने रहियैक. हुनकर जिज्ञासा शान्त करैत कहलियनि- चाउरक रोटी थिक. ओ कोनो प्रतिक्रिया नहि देलनि. कोनो तरहेँ दू टा रोटी गिरलाह. बाहर बुनछेक भऽ गेल रहैक. हमरा सभक मोन मे एकबेर पुनः पर्यटनक आशा अँकुराय लागल छल. मुदा, समय बहुत हाथ सँ निकलि चुकल छल. गाड़ीबला सँ पुछारी कयल तँ कहलक जे आब नीर-महल आ त्रिपुरसुन्दरी दुनू देखब आइ सम्भव नहि होयत. कोनो एक जगह जा सकैत छी. विकराल समय केँ देखैत शालूक पिताजी सलाह देलनि जे अनभुआर जगह मे एतेक रिस्क लेब ठीक नहि. फेर योजना बनल जे अगरतला घुमल जाय. दोसर सत्रक बाद एकटा टेम्पू कय तीनू गोटे अगरतला घुमल.

सर्वप्रथम पहुँचलहुँ- गवर्मेंट संग्रहालय. ई संग्रहालय अगरतलाक प्रसिद्ध उज्जयंता महल मे बनल अछि. उज्यंता महल निर्माण महाराजा राधा किशोर मानिक द्वारा सन् 1899-1901 ई. मे कराओल गेल अछि. ई आलीशान महल 1 वर्गकिलोमीटर मे पसरल अछि. महलक सोझाँ मे मुगल गार्डेन जकाँ बगैचा सेहो बनाओल गेल छैक. संग्रहालय मे त्रिपुराक शासक लोकनिक तथा बौद्ध परम्परा सँ सम्बन्धित अनेक प्रस्तर मूर्ति ओ पुरातात्विक बस्तु-जातक प्रदर्शनी लगाओल गेल अछि. बंगला साहित्य ओ त्रिपुराक लोकजीवन सँ जुड़ल अनेक कला-कृति एतय देखल-परिचय पाओल.

संग्रहालय घुमलाक बाद गौडीय सम्प्रदायक जगन्नाथ मंदिर पहुँचलहुँ. मंदिर शताधिक वर्ष पुरान अछि. चारूकात नव-नव मन्दिर सेहो निर्मित छैक. मंदिर-प्रांगण मे साग-सब्जीक खेती सेहो खूब देखल. शाइत भगवान केँ अपनहि बाड़ीक उपजा भोग लगैत हेतनि. पट खुजबा मे देरी रहैक. तेँ दर्शन नहि भऽ सकल. हमरा लोकनि आब भारत-बंगलादेश बॉर्डर दिस विदा भऽ गेल रही.

अगरतलाक एहि बॉर्डर पर बेस अबरजात रहैत अछि. अगरतला-ढाका-कोलकाता बस सेवा सेहो एतय सँ गुजरैत छैक. तेँ सीमा-सुरक्षा बलक जवान सभ बेस मोस्तैद रहैत छथि. दुनू देशक बीच एहि क्षेत्र मे आब कोनो तेहन सीमा विवाद नहि छैक तेँ माहौल तनावपूर्ण नहि रहैत छैक. सीमा लोहाक टाट सँ बेढ़ल छैक. सुरक्षाबल केँ खाली तस्कर आ घुसपैठी पर नजरि रखबाक रहैत छनि.

साँझ पड़ल जा रहल छलैक. लोकक जुटानी सेहो बढ़ल जा रहल छलैक. सभ किओ संध्याकालीन फ्लैग-सेरेमनी देखबाक लेल आबि रहल छलथि. जवानक रिहर्सल चलि रहल छलैक. हमरा लोकनि एम्हर जवान सभ सँ गपशप मे बाझल रही. हुनका सभक आत्मीयता देखि गद्गद रही. तावत् मेघ पुनः अकास केँ घेरि लेने छलैक. हमरा सभ केँ हेरिटेज पार्क घूमब बाँकिए छल एखन. हम सभ अगिला दिन धरि फ्लैग-सेरेमनी देखबाक योजना स्थगित कयल आ सीमा सुरक्षा बलक जवान सभ सँ काल्हि पुनः अयबाक वचन दैत तत्काल विदा लेल. (क्रमशः)

— चंदनकुमार झा 

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