नचारी (शिवराति पर विशेष)

कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ
कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ ।

हिनका नहि घर छनि नहि छनि घरारी
छनि नहि लोटा नहि छनि थारी
छनि नहि खेतहु एकहु धूर यौ..
कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ ।

देहपर हिनका नहि बीतभरि वसन छनि
पाँच टा मुँह बीच तीन टा नयन छनि
ई तऽ छथि बतहा दिगम्बर यौ...
कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ ।

हमर गौरी छथि बड़ सहलोला
कोनाकऽ पिसथिन भांगक गोला
भूतहु-प्रेतसँ हेतनि डर यौ..
कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ ।

सकल चराचर केर छथि अधिनायक
ई जोगिया छथि जगत सुखदायक
त्रिभूवन पति, छथि ई 'हर' यौ..
कोना टेबलहुँ नारद एहन वर यौ ।

— चंदन कुमार झा

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