मैथिली मंच पर मैथिलक उपेक्षाः कतेक दिन!



जनकपुरधाम : आने साल जकाँ एहु बेर विद्यापति स्मृति पर्व समारोह विभिन्न नामे सम्पूर्ण मिथिलाञ्चल, प्रान्त आ देशमे सम्पन्न भेल अछि. कातिक धवल त्रयोदशी अर्थात, अगहन ७ गते सोमदिन सँ ९ गते धरि तदनुसार नबम्बर २३ ता. सँ २५ ता. धरि दरिभंगा, पटना, मधुवनी, बाराणसी, कलकत्ता, जनकपुरधाम आदि ठाममे मनाओल गेल.

प्रसिद्धिक रुपमे दरिभंगा आ पटनाक मंचकेँ मैथिली जगतमे खूब नाम भेल करैत अछि. दरिभंगामे मैथिली सेनानी डा. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’क एकल व्यवस्थापन आ विद्यापति सेवा संस्थानक आयोजनमे ‘मिथिला विभूति’ पर्वक नामे ई उत्सब मनाओल जाइत अछि. त' पटनामे चेतना समितिक तत्वाधानमे ओकर कार्यसमिति ई पर्व मनबैत आएल अछि. 

दुनू ठामक पर्वक आयोजन अपन –अपन ढंग सँ होइत अछि. आब तँ विहार सरकार विद्यापति पर्वकेँ राष्ट्रिय मान्यता दऽ देने छैक , तएँ राज्य सरकार सेहो एहि पर्वक आयोजन करैत अछि.


दरभंगाक आयोजन एहु मानेमे विशिष्ट होइत अछि जे ई आम मैथिली प्रेमी सँ बेसी जूडल रहैत छैक. पहिल दिन उद्घाटन, सम्मान आ भाषण–भूषण प्रमुख रुपें होइत अछि. मंचपर कोनो नियन्त्रण नहि , जकरा मोन भेल चहरि कऽ अगेक सिट छेकि बैसि जाएत. मंचक कोनो तरहक मर्यादा दरभंगामे नहि कएल जाइत छैक. तेहने मंचपरक प्रमुख अतिथि सभमे कोनो खास परिवर्तन एतहु नहि होइछ, हँ तखन किछु एहन अतिथि अवस्से अबैत छथि जे विधि पहुँचएबाक हेतु मैथिली मंचपर आमंत्रित रहैत छथि.




एहि बेर राजविराजक भाषा विद् डा. सुनिल कुमार झा ‘मिथिला विभूति’ सम्मान सँ सम्मानित कएल गेलाह. ओ प्रसन्न मुद्रामे विशेष प्रतिनिधिकेँ भेटल छलखिन्ह. दोसर दिन कवि सम्मेलन आ नाटकक भाँज रहैक मुदा समय अनियन्त्रित भेने सभ गुड गोबर भऽ गेलैक.

भेलैक ई जे कार्यक्रमक प्रारम्भमे सम्मान समारोह भेलैक – आगत अतिथिकेँ शाल दोपटा माला आ पाग सँ सम्मानित कएल गेलनि. पुस्तक विमोचन भेल. भाषण भूषण भेल जे शुरुएमे समय बेसी घीच लेलकै. तखन सभ छाड भार कवि सम्मेलन पर पडलैक.

उद्घाटन सत्रमे पहिने बाबा विद्यापतिपर माल्यार्पण भेल रहैक , जकर शौभाग्य एहि विशेष प्रतिनिधिकेँ सेहो भेटलैक. तखन जे कार्यक्रम शुरु भेल तँ कार्यक्रमक काविल उद्घोषककेँ जान पराभवमे पडि गेलनि, जखन बैजू बाबू हुनकासँ माइक लऽ लऽ कऽ अपन उदगारक वर्षा करऽ लगलथि. जे से ओहि अवसरपर उपस्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक कुलपति डा. साकेत कुशबाहा, संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति डा. देवनारायण झा लगायतक प्रतिकुलपति एवं अन्य विशिष्ट अतिथि लोकनि राम भरोस कापडि भ्रमरक सधः प्रकाशित लघु नाटक संग्रह सूलीपर इजोत एवं अन्य नाटकक विमोचन सामूहिक रुपें कएलनि. एहि संग्रहमे तीन नाटक अछि जे मंचोपयोगी अछि.

जखन कवि सम्मेलनक शुरुआत भेलै त सभ गोटे साकांक्ष भेलाह  समय पर. कारण पचहत्तरिसँ उपर कवि लोकनि आमंत्रित छलाह – नेपाल सँ अयोध्याय नाथ चौधरी आ डा. रेवती रमण लाल समेत. डा.लालक अध्यक्षतामे कवि सम्मेलन प्रायः एगारह बजे शुरु भेल जे दू बजे समाप्त भेल. आब प्रश्न उठऽ लगलै नाटक किए कएल जाए. तीन चारि बजे श्रोता दर्शक कम, दोसर उत्साहक अभाव. 

