'साहित्यिक चौपाड़ि'क दोसर पर्व संपन्न


पटना : गांधी महात्माक विशालकाय प्रतिमाक बामाकात गांधी मैदान मे मासिक बैसकी 'साहित्यिक चौपाड़ि' 'क दोसर आयोजन सम्पन्न भेल. एकर आरंभ मे हाले मे बहरायल मनोज शांडिल्यक काव्य संग्रह 'सुरूजक छाहरि मे' पर चर्चा कयल गेल. 

कविता जकरा पढ़लाक उपरांत मोनमे कएक तरहक प्रश्नक ठाढ़ भ' जाय ? मोन सोचबाक हेतु विवश भ' जाय ओ अछि सुरजक छाहरि मे काव्य संग्रहक कविता- पुस्तक विमर्श मे रंगकर्मी निखिल रंजन. 

पुस्तक चर्चाक क्रम मे गुंजनश्री एहि पोथीक कविता सभ केँ पठनीय बतबैत कहलनि जे मनोज जीक कविता सभक शिल्पक उत्कृष्टता आ सहज भाषा पोथी केँ आर प्रभावशाली बनबैत अछि. 

एहि क्रम केँ आगाँ बढ़बैत पंकज चौधरी नवलश्री कहब छनि जे पछिला किछु साल मे बहरायल जतेक नीक काव्य संकलन पढ़लहुं ओहि मे सुरूजक छाहरि मे सेहो एक अछि.

बैसकीक दोसर सत्र मे सब गोटे अपन-अपन रचना पाठ केलनि. जकर आरंभ युवा कवि गुंजनश्री अपन दूटा कविता माँ अओर पिता पढ़ि केँ केलनि. तदुपरांत गजलकार पंकज चौधरी नवलश्री एकटा बाल गजल सुनौलनि. रचना पाठ सत्रे मे  युवा कवियित्री कामिनी सेहो एकटा कविताक पाठ केलनि. एहि सत्र मे मैथिली कविताक सशक्त स्वर रघुनाथ मुखिया हाले मे अपना संगे घटल ओहि घटनाक  आपबीति सुनौलनि जाहि मे यात्राक दौरान ओ आर वरीय साहित्यकार तारानंद वियोगी मृत्युक मुँह सँ बाल-बाल बचल रहथि. रचनापाठ सत्र हमरा द्वारा पढ़ल कथा सँ संपन्न भेल.

साहित्यिक चौपाड़ि 'क एहि दोसर आयोजन मे पहिल आयोजन मे उपस्थित बिनोद कुमार झा, नितेश मिश्र एवं अरविन्द तिवारीक अनुपस्थिति जहाँ कचोटलक ओतहि  रघुनाथ मुखिया अओर कामिनी जीक उपस्थिति बेस उत्साहित केलक. संख्या बलक हिसाबें देखल जाय तँ पहिल बैसकीक अपेक्षा एहि बेर एक गोटा कम अर्थात् छऐ टा लोक उपस्थित छलाह. एहि ठाम एक बात कहब आवश्यक बुझना जाइछ जे साहित्यिक चौपाड़ि कोनो जनसमर्थन हासिल करबाक लेल नहि अपितु आपसी संवाद बढ़ेबाक दिशा मे कयल एकटा सामूहिक प्रयास अछि जाहि ठाम युवा रचनाकार केँ अपन विचार-रचना कहबाक स्वतंत्रता देल जाइछ तखन एहि मे बेसी सँ बेसी जतेक गोटेक सहभागिता होय ततेक बढ़ियाँ. अपनेक उपस्थिति हमरा सभ केँ प्रोत्साहित करत, हमसब अपने लोकनिक बाट हेरब. तँ आयब ने अहाँ सभ अगिला 'साहित्यिक चौपाड़ि' पर अपन-अपन कविता, कथा, संस्मरण आ विचारक आदान-प्रदान हेतु !

(रिपोर्ट-फोटो : बाल मुकुंद पाठक)

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