एकटा नीक कलाकार बनबाक प्रयास अछि : सत्येंद्र

मैथिली, हिन्दीमे रचना करैत साहित्य साधनामे लागल, मैथिली फ़िल्म 'पीरितिया' सं अपन फ़िल्मी कैरियर प्रारंभ करयबला उत्साही कलाकार सत्येन्द्र सं भास्कर झाक संगे भेल गप्प-शप्पक किछु अंश—

सर्वप्रथम अहां अपन प्रारंभिक जिनगी, शिक्षा-दीक्षाक बारेमे किछु बताबी?
मूलरूपसं हम मधुबनीक रहनिहार छी, मुदा सम्प्रति दरंभंगा कें कर्मभूमि बनौने छी. मैथिली साहित्यमे एमए केलाक बाद हम एखन पीएचडी कए रहल छी. हमर शोधक विषय अछि- आधुनिक मैथिली नाटकमे महेन्द्र मलंगियाक योगदान: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. एकर अलावे एखन हम मास कम्यूनिकेशन तथा जर्नलिज्ममे पीजी डिप्लोमा सेहो कए रहल छी. दरभंगा रेडियो स्टेशनक लेखा विभागमे कार्यरत छी. वर्ष 2007मे हमर लघुकथाक एकटा पोथी 'अहीं के कहै छी' प्रकाशित भेल अछि.

अहांक अभिनय दिस कोना आ कहिया रुझान भेल ? अभिनय करबाक प्रेरणा कतय सं भेटल?
हमर बाबूजी अमर चन्द्र झा, गयामे छलाह आ 5 कक्षा धरि ओहि ठाम हमर पढाइ-लिखाइ भेल. बाबूजी ओतय प्रोफ़ेशनल नाटक करैत छलाह. बाबू जी बम्बइ चलि गेलाह आ किछु संघर्षक बाद ओ हिन्दी सिनेमामे सहायक निर्देशकक रूपमे काज करय लगलाह. केदार नाथ शर्मा, धीरुभाइ देशाई, नाना भाइ भट्ट (महेश भट्टक पिताजी) आदि संग लगभग 22 गोट हिन्दी आ 1टा गुजराती फ़िल्म केलाह. एहि प्रकारे अपन घरक फ़िल्मी वातावरण आओर फ़िल्मानुरागी पिताक गहीर प्रभाव हमरा पर पड़ल. बादमे अपन अभिनय कें  निखारबाक लेल हम रंगमंच सं जुड़ि काज करय लगलहुं.

अहांक बाबूजी कोन-कोन हिन्दी फ़िल्ममे सहायक निर्देशक रहथि, किछु बता सकैत छी?
हुनक प्रमुख फ़िल्ममे 'संत ज्ञानेश्वर', 'महासती अनुसूया', 'स्पाय इन रोम', 'चोर दरबाजा', 'फ़्लाईंग मैन', 'सेजल सुमरो' (गुजराती) किशोर साहूक संग "नया मंदिर", नाना भाई भट्ट संग 'मशाल' आदि किछु नाम अछि.


अहांक पहिल पहिल फ़िल्म छल श्याम भास्कर द्वारा निर्देशित मैथिली फ़िल्म 'पीरितिया'. ई फ़िल्म अहां कें  कोना भेटल छल?
श्याम भास्कर जी प्रयोगधर्मी लेखक आ निर्देशक छथि जे सदिखन मैथिली सिनेमाक प्रति गंभीर चिन्तनमे लागल रहैत छथि. ओ हमरा कथाकार आ कविक रूपमे पहिने सं चिन्हैत छलाह, मुदा जखन कास्टिंग कएल गेल त' ओ हमरा एकटा भूमिका देलनि, रंनिंग रोल छलै. शूटिंग समाप्त भेलाक बाद हम श्याम भैयासं डेरायत डेरायत पुछलियनि जे हमर काज केहन लागल ? ओ कहलाह जे हम अहाकें रोल द' कोनो गलती नहि केलहुं. हुनक उत्साहपूर्ण बोल हमर कानमे जेना मिसरी घोरि देने होअय, जेना बुझायल. एहि सं हमर उत्साह बनल रहल आ अभिनयक क्षेत्रमे आगू बढबाक प्रेरणा सेहो भेटल.
 
