सी. परमानन्द : मैथिली सिनेमाक सत्यजीत राय

फ़िल्म निर्देशक आ अभिनेता सी. परमानन्द केर संग भेल बातचीतक विषय मे कहि रहल छथि मिथिमीडिया केर सिने सम्पादक भास्कर झा —
 
मूल रूप सं दरभंगा जिलाक हायाघाट प्रखंड (सम्प्रति हनुमान नगर प्रखंड)क मोरो बिसनपुर निवासी सी. परमानन्द केर नाम मैथिली फ़िल्मक इतिहासमे सदा इयाद कयल जायत. मुदा कतेक विडम्बना अछि जे एहन महान मैथिल पुत्र जे मैथिलीक पहिल फ़िल्म 'ममता गाबय गीत'क निर्देशक छथि, आइ अन्हारमे भुतलायल छथि. हिनका पूछय बला केओ नहि! सुधि लेनिहार केओ नहि! सम्मानक नाम पर मौखिक सम्मानक अतिरिक्त हिनका किछु नहि भेटलनि.  हंसिकए कहैत छथि- 'दिल को तसल्ली देने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है.'
निर्देशक परमानन्दजी तत्कालीन बम्बइमे अपन पुरान जीनगी कें इयाद करैत कहैत छथि जे ओ मुम्बइ 1955 मे गेल रहथि. 1955-56 धरि संघर्ष केलथि. १९५७ मे पहिल काज भेटल छल हुनका. करीब 17-18टा फ़िल्म मे सहायक निर्देशकक भूमिका निभौने छलाह जाहिमे किछु फ़िल्मक नाम अछि- 'साक्षी गोपाल', 'घर संसार', ‘घर की लाज', 'गूंज उठी शहनाई', 'अप्सरा', 'घर घर दीप जले' आदि. 'साक्षी गोपाल' मे पहिल बेर काज केने छलथि. 'मां-बाप' मे सहायक संवाद लेखक रहथि. परमानन्दजी निर्देशनक अतिरिक्त अभिनय सेहो केने छलथि. भारत भूषण, निरुपा राय, अनीता गुहा अभिनीत फ़िल्म 'कवि कालीदास' तथा चर्चित फ़िल्म ‘तीसरी कसम' मे हिनक अभिनय हालाँकि छोट रहनि, मुदा नीक रहनि. राजकपूरक संग फ़िल्म 'तीसरी कसम' मे चाहक दोकान पर मैथिली सांवाद बाजिकए इतिहास बनेने छथि. परमानन्दजी स्मरण करैत कहैत छथि जे 'एही सीन मे हमरा संग हमर लंगोटिया यार रामाश्रय चौधरी छथि जेकि हमर ग्रामीण छलथि. सबसं पहिने रामाश्रय चौधरी हमरा फ़िल्म दुनियामे जयबाक लेल प्रेरित आ प्रोत्साहित केने छलाह. नित दिन गाछी मे हमरा फ़िल्म आ अभिनेता सभक बारे मे सूचना देइत रहैत छलाह आ एक्टिंग, अशीक कुमार केर एहन रोल छै, त' एहन डायलॉग छै! हिनकर बियाह शुभंकरपुर, दरभंगामे भेल छल. हम हुनका सं बड्ड प्रभावित भेल छलहुं. आर एकरे प्रतिफ़ल जे हम मुम्बइ चलि गेल रही 1955मे. मुम्बइ मे करीब 6 मास धरि संघर्ष करय पडल. फ़ेर त' खूब काज भेटल.
बम्बइ छोड़य केर पाछा कारण बतबैत कहलाह जे-हम बम्बइ मे लगभग स्थापित छलहुं. ओहि समयमे सत्यजीत रायक खूब नाम चलैत रहय. बंगाली सिनेमाक खूब लोकप्रिय रहै. हमरो मोनमे भेल जे हमहूँ मैथिली सिनेमाक लेल किछु करी. हम बड्ड खुश भेलहुं जे हमरा पहिल मैथिली फ़िल्म ‘ममता गाबय गीत’क निर्देशन करबाक सुअवसर प्राप्त भेल मुदा…….!!!  मैथिली प्रेम लेल मुम्बइ छोड़ि देलहुं 1970-71मे. मुदा मैथिली फ़िल्मक सत्यजीत राय बनबाक सपना चूर-चूर भ' गेल. हम कुर्बान भ' गेलहुं…..कुर्बान भेलहुं नहि...कुर्बान करा देल गेलहुं. मैथिल राजनीतिक शिकार बनि गेलहुं…बलिक बकरा. हमरा सं एहि फ़िल्मक दौरान जे व्यक्ति जुड़लाह, हुनक भाग्योदय भेलनि आ हमर भाग़्यास्त! कमल नाथ सिंह ठाकुर एहि फ़िल्म मे काज केने रहथि. हम सभ अन्हारे मे भुतलायत चलि गेलहुं. केओ पूछय बला नहि.
मैथिलक प्रति अपन आक्रोश व्यक्त करैत कहय लगलाह जे- 'मैथिल सभ कें लोटा मे भरिकय पाइन द' दियौ, खूब पीत. मुदा इनार खोनय केर नाम पर सब भाइग जायत. सुबिधाभोगी होयत अछि मैथिल, कर्मयोगी नहि. इनार खोना गेला पर सब दौड़ कें आयत अहां लग पाइन पिबय लेल. खूब बड़ाइयो करत अहां कें. परन्तु जहने पियास हटि जेतनि, झट ओ पड़ा जेताह ओहि ठाम सं. एहन स्थित अछि अपना ठाम'
“ममता गाबय गीत”क प्रिंट उपलब्धताक विषय मे पूछला पर बतौलनि जे 'भ' सकैत अछि एकर प्रिन्ट फ़िल्मक डिस्ट्रीब्यूटर भगत परिवार (गंगा भगत- दरभंगा टावर चौक) लग होयत.' पूछला पर परमानन्दजी स्पष्ट केलनि जे “फ़िल्म निर्देशक प्रह्लाद शर्मा मारवाड़ी स्कूलमे टीचर रहथि.'  जाले-कमतौलक निवासी शिवाजी राठौड़क बारे मे सेहो किछु बतौलनि. अन्त मे कहलनि जे- 'भास्करजी. हमर नानी गाम खड़का बसंत (जाले लग) अछि. हम बसंते बाटे खड़का जाइत छलहुं' विदित हो जे एहि फ़िल्ममे खड़का ग्रामवासी आश नारायण मिश्र सेहो काज केने छलथि. “ममता गाबय गीत” केर अभिनेता त्रिदीप कुमार केर विषय मे जनतब देलनि जे ओ एहि फ़िल्म मे अभिनय करय सं पूर्व किछु हिन्दी फ़िल्ममे सहायक निर्देशकक भूमिका निभौने छलथि, जेनाकि फ़िल्म ‘छोटी बहन'. हुनक असली नाम बीएन झा छल. परमानन्दजी त्रिदीप कुमार जीक संगहि सांता क्रूज, मुम्बइ मे रहैत छलाह.
 
(परमानन्द जीक संग भेल एहि बातचीत कें संभव बनबयमे बसहा-माखनपुर निवासी अंजनी चौधरी जीक हम आभारी छी. संबंधमे परमानन्द जी अंजनी जीक पीतियौत नाना छथिन)

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