जुग जोगारक छै

आइ जखन प्रातः काल उठलहुं त' सोझां मिथिला समाद तकलहुं. समाद नहि पाबि हमरा भेल वा त' हम पहिनहि उठि गेलहुं वा त' फेर कोनो... . बेसबूर भ' चाह आ अखबार केर बाट ताकय लगलहुं. किएक आओत अखबार? कनिया कहलीह-आइ अखबार नहि आओत. हम अकचका क' पूछलियनि-की? किएक अखबार नहि आओत? कनिया कहलीह जे अखबार जे देइत अछि ओकरा साहित्य अकादेमी दिस सं मैथिली युवा लेखन पुरस्कार भेटि रहल छैक? हम अकचकेलहुं-की? सोहनमा कें पुरस्कार? ई त' तरहत्थी पर रोइयाँ सन लगैत अछि. खैर, चुप भ' गेलहुं. आइ अखबार नहि पढने मोन व्याकुल छल.  हड़बड़ी मे स्नान केलहुं आ कार्यालय जेबा सं कने पूर्वहि डेरा सं निकलि गेलहुं. बाटे मे सोहनमा भेटल. पूछलियइ-की रौ? अखबार नहि देलें? मोन मे इहो शंका छल जे पाठक आ विज्ञापनक आभाव मे समाद बन्न त' नहि भ' गेल? सोहनमा अविलम्ब बाजल- एखनुक बात छोडू, आब हम कहियो अखबार नहि देब. हम पूछालियइ-किएक? चट द' सोहनमा बाजल जे कक्का...साहित्य अकादेमी मे युवा लेखन पुरस्कार केर जोगार लागि गेल अछि. आब पहिनुक जुग नहि छैक. योग्यता बाद मे जोगार पहिने होयबाक चाही. पुरना सभ कतबो कहताह...युवा वर्गक मैथिली अनुरागी कतबो समय सापेक्ष बजताह...चिकरैत रहताह... पोस्टर सटइत रहताह...मुदा हमरा सन जोगारी लोक पुरस्कार केर जोगार कइये लेत. कतबो महगी जमाना छैक तैयो पुरस्कार राशि सं छओ मास खेपल जा सकैत अछि. 
हम सोहनमाक मुंह दिस टुकुर-टुकुर तकैत रहलहुं. सोहनमा कहलक-मुंह की तकै छी? हम सभ जोगारी दलक सदस्य छी. अखबार देब बन्न. मोनक तामस कें त्यागि सोहनमा कें बधाइ देलहुं. कहलियैक जे तोहर मेहनति सोकाज अयलहु. एहिना बढैत रह. मुदा एक बात मोन रखै जे जोगार लगौ त' हमरो जोगारी दलक सदस्यता सं अवगत करबिहें. चट द' सोहनमा बाजल यौ सर अकादेमी पुरस्कारक जोगार करबाक अछि त' ४-५ गोटा केर जोगार करू आ नव-नव संस्था सभ खोलबओबैत रहू. जहाँ ४-५ टा संस्था पर अहांक आधिपत्य भेल कि ओहि संस्था सभ द्वारा आयोजित समारोह मे मैथिली अनुरागी बनि हाजिर भ' जाउ. बस फेर शुरू होयत अहांक चर्च आ २-३ साल कें अंतराल मे जतेक कवि गोष्ठी, कथा वाचन होयत ओहि मे जयबाक अवसर भेटत आ ओ सभ मैथिली साहित्य सेविक रूप मे प्रमाण पत्र द' देताह. ई प्रमाणपत्र वैह सभ देइत छथि, जिनका घर मे मैथिली नहि छनि. हम अचंभित छलहुं. कहलियैक- पटना, दिल्ली वला सभ बजायत तखन ने? सोहनमा बाजल-मैथिली मंच पर जयबाक हेतु सेहो जोगारक आवश्यकता छैक. आब त' हम सन्न भ' गेलहुं. पूछलियइ-पुरस्कारो मे जोगार आ मंचो पर जयबाक लेल जोगार? ई की कहलह? सोहनमा बाजल- जुग जोगारक छै. जोगार नहि करब त' कलम केर कतबो धनिक छी ओतहि रहि जायब जतय पूर्व केर किछु मैथिली अनुरागी रहि गेलाह.
— अशोक झा
(लेखक मिविप केर राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ साहित्यकार छथि)

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