'ओ आइयो छथि आ रहताह सदति'

कलकत्ता. मिथिला बहुत उर्वर भूमि अछि. एतय देव जन्म लेबय लेल आतुर रहैत छथि. एतय ऋषि राज-पाट चलबैत रहलाह अछि. एहने एक मिथिला पुत्र कें देवत्व प्राप्ति पर समस्त मिथिलावासी दुखी अछि. बृहस्पतिदिन भोरे कलकत्ता प्रवास कयनिहार आ सजग मैथिल तेज नारायण झा केर निधन सं समूचा मिथिला समाज संतप्त अछि. अपन संघर्ष भरल जिनगी मे सफलता केर सोपान धरि पहुंचल आ चीर पारि बाट बनौनिहार तेज नारायण झा मिथिला-मैथिली केर प्रबल समर्थक छलाह. ग्राम नरही निवासी तेज नारायण झा बहुत दिन सं बेमार छलाह. अंततः उर्ध्वगामी भेलाह आ सकल समाज कें टुग्गर क' गेलाह.
ज्ञात हो जे तेज नारायण झा केर ननिहाल मनपौर छलनि आ हुनक प्रारंभिक शिक्षा एतहि भेल छलनि. खिरहर हाइ स्कूलक छात्र रहल तेज नारायण झा मिथिला लेल अनेक काज कयने छथि. हुनका सं प्रवासी मैथिल कार्यकर्ता आ कार्यक्रम बेर-बेर लाभान्वित भेल अछि. सूत्र सं भेटल खबरि अनुसार हुनक अंतिम संस्कार नानी गाम अर्थात मनपौर मे कयल जायत.
मिथिला विकास परिषद् केर राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक झा सहित मैथिल समाज हुनक निधन पर गहीर संवेदना प्रकट कयलक अछि. मैथिली युवा साहित्यकार मिथिलेश कुमार झा मिथिमीडिया कें संवेदना जनबैत कहलनि जे हुनक जिनगी कोनो मैथिल संतान लेल पाठ सदृश अछि. संपूर्ण रूप सं क्षण भरि मे बेसी किछु नहि कहल जा सकैत अछि त' एक बात मोन पडैत अछि. हुनका धर्म, भाषा-संस्कृति सं अगाध प्रेम छलनि. मुदा ओ पहिने एक देवतुल्य मानव छलाह. अपन गाम लग ओ मुसलमान सभ कें कब्रगाह लेल अपन जमीन दान देने छथि. जखन कि ओ कट्टर हिन्दू मैथिल बुझल जाइत रहलाह अछि. एतबे नहि ओ सार्थक काज लेल मुक्त हस्त दान देबयवला मे सं छलाह. बाबाधाम केर बाट मे विश्रामगृह निर्माण करओने छथि जे उल्लेखनीय अछि. ओ अनेक संस्था आदि सं जुडल छलाह. वैदेही सेवा मंच सं किछु विशेष रूपें जुडल रहलाह.

युवा मैथिलीकर्मी रूपेश त्योंथ तेज नारायण झा विषय मे एक सोशल साइट पर किछु एना अभिव्यक्त केने छथि  
किछु वर्ष पूर्व तेज नारायण झा मिथिला समाद केर कार्यालय आयल छलाह. सम्पादक तारा कान्त झा सं गप-शप क' न्यूज केबिन दिस बढलाह. सम्पादक महोदय हमरा दिस आंगुर देखबैत कहलथिन यैह छथि रूपेश जिनक कएक बेर जिकिर करैत छलहुं. हम अपन सीट छोडि ठाढ़ भ' गेल छलहुं. ओ गामक नाओ पुछ्लनि फेर बहुत रास गप्प कयलनि. असल मे ओ खिरहर हाइ स्कूल केर छात्र रहल छलाह आ हम सेहो. खिरहर, मनपौर, दुर्गौली, त्योंथा आ बेनीपट्टी केर अनेक पुरना गप्प क्षण भरि मे कहि देबाक प्रयास मे छलाह तेज नारायण बाबू. एहि सं पहिनहि सं हिनका विषय मे अनेक बात हमरा ज्ञात छल. कोलकाता केर प्रमुख मैथिल सेवी मे हिनक गिनती ओहिना नहि होइत अछि.
एहिना पछिला साल अपन एक भैयारी केर बियाह मे नवगाम (दड़िभंगा) बरियाती गेल छलहुँ. ई ओतय पहुंचल छलाह. हिनक बिगड़ल स्वास्थ्य केर जनतब हमरा छल तथापि लगभग मध्य राति मे हिनक उपस्थिती अचंभित कयलक. जखन हुनक गाड़ी पंडाल लग आयल त' हम अपन मित्र मंडली सभक संग हंसी मजाक मे लीन छलहुं. हिनक गाड़ीक नंबर देखि हम जोर सं बजलहुं— ई त' कलकतिया गाड़ी छौ रे भाइ !!! हमर गप्प पर मित्र-मंडली खूब जोर सं ठहक्का बजाड़ने छल. गाड़ी सं बहराइत तेज नारायण झा बाजल छलाह-की कलकत्ता सं गाड़ी एतय नहि आबि सकैछ??? सभ चुप भ' गेल छल.
हिनका संगे यएह दू खेप सोझा-सोझी भेंट अछि. ओना मिथिला-मैथिली हिनक योगदान कें सदति मोन राखत. (मिथिमीडिया सेन्ट्रल डेस्क)

Advertisement

Advertisement