‘मणिपद्म’क रचना संसार पर विचार

> चेतना समिति, पटनाक विचार गोष्ठी 
पटना. महाकवि बैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ द्वारा संस्थापित चेतना समिति (18 जुलाइ,1954 ई.) पटनाक तत्त्वावधान मे दिनांक 26 एवं 27 नवम्बर, 2012 ई कें 59म विद्यापति स्मृतिपर्व समारोहक आयोजन कएल गेल. विद्यापति स्मृतिपर्व समारोहक अवसर पर 1971 ई.सँ निरन्तर विचारगोष्ठी आयोजित होइत रहल अछि. आरम्भमे एकर स्वरूप पूर्वांचलीय छल जाहिमे असमी, उड़िया, बंगला एवं नेपाली, हिन्दी आदि भाषाक विद्वान अपन-अपन भाषा साहित्यक प्रसंग आलेख पाठ करैत छलाह.

एक वर्ष बांग्लादेश सँ डा. काजी अब्दुल मन्नान सेहो आएल छलाह. किन्तु चेतना समितिक पूर्वांचलीय विचार गोष्ठी आब मैथिली भाषा-साहित्य धरि सीमित भए गेल अछि. विचारगोष्ठीमे पठित आलेख चेतना समिति छपैत रहल अछि जकर संख्या चालीससँ बेसी अछि. एहिसँ मैथिलीक आलोचना साहित्यक भंडार भरल अछि. एहि क्रममे 59म विद्यापति स्मृतिपर्व समारोहक अवसर पर डा. रमानन्द झा ‘रमणक संयोजकत्व एवं प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो. महेन्द्रनारायण कर्णक अध्य़क्षतामे 27 नवम्बर, 2012 कें मैथिलीक ख्यातलब्ध साहित्यकार डा.ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’क रचना संसारपर केन्द्रित विचार गोष्ठी भेल. एहिसँ पूर्व प्रवृति केन्द्रित विचार गोष्ठी होइत छल. मणिपद्मक समग्र साहित्यपर विचारक हेतु प्रत्येक सहभागीक लेल अलग-अलग विषय निर्धारित छलनि. एहिमे निम्नलिखित विद्वान आलेख पाठक एलनि. डा. प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’ (मणिपद्म कृत लोकगाथात्मक उपन्यासक नायक/नायिकाक ऐतिहासिकता), प्रो. रत्नेश्वर मिश्र, (मणिपद्म कृत लोकगाथात्मक उपन्यासमे मिथिलाक सांस्कृतिक इतिहास), डा. उषाकिरण खान (लोकगाथाक औपन्यासिक लेखनक प्रयोजन - सन्दर्भ मणिपद्मक उपन्यास), डा.देवेन्द्र झा, (मणिपद्मक रचनाक राष्ट्रवादी स्वर), डा. भीमनाथ झा, (मैथिलीक संस्मरण साहित्यमे मणिपद्मक स्थान), डा. पन्ना झा (मणिपद्मक पत्रमे मणिपद्मक व्यक्तित्व एवं परिवेष), डा. फूलचन्द्र मिश्र ‘रमण’, (मणिपद्मक उपन्यास ‘लोरिक विजय’), डा. योगानन्द झा, (मैथिली लोकगाथाक अनुसन्धान एवं मणिपद्म)  डा. अरुण कुमार कर्ण, (मणिपद्मक उपन्यास ‘फुटपाथ’ एवं ‘कनकी’) भैरवलाल दास (मणिपद्मक कथा एवं ओकर भाषा-शिल्प), डा. रमण कुमार झा ( मणिपद्मक नाट्य साहित्य), बच्चा ठाकुर, (मणिपद्मक निबन्ध साहित्य) रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’, एवं जगदीशचन्द्र ठाकुर ‘अनिल’, (मणिपद्मक काव्य साहित्य), डा. इन्दिरा झा (मणिपद्मक उपन्यास ‘नैका बनिजारा’), मधुकान्त झा एवं डा. चक्रधर ठाकुर (मणिपद्मक उपन्यास ‘राय रणपाल’), डा. अरुणा चौधरी (मणिपद्मक उपन्यास ‘लवहरि कुसहरि’), डा. वीणाधर झा (मणिपद्मक उपन्यास ‘अर्धनारीश्वर’), डा. अषोक कुमार मेहता (मणिपद्मक उपन्यास ‘दुलरा दयाल’), डा. वासुकीनाथ झा (मणिपद्मक महत्त्व)। गोष्ठीक अध्यक्ष प्रो. एम.एन. कर्ण मणिपद्मक साहित्यक समाजशास्त्रीय दृष्टिसँ विचार कएलनि. ओ मणिपद्मक लेखन यात्रा कें समक्ष रखैत कहल जे हुनक साहित्य, विशेषतः लोक साहित्य जातीय अस्मिताक अन्वेषण एवं स्थापना करैत अछि. ई अन्वेषण एवं स्थापनाक प्रयास 1960 एवं 1980 ई.क बीच राष्ट्रीय स्तरपर सभ क्षेत्र मे भए रहल छल. मिथिला एवं मैथिलीमे तकर श्रेय डा. ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म' कें छनि. ओ विचार व्यक्त कएल जे मैथिलीक आनो साहित्यकार केन्द्रित विचार गोष्ठी होएबाक चाही. — डॉ. रामानंद झा 'रमण'

Advertisement