चन्द्रकलाक घरआपसीक कथा फ़िल्मी छै!


क्रिसमसक भोर. निन्न फुजले छल कि मोबाइल गाबि उठल. साल्टलेक थाना सं कॉल छल -'आसुन, आपनार लोक एसेछे बिहार थेके'. हमरा आश्चर्य भेल छल आ हर्ख सेहो. थाना-पुलिसक चक्कर सं कने भयो लागल छल. मुदा बीतल किछु दिन मे कएल काज पर हिम्मति छल. भास्करजी कें फोन मिलओलहुं त' ओ देवघर मे रहबाक बात कहलनि. मुदा आश्वस्त केलनि जे 'चन्द्रकला'क परिजन कें रिसीव करबाक लेल ओमप्रकाश पहुंचि जेताह आ सभ काज भ' जेतैक. कनेक काल पर पुलिसक फोन अबैत रहल आ ओ डपटैत रहल. मुदा किछु कॉलक बाद फोन आएब बन्न भ' गेल. मने ओमप्रकाश पहुंचि गेल रहथि चन्द्रकलाक पति लग.

क्रिसमस सं लगभग एक मास पहिने भास्करजी महानगरक साल्टलेक क्षेत्र मे एक मैथिलीभाषी बूढ़ महिलाक रहबाक बात कहलनि जे लगभग पनरह बरख सं सड़कक कात मे गुजारा करैत रहल छल. एमकी जाड़ काटब ओकरा लेल चुनौतीपूर्ण भ' गेल छलैक. लगक दोकानबला सभ ओकर खियाल करैत छलैक आ सभ ओकरा ओकर गाम पठयबाक बात करैत छलैक. बेर-बेर पुछने बुढ़िया गामक नाम बेतौना (बेनीपट्टी) कहैत छलैक. ओ कोना-किए एतय आबि गेल छल से स्पष्ट नै भ' सकल छल.

हम कने कछमछा क' एहि विषय कें बिसरा जेना देलियैक. मने 'मन्डे टू फ्राइडे' केर व्यस्तता मे ओझरा गेलहुं. पुनः भास्करजी केर फोन आएल. जाड़ बढ़ल जा रहल छल आ बुढ़िया खाना-पीना कम क' देने छल. बीड़ीक इलम बेस छलैक ओकरा आ से जखन-तखन धूकैत रहैत छल. मुदा खाल (धार) कातक शीतलहरी बीड़ी धुआं पर काटब संभव नै. 

दू बेर जा क' बुढिया सं गप्प केलहुं आ ओकरा विषय मे किछु डिटेल एकत्र केलहुं. गाम पर बड़का भैया (सरपंच त्योंथ) कें विषयक जानकारी देलियनि. संयोग जे त्योंथ सरपंच वशिष्ट कुमार झा  संरपंच संघक कोषाध्यक्ष छथि आ हुनका लग सभ पंचायतक सरपंचक संपर्क सूत्र उपलब्ध छलनि. ओ बेतौनाक सरपंच शौकत अली नूरी केर सूत्र देलनि. शौकत साहब सं जखन संपर्क केलहुं त' ओ पूरा सहयोग केर भरोस देलनि. तीन-चारि बेर गप्प भेलाक बाद आ कनेक छानबीनक बाद शौकत बाबू चन्द्रकलाक घरक पता लगा लेलनि. चन्द्रकला कछड़ा बस्तीक विलास पासवान (70 वर्ष) केर पत्नी छल जे पनरह बरख पूर्व घर सं निकलि गेल छल.

आब हमरा बुढ़ियाक पोता सं फोन पर गप्प होमए लागल छल. ओ हमरा सं अपन पितामहीक सम्बन्ध मे निजगुती चाहि रहल छल. नाना प्रश्न, नाना संधान करब शुरू केलक. हमरा ई सभ असहज लागि रहल छल. हम ओकरा डपटैत कहलियैक जे अहांक पितामहीक सुधि देलहुं से अपराध भेल. लेबए एबैक त' नीक, नै त' जेना-तेना जीबिये रहल छै बुढ़िया.  

एम्हर भास्करजी कें एहि संबंध मे अपडेट देइत रहल छलहुं आ ओ स्थानीय नीक लोक ओमप्रकाशजी कें अपडेट देने जा रहल छलाह. ओमप्रकाशजी समाजसेवी छथि आ पिछड़ल सभक मदति लेल समर्पित रहैत छथि. यएह बुढियाक विषय मे भास्करजी कें बतओने छलाह आ तखने ओ एहि विषय मे पड़ल छलाह. ओमप्रकाशजी थाना -पुलिसक कागजी विधान क' बुढ़िया कें ओकर पति संग विदा क' देलनि.

जानकारी भेटल जे पनरह साल पहिने चन्द्रकलाक एकटा पुत्रक असामयिक निधन भ' गेलैक आ ओ विक्षिप्त जकां भ' गेल. एहने मे ओ गाम सं विदा भ' गेल छल. कोना-कोना ई कलकत्ता आएल आ कोना पनरह बरख रहल से एखनो एक बुझौअलि अछि. मुदा ओ पति कें देखिते माथ पर नुआ ध' नेने छल आ प्रसन्न भेल छल. एतबे नै दोकानबला सभक पत्नी सभ चन्द्रकला कें माएतुल्य बुझैत छल आ कपड़ा-लत्ता, इदाइ-विदाइ संग विदा केलक.

आपसी कम्यूनिकेशन सं नरक सन जिनगी जीबैत चन्द्रकला अपन गाम अपन लोकक मध्य पहुंचि गेल. एहन कतेको चन्द्रकला महानगरक चकचोन्हीं मे नारकीय जिनगी बिता रहल होएत. सैकड़ो सामाजिक संस्था बड़का-बड़का बात करैत चंदा उगाही करबा मे लागल होएत मुदा केओ चन्द्रकला सन-सन नचार लोकक सुधि लेबा मे रुचि नै देखबैत अछि. ओमप्रकाशजी सनक एक-एकटा व्यक्ति बड़का-बड़का काज करैत देखल जाइत छथि त' मानवता जीबैत अछि से निजगुती होइछ. मामिला मे सरपंच द्वय वशिष्ट कुमार झा, शौकत अली नूरी आ साहित्यिक मित्र भास्करजी केर तत्परता आ सहयोग प्रशंसनीय अछि.

 — रूपेश त्योंथ 

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