राक्षस (लघु कथा)

बलिप्रदानक लेल छागर सभकेँ नहा ओकरा गरदनिमे फूलक माला पहिरा देल गेल रहैक. माला ककरो कनैलक बनल रहैक, ककरो तीरा फूलक आ' ककरो मिला-जुलाकेँ सबरंगा फूलक.
दुर्गा आगाँमे देबालक एहिकोसँ ओहि कोण धरि नाम-चाकर केराक भालरि जोड़िकऽ बिछा देल गेल रहैक. छागर सभक तऽ होश उड़ल रहैक. जे गामक जतेक पैघ आ' टाका बला लोक, से ततेक पैघ छागर पोसि रखने छल. कबुला बला सब थोड़े छोटो छागर, कम दाममे भेटलासँ आनि रखने छल. एहिक्रममे गाम भरिक छोट-पैघ, प्रायः डेढ़ सय छागरक बलि प्रदान शुरु भऽ गेल रहैक. माइकपर लिस्टमे सँ माइकपर नाम पुकारल जाइ आ' छागरबला वा ओकर जन-बोनिहार महिषामे छागरक मुड़ी ढुका किल्ली लगा देइत रहैक आ' बलि पाचक (छागर कटनिहार) 'दुर्गा माइक जय....'कहैत छपाक दऽ छागरक मुड़ी काटि देइत रहैक. एक गोटे मुड़ीकेँ सरबामे लऽ दुर्गाक आगाँमे राखल केराक पातपर राखि अबैत छल आ' धर लऽ छागरबला कात भऽ जाइत छल. मुड़ीमे छागरक जीह बहरायल, कुचायल आ' आँखि टक-टकायल रहैत छलैक आ' धरमे टाँग छटपटाइत रहि जाइत छलैक. फेर वएह क्रम...दुर्गा माइक जय...होइ आ...छपाक. कोनो-कोनो जुआयल छागरक बलि देइ मे बलि पाचककेँ दू कि तीनो छऽ मारय पड़ैत रहैक गरदनि पर आ' छागर जोड़-जोड़सँ मेँऽ..मेऽऽऽ करैत चुप्प भऽ जाइत छल.
बचलाहा छागर सभ एक-दोसरा दिस तकैत मेमिया रहल छल. जेना ओकरा सबकेँ लागि रहल छलैक जे पहिले जेना राक्षस सब मनुक्खकेँ पकड़ि-पकड़ि अपन कुल देवता लऽग बलि देइत छल आ' उत्सव मनबैत छल, तहिना ई मनुक्ख-राक्षस ओकरा सबकेँ पकड़ि-पकड़ि बलि दऽ रहल छैक...आ' फेर जयघोषक स्वर तेज भऽ जाइत छैक...दुर्गा माइक जय....छपाक...छपाक. अनमोल झा
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