सम्मलेनमे मैथिली भाखापर भेल विमर्श


जनकपुर : एगारहम अन्तर्राष्टूीय मैथिली सम्मेलन २०७१ अन्तर्गतक पहिल दिन पहिल सत्रमे मैथिली भाषाक सहजीकरणक समस्या आ समाधान विषयक विचार गोष्ठी सम्पन्न भेल. ओहि सत्रमे भाषा विज्ञ डा. रामावतार यादव मैथिली भाषा अतिप्राचिन रहल कहैत एहिमे एकरूपता आनयपर जोड देलनि. भाषाकेँ वैश्विक मान्यताक लेल एकरूपता आवश्यक रहल कहैत डा. यादव पुरान ग्रन्थसभक आधारपर लेख्यमे एक रूपता आनब आवश्यक रहल बतौलनि. ओ कहलनि विश्वक करीब करीब सभ भाषामे बाजब आ लिखबमे भिन्नता होइत अछि. मुदा लेख्य भाषामे एकरूपता अवश्य रहैत अछि. मैथिली आन्दोलनीसभ ‘जे बजैछी सएह मैथिली’ कहि चला रहल अभियान प्रति कडा टिप्पणी करैत ओ साहित्यक धनिक रहल मैथिली भाषाकेँ एना उपेक्षा करब उचित नहि रहल कहलनि.

ओ उच्चारणक आधारपर लिखव भाषा शास्त्र सँ तर्क संगत नहि रहल कहैत अंग्रजी भाषाक बहुतो उदाहरणसभ प्रस्तुत कएलनि. मैथिली भाषा प्राचीन रहितो क्षेत्रगत विशेषकेँ रूपमे एकरा व्याख्या कएल गेला सँ समस्या आएल बतौने छलथि .


साहित्यकार एवं पत्रकार हिमांशु चौधरीक संयोजन एवं संचालनमे सम्पन्न एहि सत्रमे सहभागीसभ अपन अपन जिज्ञासा डा. यादव समक्ष रखने छलथि. जवाबमे डा. यादव बाजब आ उच्चारण ठाम अनुसार फरक भऽ सकैत अछि मुदा एकरूपताक लेल भाषाक उच्चतम बिन्दुक प्रयास होएबाक चाही.

सम्मेलनक दोसर दिनक पहिल सत्रमे मिथिलाक लोक चित्रमे जीवनत्व विषयक विचार गोष्ठी सम्पन्न भेल अछि. सुदर्शन लाल कर्णक संयोजन एवं संचालनमे सम्पन्न एहि सत्रमे मिथिलाक लोकचित्रपर मिथिला लोकचित्रक मर्मज्ञ कृष्णकुमार झा कश्यप अपन विचार रखने छलथि. मिथिलाक लोकचित्र सम्पूर्ण मिथिलाक जीवन तत्वकेँ स्थापित करबामे महत्वपूर्ण योगदान देने हुनक कहब छलनि.

मिथिलाक लोकचित्र विश्व स्तरमे स्थापित भऽ गेल कहैत मर्मज्ञ कश्यप एकरा जीवन्त राखयकें लेल सभपक्षकेँ अपना अपना स्तर सँ अग्रसर होबय पडत बतौलनि. गोष्ठी सहभागीसभ लोकचित्रपर अपन अपन विचार रखने छलाह जाहि पर कश्यप हुनकासभ जिज्ञासाकेँ समाधान सेहो कएलनि.

सम्मेलनक अन्तिम दिनक अन्तिम सत्रमे विशाल कवि गोष्ठी सम्पन्न भेल.  साहित्यकार अयोध्यानाथ चौधरीक अध्यक्षता आ साहित्यकार रामभरोस कापडिक प्रमुख आतिथ्य एवं कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक कुलपति डा. देवनारायण झाक विशेष आतिथ्यमे सम्पन्न ओहि कवि गोष्ठीमे नेपाल भारतक कविलोकनिसभक सहभागिता रहल छल. मैथिली अभियानी, वैदेशिक रोजगारी, महिला हिंसा, हास्य व्यङ्ग पर आधारिक कवितासभ कवि सम्मेलनकेँ रोचक बनौने छल.

कवि गोष्ठीक संयोजक काशीकान्तक संयोजकत्वमे सम्पन्न गोष्ठीमे भारतक जनक, विष्णुदेवा सहितक कविसभ कविता पाठ कएने छलथि तँ नेपालक विजय दत्त मणी, राजाराम राठौड, जयशंकरनाथ झा, लालजी ठाकुर, कैलास दास, नरेश ठाकुर, सपना कर्ण, विद्याकर, विष्णुदेव झा, मन्दिाकिनी कर्ण, अमरकान्त ठाकुर, विजेता चौधरी, मनोज झा, रामभरत साह सहितक कविसभ कविता वाचन कएने छलथि.

(रिपोर्ट : रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर')

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