मोदी सरकारसँ मिथिलाक अपेक्षा

पन्द्रहम लोकसभा भंग कएल गेल. देशमे कुल पाँच सय तैंतालिसटा लोकसभा क्षेत्रमे करीब अस्सी करोड़सँ अधिक मतदाता अपन जनादेश सुनौलनि. नरेन्द्र मोदीक नेतृत्वमे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अभूतपूर्व जनसमर्थनक संग केंद्रीय सत्ता प्राप्त केलक आ आगामी पाँच साल धरि देशक कमान अपना हाथमे लेलक. एहि चुनावक एकटा विशिष्ट बात इहो रहल जे १९८४ई.क बाद देशमे पहिल बेर कोनो एक राजनीतिक दलकेँ पूर्ण बहुमत भेटलैक अछि. भाजपा आमचुनावमे अभूतपूर्व प्रदर्शन करैत कुल २८२ टा लोकसभा क्षेत्रमे विजय प्राप्त केलक. देशक इतिहासमे ई पहिले घटना थिक जे कोनो गैर-कॉन्ग्रेसी दलकेँ एतेक पैघ जनसमर्थन भेटलैक अछि. जानकार लोकनिक मानब छनि जे ई अपार जन-समर्थन पछिला सरकरक अकर्मण्यताक प्रति प्रतिक्रिया मात्र नहि थिक बल्कि मोदी सरकारसँ आशा-अपेक्षाक प्रतीक थिक. एहनामे नव सरकारपर जवाबदेही बढ़ि गेल अछि जे ओ सवा सय करोड़ भारतवासीक आशा-आकांक्षाक पूर्ति करय. भारतकेँ सामाजिक-आर्थिक-सामरिक दृष्टिकोणसँ सबल बनाबय आ विकासशील राष्ट्रसँ विकसित राष्ट्र केर श्रेणीमे आनय.
तेरहम लोकसभा अंतर्गत अटल बिहारी बाजपेयीक नेतृत्वमे मिथिलाक कल्याण लेल अनेक निर्णय लेल गेल छल. यथा- कोसी पर पुल निर्माण, मैथिली भाषाकेँ संविधानक आठम अनुसूचिमे स्थान आदि. एहि निर्णय केर बाद तत्कालीन एनडीए सरकारकेँ मिथिलामे आगामी चुनावमे जनसमर्थन भेटबाक अपेक्षा सेहो छलैक मुदा, २००४ केर चुनावमे तकर विपरीत मिथिला क्षेत्रमे एनडीए जनता द्वारा नकारल गेल. बाढ़ि आ रौदीक मारल, विपन्नताक पछाड़ल मैथिल मतदाताकेँ कॉन्ग्रेसक नेतृत्वमे यूपीए गठबंधनमे नव आशाकिरण देखेलन्हि मुदा, अगिला दस बरख धरि फेर ठकल गेलाह. २००४मे एनडीएक हारि देशक चुनावी विश्लेषक लेल एखनो एकटा अप्रत्याशित घटना बनल अछि. कतेको लोकक मानब छनि जे बाजपेयी सरकार देशकेँ विकासक पटरीपर सुव्यवस्थित ढंगसँ आगाँ बढ़ेबामे सफल भेल छलाह जे यूपीए'क कार्यकालमे पुनः पटरीसँ उतरि जकाँ गेल. तखन एहिबेरक चुनावमे मिथिलाक मतदाता लोकनि नहि चुकलाह. देशक जनमतकेँ अकानति नरेन्द्र मोदीक प्रति विश्वास जनौलनि अछि आ नव सरकारसँ विकासक आशा लगौलन्हि अछि. एहि जनसमर्थनक बदला मैथिलकेँ अपेक्षा छनि जे ई नवका