साहित्यमे कथा सभसँ सशक्त माध्यम

> सगर राति जरैत रहल दीप 
दड़िभंगा. कथावाचनक परम्परा प्राचीन कालसँ चलि रहल अछि. मिथिलाक प्रत्येक गाममे एहन अनेको कथावाचक रहै छलाह जे अपन कलात्मक कथासँ कतेक राति धरि लगातार श्रोता लोकनिकेँ बान्हि कऽ रखै छलाह. क्रमश: ई परम्परा लुप्त होबऽ लागल. तखन लोक सभ खिस्सा लिखऽ लगलाह. वर्तमानमे कथा सभसँ सशक्त विधाक रूपमे उभरि कऽ आएल अछि. एकरा ध्यानमे राखि साहित्यिक आ सांस्कृतिक आयोजन ‘सगर राति दिप जरय’ शुरू कएल गेल. कथावाचनक ई अदभुत प्रयोग आइसँ तीन दशक पहिने शुरू भेल छल जे आइयो चलि रहल अछि. ई बात (1 Nov. 2012) शनिक साँझ 6 बजे महाराजा महेश ठाकुर मिथिला कालेजक परिसरमे शुरू भेल एहि कार्यक्रमक अध्यक्षता करैत मैथिलीक प्रख्यात साहित्यकार आ साहित्य अकादमीसँ पुरस्कृत डा. भीमनाथ झा कहलनि. ओ साहित्यकार लोकनिकेँ सम्बोधित कऽ रहल छलाह. एहि कार्यक्रमक उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक राकेश कुमार मिश्र केलनि. एहि अवसरपर डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू, मैथिली अकादमीक अध्यक्ष कमलाकान्त झा आदि एहि आयोजनक विशेषतापर प्रकाश देलनि.
विभिन्न साहित्यकार लोकनि द्वारा बेराबेरी कथाक समीक्षा सेहो कएल गेल. कथापाठ केनिहारमे जनकपुरसँ राजाराम सिंह
राठौड़, कोलकातासँ अनमोल झा, गुवाहाटीसँ ललित झा, पटनासँ कमल मोहन चुन्नू, रामनारायण सिंह, समस्तीपुरसँ रमाकान्त राय रमा, स्थानीयमे डा. आशा मिश्र, ज्योत्स्ना चन्द्रम, अमलेन्दु शेखर पाठक, रोशन कुमार झा, शैलेन्द्र आनन्द, फूलचन्द्र झा प्रवीण, ऋषि वशिष्ठ, मुकुन्द मंयक, अमित मिश्र, जगदीश प्रसाद मण्डल, दुर्गानन्द मण्डल, उमेश मण्डल, बेचन ठाकुर सहित कतेको साहित्यकार लोकनि कथाक पाठ केलनि. अगिला कथा गोष्ठी लेल चारि ठामसँ प्रस्ताव भेटल. एहिमे ललित झा गुवाहाटी लेल, रोशन झा कन्है लेल आ कमलेश झा घनश्यामपुर लेल प्रस्ताव देलनि. उपस्थित सभ गोटे केर सहमतिसँ अगिला सगर राति दीप जरय कमलेश झाकेँ देल गेलनि जे घनश्यामपुरमे आयोजित होएत.

ई आयोजन किरण जयन्तीपर मिथिला आवाज आ विप्लव फाउंडेसनक तत्वाधानमे भेल. एहि कथा गोष्ठी आयोजक  अरविन्द ठाकुर छलाह ओ अजीत आजाद एकर संचालन कएलनि. साँझ 6 बजे दीप जड़ा कऽ कथा गोष्ठीक शुरुआत कएल गेल आ दीप भोर 6 बजे समापन धरि जरैत रहल. सबसँ पहिने पोथीक लोकार्पण भेल जाहिमे जगदीश प्रसाद मण्डल केर 11टा पोथीक संग आन-आन रचनाकार ओम प्रकाश झा केर गजल, रुबाइ संग्रह "किओ बूझि नै सकल हमरा", उमेश पासवानक "वर्णित रस", चंदन कुमार झाक "मोनक बात", शिव कुमार झा "टिल्लू"क "क्षणप्रभा", अमित मिश्रक "नव अंशु" मुन्ना जीक "हम पुछैत छी" , रामविलास साहु केर "रथक चक्का उलटि चलै बाट", बेचन ठाकुरक "बाप भेल पित्ती आ अधिकार" ,  झारुदारजीक "हमरा बिनु जगत सुन्ना छै" आ गजेन्द्र ठाकुरक पोथी मिला कऽ कुल 37टा पोथीक लोकार्पण भेल. एहि ठाम भारत-नेपालक कोन-कोन सँ कथाकार जुटल छलथि.
— कुमार शैलेन्द्र / अमित मिश्र

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