'फगुआ मिलन आ हंसी-ठहक्का'

कलकत्ता. फागुन केर मास आ होरीक हुडदंग मे हंसी-ठहक्का केर जेना बहन्ना ताकल जा रहल अछि ताहि सं लगैछ जे महानगर केर दौग-भाग सं निचैन आ मस्ती केर दू क्षण तकबा लेल लोक फिरेशान अछि. अनेक होली मिलन आ प्रीति भोज आ हास्य सम्मलेन केर आयोजन भ' रहल अछि. एहना मे मैथिल पाछू कोना रहि सकैत अछि.
मुस्की अनमोल छैक आ एहि  कें धियान रखैत कतेको साल सं स्थानीय मैथिल नाट्य संस्था कोकिल मंच फागुन मास मे 'फगुआ ठहक्का' कार्यक्रमक आयोजन करैत आबि रहल अछि. एहि आयोजन मे मैथिल बुद्धिजीवी लोकनि जमा भ' हंसी-ठहक्का केर कार्यक्रम करैत छथि. कोलकाता केर कवि लोकनि  हास्य-व्यंग्य कविता केर पाठ करैत छथि जे एहि कार्यक्रम केर सभ बेसी आकर्षण बिंदु अछि.
एहि आयोजन मे पठित हास्य कविता कें कोकिल मंच केर स्मारिका जे प्रत्येक साल प्रकाशित होइत अछि, मे स्थान देल जाइत अछि. कहि दी जे कोकिल मंच केर स्मारिका मे सेहो सभ सं रोचक फगुआ ठहक्का केर कविता सभ रहैत अछि. एहि बेर ई आयोजन रविदिन 24 मार्च 2013 कें सागरमल लोहारीवाला धर्मशाला (निकट शोभा बाजार मेट्रो) मे 4.3.0 बजे सं आयोजित अछि. सम्पूर्ण आशय केर जनतब प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक गंगा झा देलनि. (Report:  मिथिमीडिया ब्यूरो)

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