सरकार हुनकर दरिद्रता दूर करबामे सफल होयत. मिथिलाक सामाजिक-सांस्कृतिक गरिमा पुनः स्थापित होयत. बाढ़ि आ रौदीसँ मिथिला मुक्ति पाओत. करीब पाँच करोड़ मैथिल मतदाता मोदी सरकारसँ की अपेक्षा रखैत अछि ? सरकारकेँ, मिथिलाक कोन-कोन एहन मुद्दा छैक जकर प्राथिमिकताक संग निवारण करबाक चाही, तकर एकटा संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित अछि:
कृषि-विकास ओ जल-प्रबंधन:
अनेक छोट-पैघ नदीसँ आच्छादित मिथिलामे अथाह जलस्रोत अछि. मुदा, इएह जलस्रोत आइ मिथिलाक शोक बनल अछि. वैज्ञानिक रीतिएँ जल-प्रबंधनक अभावमे एतुका कृषि-व्यवस्था रौदी-दाही'क चपेटमे पड़ल अछि. माछ-मखानक उद्योग मृतप्राय अछि. मिथिलाक जल-संसाधनकेँ जँ सुव्यवस्थित योजनान्तर्गत वैज्ञानिक प्रबंधनसँ सहेजल जाए त' एतय कृषि,मत्स्य उद्योगक विकासक संगहि पन-बिजली उत्पादनक मार्ग सेहो प्रशस्त होयत. मोदी सरकार नदी-जोड़ परियोजनाकेँ आगाँ बढ़ाय देशमे सिंचाई ओ पेयजल व्यवस्थाकेँ सुदृढ़ करबाक सपना आमजनकेँ देखौलक अछि तेँ मिथिलाक लोककेँ सेहो अपेक्षा छैक जे एहि क्षेत्रक जल-सम्पदाक कुशल प्रबंधन दिस नव-निर्वाचित केन्द्रिय सरकार ठोस डेग बढ़ाओत आ अगिला पाँच बरखमे तत्परताक संग एहि समस्याक समाधान ताकत. गंडकसँ कोसीक मध्य जँ नदी सभक पानिकेँ वैज्ञानिक ढ़ंगसँ "चैनलाइज (Channelize)  कएल जाए त' मिथिला माछ आ तरकारीक उपजामे रिकॉर्ड स्थापित क' सकैत अछि.  कृषि आधारित एहि भू-भागमे वैज्ञानिक ढंगसँ खेती लेल एतुका किसानकेँ प्रोत्साहित ओ प्रशिक्षित करब सेहो आवश्यक अछि. तेँ पूर्वी मिथिला क्षेत्रमे कृषि विश्वविद्यालयक स्थापनाक खगता सेहो अछि.
शिक्षाः
इतिहास प्रमाण अछि जे मिथिला अदौंसँ शिक्षाक प्रमुख केन्द्र छल. एतय एकसँ एक बढ़िक' विद्वान भेलाह जे अपन विद्वतासँ जग-प्रसिद्धि पौलनि. मिथिलामे लोक बाहरसँ सेहो अध्ययनक हेतु अबैत छल. मुदा, आजादीक सरसठि साल पछाति आइ मिथिलाक करीब चालीस प्रतिशत आबादी अशिक्षित अछि. ताहूसँ बढ़ि एतय वैज्ञानिक ओ आधुनिक शिक्षाक घोर अभाव अछि. एतुका युवा उच्च शिक्षाक लेल देशक अन्य प्रान्तमे पलायन करबा हेतु बाध्य छथि. एहि दुर्व्यवस्थासँ एतुका मानव-संसाधन'क समुचित विकास नहि भ' सकल अछि. मिथिलाक सात करोड़ मैथिल समाजकेँ मोदी सरकारसँ अपेक्षा छनि जे एतहु आब आधुनिक ओ रोजगारोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराओल जाएत. आइ मिथिलाक विस्तृत भूगोल ओ जनसंख्याकेँ देखैत आवश्यक अछि जे एतय आइआइएम (IIM- केंद्रीय मिथिलामे), आइआइटी (IIT-पूर्वी मिथिलामे) आ एनआइटी'क (NIT-दक्षिण मिथिलामे) स्थापना हो.