कलाकारक मुखिया रीतेश नहि करबाक मनःस्थितिमे रहए, जकरा अनुचित मानि ताही मंचपर करबाक दबाब देल गेलै. ओ नाटक कएलक आ जे जतेक दर्शक रहथि – प्रसन्न भऽ उठल छलाह. जनकपुरक रंगदर्पण संस्था रीतेश पाटलीक निर्देशनमे राम भरोस कापडिक भ्रमरक नाटक ‘आ बौधु बाजि उठल ’क मंचन कएलक. 



दोसर दिन धुमगज्जर भेलैक – सांस्कृतिक कार्यक्रमक. उद्घाटनक बाद जे कलाकार लोकनि सुर तनलनि से दोसर दिन अर्थात २६ ता. १० गतेकेँ १० बजे भोर धरि क्रम टुुटल नहि रहैक. थैया थैया भऽ गेल रहैक. करिब दश हजार व्यक्ति बैसबला पण्डाल खचाखच भरल छल.

पटनाक पहिल दिन उद्घाटन सत्रक बाद कवि सम्मेलन रहैक. उद्घाटन सत्रमे किछु विशिष्ट ब्यक्तित्वसभके अपन अपन क्षेत्रमे महत्वपूर्ण योगदानक हेतु सम्मान कएल गेलनि जाहिमे संस्कृतिविद् डा. प्रफुल्ल कुमार मौन सेहो रहथि जनिका ताम्रपत्र, दोपटा आ पाग देल गेलनि.  उद्घाटनक क्रममे किछु गोेटे मिथिला आ मैथिलीपर चर्चा करबा सँ बेसी स्वास्थ्य शिक्षापर बेसी जोड रहनि. आ दिनमे मणिकान्त झाजे विचार गोष्ठि रहैक तकरो विषय स्वास्थ जनचेतना रहैक , जकर स्पष्ट छाप कार्यक्रमक अधिकांश वक्ताक मन्तव्य रहैक. दोसर दिन भेने विचार गोष्ठि रर्हैक। भिनसरे १०–११ बजेृ रातिमे विविध मनोरंजनातमक कार्यक्रमक संग केन्द्रिय नेता एवं अतिथि सभक उपस्थिति रहए. तेसर दिन भेने डा. कमल मोहन चुन्नुक लिखल नाटक ‘आब्जेक्सन मी लोर्ड’ चुन्नुएजीक निर्देशनमे सम्पन्न भेल छल. 

कार्यक्रमक क्रममे आनन्द मेला, मिथिला चित्रकला प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनीक आयोजन कएल गेल छल. अरुणा चौधरी जीक मखानक खीर, तीलकोरक तरुआ, आ प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’क सुअदगर पान– जे नहि चखलनि से पछतैलनि. पत्र पत्रिका आ पुस्तक सेहो विक्री भेवे कएल. मिथिला दर्शन आ घर बाहरक नवका अंक सेहो हाथे हाथ जा रहल छल.

विद्यापति पर्वक तीनू दिन धुमगज्जर करैत विति गेल. मुदा अपना पाछाँ फेर सँ किछु प्रश्न छोडि गेल– मैथिलीक एहि दुनू मंचक आसनीमे कतेक गोटे आम मैथिल वर्ग सँ बैसाओल जाइत अछि. दू शब्द अभिव्यक्ति बाजऽ देल जाइत अछि. मिथिला राज्यक हेतु संघर्ष लेल बोट क्लब पर दश विस गोटे पाग पहिरि बैसी गेने कहाँ सम्भव हएत. 

नेपालमे गोलैसी तँ छैक मुदा एहि तरहेँ कोनो काज मैथिलीक नहि होइत अछि तएँ स्वभाविक रुपें एहन प्रान्तक निर्माण कएल जा चुकल छैक जकर भाषा मैथिली आ राजधानी जनकपुर हएबामे शंका नहि कएल जा सकैछ. 

विद्यापति पर्वक अवसरपर एकटा कऽ जे स्मारिका प्रकाशन होइछ ओ ने पटनामे ने दरभंगामे वितरण होइछ. किए ने पूर्वमे प्रकाशित कऽ तकर उपयोग कएल जाए. पटनामे कार्यक्रम तय रहैछ, वितरण होइछ. दरभंगामे से नहि रहैछ. बैजूबाबू स्वयं कार्यक्रम रहैत छथि आ सूचनाक आधार सेहो.

जे होइक विद्यापति स्मृति पर्वक अपन रौनक आ साहित्यिक जमघटक हेतु निरन्तर स्मरण कएल जाएत. 

रिपोर्ट : कुमार अभिनन्दन

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