'नेपालक मैथिली काव्य कोनो समकालीन काव्यधारासं बीस'


जनकपुर : मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार कीर्तिनारायण मिश्र नेपालमे लिखल जाइत रचनापर अपन टिप्पणी करैत एकरा भारतीय क्षेत्रमे लिखल जा रहल काव्य लगायत कोनो विधाक रचनासं झूस नहि हएबाक गप कहलनि. ओ अपन तीन दिनक प्रवासपर जनकपुर आयल छलाह. हुनक सम्मानमे आयोजित एक विशेष कार्यक्रममे बजैत ओ कएक दशकक अन्तरालक बाद नेपाल अएबाक बात कहैत भाव विभोर भ' जनकपुर आगमनकें सफल कहलनि.


कार्यक्रमक अध्यक्षता प्राज्ञ रामभरोस कापडि 'भ्रमर' क' रहल छलाह. अपन अध्यक्षीय मन्तव्यमे ओ मिश्रजीक जनकपुर आगमन स्मरणीय रहत से विश्वास व्यक्त करैत भारतीय मैथिली क्षेत्रमे नेपालीय मैथिली साहित्यकें जानि बूझिक' अबडेरल जा रहल तथ्यकें उजागर कएलनि. तकराबाद एकटा संक्षिप्त तथा स्तरीय काव्यपाठक क्रम शुरू भेल जाहिमे मिश्रजीक अतिरिक्त डा. रेवती रमणलाल, अयोध्यानाथ चौधरी, काशीकान्त झा, दिगम्बर भूषण दिनमणि, अशोक दत्त, बिजय दत्त मणि, राजाराम सिंह राठौर, मनोज प्रमेश, रामभरोस कापडि भ्रमर लगायतक रचना प्रस्तुत भेल.

(रिपोर्ट : मिथिमीडिया ब्यूरो)

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