साहित्यक कल-कल सं मैथिली बिहुंसल - मिथिमीडिया
साहित्यक कल-कल सं मैथिली बिहुंसल

साहित्यक कल-कल सं मैथिली बिहुंसल

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> मिथिला महोत्सव केर तेसर दिनक कार्यक्रम
कलकत्ता. मिथिला महोत्सवक तेसर दिनक कार्यक्रम बेस झमटगर रहल. साहित्य पर केन्द्रित ई कार्यक्रम चारि सत्र मे विभक्त छल. डॉ. बुचरू पासवान द्वारा दीप प्रज्ज्वलित क' कार्यक्रम केर उद्घाटन भेल. तत्पश्चात गोसाओनिक गीत सं कार्यक्रम शुरू भेल.
कार्यक्रमक पहिल सत्र अभिभाषणक छल. जाहि मे डॉ. बुचरू पासवान केर संगहि राम कुमार मुखोपाध्याय, गीतेश शर्मा, तारकेश्वर मिश्रा अपन वक्तव्य रखलनि. एहि अवसर पर हिंदी लेखन केर सिद्ध हस्ताक्षर निर्भय मल्लिक कें सम्मानित कयल गेलनि. पहिल सत्र मे मैथिल समाजसेवी कामदेव झा ओ उमेदलाल कामत सेहो मंचासीन छलाह. एहि सत्रक अध्यक्षता मिथिला विकास परिषद् केर राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक झा कयलनि.
दोसर सत्र आधुनिक मैथिली कविताक
दशा ओ दिशा विषय पर आलेख पाठ केर छल. एहि सत्रक अध्यक्षता मैथिली साहित्यविद डॉ. वीरेन्द्र मल्लिक कयलनि. डॉ. मल्लिक केर संगहि प्रो. शंकर झा, प्रफुल्ल कोलख्यान, अशोक झा, आमोद झा, फूलचंद्र झा 'प्रवीण' ओ  शैल झा आलेख पाठ कयलनि.
तेसर सत्र कवि गोष्ठी केर छल जाहि मे सत्रक अध्यक्ष विद्यानंद झा सहित लक्ष्मण झा 'सागर', चंदन कुमार झा, राजीव रंजन मिश्र, भास्करानंद झा 'भास्कर', विजय इस्सर, विवेक कुमार झा ओ रूपेश कुमार झा 'त्योंथ' रचना पाठ कयलनि.
चारिम ओ अंतिम सत्र मे भावना  प्रतिहस्त
व अन्य द्वारा भाव - नृत्य दर्शक कें बेस नीक लागल. अंत धरि खचाखच भरल प्रेक्षागृह कार्यक्रमक सफलताक गवाही द' रहल छल.
 (Report: मिथिमीडिया ब्यूरो)     

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