दरभंगा स्थित संस्कृत विश्वविद्यालयकेँ केंद्रीय विश्वविद्यालयक मान्यता देल जाए. संगहि जहिना किशनगंजमे पछिला सरकार द्वारा अलीगढ़ विश्वविद्यालयक केन्द्र स्थापित कएल गेल तहिना केन्द्रिय मिथिलामे वा पश्चिम मिथिलामे बनारस हिन्दु विश्वविद्याल ( BHU)क केन्द्र स्थापित कएल जाए. प्रत्यके अनुमंडल स्तरपर केंद्रीय विद्यालक समतुल्य विद्यालय स्थापनासँ एहि क्षेत्रक शिक्षा व्यवस्थाक गुणवत्तामे परिवर्तन आबि सकैत अछि. शिक्षा जगतमे मिथिलाक गरिमा पुनर्स्थापित करबा निमित्त राज्य ओ केन्द्र सरकारक सम्मिलित प्रयास करब आवश्यक अछि. शिक्षा व्यवस्थामे सुधार भेलासँ मैथिल युवक अपन प्रतिभाक बलपर भारतक भाग्य बदलबाक क्षमता रखैत छथि.
स्वास्थ्यः
बिहार देशक सभसँ अविकसित प्रान्तमेसँ एक अछि. ताहूमे बिहारक सर्वाधिक अविकसित जिला मिथिला क्षेत्रमे अछि. स्पष्टतः एतय आधारभूत संरचना ओ मूलभूत सुविधाक घोर अभाव अछि. कुपोषण आ प्रदुषित पेयजल'क कारणे एहि क्षेत्रक आबादी अनेक तरहक रोगसँ ग्रस्त अछि. कालाजार आ जापानी ज्वर प्रलय मचौने अछि. संगहि लचर स्वास्थ्य व्यवस्थासँ मिथिला त्रस्त अछि. एतुका अस्पतालक हालति बदतर अछि. लोक इलाज करेबा हेतु राज्यसँ बाहर जेबाक लेल विवश छथि. जिनका खर्च नहि जुमैत अछि से इलाजक अभावमे असामयिक मृत्युक शिकार होइत छथि. नव सरकारकेँ मिथिलाक स्वास्थ्य व्यवस्थामे सुधार करबाक हेतु राज्य सरकारक संग तत्परताक संग प्रयास करबाक चाही. संगहि, मिथिलाक सभसँ पैघ अस्पताल, डीएमसीएच (DMCH) केर कायाकल्प हो जाहिसँ एतय आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो आ लोककेँ राज्यसँ बाहर नहि जाय पड़नि. एकर अलावे भागलपुर वा पुर्णियामे एम्स (AIIMS) स्तर केर अस्पतालक सुविधा उपलब्ध कराओल जेबाक खगता अछि. ग्रामीण स्वास्थ्य मिशनकेँ आर प्रभावी ढ़ंगसँ लागू करबाक दरकार सेहो अछि. स्वास्थ्य बीमाक सुविधा हरेक जन-सामान्यकेँ प्राप्त हो ताहि दिस सेहो सचेष्ट रहबाक आवश्यकता अछि.
