'विद्यापति व्यापक मुदा मैथिली सिकुचि रहलय'

> स्मृति संध्या मे दायित्व पर चिंतन
कलकत्ता. मिथिला सांस्कृतिक परिषद् कोलकाता द्वारा कातिक इजोरिया त्रयोदशी पर आयोजित विद्यापति स्मृति संध्या मे वक्ता लोकनि मैथिली प्रचार-प्रसार आ वर्त्तमान समस्या पर इजोत देलनि. सोमदिन 26 नवम्बर 2012 कें स्थानीय विद्यापति विद्यामंदिर मे विद्यापति प्रतिमाक समक्ष मैथिल बुद्धिजीवी लोकनि तापस कवि कें श्रद्धांजलि देलनि. गोष्ठीक अध्यक्षता सुप्रसिद्ध मैथिल चिन्तक आ मैथिलीसेवी नवीन चौधरी कयलनि. डॉ जयशंकर मिश्र अपन वक्तव्य मे मिथिलाक कला कें अनुपम बतबैत एकर व्यापकता पर जोर देलनि. विद्यापति विद्यामंदिर केर प्रभारी प्रधानाध्यापक आशुतोष पांडे विद्यापति कें श्रद्धांजलि देइत भारतीय भाषा साहित्य मे विद्यापतिक महत्व बतओलनि.

अशोक चौधरी मैथिली कें प्राथमिक शिक्षा मे स्थान भेटबाक आन्दोलनक बात कहलनि. हुनक कहब छल जे जा हम सभ एहि बात पर सरकार कें घेरब नहि ता बिहार सरकार मैथिली पर धियान नहि देत. मैथिलीक विरुद्ध खडयन्त्र भ' रहल अछि आ एहि  मे मैथिलक उदासीनता चिंताक विषय. एकर संगहि प्रमोद ठाकुर एक जुझारू नेताक खगता बतओलनि. मिथिला सांस्कृतिक परिषद् केर अध्यक्ष सुरेन्द्र नारायण झा अपन वक्तव्य मे विद्यापतिक भाखा मैथिलीक प्रसार पर इजोत देलनि. एकर अतिरिक्त एहि अवसर पर कामेश्वर झा 'कमल', अजय कुमार झा 'तिरहुतिया', देवीशंकर मिश्र, रोहित कुमार मिश्र, अनमोल झा, रूपेश त्योंथ व अन्यान्य लोकनि श्रद्धा अर्पित करैत अपन बात रखलनि. कार्यक्रमक सञ्चालन मिथिलेश कुमार झा कयलनि.
(Report: मिथिमीडिया ब्यूरो) 

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