मिथिला विभूति पर्वक दोसर दिन विमर्श ओ गोष्ठी

दड़िभंगा. विद्यापति सेवा संस्थान केर तत्वावधान मे आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोहक अवसर पर मंगलदिन 27 नवम्बर 2012 कें 'मिथिला आ इतिहास' विषय पर संगोष्ठीक संगहि कविगोष्ठी ओ नाटकक आयोजन भेल. तीन सत्र मे विभक्त कार्यक्रम मे मैथिल बुद्धिजीवी लोकनिक जुटान देखल गेल.
पहिल सत्र केर संगोष्टी मे प्रसिद्ध चिंतक प्रो. जीतेंद्र नारायण कहलनि जे मिथिलाक इतिहासक अध्ययन आ चर्च व्यवसायिक दृष्टि सं कम, धर्म, संस्कृति केर अयना मे कयल जयबाक चाही. मिथिला विद्वता केर 'इंडस्ट्री' छल. मिथिला मात्र  विद्वता केर खजाना नहि, संतोषक सागर रूप मे सेहो चर्चित रहल अछि. ओ कहलनि जे मिथिलाक गौरवपूर्ण इतिहास मे शोध केर असीम संभावना अछि. आकाशवाणीक पूर्व अधिशासी अधिकारी डा.प्रभात नारायण झा कहलनि जे  गंगा सं हिमालय धरि मिथिला केर विस्तार आ लोक मानस मे रचल लोक गाथ सभ सं इतिहास केर संबंध रहल अछि. डा. मुनीश्वर यादव विष्णु पुराण मे मिथिला केर चर्च केर उल्लेख करैत कहलनि जे  में एहि मे पचपन जनक केर चर्चा अछि. कार्यक्रम मे ओम प्रकाश, प्रसिद्ध चिंतक डा.सुरेश्वर झा, प्रसिद्ध चिकित्सक डा.मोहन मिश्र ओ अन्य लोकनि अपन विचार रखलनि. उद्घाटन चिकित्सक डा. गणपति मिश्र दीप प्रज्वलित क' कयलनि.
दोसर सत्र मे कमलाकांत झा केर अध्यक्षता मे कविगोष्ठी आयोजित भेल, जकर उद्घाटन डॉ.उदयचंद्र झा 'विनोद' कयलनि. श्याम बिहारी लास 'सरस'क गीत सँ गोष्ठी शुरू भेल. कविगोष्ठी मे दिलीप कुमार झा 'लूटन', शैलेन्द्र आनंद, मंजर सुलेमान, विनोद कुमार, चंद्रेश, हरिश्चंद्र हरित, प्रवीण कुमार मिश्र, पंकज सत्यम, दिनेश झा, श्वेता भारती, अजित आजाद, चंद्रमोहन झा 'पड़बा', कुमार शैलेन्द्र,शंकरदेव झा आदि काव्यपाठ कएलनि. जयप्रकाश चौधरी 'जनक' केर हास्य-व्यंग्य खूब गुदगुदौलक. एकर अतिरिक्त शंभुनाथ मिश्र, आर.के.रमण, रघुनाथ मुखिया, विनय विश्वबंधु, राम नरेश राय, कविता खूब प्रसंशित भेल. मंचपर मात्र दू गोट कवियित्री छलीह. निक्की प्रियदर्शिनी महिलाक उचित प्रतिनिधित्व नहि रहबाक प्रश्न उठौलनि संगहि दू गोट कविता पढ़बाक अनुमति चाहलनि आ' फेर-बासमती तथा समाजक प्रश्न नामक कविता पढ़ि श्रोता सभकेँ सनेस देबाक चेष्टा कएलनि. मंच पर मैथिलीक पुरान आ' निस्सन कवि सभक अनुपस्थिति श्रोताक बीच चर्चाक विषय बनल रहल. बेसी कविता पुरान आ' हास्य-व्यंगमय छल जे तात्कालिक रूपेँ श्रोताकेँ तऽ खूब सोहेलनि मुदा बौद्धिक वर्गकेँ कविगोष्ठी एहिबेर कनेक झुझुआन लगलनि. नवकवि सभ दर्शकक भारी संख्या देख आह्लादित छलाह.
तेसर सत्र मे कवि सम्मेलनक बाद जनकपुरसँ आयल नाट्य मंडली 'शूली पर इजोत' नाटकक मंचन कएलक. जे आम दर्शकक माथसँ उपर बाटे बहल. नाटकक बाद धरोहर मंच द्वारा मिथिलाक संस्कृतिपर आधारित लोक नृत्यक प्रस्तुति भेल. साँझमे कविगोष्ठीसँ पूर्व संस्थानक महासचिव बैजूक संग अन्यान्य वक्ता लोकनि मैथिली भाषामे शिक्षा,मिथिलाक्षर अभियान तथा मैथिलीमे बैनर-पोस्टरक प्रयोगक आह्वान कएलनि. (Report: मिथिमीडिया ब्यूरो) 

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