सड़क एवं परिवहनः
हालाँकि पछिला किछु बरखमे मिथिले नहि अपितु पूरा बिहारमे सड़क'क स्थितिमे सुधार भेल अछि तथा नेटवर्क विस्तार भेल अछि मुदा, एखनो मिथिलाक परिवहन व्यवस्थामे सुधारक अनेक गुंजाइश अछि. एखनो सुदूर मिथिलाक बहुत पैघ आबादी पुल-पुलिया ओ सड़कक अभावमे बेहाल अछि. अतः ग्रामीण परिवहन व्यवस्थाक सुधार हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाकेँ आर विस्तार देबाक आवश्यकता अछि. संगहि मिथिलाक लोककेँ नव सरकारसँ आस छैक जे अगिला पाँच बरखमे मिथिला क्षेत्रक सभ प्रमुख रेलमार्ग केर विद्युतिकरण भ' जाएत. समस्तीपुर-दरभंगा रेललाइन केर दोहरीकरण सेहो परम आवश्यक भ' गेल अछि. सकरी-फारबिसगंज रेल परियोजना शीघ्रहि पूर्ण होयत तकरो आस लागल अछि. पर्यटन ओ सामरिक दृष्टिकोणसँ महत्वपूर्ण क्षेत्र रहितहुँ मिथिलामे हवाई यात्रा'क सुविधा नहि अछि. मोदी सरकारसँ मिथिलाक लोक अपेक्षा करैत छथि जे मुझफ्फरपुर, पूर्णिया आ भागलपुर या दरभंगासँ सार्वजनिक वायू-परिवहनक सुविधा उपलब्ध कराओल जाए.
उद्योग एवं व्यापारः
मिथिलाक अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अछि. एहि क्षेत्रक आर्थिक विकास लेल आवश्यक अछि जे कृषि-उत्पादनक बढ़ोत्तरीक संगहि उपजाक भण्डारण ओ विपणन केर समुचित व्यवस्था हो. अतः मिथिलाक हरेक जिलामे फूड-पार्क एवं सम्पूर्ण मिथिलामे कमसँ कम पाँच जगह मेगा फूड-पार्क केर स्थापना कएल जाए. खाद्य-प्रसंस्करण आधारित उद्योगकेँ बढ़ावा देल जाए. सर्वोपरि जे एहि क्षेत्रक बंद पड़ल चीनी मिलकेँ तत्काल चालू करबाक हेतु आवश्यक नीतिगत बदलाव कएल जाए. ज्ञात हो जे मिथिलाक कतेको चीनी मिलक उत्पादन केन्द्र ओ राज्य सरकारक मध्य एथनॉल उत्पादनक विवादक चलतेँ अटकल अछि. बरौनीक फर्टीलाइजरक पुनर्परिचालन सेहो मिथिलाक अर्थव्यवस्थाक स्वरूपमे क्रांतिकारी परिवर्तन आनि सकैत अछि. सिल्क उद्योगसँ जुड़ल बुनकरकेँ समुचित सुविधा ओ बाजार उपलब्धतासँ मिथिलामे वस्त्र-उद्योगक एकबेर फेर बाट प्रशस्त होयत. उद्योगक विकास लेल विद्युत आपुर्ति सेहो आवश्यक अछि. अतएव मिथिलाक बिजली कारखानाक क्षमता विस्तारक संगहि कोल-लिंकेजक सुलभता हो. एतुका हस्तशिल्प, ओ चित्रकलाकेँ विश्व-बाजारमे प्रचारित कएल जाए. लघु एवं मध्यम उद्योगकेँ आर्थिक प्रोत्साहन भेटय.