एखन धरि अहां कोन कोन फ़िल्म एवं सीरीयलमे अभिनय केने छी ?
जेना हम कहि चुकल छी, हमर पहिल फ़िल्म छल “पीरितिया”. तकरा बाद अभिजीत सिंहक “ दुलरुआ बाबू”, विजय कुमारक हिन्दी टेलीफ़िल्म “श्यामा दर्शन”, सौभाग्य मिथिला लेल श्याम भास्कर द्वारा निर्देशित सीरियल “डॉ टोपीबाला”, लाइफ़ ओके पर प्रसारित “सावधान इन्डिया”, रवि खन्डेलवाल निर्देशित लघु मैथिली फ़िल्म “कोखि”, श्याम भास्करक “ फ़ेर हेत
भोर” आदिमे अभिनय केने छी. उदय राज द्वारा निर्देशित मैथिली फ़िल्म “ घोघमे चांद” जल्दिये रिलीज होयत.

' फ़ेर हेत
भोर' केर मूल कथ्य की थिक? किछु बताबी?
एहि फ़िल्मक कथा राजनैतिक जीवनमे आयल स्खलनक प्रति घुमैत अछि, जाहिमे सत्ताक क्रूरता आ निरंकुशताक दर्शन होयत अछि. फ़िल्मक नायक अपन स्वार्थसिद्धिक लेल कृत्य-कुकृत्यक मध्य कोनो अन्तर नहि करैत छथि. हुनका लेल सत्ता मात्र हितपोषणक पर्याय थिक. एहि फ़िल्मक विषय-वस्तु मैथिली सिनेमाक दर्शक लेल नव अछि. मैथिली मे यथार्थवादी सिनेमाक घोर अभाव अछि. आशा करैत छी जे “फ़ेर हेतइ भोर” सं यथार्थवादी सिनेमाक आरंभ होयत. एकटा आओर खास बात. एहि फ़िल्ममे कोनो गीतक प्रयोग नहि अछि. 


बड्ड नीक ! अहां कोन कोन मैथिल अभिनेतासं प्रभावित छी ?
रवि खंडेलवाल, राजीव सिंह, अनिल मिश्रा, मुरलीधरजी आदि किछु गोटे छथि जिनक अभिनय सं हम बेसी प्रभावित छी. ई लॊकनि सम्पूर्ण कलाकार छथि. आ हमहु एकटा नीक कलाकार बनबाक प्रयास कए रहल छी. एहि लेल हमरा एकहन बड्ड काज करबाक अछि. आब आगू देखियौ की होयत अछि.

अहांक हिसाबे मैथिली फ़िल्म लोकप्रिय नहि होमय केर की-की कारण अछि ?
हमरा जनतवे नीक कथाक अभाव, दक्षता व कुशलता सं तैयार पटकथाक अभाव, निर्देशक-निर्माता द्वारा आर्टिस्टक ड्रेस, मेक-अप सबमे समझौता, आ कहानीमे समय सं पाछू चलबाक सोच जड़ियाएल छै. ओना हमरा बुझने जाबत तक प्रदर्शन व्यवस्था नहि सुधरत, ता धरि मैथिली सिनेमाक प्रगति बाधित होयत रहत. अनेको फ़िल्म त' लैपटॉपे मे रहि जायत अछि. दोसर अहम कारण, प्रोफ़ेशनल डायरेक्टरक घोर अभाव अछि मैथिलीमे, ओना आइ-काल्हि निर्देशक बनबाक होड़ लागि गेल अछि.


मैथिली सिनेमाक भविष्य अहां किनक हाथमे
उज्ज्वल देखि रहल छी ?
मुरलीधर जी, अभिजीत सिंह, श्याम भास्कर, उदय राज आदि किछु निर्देशक छथि जे जदि नियमित रूपे फ़िल्म बनाबथि त' नीक संभावना बनत. आजुक समयमे मैथिली सिनेमाक लगातार हिट फ़िल्मक आवश्यकता छै. मनोज श्रीपतिजी सेहो कुशल निर्देशक छथि. हिनको पर मैथिली सिनेमा बहुत निर्भर अछि.
 
ई आरोप लगायल जा रहल अछि जे मैथिली फ़िल्म कें रीलिज करबाक लेल हॉल नहि भेटैत अछि. से की कारण ?
 एहि बारेमे हम विशेष त' नहिं कहब किएक त' हम प्रोडक्शन सं कनियो नहि जुड़ल छी, मुदा जेना सुनै छी जे आन क्षेत्रीय भाषाक एजेन्ट किछु बाधा उत्पन्न करैत छथि.

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