'मिथिला राज्य कोना?' विषयक परिचर्चा

कलकत्ता: उपनगरीय क्षेत्र कोन्नगर स्थित वैदेही मंदिर प्रांगणमे अखिल भारतीय मिथिला पार्टी द्वारा परिचर्चा रविदिन 14 दिसंबर कें बेरूपहर 3 बजे सं आयोजित भेल. परिचर्चाक विषय कनेक अलग सन छल. एक दिस जतय सगरो राज्य आन्दोलनकारी लोकनिसं मिथिला राज्यक औचित्य पर प्रश्न कएल जाइए ओतहि एक देग आगू बढ़िक' मिथिला पार्टीक ई परिचर्चाक नियार बेस आह्लादकारी रहल. वक्ता लोकनि अपन बात रखबाक क्रममे ई चर्च केलनि.

कार्यक्रमक अध्यक्षता वरिष्ठ मैथिल कार्यकर्ता ओ नाट्यकार कृष्णचन्द्र झा 'रसिक केलनि. कार्यक्रमक आरम्भ प्रार्थनासं भेल. तत्पश्चात पार्टीक अरविन्द कुमार झा स्वागत भाषण देलनि. ओ मिथिला क्षेत्रक घोर उपेक्षा पर अपन बात रखलनि आ समाधान रूपमे मिथिला राज्य बतओलनि. रत्नेश्वर झा अपन बात रखलनि जे मिथिलाकें षड्यंत्रक तहति पछुआ देल गेल छै. पृथक राज्य भेनहि कल्याण छै. उमाकांत झा 'बक्शी' विकासक बात करैत बजलाह जे लोककें रोजगार चाही, भोजन-वस्त्र चाही. वर्त्तमानकें सोचि भविष्य बनाओल जाइत छै. मात्र भूतक चर्चसं कल्याण संभव नहि. 

कार्यक्रममे साहित्यकार रूपेश त्योंथ बजलाह जे जाति-पातिसं उपर उठि राज्य आन्दोलनमे सबहक भागीदारीकें सुनिश्चित करबाक आवश्यकता अछि. ओ कहलनि जे मिथिला राज्य तखने संभव होयत जखन हजारक हजार युवा कें मोहिमसं जोड़ल  जायत. धीरजजी मिथिलाक आर्थिक अवस्था पर धियान खिचबओलनि त' पुष्पेन्द्र पाठक कहलनि जे राज्य तखने होयत जखन मिथिलाक सभ वर्गक लोक एक संग आओत. एहि हेतु व्यापक जनजागरण अभियानक खगता छैक. साहित्यकार अजय तिरहुतिया बजलाह जे मिथिला किछुमे कम नहि छै. तखन हमरा सभ मगध दिस मुंह बौने तकैत छी सैह घोर आश्चर्यक बात. मिथिलाक सभ मैथिल अछि आ पृथक राज्य पहिचान, भाखा, संस्कृति कें संजोगबा लेल जरूरी छै. 

कृष्णचन्द्र झा रसिक' अध्यक्षीय भाषण देइत बजलाह जे मैथिलीकें अष्टम अनुसूचिमे जहिना स्थान भेटि गेलैक तहिना राज्यो बनि जायत से सोचि सुतल रहने नै होयत. एक पैघ संघर्ष लेल हमरा लोकनिकें तैयार रहबाक चाही. ओ बजलाह जे एहन सन कार्यक्रम कलकत्तासं बेसी मिथिलामे होयबाक चाही. 

कार्यक्रमक संचालन रोशन चौधरी केलनि. एहि मे प्रदीप झा, प्रकाश झा, प्रकाश ठाकुर सहित स्थानीय मैथिल सभ सेहो जुटलाह. वक्ता लोकनिसं प्रश्न पुछबाक समय देल गेल छलैक. सभ गोटे मिथिला राज्यक आवश्यकताक समर्थन केलनि.    

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