कला, संस्कृति, एवं पर्यटनः
मिथिलाक कला एवं सांस्कृतिक वैशिष्ट्य ककरोसँ छपित नहि अछि. मिथिला चित्रकला विश्वमे नाओं केने अछि. आब एकरा वाणिज्यिक दृष्टिकोणसँ बढ़ायब जरूरी अछि. मोदी सरकार एहि दिस डेग उठायत से मैथिलकेँ आस छनि. जँ एतुका चित्रकलाकेँ बाजारसँ जोड़ि देल जाए त' हजारो कलाकारक भाग्य बदलि सकैए. मिथिलामे पर्यटन अपार संभावना अछि मुदा, आधारभूत संरचना ओ मूलभूत सुविधाक अभावमे एतय अद्यावधि पर्यटन उद्योगक विकास नहि भ' सकल अछि. मोदीक चुनाव प्रचारमे पर्यटन स्थलक विकास एकटा प्रमुख मुद्दा छल. अतः मैथिल मतदाता लोकनि सेहो आशावान छथि जे मिथिलामे रामायण सर्किट निर्माण ओ अन्य पर्यटन स्थलक विकास कएल जाएत. गंगा नदीक सफाई मोदी सरकारक प्रमुख एजेण्डामे शामिल अछि. अतः अपेक्षा अछि जे सिमरिया, सुल्तानगंज भागलपुर आदि स्थानपर गंगा घाटक पर्यटनक दृष्टिकोणसँ विकास कएल जाएत. भाजपाक घोषणापत्रमे एकसय नव शहरक विकास योजना शामिल कएल गेल अछि. मिथिलामे शहरीकरण नगण्य अछि तेँ एहि क्षेत्रक शहर सभक सुनियोजित विकास भेनाइ परम आवश्यक अछि. आशा कएल जा सकैए एहि नवका शहरमे मिथिलाक भागलपुर, मुझफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, आदि जगह सेहो शामिल होयत. 
पूर्वमे दरभंगा राजक अत्याधुनिक साज-सज्जासँ पूर्ण सैलुन बरौनीसँ दरभंगा धरि चलैत छल जे प्राप्त सुचनानुसार आब नष्ट भ' चुकल अछि. भारत सरकारक रेल-मंत्रालयसँ मिथिलाक जनता अपेक्षा राखत जे मिथिलाक कला, संस्कृति, संगीत, इतिहास ओ लोक-व्यवहारकेँ प्रदर्शित करैत बरौनीसँ सीतामढ़ीधरि पर्यटक ट्रेनक परिचालन आरंभ कएल जाए. संगहि जयनगर-जनकपुरक मध्य परिचालित रेलसेवाकेँ सेहो पर्यटनक दृष्टिकोणसँ विकसित कएल जाए. मिथिलामे पर्यटन उद्योग लाखो लोककेँ रोजगार प्रदान करबाक क्षमता रखैत अछि. भारत सरकारक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मैथिली भाषा-भाषी क्षेत्रक विशालता ओ मैथिलीक समृद्ध इतिहासक सम्मान करैत दूरदर्शनक मैथिली चैनल खोलय. आकाशवाणी दरभंगाकेँ पूर्णतः मैथिली भाषाक रेडियो चैनल घोषित कएल जाए. एहिसँ मिथिलाक लोकसंगीत ओ मैथिली सिनेमाजगतकेँ बढ़ावा भेटत.
विशेष-पैकेज आ कौशल-विकासः
बिहार सरकार आइ कतेको बरखसँ विशेष राज्यक मान्यता आ राज्य लेल विशेष पैकेज केर मांग क' रहल अछि. नरेन्द्र मोदी अपन चुनाव प्रचारमे बिहारकेँ विशेष राज्यक दर्जाक संगहि पचास हजार करोड़ टाकाक विशेष पैकेज केर बात कहने छथि. मुदा, पछिला किछु बरखमे बिहार सरकार केर मिथिलाक प्रति जे रूखि रहल अछि ताहिसँ मैथिल मतदाता अपनाकेँ उपेक्षित बूझि रहल छथि. मगध आ मिथिलाक विकासमे क्षेत्रिय विषमता प्रतीत होइत अछि. अतः मैथिल चाहैत अछि जे मोदी सरकार बिहारक लेल विशेष पैकेज केर घोषणा अतिशीघ्र करय संगहि एहि पैकेज केर उपयोग मात्र राज्य सरकारक विवेक पर नहि छोड़ल जाए अपितु क्षेत्रिय असमानता आ पिछड़ापनकेँ ध्यानमे रखैत योजनागत रूपमे देल जाए. जाहिसँ मिथिलाक जनता केर संग कोनो तरहक भेदभाव नहि हो.
