‘मैथिली प्रबंध काव्यक विकास ओ परम्परा’ संगोष्ठी

साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित संगोष्ठी मे जुटल साहित्यकार लोकनि
मधेपुरा. साहित्य अकादेमी नव दिल्ली एवं पार्वती विज्ञान महाविधालय मधेपुराक संयुक्त तत्वाधान मे 21-22 अक्टूबर कें ‘मैथिली प्रबंध काव्यक विकास ओ परम्परा’ विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार केर आयोजन भेल. कार्यक्रमक उद्घाटन भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविधालयक कुलपति आर. एन मिश्र कयलनि. ओ कहलनि जे मैथिली भाषा एवं साहित्य अपन माधुर्य एवं साहित्यिक विशिष्ठताक संग लोक जीवनक भाषाक रूप मे स्थापित अछि. एकर समृद्ध ऐतिहासिक परम्परा रहल अछि. कुलपति मैथिली केर विकासक लेल वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर सेहो इजोत देलनि. एहि सं पहिने साहित्य अकादेमीक उपसंपादक डा. देवेन्द्र कुमार देवेश पाहुन लोकनिक स्वागत कयलनि. ओ  मैथिलीक उत्थान व संवर्द्धन मे साहित्य अकादेमीक अवदान कें रेखांकित कयलनि. ओ कहलनि जे अकादेमी युवा एवं बाल साहित्य लेखन पर  सेहो पुरस्कार देइत अछि.
मैथिली परामर्श मंडल, साहित्य अकादेमी केर संयोजिका डा. वीणा ठाकुर, रामदेव झा अपन उदगार व्यक्त कयलनि. पहिल सत्र केर अध्यक्षता रमाकांत मिश्र ओ पार्वती विज्ञान महाविधालयक प्राचार्य केपी यादव धन्यवाद ज्ञापन कयलनि. संगोष्ठी केर द्वितीय सत्र केर अध्यक्षता महेन्द्र झा कयलनि. प्रतिभागी मे रमण झा, देवनारायण साह, हरिवंश झा, रंजित कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार चौधरी विभिन्न विषय पर आलेख पाठ कयलनि. एहि संयुक्त सत्र मे माधुरी झा एवं महेन्द्र झा अपन अध्यक्षीय भाषण सं प्रबंध काव्य केर विशेषता उजागर कयलनि. प्रथम दिवसक अंतिम सत्र मे अभय कुमार, कुलानन्द झा आलेख पाठ कयलनि तथा सत्र केर अध्यक्षता जगदीश नारायण प्रसाद कयलनि.
संगोष्ठी केर दोसर दिन प्रथम सत्रकेर अध्यक्षता मैथिलीक हस्ताक्षर व तिलका मांझी विश्वविधालय भागलपुरक मैथिली विभागाध्यक्ष केष्कर ठाकुर कयलनि आ आलेख पाठ धीरेन्द्र कुमार, शिवप्रसाद यादव, ललिता झा, विश्वनाथ झा, रामनरेश सिंह, वीरेन्द्र झा  विभिन्न विषयक आलेख पाठ कयलनि. एहि दू दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठीक अंतिम सत्र मे अशोक सिंह तोमर, किशोर कुमार सिंह, कमल मोहन चुन्नू, शंकर देव झा आलेख पाठ कयलनि. एहि सत्रक अध्यक्षता मैथिलीक साहित्यकार धीरेन्द्र नारायण झा ‘धीर’ कयलनि.
समापन सत्रक मुख्य अतिथि भू.ना. मंडल विश्वविधालयक कुलपति डा. आरएन मिश्र अपन महत्वपूर्ण वक्तव्य मे कहलनि जे तकनीकी गतिक अनुरूप साहित्यक सेहो गति होयबाक चाही. ललितेश मिश्रक अध्यक्षता मे धीरेन्द्र नाथ मिश्र पर्यवेक्षीय रपट पेश कयलनि. समापन भाषण मे पार्वती विज्ञान महाविधालयक प्राचार्य केपी यादव समस्त सुधि श्रोताएवं  प्रतिभागी कें साधुवाद देलनि. प्राचार्य सहयोगी लोकनि सहित आयोजनक संयोजिका वीणा ठाकुर, साहित्य अकादमीक उपसंपादक देवन्द्र कुमार ‘देवेश’, साहित्यकार डा. भूपेून्द्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’ एवं प्रो. श्यामलकिशोर यादव आदि केर गरिमामय उपस्थिति पर विशेष आभार व्यक्त कयलनि. धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कुलानन्द झा कयलनि.
द्विदिवसीय एहि साहित्यिक समागम मे कतेको विशेष बात छल जाहि मे ‘जय-जय भैरवि असुर भयाओनि..’ गीत पर प्रो. बिजली प्रकाश द्वारा प्रशिक्षित राजनन्दनी एवं निहारिका नन्हीं केर भाव नुत्य, केवी झा महाविधालयक प्राध्यापक प्रभु नारायण लाल दास द्वारा मिथिलाक कला-संस्कृति पर आधारित समाचार पत्र सभ मे प्रकाशित रपट केर प्रदर्शनी आदि. मधेपुराक धरती पर साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित एहि महत्वपूर्ण साहित्यिक समारोह केर गूंज कएक बरख धरि सुनल जा सकत.  
(Report/Photo: अरविन्द श्रीवास्तव)

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