विद्यापतिक नाम 'बक्शीक' निवेदन

विद्यापति  घुरि  आउ  एक बेर, देखू  विस्फी  गाम यौ !
मैथिल, मिथिला बेचि रहल कवि कोकिल के नाम यौ !

उगना देलन्हि पिसी आहाँ के, गंगाजल मे भांग यौ !
आँहाँकगीत उगना केर महिमा बढ़ल भांग के मांग यौ !
आब शराव विदेशी आयल ताण्डव नृत्य तमाम यौ !
विद्यापति घुरि आउ एक बेर, देखू विस्फी गाम यौ !

नगरचौक पर प्रतिमा टकटक ताकि रहल अछि बाट यौ !
के पोछैत धोयत प्रतिमा के ? किए लगेतै हाथ यौ !
जखन चुनाव लड़त नेतागण चर्चा गामे गाम यौ !
विद्यापति घुरि आउ एक बेर, देखू विस्फी गाम यौ !

राजा शिव सिंह रूप नारायण लखिमा के गुणगान यौ !
मैथिल मिथिला छोड़िक भागल मिथिला जनु शमशान यौ !
स्वर्गहुँ सँ सुन्दर जे मिथिला तकर विधाता वाम यौ !
विद्यापति घुरि आउ एक बेर, देखू विस्फी गाम यौ !

राधा केर विरह लिखलहुँ आ बाबा केर नचाती यौ !
आँहाँक लेखनी उठा सकल नहि सीता के दुःख भारी यौ !
एखनहुँ सीता कानि रहल छथि राजधर्म के नाम यौ !
विद्यापति घुरि आउ एक बेर, देखू विस्फी गाम यौ !

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