रोजी-रोजगारक खोजमे मैथिल युवक पलायन लेल आइ विवश छथि. मैथिल युवाकेँ मिथिलेमे रोजी-रोजगार भेटय ताहि हेतु ओकर कौशल-विकास सेहो आवश्यक अछि. संयोगसँ युवा लोकनिक कौशल-विकास (Skill Development) मोदी सरकारक प्राथमिकता कहल जाइछ. अतः मिथिलाक युवक एहन तरहक कोनो योजनासँ खास लाभ प्राप्त करताह आ अपनहि गाम-घरमे रोजगार पौताह तकर समुचित व्यवस्था दिस नव केन्द्रिय सरकारसँ ठोस डेगक अपेक्षा मिथिला रखैत अछि.
राज्य पुनर्गठन आयोगः
आइ करीब पचास बरखसँ पृथक मिथिला राज्य आंदोलन चलि रहल अछि. देशक आन-आन भागमे जेना-अलग विदर्भ, गोरखालैण्ड, बुंदेलखण्ड आदि राज्य गठनक मांग स्थानीय लोक कए रहल छथि आ आंदोलनरत छथि. जेनाकि भाजपा अपन घोषणापत्र केर माध्यमसँ छोट-छोट राज्यक गठन पर सहमति जनौलक अछि तेहनामे मोदी सरकारसँ मिथिलाक जनता प्रबल आशा रखैत अछि जे ओ पृथक मिथिला राज्यक निर्माणक दिशामे ठोस पहल करत आ अगिला पाँच बरखक अभ्यंतर मिथिलाक आकांक्षानुरूप, क्षेत्र सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक मिथिला राज्यक गठन करत. मोदी सरकारकेँ विभिन्न क्षेत्रक जनमानसक भावनाकेँ सम्मान करैत तत्काल राज्य पुनर्गठन आयोगक गठन करबाक चाही आ मिथिला समेत अन्य छोट राज्यक मांग पूर्ति हेतु योजनाबद्ध रूपेँ काज करबाक चाही.
मिथिला नेपाल आ बंगलादेशक सीमावर्ती इलाका अछि. अतः सामरिक दृष्टिकोणसँ सेहो एकर विशिष्ट महत्व छैक. हालमे जाहि तरहेँ मिथिला क्षेत्र आतंगवादक गढ़ केर रूपमे उद्घाटित भेल अछि ताहिसँ केन्द्र सरकारपर दायित्व बनैछ जे एहि क्षेत्रक अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती इलाकापर पहरेदारी चुस्त कएल जाए. संगहि केन्द्र-राज्यक बीच आर सहयोगक वातावरण स्थापित करैत मनरेगा, शिक्षाक अधिकार आ खाद्य सुरक्षा कानून, आदि जन-कल्याणक योजनाकेँ प्रभावी ढ़ंगसँ कार्यान्वित कएल जाए. जँ एहि क्षेत्रक जन-प्रतिनिधि लोकनि क्षेत्रिय अस्मिताकेँ ध्यानमे रखैत दलगत राजनीतिसँ उपर उठि उपरोक्त विन्दु सभपर विचार करताह आ तदनुरूप योजना निर्माण कए कार्यान्वित करताह त' अगिला पाँच बरखमे मिथिलाक कायाकल्प भ' सकैत अछि. आवश्यक इहो अछि जे आम मैथिल एहि मध्य  जाति ओ सम्प्रदायसँ उपर, अपन जनप्रतिनिधिकेँ मिथिलाक समस्यापूर्ति लेल कोन तरहेँ बाध्य करैत छथि.
— चन्दन कुमार झा 

(लेखक मैथिलीक युवा साहित्यकार छथि. आलेख संबंध मे अपन प्रतिक्रिया cjha83@gmail.com पर पठा सकैत छी)

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