मिथिला राज्यक औचित्य पर भेल संगोष्ठी

बम्बइ: अन्तर्राष्ट्रीय मैथिल परिषदक संयोजनमे मिथिलाक गौरबशाली इतिहास एवं मिथिला राज्यक औचित्य पर एकटा भव्य संगोष्ठीक आयोजन मायानगरी मे विगत रविदिन (16 फरवरी) कें आर्यसमाज हाल, हिन्दुस्तान चौक, मुलुण्ड मे भेल. मुख्य वक्ता पं० जीबकान्त मिश्र मिथिलाक ऐतिहासिक महत्वक वर्णन करैत कहलनि जे मिथिलाक माटिमे ओ शक्ति समाहित अछि जाहिसँ आदिशक्ति जगदम्बा सीता धरतीक गर्भसँ बेटी बनिकऽ उत्पन्न भेल छलीह. जनिक अनुकम्पा सं मिथिला एवं चरा-चर विश्व लाभान्वित भेल अछि ओ भऽ रहल अछि. मिथिलाक भूमि ओ भूमि अछि जाहि ठाम भगवान श्रीराम भगवान नहि अपितु एक व्यक्तिक रूपमे मानल जाइत छथि. जगदम्बा सीताक सहयोगिनी अनेक देबी जल स्वरूपा भऽ कमला, कोसी, गण्डकी, यमुना आदि रूपमे विराजमान छथि. जाहि ठाम पग-पग पर मिथिलाक पुरातन संस्कृति, समृद्धि एवं उन्नतिक प्रमाण बिखरल पडल अछि, जकरा समझबाक ओ सहेजबाक आवश्कता अछि. लोक अपना संस्कृति कें छोडैत जा रहल छथि ई चिन्ताक विषय अछि, तै हमरा लोकनि कें एहि विषय पर ध्यान देबाक आवश्यकता अछि.
संस्थाक अध्यक्ष चक्रधर झा मिथिलाक प्रति शासनक अवहेलनासँ उत्पन्न विपन्नताक कारणे होबयबला पलायनक प्रति चिन्ता व्यक्त करैत कहलनि जे ई बिहार एवं भारत सरकारक मिथिलाक उपेक्षाक देन अछि. तै आब ओ समय आबि गेल अछि जे हमरा लोकनिके अपना भाग्यक विधाता स्वयं बनय पडत.
मिथिलामे एखनो संसाधनक कमी नहि अछि. अजस्त्र जलश्रोत, उर्वर माटि एवं मैथिल युवावर्गक प्रतिभा ओ मेहनतिक सदुपयोक क' लेलासँ मिथिला भारतक सभ प्रान्तमे अग्रसर भ' सकैत अछि. संगहि संस्थाक उद्देश्य मिथिलामे प्रतिभाक विकास हेतु सेमिनारक आयोजन करब, अप्रवासी मैथिलकें मिथिलाक मूलधारा सँ जोडब आ संस्थाक माध्यम सँ व्यवसायिक प्रशिक्षणसँ आत्मनिर्भर बनयबाक हेतु कार्यक्रम चलयबाक घोषणा सभाक समक्ष कयलनि. प्रमुख अतिथि महेश्वर मिश्र एहि अभियानमे अपन सहयोगक वचन देलनि. सदरे आलम गौहर, विनय विश्वबन्धु एवं प्रो० कृष्णकुमार झा 'अन्वेषक' अपन काव्यपाठसँ श्रोताकें आह्लादित कयलनि. मञ्च सञ्चालन प्रो० कृष्णकुमार झा 'अन्वेषक' कयलनि. (Report:  मिथिमीडिया ब्यूरो)

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