'झकझोरि देलक पुलिस-प्रशासनक उदासीनता'

ई मामिला आँखि खोलि देलक लोकक. कांड निर्दयतापूर्ण छल. तकर बाद सरकार ओ पुलिस- प्रशासन  उदासीनता सं मामिला मे समाज पर आंगुर उठय लागल.  एक त' घटना राज्य मे जन-सुरक्षा, विशेष क' महिला सुरक्षा केर स्थिति उजागर करबा लेल पर्याप्त अछि. दोसर घटना केर बाद लगातार उपेक्षा ओ पीड़िता केर मृत्यु पश्चात पॉलिटिकल ड्रामा बहुत बेसी चकित करयवला छल. जखन सभ देखलक जे न्यायक दिशा मे कतहु किछु ने भ' रहल छै त' समाज आ समाजक लोक दिस सभक नजरि गेल आ हं मैथिल समाज एहि दिस तत्परता मे कने देरी केलक. मुदा जओं सरकार ओ पुलिस-प्रशासन अपन काज इमानदारी सं करैत त' फेर समाज पर कोनो तरहक आरोप लगबे नहि करैत. समाज, क्षेत्र ओ राजनीति सं ऊपर उठी त' घटना बहुत बेसी विदारक छल. ओहुना पश्चिम बंगाल मे एहि तरहक मामिला बहुत बेसी देखबा मे अबैत अछि. सरकार कें मजगूतीक संग जन सुरक्षा खास क' महिला सुरक्षा कें सुनिश्चित करबाक चाही.
पीड़िता केर पिता सं वा हुनक संग रहनिहार परिजन सभक संग बातचीत मे हमरा कखनो नहि लागल जे ओ समाजक उदासीनता सं दुःखी छथि. मीडिया मे आयल एहि विषयक समाद संदेहास्पद बुझना जा रहल अछि. घटनाक पश्चात देखय मे आयल जे महानगर आदि मे समाज कें जिया राखब जरूरी. एकजुटता जरूरी अछि. संघे शक्ति छैक एकरा नकारल नहि जा सकैत अछि.

एहि पूरा मामिला पर सरकारो एक्टिव भेल मुदा कने विलम्ब सं. जांच आदि चलि रहल अछि. पीड़ित परिवार न्याय लेल लड़िए रहल अछि. तखन बिहार सरकारक पहल प्रशंसनीय अछि. ओकरा आपस त' नहिये आनल जा सकैछ मुदा दानव सभ कें कड़गर सजाय हो. सजग रही आ सुरक्षित रही.  

(मध्यमग्राम कांड पर कवरेज कयनिहार पत्रकार उमेश राय केर टिप्पणी)

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